Contemporary Fiction
Sah-Saa
- Author Name:
Geetanjali Shree
-
Book Type:

- Description:
‘सह-सा’ छोटे-छोटे अकस्मातों में बनती व्यापक मानव नियति की कहानी है। रोज़मर्रा के अनाटकीय प्रसंगों की टकराहटों से बड़े सवालों के खुले में आ जाने की कहानी। न्यायमूर्ति भूलेराम मिसिर अवकाश-प्राप्ति के बाद पत्नी प्रेमिला, बेटी चिया, और अपाहिज अम्मा के साथ रह रहे हैं। पत्नी व बेटी नौकरी पर निकल जाती हैं और घर की ज़िम्मेदारियाँ खुशी खुशी उन्होंने अपने ऊपर ले ली हैं। माँ अपनी शोर करती पटरागाड़ी पर बैठ घर भर का मुआयना करती रहती हैं। भूलेराम का बेटा, श्रवण, दूसरे शहर में है। दो नौकर हैं, शम्भु और उसकी जिज्जी। सब साथ भी हैं, अलग-थलग भी। घरों के जाने पहचाने शीतयुद्ध में रत, जिसे भूलेराम खुला युद्ध नहीं बनने देते। हँसते-खेलते सब पर आदतन चिल्लाते हैं, और बिना डींग-दावे के सबका ध्यान रखते हैं। सहसा एक दिन वे बेआराम हो जाते हैं। प्यार से बनाये उनके वन-प्रांगण में एक गौरैया उनकी बाँह पर आ बैठती है। वे मुस्कुराते हैं कि बाँह को डाल समझ रही है पर तभी मन में संदेह कौंधता है कि उन्हें देख ही नहीं रही शायद। ‘मैं क्या अदृश्य? हवा? प्रेत? भूत सा फिरता अपने घर में।’ यह संदेह यादों की लंबी कड़ी से जुड़ता है। वे जर्जराने लगते हैं और अचानक बीमारी के एक झटके में दम तोड़ देते हैं। जीते जी अदृश्य होने लगे भूले मृत्योपरांत चारों ओर छा जाते हैं। प्रकट कथा के पीछे, उसके अनकहे में, एक और कथा भी चलती है जो दिखाती है कि इस वाचाल समय में हम वही देखते सुनते हैं जो ढिंढोरा है, भड़कीला है, उसके पीछे हो रहे को नहीं। बात चाहे परिजनों की हो या नेताओं की या मेहनतकश मज़दूरों की, हम चुपचाप के अच्छे और बुरे दोनों को मिस कर देते हैं। भूले द्वारा चुपचाप किया गया अच्छा और चूहों द्वारा चुपचाप किया गया संहार इसीलिए छिपा रहता है। इस कृति में भी गीतांजलि श्री की भाषा और शैली का अपना वैभव है। बदलती स्थितियों, मनःस्थितियों को उजागर करती कभी चुटीली, नुकीली, कभी प्रशांत, उदास और दार्शनिक। हमेशा बहुअर्थी। और इसमें है उस प्रकृति का अद्भुत वात्सल्य जिसे हम बेगाना बना बैठे हैं। ‘सह-सा’ एक अनूठी प्रेम गाथा है।
Sah-Saa
Geetanjali Shree
21% offAvailable
Sangam Teere
- Author Name:
Pratap Gopendra
-
Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में सिविल सेवा में रत अभ्यर्थियों के संघर्ष का जीता-जागता चित्र प्रस्तुत किया गया है। उपन्यास और संस्मरण की भूमध्य रेखा पर फिसलती-सरकती एक सहज-सरल कृति है जो स्वयं में सुनहरे भविष्य के लिए संघर्ष करने वाले किशोर-युवा पीढ़ी के अन्तर्द्वन्दों, वेदनाओं, छोटी-छोटी खुशियों को समेटे हुए, धुप्प अंधकार में मार्ग खोजती उनकी अदम्य जीजीविषा को अतीव रोचकता और स्पष्टता से प्रस्तुत करती है। एक ऐसा आख्यान, जहाँ सिविल सेवाओं की तैयारी करने वालों की अनजानी दुनियाँ पूरी विश्वसनीयता के साथ उपस्थित होती है।
Sangam Teere
Pratap Gopendra
20% offAvailable
Rajabadal
- Author Name:
Bimal Mitra
-
Book Type:

- Description:
हिन्दी और बांग्ला में समान रूप से लोकप्रिय कथाकार विमल मित्र के उपन्यास राजाबदल में न कोई राजा है और न कोई राज्य; सिर्फ एक स्कूल है—बलरामपुर हाई स्कूल और उस स्कूल के संस्थापक हैं—गौर पंडित। एक बाप जिस तरह अपने बेटे के निर्माण में अपना सर्वस्व लगा देता है उसी तरह गौर पंडित अपने खून-पसीने से सींच-सींचकर स्कूल का यह बिरवा खड़ा करते हैं। इसके लिए उन्होंने भीख माँगी, पत्नी के जेवर बेचे और क्या-कुछ नहीं किया! लेकिन जैसे-जैसे स्कूल का विस्तार होता गया, गौर पंडित के अधिकार कम होते गए और एक दिन उन्हें स्कूल की कमिटी से हट जाना पड़ा। अपने जीवन के अन्तिम दिनों में उन्होंने हैरानी से देखा कि मालिक बदलने के साथ-साथ जैसे स्कूल का सब-कुछ बदल गया है, भला और बुरा सब-कुछ। और तब जैसे वे तड़प उठे; उन्हें लगा कि उनका मानस-पुत्र पतन के रास्ते पर जा रहा है। वे इस सारी स्थिति को सह नहीं सके और एक अनिर्वचनीय पीड़ा मन में लिये गाँव से विदा हो जाते हैं। चलते समय बार-बार एक प्रश्न उनके मन में उठता है : राजा बदलने के साथ क्या राज्य भी पूरी तरह बदल जाता है? क्या राज्य के लोग तक बदल जाते हैं? इतना ही नहीं, उनका भला-बुरा, शुभ-अशुभ सब कुछ बदल जाता है? गौर पंडित के इस प्रश्न में लेखक ने आज की एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक समस्या को रूपायित किया है। सर्वथा रोचक और भावभीना उपन्यास।
Rajabadal
Bimal Mitra
20% offAvailable
Garibnawaz
- Author Name:
Santosh Choubey
-
Book Type:

- Description:
ये इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ हैं। यहाँ उत्तर-आधुनिक कहानी के इशारे हैं। ये पॉज़िटिवली हल्की-फुल्की हैं और बे-बोझ एवं प्रसन्न हैं। ये बड़ी बात का आडम्बर नहीं रचती हैं और न फालतू की पीड़ा का स्वाँग भरती हैं। इन कहानियों से हिन्दी में उत्तर-कहानी की शुरुआत हुई मानी जा सकती है। —सुधीश पचौरी संतोष चौबे की कहानियाँ यथार्थ की गहनता और व्याप्ति में जाकर सत्य को आख्यान में रूपान्तरित करने का जतन करती हैं। इस प्रक्रिया में वे कहानी कहने के अनेक अनुशासनों को नकारती हैं और यूँ अपनी तरह के कथानुशासन एवं शिल्प की निर्मिति करती हैं। ‘ग़रीबनवाज़’ की अधिसंख्य कहानियों में साहित्य, कला से जुड़े चरित्र उपस्थित हैं लेकिन कहानियाँ महज़ यहाँ से उड़ान भरती हैं, अन्तत: वे आर्थिक उदारीकरण से उपजी मूल्यहीनता, लालच, कपटीपन और क्षरणशील आधुनिकता का प्रत्याख्यान करती हैं। इन चीज़ों में इतनी निष्ठुरता है कि समाज की तमाम सुन्दरताएँ नष्ट हो रही हैं। संतोष चौबे की कहानियाँ पूँजी, तकनीक एवं ताक़त के सहमेल से उपजी विरूपता से मुठभेड़ करती अन्तत: जीवन के सुन्दरतम के पक्ष में खड़ी होती हैं। —अखिलेश
Garibnawaz
Santosh Choubey
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Dukhiyare
- Author Name:
Anis Ashfaq
-
Book Type:

- Description:
वे ख़ुशियाँ, वे खिलखिलाहटें, वे रौनक़ें जिनसे लखनऊ कभी आबाद होता था, मुरझाती हुई धीरे-धीरे उदासियों में बदल गईं। कुछ हवेलियाँ बिक गईं, कुछ नीलाम और कुर्क हो गईं। खानदान जिनकी उपमा सितारों से दी जाती थी, वक़्त और अपनी लापरवाहियों से पिटते-पिटते सड़कों पर आ गए, सड़कों पर भी जगह न रही, तो पब्लिक मैदानों में जा टिके...कर्बलाओं, इमामबाड़ों और मस्जिदों में सिर छुपाते घूमने लगे। ये कहानी इसी दुखियारे वक़्त की है। एक भाई हैं जो छोटे भाइयों के मुक़ाबले अपनी माँ के बहुत लाडले हैं लेकिन उनके दिमाग़ में ख़लल है, बेचैनी कहीं टिकने नहीं देती...वक़्तन-फ़-वक़्तन कुछ औल-फौल बोलने लगते हैं, अपने ख़्वाबों की हवेलियों के नक्शे खींचने लगते हैं और कभी भी किधर भी निकल जाते हैं, छोटे भाई उनको ढूँढ़ते रहते हैं, जब मिलते हैं तो घर भी ले आते हैं, लेकिन बड़े फिर किसी दिन कोई पर्चा छोड़कर ग़ायब हो जाते हैं... शुरू से आख़िर तक यही सिलसिला चलता रहता है, खो जाने और मिल जाने का, और इस लामहदूद–से लगने वाले सफ़र में पुराने लखनऊ का इतिहास और भूगोल हमारी आँखों के सामने से गुज़रता जाता है, उस दुख को दर्ज करता हुआ जिन्हें वक़्त अपने उतरते दिनों की झोली में डालकर कभी न लौटने के लिए चला जाता है...
Dukhiyare
Anis Ashfaq
20% offAvailable
O je Kahiyo Gaam Chhalai
- Author Name:
Shubhendu Shekhar
-
Book Type:

- Description:
धर्म आ दर्शनक स्तर पर बहुलता भारतीय सभ्यता आ संस्कृतिक प्रमुख विशेषता रहल अछि। भारतीय समाज मे परस्पर विरोधी विचारधारा आपस मे टकराइत-मिलैत, सहअस्तित्वक संग समानान्तर गति सँ आगाँ बढ़ैत रहल। मुदा सत्ता-पोषित आ प्रायोजित धर्मक टारगेट पर सदिखन लोकधर्म आ सहिष्णु-समावेशी विचारधारा रहल। शुभेन्दु शेखरक विमर्शपरक उपन्यास 'ओ जे कहियो गाम छलै’ एहि साम्प्रदायिक घृणा मे अमानुष आ नृशंस होइत मिथिलाक गाम केँ बचेबाक आकांक्षा थिक। शुभेन्दु शेखरक दृष्टि वैज्ञानिक आ मानवीय छनि। ओ साम्प्रदायिकता केँ शहरी मध्यवर्गक बीमारी बुझैत छथि जे आब गामो मे नीक जकाँ पसरि चुकल अछि। सब प्रकारक दाओ-पेंच, घृणा, हिंसाक बीच रामगुलाम सन पात्र ओहि समन्वय परंपराक अंतिम कड़ी अछि जे सैकड़ो वर्ष मे निर्मित भेल छल। शुभेन्दु 'धर्म, आस्था, रूढि़ आ अंधविश्वासक बीचक मेंही रेहा’ केँ बचा लेब’ चाहैत छथि। समाज मे धार्मिक वैमनस्य पसारि क’ जंगल बनाब’वला राजनीतिक खिलाड़ीक लेल लेखकक ई चेतावनी—'जंगल के एक टा खूबी होइत छै जे एहि मे केम्हरो सँ घूसल जा सकैत छै,’ भविष्यक प्रति आशा जगबैत अछि। सम्पूर्ण उपन्यास मानवीय विवेकक धुरी पर केन्द्रित अछि। लोकोक्ति आ मुहावरा सँ गूँथल, किस्सागोईपूर्ण एहि उपन्यासक इंद्रधनुषी भाषाक छटा पाठक केँ बान्हैत अछि, संगहि मनुक्ख बनल रहबाक लेल उद्वेलित सेहो करैत अछि। —श्रीधरम
O je Kahiyo Gaam Chhalai
Shubhendu Shekhar
17% offAvailable
Doo Dhap Aagan
- Author Name:
Dilip Kumar Jha
-
Book Type:

