Poetry

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Main Ek Pheriwala

  • Author Name:

    Rahi Masoom Raza

  • Book Type:
  • Description:

    राही मासूम रज़ा मूलतः कवि हैं और उनकी आन्तरिक अनुभूतियों को कविताओं में ही तीव्रतम अभिव्यक्ति मिली है। ‘मैं एक फेरीवाला’ की कविताओं में ज़िन्दगी की कटुताओं से जूझने की ज़िद है और उसी ज़िन्दगी को गरम-गरम पीने की प्यास भी! संग्रह में लगभग 18 वर्षों के लम्बे अन्तराल में लिखी गई कविताएँ संगृहीत हैं। ‘मैं एक फेरीवाला’ की कविताएँ ‘हिज्र’, ‘प्यास’ और ‘तनहाई’ की कविताएँ है। स्वयं कवि के शब्दों में, “मेरी शायरी की बुनियादी लय उदासी की है। यह उदासी हमारे युग की सबसे बड़ी और जीवित वास्तविकता है।” इन भावनाओं को विभिन्न कविताओं में प्रतिबिम्वित होते देखा जा सकता है। इतनी लम्बी अवधि की कविताओं का संग्रह होने की वजह से काव्यरूप और विषयवस्तु के स्तर पर इसमें बड़ा वैविध्य है। रूमानियत से भरपूर गीतों से लेकर एक सामान्य आदमी की लाचारी और आकांक्षा का चित्रण करनेवाली छोटी-छोटी कविताएँ भी इस संग्रह में मिलेंगी । यह संग्रह राही मासूम रज़ा के कवि-व्यक्तित्व का वैविध्य पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है ।

Main Ek Pheriwala

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Rahi Masoom Raza

20% off

199

₹ 159.2

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Sheeshon Ka Masiha

  • Author Name:

    Faiz Ahmed 'Faiz'

  • Book Type:
  • Description:

    शीशों का मसीहा की शुरुआत होती है फ़ैज़ के एक लेख से जो उन्होंने अपने बारे में लिखी है, ज़ाहिर है बहुत संकोच के साथ क्योंकि उनके मुताबिक अपने बारे में बात करना ‘बोर लोगों का शग़ल है।’ लेकिन आगे जो वे बताते हैं, वो फ़ैज़ के पाठकों के लिए काफ़ी काम का है; उनसे हम इस किताब में संकलित उनकी नज़्मों, ग़ज़लों और अशआर की पृष्ठभूमि को जानते हैं। ‘नक़्शे-फ़रियादी’ के बारे में बताते हैं कि इसकी शुरुआती नज़्में जिस फ़ज़ा में आईं वह तालिबे-इल्मी का दौर था जिसमें ‘इब्तिदा-ए-इश्क़’ का तहय्युद भी शामिल था कि ‘ख़ुदा वो वक़्त न लाए कि सोगवार हो तू’; लेकिन यह दौर लम्बा न चलाए—कॉलेज के बड़े-बड़े बाँके तीसमारखाँ रोजी-रोटी की तलाश में गलियों की ख़ाक फाँकने लगे; और दिल कह उठा—‘मुझसे पहली-सी मुहब्बत मेरे महबूब न माँग’। फिर फ़ैज़ पत्रकारिता, ट्रेड यूनियन, और जेलख़ाना जिसके बारे में उनका कहना है कि ‘जेलख़ाना’ आशिक़ी की तरह ख़ुद का बुनियादी तजुर्बा है। इस तजुर्बे की साक्षी हैं  ‘दस्ते-सबा’ और ‘ज़िन्दाँनामा’। ‘शीशों का मसीहा’ इस तरह हमें फ़ैज़ की रचना-यात्रा को समझने का एक रास्ता देती है।

Sheeshon Ka Masiha

Sheeshon Ka Masiha

Faiz Ahmed 'Faiz'

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350

₹ 280

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Mornaach

  • Author Name:

    Nida Fazli

  • Book Type:
  • Description:

    मोरनाच देवनागरी में आनेवाला निदा फ़ाज़ली का ऐसा संकलन है जिसमें उनकी अब तक की अधिकांश कविताएँ निरखी और परखी जा सकती हैं। इसमें पिछले पच्चीस बरसों की उनकी सोच-समझ और सरोकार का फैलाव है और अब तक आए तीनों मजमूओं में से ख़ुद लेखकीय चुनाव—इसीलिए एक अर्थ में यह निदा की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह भी कहा जा सकता है। इसमें ग़ज़लें भी हैं, नज़्में भी और कुछ गीत भी। शुरू का दौर भी है, बीच का भी और इधर का भी, लेकिन जो बात अव्वल से अब तक मुसलसिल बनी हुई है, वह है कवि का हर एक के लिए एक बेलौस लगाव—कुछ लोगों को यह सिनिसिज़्म की हदों को छूने वाला भी लग सकता है लेकिन शायद यह हर आधुनिक रचनाकार की मजबूरी है कि वह माँ, बाप, भाई, बहन, परिवार, स्त्री, प्रेम, समाज और देश—किसी को भी जस का तस स्वीकार नहीं करता। वह उन्हें सन्देह के कठघरे में धकेलकर सवाल करता है—ऐसे कि पहले वह सवाल पलटकर एक-एक कर ख़ुद उसका गिरेबान पकड़ ले और फिर अन्तत: समाज का होकर रह जाए। यही वह सच है जिसे अपने समय का हर सही रचनाकार अपने अनुभव की रोशनी में ही देखना और परखना चाहता है जैसाकि ख़ुद निदा फ़ाज़ली का ही एक दोहा है: वो सूफ़ी का कौल हो, या पंडित का ज्ञान जितनी बीते आप पर, उतना ही सच मान। —शानी

Mornaach

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Nida Fazli

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250

₹ 200

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Pratinidhi Kavitayein: Pawan Karan

  • Author Name:

    Pawan Karan

  • Book Type:
  • Description:

    पवन करण की कविताओं में हमें अपनी जानी-पहचानी दुनिया दिखाई देती है, लेकिन ठीक उसी तरतीब में नहीं, जिस तरतीब में हम उसे देखने के आदी हैं। वे उस दुनिया को भीतर से बदल रहे होते हैं; उसकी आन्तरिक बुनावट को उसके अपने ही औज़ारों से नया रूप देते हुए; और एकदम से इतना भी न बदलते हुए कि वह हमें अनजानी लगने लगे, डराने लगे। वे एक सुलझी हुई दृष्टि के साथ और सहानुभूतिपूर्वक हमारे सामाजिक आत्म को न्याय की एक व्यापक संकल्पना से अनुकूलित करते हैं और हमें अपने अन्यायों को देखने में सक्षम बनाते हैं। स्त्री को उनकी कविता ने एक ऐसी कसौटी के रूप में चीन्हा है जिस पर हमारा वर्तमान और इतिहास, दोनों अपनी मनुष्यता और न्यायबोध को परख सकते हैं। उनकी प्रतिनिधि कविताओं की यह प्रस्तुति उनकी कवि-दृष्टि और काव्य-सामर्थ्य दोनों को समझने में सहायक होगी।

Pratinidhi Kavitayein: Pawan Karan

Pratinidhi Kavitayein: Pawan Karan

Pawan Karan

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Pratinidhi Kavitayein: Navin Sagar

  • Author Name:

    Navin Sagar

  • Book Type:
  • Description:

    नवीन सागर की कविताओं को पढ़ते हुए आप हिन्दी कविता की दुनिया में अपनी मौजूदा रिहायश से उठकर कहीं और जाने के लिए चल पड़‌ते हैं—एक ज़्यादा गहरी, ज़्यादा परतदार, ज़्यादा नाज़ुक और ज़्यादा ठोस जगह की तरफ़। वह जगह जहाँ आपको अपने न समझ में आनेवाले लेकिन मारक दुख की सहज, स्पष्ट और चित्र जैसी अभिव्यक्ति मिलती है। हमारी भाषा ने कम ही ऐसी कविताएँ पाई हैं, जैसी ये सारी हैं। नवीन सागर की कविता-पुस्तकें लम्बे समय से अनुपलब्ध हैं। हालाँकि इस बीच उनकी कविताओं की तरफ़, ख़ासतौर पर नई पीढ़ी का ध्यान उल्लेखनीय ढंग से गया है। ऐसे में उनके देहान्त के लगभग पच्चीस वर्ष बाद उनकी कविताओं से यह प्रतिनिधि चयन प्रकाशित हो रहा है। उम्मीद है कि यह पुस्तक लगभग भूले हुए, लेकिन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एक कवि को विचार के केन्द्र में लाएगी।

Pratinidhi Kavitayein: Navin Sagar

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Navin Sagar

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Alvida Nehru

  • Author Name:

    Mohammad Naushad

  • Book Type:
  • Description:

    ‘अलविदा नेहरू’ में उन शोकाकुल नज़्मों को संकलित किया गया है जो उर्दू शायरों ने नेहरू को श्रद्धांजलि देते हुए कहीं। इन शायरों में उस दौर के लगभग तमाम शायर शामिल हैं। इस मर्सियानुमा शायरी को पढ़ते हुए एहसास होता है कि राजनेता और व्यक्ति के रूप में नेहरू को कितनी व्यापक और दिली स्वीकृति हासिल थी। पुस्तक की भूमिका में महमूद फ़ारूक़ी लिखते हैं कि “तर​क़्क़ीपसन्द शायर कई मामलों में ख़ुद को नेहरू के क़रीबतर पाते थे। बेशतर नौजवान उर्दू शायर वैसी ही आज़ादी चाहते थे जो नेहरू का ख़्वाब थी जिसमें शान्ति, तरक़्क़ी, आर्थिक ख़ुशहाली, इनसान और फ़र्द की आज़ादी शामिल रहे...और रैशनलिज़्म को फ़रोग़ दिया जाए।” नेहरू का जाना उनके लिए उस पूरी तहरीक का माँद पड़ जाना था, जो इस मुल्क को एक समतावादी, सेक्युलर और आधुनिक देश बनाने के लिए उनके नेतृत्व में शुरू हुई थी। आज जब नेहरू के राजनीतिक मूल्यों और उनके दौर की आर्थिक-सामाजिक उपलब्धियों पर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, ये रचनाएँ उनकी छवि का एक अलग रुख़ पेश करती हैं।

Alvida Nehru

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Mohammad Naushad

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Harivansh Ray Bachchan - Rachana Sanchayan

  • Author Name:

    Harivansh Rai Bachchan

  • Book Type:
  • Description:

    An anthology of the writings of modern Hindi writer Harivansh Rai Bachchan, compiled and edited by Ajit Kumar.

Harivansh Ray Bachchan - Rachana Sanchayan

Harivansh Ray Bachchan - Rachana Sanchayan

Harivansh Rai Bachchan

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₹ 456.5

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Ye Kisase Bolata Hoon

  • Author Name:

    Lakshman Prasad Gupta

  • Book Type:
  • Description:

    लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता की ग़ज़लों में न तो अतिशय भावुकता है और न ही अतिरंजित क्रांतिकारिता। वे सहज अभिव्यक्ति के शाइर हैं। उनकी शाइरी में जीवनानुभवों की विविधता भी है और संवेदना की गम्भीरता भी। वे अपने इर्द-गिर्द के जीवन को देखते हैं और उसे शेर में ढालते हैं। इसीलिए इस सवाल का जवाब ढूँढ़ना लाजिमी है कि आख़िर उनकी ये ग़ज़लें किसकी ख़ातिर है? जाहिर है कि लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता की ग़ज़लें न तो विशुद्ध बुद्धिजीवियों के लिए हैं और न ही बगैर कुछ समझे-बूझे 'वाह-वाह' करने वाले मजमे के लिए। उनकी ग़ज़लें तो ऐसे लोगों के लिए हैं जो अपने समय और समाज की हक़ीक़त से वाक़िफ़ हों। न सिर्फ़ वाक़िफ़ हों बल्कि उद्वेलित भी। - अब्दुल बिस्मिल्लाह लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता की ग़ज़लों की आर्ट गैलरी से गुज़रते हुए बड़ी शिद्दत से ये एहसास होता है कि उन्होंने अपनी ग़ज़लों को पहले पूरी ईमानदारी से जिया है फिर उन्हें कैनवस पर उतारा है, साथ ही अपने अनुभव की तूलिका से ज़िन्दगी के विभिन्न पहलुओं को उकेरने की कामयाब कोशिश की है। लक्ष्मण की ग़ज़लों की लय मध्यम, गुफ़्तगू का अन्दाज़ नर्म और सोच में पवित्रता है। उनकी ग़ज़लों में पामाल होते इंसानी रिश्तों का दर्द, एक-दूसरे के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता का दुख, तथाकथित तरक्की के पीछे अंधाधुंध भागने के क्रम में आपसी प्रेम, सौहार्द, भाईचारा से दूर होते जाने का ग़म, सर से पाँव तक स्वार्थ में डूबी राजनीति के प्रति मन में क्षोभ तथा सारे संसार को प्रेम के सूत्र में बाँध देने की छटपटाहट भी है। - हातिम जावेद

Ye Kisase Bolata Hoon

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Lakshman Prasad Gupta

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Athato Kavya Jigyasa

  • Author Name:

    Virendra Mullick

  • Book Type:
  • Description:

    पूजी द्वारा विकासक रूप मे प्रतिपादित बाजारवाद, सबकिछु केँ 'पसार' बना देलकए। प्रशासन, न्याय, वित्त, सूचना, स्वास्थ्य, शिक्षा... सबकिछु बाजार नियंत्रित होइत मनुखक विसंगति केँ ओहि स्तर तक ल' गेलए जे सांस्कृतिक परिचिति पर्यंत विलोपित भ' जाए। अही मर्मांतक पीड़ा सँ आप्लावित अछि ई कविता संग्रह 'अथातो काव्य जिज्ञासा'। कविता बिडंबनापूर्ण परिवेशक प्रतिपक्षी अछि, चिंतित अछि आ अस्तित्वक प्रश्न सँ पाठक केँ आविष्ट करै अछि, सोचबाक लेल, सक्रिय हेबाक लेल उत्प्रेरित करै अछि। पूजी, बाजार आ साम्राज्यवादक वर्चस्व हमर भाषा, हमर संस्कृति, हमर सर्वस्व विश्व मानवीय दृष्टिकोणक संग कविता, मनुष्यताक उत्कर्षक लेल प्रतिबद्ध अछि, बिना कोनो संशय-ओझरौनी के बेस स्पष्ट बिम्ब मे मुखर अछि, सत्यक साक्षात्कार लेल तत्पर अछि। ..... लोकक पेट पर मारैत लात नित नव-नव सिद्धांत आ विज्ञापनक भरमार। सामयिक, असत्य आ अन्यायक बलधकेल अधिनायकवादी सत्ताक पिशाची-नर्तनक काल मे, कविता अपन कर्तव्य सँ संपृक्त अछि, आशा आ विश्वासक संग अडिग अछि। मुदा नागरिक वीर देश केर एखनहु बरूदक ढेरी पर कविताक संग विहुँसि खेलाइछ। एक अग्निजीवी कविक लेल इएह ने काव्य-स्वभाव, कविता-प्रवृत्ति छी! —कुणाल (कवि-रंगकर्मी)

Athato Kavya Jigyasa

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Virendra Mullick

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₹ 290.5

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Vidyapatik 100 Pad : Juvati Bhay Janme Janu Koi

  • Author Name:

    Kunal

  • Book Type:
  • Description:

    समस्त आधुनिक भारतीय भाषाक दुर्लभ कविक नाम अछि विद्यापति। चौदहम शताब्दीक मिथिला नरेश शिवसिंहक परम मित्र आ राजकवि विद्यापति दरबार मे रहितहुँ अपन कविता मे दरबारी संस्कृति केँ अतिक्रमित क' जाइत छथि। हुनक सम्पूर्ण पदावली मे नामोल्लेखक अतिरिक्त दरबारक ऐश्वर्यशाली वैभव आ दरबारी संस्कृतिक विलोपन चमत्कृत करबाक विषय थिक। असीम भक्ति, उद्दाम शृंगार आ अंतरंग प्रेमक विरलतम कवि छथि विद्यापति। मध्यकालीन काव्य परिसर मे 'अलौकिक' भक्तिक बीच सघन सामाजिक सरोकार आ मानवीय आकांक्षाक काव्यात्मक अभिव्यक्ति विद्यापति केँ अपन समकालीन भक्त कवि सँ सर्वथा अलग आ विशिष्ट बनबैत अछि। भक्ति कविता मे स्त्री-निन्दाक रूढि़ पालनक विपरीत स्त्री-सौंदर्य, स्त्री-आकांक्षा आ स्त्री पीड़ाक अभिव्यक्ति विद्यापति केँ स्त्री-संवेदनाक महाकवि बनबैत अछि। बेमेल विवाह, मिथिलाक विपन्नता, पलायनक पीर, स्त्री-वेदना एवं अशिक्षित महिला-पुरुषक लेल यौन-शिक्षाक आरम्भिक ज्ञान सदृश्य आधुनिक विचार सभक काव्यात्मक लड़ी थिक पदावली; विशेष रूप सँ नचारी आ महेशवाणी। रंगकर्मी आ विद्यापति काव्यक मर्मज्ञ अध्येता कुणाल संपादित प्रस्तुत संग्रह मे मुख्य रूप सँ सामाजिक चेतना-सम्पन्न पद सभ केँ वर्तमानक आँखि सँ देखैत परोसबाक चेष्टा कयल गेल अछि जे कविक समकालीनता सिद्ध करैछ। ई संग्रह विद्यापति केँ भक्त आ शृंगारी कविक बान्हल चौखटि धरि सीमित नहि राखि, दिन-दुनियाक चिंता आ चिंतन सँ समृद्ध एक टा सरोकार सम्पन्न कवि सँ साक्षात्कार करबैत अछि। —कमलानंद झा

Vidyapatik 100 Pad : Juvati Bhay Janme Janu Koi

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Kunal

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₹ 207.5

Available

Navmallika

  • Author Name:

    Kunal +3

  • Book Type:
  • Description:

    आधुनिक मैथिलीक समग्र पत्रकारिताक इतिहास मे दिल्ली सँ प्रकाशित 'अंतिका'क भूमिका बहुत तरहें अन्यतम रहल छै। कोनो पूर्व वा समकालीन मैथिली पत्रकारिताक उपरौंझ मे वा प्रतिस्पर्धा मे नहि, अपितु पत्रिकाक अपन प्रयोगशील संरचना, दृष्टिकोण ओ बहुकोणीय साहित्य-प्रयोगक समानांतर अभ्यास रूप मे। हमरा बुझने मैथिलीक समकालीन आधुनिक बोधक रचनाशीलता केँ देशक समस्त भाषा-साहित्यक मुख्य प्रवाह मे आनि वैश्विक गतिविधि पर्यंत जोड़बा मे 'अंतिका'क भूमिका सदैव अहम आ उल्लेखनीय रहतैक। अपन एहि विशेष भूमिकाक अद्यतन शृंखला मे 'अंतिका'क आरंभिक 25 अंक सभ मे सँ आजुक समय मे हस्तक्षेप करैत महत्त्वपूर्ण चौंतीस कविक बीछल कविताक संकलन 'नवमल्लिका'क प्रकाशनक प्रयोग सेहो हमरा अभिनव आ प्रीतिकर लागलए तथा प्रासंगिक सेहो। हमरा जनैत एहि प्रक्रिया मे रचना ओ रचनाकारक सामाजिक प्रयोजनीयता एक टा नव संदर्भ मे भविष्योन्मुख होइत छै। निश्चये एहन उपक्रम कोनो सजग सचेष्ट सम्पादकीय बोध आ रचनात्मक ऊहिए सँ संभव होइत छै। -गंगेश गुंजन # मैथिली पत्रकारिताक परंपरा मे 'अंतिका' नवाचारक लेल जानल जाइत अछि जकर प्रमाण थिक ई कविता संचयन। 'नवमल्लिका' मे संकलित चारि पीढ़ीक कवि आ हुनक कविताक कैनवास बहुआयामी अछि आ प्रयोगधर्मी सेहो। मैथिलीक कोनो एक पत्रिकाक अंक सँ एहन उत्कृष्ट संकलन निकालब हमरा जनतबे असंभव। विषयक विविधता, काव्यगत-प्रयोगधर्मिता आ समग्र-प्रभावान्विति मे ई संकलन छात्र-प्राध्यापक आ कविताक विज्ञ पाठक लेल अनमोल उपहार थिक। — प्रो. ज्ञानतोष कुमार झा

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495

₹ 410.85

Available

Dakchal Samay Par Rekh

  • Author Name:

    Krishnamohan Jha 'Mohan'

  • Book Type:
  • Description:

    कृष्णमोहन झा 'मोहन' जीवनक जाहि मोड़ पर अपन बेस अनुभवी कनहा पर कविता केँ उठाक' मैथिली साहित्यक दुनिया मे प्रवेश कयलनि ओइ उमेर तक अबैत-अबैत सामान्य कवि हाँफ' लगैत अछि आ बेसी सँ बेसी अपना केँ दोहराब' लगैत अछि; मुदा मोहन जीक पहिल संग्रह 'ग्लोबल गाम सँ अबैत हकार' पढ़िक' बुझायल जे अपन युगक प्रश्न सँ गाँथल एवं राजनीतिक रूप सँ सचेत ओ एक टा एहेन प्रश्नाकुल कवि छथि जिनक चेतना ग्लोबल सँ ल'क' लोकल धरिक गूँज-अनुगूँज सुनबा लेल उत्सुक छनि।... ओइ दृष्टि सँ ई दोसर संग्रह हिनक पहिल संग्रहक विस्तार एवं पूरक प्रतीत होइत अछि। आइ कविता आ ओकर परिसर मे जे नाना प्रकारक विमर्शक हल्ला सुनाय पड़ैत अछि ओकर अइ संग्रह मे अनुपस्थिति एवं तकरा जगह पर भूमण्डलीकृत दुनिया मे गाम-घरक करुण नियति केँ अनुरेखित करब कृष्णमोहन जीक राजनीतिक समझ छियनि। एकैसम शताब्दीक तेसर दशकक आरंभ मे जीवन-स्थिति तँ एहेन विकट बनि गेल छै जे हिनका सदति 'सोहारीक त'र सँ बजार हुलकी' दैत देखार दै छनि। अइ विध्वंसक वास्तविकताक आगू हिनक कवि बेसी आशावादी बन' मे समर्थ नइँ छनि, मुदा किछु बरख पहिने हकार बनिक' जे दुख लोकक जीवन मे प्रवेश कयने छल ओकर चाँगुर सँ दकचल समय पर अपन रेख खिंचबाक प्रयत्न अइ संग्रहक कविता मे लक्षित कयल जा सकैत अछि। दूरसंचारक विस्फोटक कारणें आइ जीवनक सब क्षेत्र मे एक टा अरुचिकर एकरूपता व्याप्त अछि, जइ सँ कवितो बचल नहि अछि। बिनु अनुभवक एक टा रेडीमेड काव्यबोध प्राय: कविक रचना मे हेलैत देखार दैत अछि। खुशीक बात ई जे कृष्णमोहन झा 'मोहन' अनुभूत संसार सँ अपन अभिव्यक्ति केँ मार्मिक ओ प्रामाणिक बनबैत छथि एवं समकालीन मैथिली कविता केँ अपना तरहें समृद्ध करैत छथि। —कृष्णमोहन झा, सिलचर

Dakchal Samay Par Rekh

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Krishnamohan Jha 'Mohan'

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₹ 207.5

Available

Dharashayi Hebaak Samay

  • Author Name:

    Taranand Viyogi

  • Book Type:
  • Description:

    मैथिली साहित्यक आधुनिक काल जहिया सँ प्रतिष्ठापित भेल, मैथिलीक साहित्यकार-समाज सेहो एहि मर्मान्तक दृश्य सब केँ साहित्य मे मूर्त करैत रहला अछि। दुनिया जें कि प्रौद्योगिक विकास पर चढ़ैत आइ ग्लोबल विलेज भ' गेल अछि, कोविड-19 नामक अइ महामारीक प्रकोप सेहो मनुष्यक नक्शे-कदम पर चलैत ग्लोबल जटिलता सँ भरल-पुरल साबित भ' रहल अछि। भारत सहित दुनियाक तमाम भाषा मे साहित्यकार लोकनि अइ अभूतपूर्व परिस्थिति केँ शब्दांकित करैत देखल गेला अछि। मैथिली अइ मे पाछू नहि रहल अछि। तारानंद वियोगीक ई संग्रह कविता मे कोरोना-काल केँ दृश्यांकित करबाक चेष्टा थिक। महामारीक फैलाव, एकर चुनौती, मानव-संबंध पर पड़ल एकर असर, व्यवस्था आ विज्ञानक लाचारगी, प्रभावित लोकनिक हाहाकार—सब कथू अइ कविता सब मे जगह-जगह आयल अछि। प्रकृति सँ दूर हटैत उत्तर आधुनिक मनुष्यक सभ्यता केँ ल' क' कतेको ठाम वियोगी कइएक मूलभूत प्रश्न सब उठबैत छथि। प्रकृतिक स्वयं मे की संकेत अछि, आ विकासक पैमाना कोना अपूर्ण अछि, इहो सब प्रसंग ठाम-ठाम आयल अछि। कवि अपने सेहो कोरोना सँ संक्रमित भेला, कठिन परिस्थिति सँ जूझैत स्वास्थ्य-लाभ केलनि। घोर आदंकक दौर मे सेहो ओ रोगग्रस्त अवस्था मे प्रतिदिन कविता-डायरी लिखलनि, सेहो अइ संग्रह मे संगृहीत अछि। ई मनुष्यक जिजीविषाक ज्वलंत निदर्शन बनि क' सोझा आयल अछि। वियोगीक काव्य के सर्वाधिक उल्लेखनीय विशेषता ओकर लोकधर्मिता अछि। हुनक काव्य भाषाक सहजता, सरलता आ बिम्बधर्मिता ओकरा अत्यधिक व्यंजक बनबैत अछि। ओ मर्मस्पर्शी काव्य शिल्पक रचनाकार तँ छथिहे, सब सँ रोचक अछि वियोगीक काव्यभाषा, जकरा लेल ओ सब दिन स्मरण कयल जेता। —केदार कानन

Dharashayi Hebaak Samay

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Taranand Viyogi

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260

₹ 215.8

Available

Anhar Me Damroo

  • Author Name:

    Gangesh Gunjan

  • Book Type:
  • Description:

    वरिष्ठ कवि गंगेश गुंजनक 'अन्हार मे डमरू' घुप्प अन्हरियाक विरुद्ध इजोत तकबाक विलक्षण काव्य-प्रयासक नाम थिक। सम्पूर्ण सम्भावनाक संग कविक दायित्व-बोध आ काव्य-विवेकक मणिकांचन सहकार संग्रहक वैशिष्ट्य। 'धानक शीश जकाँ फुटैत' जाग्रत कविताक 'बगूचा' अछि—'अन्हार मे डमरू'। चमत्कृत करैत कविताक रेंज आ कविक निजी काव्य-भाषाक सौंदर्य कविता केँ नव सृजनशीलता सँ भरि दैछ। मिथिलाक संस्कृति सँ अथाह अनुराग आ रूढ़ अपसंस्कृतिक प्रति घोर चिंताक अंतर्द्वंद्व सँ बनैत कविता विमर्शक लेल पाठक केँ सहजहि हकारैत अछि। 'प्रथम चुम्बनक कृतज्ञता' आ 'दोसर चुम्बनक कृतघ्नता' सँ ल' क' 'कुसियारक पर्याय बनैत स्त्रीक जीवन-कथा', 'धुआँइन ढेकार जकाँ सुन्न दालन पर' 'पुरना मिथिलाक्षरक पाण्डुलिपि जकाँ' पड़ल लोकतंत्रक ठठरी, दिल्ली नगरक त्रासद तामस, जबियाअल मनुक्खक सामने अकादारुन बजार वा 'यात्रीजीक एक कंठ मे सय-पचास लाखक प्रतिध्वनि'; ई सभ टा स्वर समवेत रूपेँ 'अन्हार मे डमरू:क परिसर मे भेटि जैत। बहुस्वरता, विषय-बहुलता आ कथन-भंगीक विविधता संग्रहक नवीनता थिक। प्रतीक, बिंब सँ सुसज्जित एक टा पारदर्शी महीन काव्य-आवरण कविता केँ कुहेसगर नहि बना जीवन-जगतक अलक्षित समय केँ दर्शबैत अछि। गुंजनजीक कविताक संवादधर्मिता हुनक कविता केँ सहज बोधगम्य तँ बनबैत अछि, मुदा ई सहजता सरलता नहि अपितु विषय-वस्तुक समग्रता आ जटिलता केँ सरलता सँ बुझबाक काव्य-युक्ति अछि। —कमलानंद झा

Anhar Me Damroo

Anhar Me Damroo

Gangesh Gunjan

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₹ 261.45

Available

Sonak Pijra

  • Author Name:

    Baidyanath Mishra

  • Book Type:
  • Description:

    मानव-दुर्दशाक बढ़ैत परिमाण, मानव-मूल्यक खुल्लमखुल्ला अपमानक वातावरण सँ मुक्तिक कामना हरदम सँ जन-आकांक्षा रहलए। कविताक लेल ई आकांक्षा, जीवन-राग छी जे पीड़ा आ कचोटक ताल पर बजैत रहैए। वैद्यनाथ मिश्रक कविता अही कचकैत पीड़ाक माझ सँ गमन करैए। आइ जाहि तथाकथित 'जनतांत्रिक व्यवस्था' सँ शासित छी हमरा लोकनि, ताहि मे पद-प्राप्ति होइते 'सेवक' अधिनायक भ' जाइए, भाग्य-विधाता बनि जाइए। अपेक्षा करैए जे ओकरा सँ जन-अधिकारक बात नइँ कयल जाए। कोनो प्रश्न नइँ पूछल जाए। कर्तव्यक चर्चा नइँ कयल जाए। जन के लेल एकमात्र उपाय छै, ठेहुनिया रोपि दसो नह जोड़ि, अनुनय, विनय, प्रार्थना, मनुहार, चिरौरी कयल जाए—हे प्रभो! (भक्तक) आनंददाता, कनी एम्हरो तकियउ! खाली ओएह सब मनुख नइँ जकर संपत्ति दिनानुदिन विशाल भेल जाइए। बाकी जनता सेहो अही देशक वासी छी... एम्हरो तकियउ... जनतंत्रक नाम पर एहि विकराल बिडम्बना सँ सोझाँ-सोंझी होइत वैद्यनाथ मिश्रक कविता गंहीर उतरैत तीक्ष्ण व्यंग्य मे परिणत भ' जाइए। सूक्ष्म-पर्यवेक्षण आ स्पष्ट संलिप्तता सँ भरल-पुरल वैद्यनाथ मिश्रक कविता, विम्ब-विधानक सरलता सँ अपरूप काव्यानुभूतिक सृष्टि करैए, सोचबाक लेल बिलमबैए आ चेतना केँ हिलकोरैए। वैद्यनाथ मिश्रक कविता स्वयं आ समय सँ साक्षात्कार करबैए। एहि अनुभूतिक लेल पढऩाइ आवश्यक शर्त। —कुणाल

Sonak Pijra

Sonak Pijra

Baidyanath Mishra

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300

₹ 249

Available

Danuphak Phool Jakan

  • Author Name:

    Vidyanand Jha

  • Book Type:
  • Description:

    देसक इतिहास आइ अपन निर्दयतम दौर सँ गुजरि रहल अछि जखन भाषा मे अपन अन्त:करणक रक्षा क' सकब एक कठिन चुनौती बनल अछि। मैथिलीक बहुलांश कवि-समुदाय केँ हमरा लोकनि आइ जत' रौरव के उत्सव मनबैत देखबा लेल अभिशप्त छी, विद्यानंद ने तँ अपन जनानुभव सँ एकात भेला अछि आ ने अभिव्यक्तिक जरब उठेबा मे कनियो थकमकाइत छथि। देसवासीक नियति केँ प्रभावित केनिहार हरेक प्रपंच पर हुनका लग अपन कविता छनि। नाना प्रकारक मानवीय आ प्राकृतिक उत्पातक बीच ओ साधारण जन पर पड़ैत एकर प्रभावे केँ उचित-अनुचितक दिशानिर्देशक मानैत रहला अछि। स्मृति सेहो कोना उपस्थित होइत छैक, से हम सब एत' बारंबार देखि सकै छी। हुनक काव्यानुभवक अनुरूपे हुनकर ई संग्रह सेहो विविधता आ व्यापकता सँ भरल अछि। समकालीन कविताक लेल अवश्ये ई एक महत्त्वपूर्ण बात थिक जे हमर ई कवि अपन हरेक नव संग्रह मे पछिला संग्रह सँ आगू बढ़ल देखाइत छथि। हुनकर पाठक लोकनि से एहू संग्रह मे देखि सकता। —तारानंद वियोगी # विद्यानंदक कविता मे आत्म निरीक्षणक एक टा अद्भुत पद्धति छनि। अस्तित्ववादक आधुनिक परम्पराक देशज आ लौकिक सहज विमर्श सँ जेना बियाह होइत हो। जतबे भावोत्तेजित ततबे निरीह, शांत, आ प्रतीतिकर। खेतिहर, गामक लोक, ऑरवेल, अम्बेडकर आ महात्मा गांधी—एहन अनेक पात्र हिनक काव्य मे सजीव भ'क' संवाद करैत अछि। कवि केँ धन्यवाद जे ओ अपन काव्य रचना मे सतत सत्यपरक, तथ्यपरक आ साहित्यिक सौन्दर्यपरक संतुलनक संग समुचित संसार गढ़ैत रहलाह अछि। —देव नाथ पाठक

Danuphak Phool Jakan

Danuphak Phool Jakan

Vidyanand Jha

17% off

315

₹ 261.45

Available

Ek Ta Herayal Duniya

  • Author Name:

    Krishna Mohan Jha

  • Book Type:
  • Description:

    Collection of Maithili Poems

Ek Ta Herayal Duniya

Ek Ta Herayal Duniya

Krishna Mohan Jha

17% off

100

₹ 83

Available

Prakritik Sundartam Hastakshar

  • Author Name:

    Meena Jha

  • Book Type:
  • Description:

    Collection of Maithili Poems

Prakritik Sundartam Hastakshar

Prakritik Sundartam Hastakshar

Meena Jha

17% off

250

₹ 207.5

Available

Bichhdal Kono Pireet Jakan

  • Author Name:

    Vidyanand Jha

  • Book Type:
  • Description:

    Collection of Maithili Poems. मनुष्य केँ आ जीवनक आन सब रूप केँ जे गछाडऩे अछि आपदा ओ विपदा सभ तकर संताप समाएल अछि एहि संग्रहक अनेक कविता मे। निरंतर आभासी होइत जाइत एहि समय मे यथार्थक ठोस ऐन्द्रिक बोध खिया रहल अछि आ ताहि सँ जीवन मे कएक तरहक मारूक कमी ओ दिक्कत सभ आबि रहल अछि। जीवन ओ जगतक ठोस विवरण सभ सँ भरल-पुरल एहि संग्रहक कविता सभ थोड़बहुत काट करैत अछि एहि बातक। आ संगहि जगजियार होइत जाइत अछि एहि सँ जीवनक त्रासद विसंगति ओ विडम्बना सभ; शोषण ओ अन्यायक मर्मांतक रूप सभ; आ इतिहासक दारूण संत्रास सभ। जे किछु शुभ ओ सुंदर बचल अछि जीवनक व्यापक ओ गझिन तानीभरनी मे ताहि मे सँ किछु अनूप जोगाओल गेल अछि एहि संग्रह मे। आ बीच-बीच मे छिटकैत चलैत अछि अस्तित्वक स्वरूपक अबंचक कि रोमांचित कर’वला सूक्ष्म बात सभ सेहो। प्रकृति ओ मनुष्य, अपन संगिनी ओ रूपसी मिथिला, तथा भाषा ओ कलाक विभिन्न रूप सँ जे 'पिरीत’ छनि कवि केँ ताहि सँ डगडग करैत कविता सभ ही केँ जुड़ा दैत अछि, जीवन मे आस्था केँ टेक दैत अछि आ संघर्षक लेल संबल सेहो। दनुफक फूल जकाँ सादा, साफ, हल्लुकओ खलसैत भाषा ओ शिल्प मे रचल गेल एहि संग्रहक कविता सभ सहजहि जीवनक पिरितिया बना दैत अछि। गहन शुभाशंसाक संग हम हलसि क’ एकर स्वागत करैत छी। उत्सवक घड़ी थिक ई मैथिली कविताक लेल। —हरेकृष्ण झा

Bichhdal Kono Pireet Jakan

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Vidyanand Jha

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₹ 249

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Anjur Bhari Ijot

  • Author Name:

    Romisha

  • Book Type:
  • Description:

    आँजुर भरि इजोत रोमिशाक प्रेम सम्बन्धी कविता स्त्री आ मनुष्यक सामूहिक जीवन मे अस्तित्वक अही अविचल यथार्थक वास्तविक मूल्य तकैत अछि। प्रपंच सँ संचालित सामाजिक व्यवस्थाक प्रवंचित मनुष्यक समस्त अभिलाषा केँ हुनकर काव्य-नायिका अपन जाग्रत चेतना सँ देखै छथि, आ जीवन मे किछु महत्त्वपूर्ण करबा लेल व्याकुल रहै छथि। अपन उद्यम मे यत्र-तत्र-सर्वत्र समाजक बहुमुखी आघात सहैतो कखनहुँ हताश नइँ होइ छथि। हुनकर स्त्री, पशु मनोवृत्तिक हिंस्र, खूँखार, वेधक दृष्टि-घात अहर्निश सहिकए क्रमश: पकठोस आ सावधान समझ बना लै छथि। एहेन स्त्री परिवार केँ सुगठित करबा लेल एक-एक साँस लगबै छथि। समस्त कर्तव्यक पूर्ति करैत हुनका एतबा कचोट अवश्य होइ छनि जे समाज आ कि परिवार हुनकहु मादे सोचथि। कवयित्रीक ई अपेक्षा एक टा महत्त्वपूर्ण पक्ष केँ उद्घाटित करैत समाज केँ ई संकेत दैत अछि जे पारिवारिकताक रक्षा मे आ परिवारक गठन मे जीवन झोंकि देनिहारि स्त्रीक पहचान आ हुनकर मनोबलक संज्ञान लेब अनिवार्य अछि। सूर्य, चन्द्रमा, फूल, पवन, प्रकाश, प्रेम, मनुष्यता, नैतिकता, विवेकशीलता, कृतज्ञता आदिक प्रति मोहाविष्ट हएब; प्राकृतिक अवदान सँ आह्लादक रूपक गढ़ब, कविता मे मोहक आ बहुरंगी व्यंजना उपस्थित करब...तय करैत अछि, जे रोमिशा केँ मानवीय परिवेश लेल बड़ बेसी अनुराग छनि। इएह अनुराग हुनका जनसरोकारक दायित्व सँ बन्हने रखतनि, आ हुनकर रचनात्मकता केँ उत्कर्ष देतनि। —देवशंकर नवीन

Anjur Bhari Ijot

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Romisha

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