- Description:
दिलीप कुमार झा विशुद्ध जिज्ञासु रचनाकार छथि। समकालीन समाज केँ नस-नस चिन्हैत छथि। ओ यात्रीजीक कथन पर उचिते पूर्णतया उतरै छथि। दिलीपजी मैथिलीक जमीनी अभियानी छथि। ई उपन्यास तकर बेस उदाहरण अछि। यथार्थ आ कामना केँ एक टा छोट सन उपन्यास मे सफल बना देलनि। मनलग्गू तँ एहन जे हम एक बैसकी मे समाप्त क’ गेलहुँ। सब टा खूब नीक, पात्रोचित सहज भाषा छनि। —उषा किरण खान 'दू धाप आगाँ’ उपन्यास एहि रूपें उल्लेखनीय अछि जे, आइ जे समाज मे नहि अछि आ अहाँ चाहि रहल छी, त’ अपन संघर्ष बलें जेना सुधा करैत अछि ओना क’ सकैत छी। उपन्यास एहि बातक दृष्टि दैत अछि आ तकर प्रेरणा सेहो। वर्तमान समय मे शिक्षा-प्रणाली ओ राजनीतिक क्षेत्र दुनू विकृतिक चरम पर पहुँच गेल अछि। आब प्रश्न उठैत अछि जे एकरा ठीक कयल जा सकैत अछि? हमरा जनैत समकालीन साहित्यक यैह पैघ विशेषता छै जे ओ समाज मे घटित होइत घटना ओ स्थिति केँ देख मात्र विचलित नहि होइत अछि अपितु ओ समाज केँ प्रेरित करबाक लेल एहन संरचना करैत अछि जे समाज मे नहि अछि किंतु रचनाकार अपन रचना द्वारा ओहि स्थिति सँ उबरबाक लेल एक टा सुखद स्थितिक आयोजन करैत अछि। ओहि स्थिति केँ अनबाक लेल उपन्यासकार जाहि पात्र केँ ठाढ़ करैत छथि ओ एहि उपन्यास मे मुख्यरूप सँ सुधा छथि। हमरा जनैत आइयो सामाजिक परिस्थितिक परिवर्तन लेल नारी केँ आगू आनब कठिन अछि। —डा.शिवशंकर श्रीनिवास
Doo Dhap Aagan
Dilip Kumar Jha
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Madar
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
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Book Type:

- Description:
A Maithili Novel
Madar
Subhash Chandra Yadav
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Kaniya ek ghunghruawali
- Author Name:
Vibha Rani
-
Book Type:

- Description:
मैथिली मे नवम दशक सँ लेखनरत विभा रानी (1959) हिन्दी मे सेहो सक्रिय छथि। कथा, नाटक आ अनुवाद मे हुनक बहुत रास काज छनि। हिनक मौलिक सैंतीस टा आ अनूदित दस टा किताब प्रकाशित। विभा रानीक नवीनतम उपन्यास 'कनियाँ एक घुँघरुआवाली’क मादे मंतव्य: उपन्यास, जटिल आ स्त्री-मोनक लेल दमनकारी परिस्थितिक बीच कामनाक प्रतिफलन हेतु मर्म मे बसल संघर्षक निरंतरताक कथा कहैए। ई मिथिला-केंद्रित, स्त्री-प्रतिभाक प्रतिमान बनबाक कथा सेहो छी जे विडंबनाग्रस्त पितृ-सत्ताक अनवरत अवरोध, विरोध, छल-छद्मक अविराम प्रतिरोध करैए आ डोमकछ कें विस्तार दैए। —कुणाल नृत्य-संगीतक प्रति मैथिल समाज मे घोर उपेक्षा भाव कें उपन्यास मे आलोचनात्मक दृष्टिएँ दर्शाओल गेल अछि। मैथिल लोकनि गीत-नृत्यक रसिया होइत छथि ओकरा ई खूब नीक लगैत छनि, मुदा दोसरक बेटी-पुतोहु द्वारा कयल गेल नृत्य आ गाओल गेल गीत। —कमलानंद झा उपन्यास मे सामाजिक वातावरण, परिवेश, स्त्री-पुरुष लोकनिक संवाद उपन्यास कें सजीव रूप प्रदान करैत अछि। —बिभा कुमारी
Kaniya ek ghunghruawali
Vibha Rani
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Laltenganj
- Author Name:
Savhchidanand Sachchu
-
Book Type:

- Description:
'लालटेनगंज' उपन्यासक लेखक सच्चिदानंद सच्चू दृष्टिवान पत्रकार छथि आ 'अल्लाह हो राम' हिनक पहिल उपन्यास। मैथिली उपन्यास 'लालटेनगंज' धनबाद-झरिया इलाकाक कोलियरी जीवनक कारी-स्याह साँच सँ आत्मसाक्षात्कार करबैत अछि। मैथिली उपन्यास परंपरा मे ई उपन्यास विषयक नवीनता आ ट्रीटमेंटक नवता लेल स्मरण कयल जायत। दू जून रोटीक लेल प्रतिक्षण अपन जिंदगी केँ दाव पर लगबै लेल विवश खदान मजूरक जिंदगीक संघर्षगाथा सोचबाक हेतु आमंत्रित करैत अछि। एहि खदान मे मृत्यु मड़ुआक दोबर भावे सहज, मुदा जीवन अत्यंत कठिनतम। #कमलानंदझा कसल कथानक, सहज कथा-प्रवाह, मजदूरक कहानी ओकरे जुबानी, अनेक गौण पात्र समग्रता मे एकर औपन्यासिक वितान केँ तनने छै। उपन्यास पढ़ैत सहजहि उन्नैसम शताब्दी मे फ्रेंच उपन्यासकार एमील जोलाक कोयला श्रमिकक समस्या पर लिखल उपन्यास 'जर्मिनल' मोन पडि़ गेल। #मीनाझा सच कही त' ई उपन्यास अपन कंस्ट्रक्ट आ संरचना मे बहुत लाजवाब अछि। कथा-भूमि बिल्कुल गर्म छै, आ ताहि पर प्रेम आ मित्रता सन मूल्यक पड़ैत फुहार एक टा अलग तरहक लोभ जगाबैत अछि... #अकबररिज्बी
Laltenganj
Savhchidanand Sachchu
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Khonta Aa Chidai
- Author Name:
Mayanand Mishra
-
Book Type:

- Description:
Maithili Novel
Khonta Aa Chidai
Mayanand Mishra
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Allah Ho Ram
- Author Name:
Sachchidanand Sachchu
-
Book Type:

- Description:
सब संप्रदायक अपन-अपन देवता छै। ककरो अल्लाह, ककरो राम। एक दोसरा सँ छत्तीसक आँकड़ा! मुदा कहियो एना बुझल जाइ छलै, 'अल्लाह मे राम छै आ राम मे अल्लाह' तेँ अल्लाह हो राम! सहज ग्रामीण अंत:चेतना मे व्याप्त अध्यात्म केँ जीवन-मूल्यक रूप मे लैत आजादी सँ पहिने जुआन होइत पीढ़ी आ आजादीक बादक क्रमश: वर्तमान रुढि़, वैमनस्यक बीच जुआन भेल आजुक पीढ़ी केँ अनायासे तुलनात्मक रूप मे देखै अइ उपन्यासकार आ सविस्तार ओकर कथा कहै अइ। तेँ एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक परिवर्तन (सम्यक सँ उन्मादी दिस उन्मुख)क तटस्थ निरूपण संग एक टा ऐतिहासिक दस्तावेज बनि क' प्रस्तुत होइत अइ उपन्यास 'अल्लाह हो राम'। उपन्यासक यात्रा प्राय: सत्तरि-अस्सी बरखक छै। आजादी सँ पहिनेक समय-समाज सँ उपन्यास शुरू होइत छै। एहि विस्तृत अवधिक काल-कथा, एहि अवधि मे बदलैत मनुक्खक कथा, एहन सहज रूप मे गुंफित जे बेसीकाल लोक-कथाक सहोदर बुझाइए। कथा मे कथा, समयक कथा, चरित्रक कथा। सब के सब अपना तरहक रीयल लाइफ कैरेक्टर, अपन (उन्नत कि मलिन) मूल्यक संग जीवंत। आजादीक लड़ाइ, बँटवाराक दाह-दंश-दाग, सुखाड़क डाँग, बाढि़क मूंगरा-मारि, राजनीतिक दखलंदाजीक बीज आ उत्सव-त्योहारक संगहि स्त्रीक स्थिति आ उत्पीडऩ...सब किछु सहज-स्वाभाविक... टाइम-ट्रेन (काल रथ) पर यात्रा करै सन। खास क' पार्टीशन आ वृहत मुस्लिम समाज पर मिथिला-मैथिलीक परिप्रेक्ष्य मे ई पहिल उपन्यास थिक। मुखर सामाजिक सरोकार आ कथा कहबाक आकर्षक शिल्पक संग, उपन्यास 'अल्लाह हो राम' उत्तम रचनाक श्रेणी मे प्रमुख स्थान राखत। एक तरहें मैथिली उपन्यासक एक टा मीलक पाथर सिद्ध हैत, से विश्वास अछि। —कुणाल
Allah Ho Ram
Sachchidanand Sachchu
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Bihari Paat Aa Pathar
- Author Name:
Mayanand Mishra
-
Book Type:

- Description:
Maithili Novel
Bihari Paat Aa Pathar
Mayanand Mishra
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Duvidha Mai Kaya
- Author Name:
Rishi Gajpal
-
Book Type:

- Description:
Hindi Novel
Duvidha Mai Kaya
Rishi Gajpal
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Gulo
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
-
Book Type:

- Description:
Hindi Novel
Gulo
Subhash Chandra Yadav
17% offAvailable
Karbala Dar Karbala
- Author Name:
Gourinath
-
Book Type:

- Description:
1980's blindings to 1989's massacre 'कर्बला दर कर्बला' अपने ढंग का एक अलग उपन्यास है। विमर्शों के इस दौर में यह अपना नया विमर्श चाहता है। गौरीनाथ का यह उपन्यास हमें एक भयावह दुनिया में ले जाता है। ऐसी दुनिया में जो अपराध जगत, पुलिस-प्रशासन और कट्टर धार्मिक संगठनों के गँठजोड़ से बनी है और जहाँ युवाओं के मधुर हो सकने वाले पल भी सहसा कटु हो उठते हैं। यह भागलपुर की दास्तान है। उसी भागलपुर की, जहाँ का अँखफोड़वा काण्ड और नब्बे के दशक में महीनों चले साम्प्रदायिक दंगों ने पूरे इतिहास को ही झकझोर दिया था। शिव और ज़रीना के सपनों की कहानी के बहाने लेखक ने ऐसी कथा बुनी है जो सत्ता और पूँजी के बल पर उत्पीड़ित और लांछित मानवता की कहानी बन गई है। 'कर्बला दर कर्बला' में कल्पना और यथार्थ से भी आगे बढ़कर तथ्यात्मकता को जिस तरह पिरोया गया है वह हिन्दी में उपन्यास-लेखन के क्षेत्र में एक साहसिक प्रयोग है। इस उपन्यास को पढऩा एक दु:स्वप्न से गुज़रना है। मगर उस दु:स्वप्न में कोई फ़ैंटेसी नहीं, बल्कि सच्चाइयों के बनते-बिगड़ते चित्र भरे पड़े हैं। रोंगटे खड़े कर देने वाले चित्र। —अब्दुल बिस्मिल्लाह ... और... भागलपुर से डॉ चन्द्रेश कहते हैं-- लेखक-पत्रकार गौरीनाथ ने बिहार के भागलपुर शहर को केन्द्र में रखकर लगभग दस साल के कालखण्ड में हुए उन चर्चित घटनाओं को समेटने की कोशिश की है, जिसने इस अत्यंत प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के चेहरे को दाग़दार बनाया है, वह चाहे कुख्यात अंधाकरण काण्ड हो या 1989 का भयानक हिन्दू-मुस्लिम दंगा। लेखक ने यथासंभव तटस्थ भाव से इन घटनाओं का सूक्ष्म अन्वेषण कर इसके इर्द-गिर्द गल्प का ताना-बाना बुना गया है, जो उपन्यास के बहाने अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी है यानी दस्तावेज़ में उपन्यास की महक और उपन्यास में दस्तावेज़ की झलक।
Karbala Dar Karbala
Gourinath
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Mati ke Log Sone ki Naiya
- Author Name:
Mayanand Mishra
-
Book Type:

- Description:
कास और झौआ कोसी के सर्व-सुलभ वरदान हैं, पानी और मछली की तरह। जब घर में अन्न नहीं और जेब में नगदी नहीं, तब भी हीतलाल और रमेसर जैसे लोग कुछ बोझे कास काट-बेचकर मड़ुआ-मक्के और नमक का जुगाड़ कर लेते हैं। ये माटी के लोग हैं जिनके लिये नावें सोने से भी बढ़कर हैं। सस्ते श्रम की तरह इनके जीवन में सहज प्रेम कोसी के कास-झौए की तरह ही सुलभ और जीवन का सहारा है। नाच-गाने में ये अपनी तकलीफ भूल-बिसर कर निरस से जीवन में रस घोलते हुए कठिन संघर्ष में लगे रहते हैं। कोसी के कठिन जीवन-संघर्ष के बीच अनूपी और हीतलाल जैसे चरित्रों का प्रेम इस उपन्यास की अद्भुत विशेषता है। अनूपी जैसी एक स्त्री जो पति हीतलाल का घर छोड़ नथुनी पान वाले के यहाँ रहने चली गई है, उस स्त्री के प्रेम की गहराई और उसके साथ हीतलाल का सम्मानपूर्ण जुड़ाव स्त्री-विमर्श के नये दौर में भी दुर्लभ है। इन सरल हृदयी लोगों के बीच दो सौ मन धान के 'अगों' रूप में दान-दक्षिणा पर नज़र गड़ाए नेता और अफसर का गज़ब सांकेतिक बिम्ब है। रस-सिद्ध प्रवाहमयी भाषा के धनी प्रसिद्ध उपन्यासकार मायानंद मिश्र का चमत्कार इस उपन्यास में अपने चरम पर है। यही कारण है कि प्रथम प्रकाशन के 56 वर्ष बाद भी इस उपन्यास के प्रति पाठकीय आकर्षण बरकरार है।
Mati ke Log Sone ki Naiya
Mayanand Mishra
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Shilakshar Ban Mere Man
- Author Name:
Meena Jha
-
Book Type:

- Description:
'शिलाक्षर बन मेरे मन' उपन्यास एक साथ स्त्री-संघर्ष और लड़ते-मरते कृषक समाज की आधुनिक महागाथा है। बिहार के 1967 के विश्व-व्यापी सूखे और अकाल की परिघटनाओं को लेकर मीना झा ने बहुत ही जीवंत और विश्वसनीय ढंग से इस उपन्यास के ताने-बाने को बुना है। अन्नदायिनी धरती की कोख में दरारें पड़ी हैं, खेत में खड़ी फसलें जल गई हैं या उसमें दाने नहीं हैं, नदियों का पानी सूख गया है, मछलियों के जीवन पर भी संकट आ गए हैं और छोटे बच्चों को स्कूलों में मिलने वाली खिचड़ी दुर्लभ पकवान से भी बढ़कर हो गई है और उसी समय सरकारी राशन की कालाबाज़ारी भी चरम पर—ऐसे अमानुषिक अकालबेला के जीवन का चित्रण कथाकार और यात्रा वृत्तांत की सिद्ध लेखिका मीना झा ने इस तरह किया है कि आप उस जीवन के तल में उतरने से खुद को रोक नहीं सकते। यहाँ सूखे और अकाल से जूझते लोगों की भीड़ से मीना झा ने कुछ ऐसे स्त्री-पुरुष, युवक-युवतियों और बच्चों को अपने कैनवस पर उतारा है जो उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र के रूप में सामने आते हैं और जिनके दीर्घ काल तक पाठकों के मन-मस्तिष्क में टिके रहने की प्रबल संभावना है। मिथिला समाज के मिट्टी-पानी में लिथड़े ये पात्र महज़ औपन्यासिक पात्र नहीं, उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र हैं—नागार्जुन के 'बलचनमा' और 'वरुण के बेटे' के चरित्रों की तरह। मास्टर काका, विजय, बुढिय़ा दादी, शंभू, रागिनी तक को आप विस्मृत नहीं कर पाएँगे; प्रधान नायिका कुसुम की तो बात ही मत कीजिए। बेहद पठनीय यह उपन्यास जितना ही जीवंत और चाक्षुष है, उतना ही विचारोत्तेजक भी। —श्रीधरम
Shilakshar Ban Mere Man
Meena Jha
17% offAvailable
Aag
- Author Name:
Chandrarekha Dhadwal
-
Book Type:

- Description:
पहाड़, उसकी बर्फीली चोटियाँ और शांत वातावरण शुरू से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं लेकिन इस पर्यटकीय छवि से इतर पहाड़ की गोद में बसे सैकड़ों छोटे गाँवों की तरफ लोगों का ध्यान अपेक्षाकृत कम जाता है। अपने पहले उपन्यास 'समय मेरे अनुरूप हुआ' से ही चर्चा में आईं वरिष्ठ लेखिका चंद्ररेखा ढडवाल अपने नये उपन्यास 'आग' में हिमाचल प्रदेश के एक ऐसी ही पहाड़ी गाँव की कहानी कहती हैं, जिसमें ग्रामीण परिवेश का संघर्षों से भरा जीवन है। प्रेम है। बैर है। लोकगीत और किस्से-कहानियाँ हैं। पर्व-त्यौहार, मेले-ठेले और खान-पान हैं। एक खिलंदड़ और मनमौजी मिज़ाज की लड़की लोइना है। उसी घर में पला-बढ़ा खेत-खलिहान में काम करने के लिए रखा गया बाहर का एक लड़का प्रीतो है। दोनों के भीतर सुलगती एक प्रेम आग है। लेकिन इससे पहले कि इनके प्रेम को हवा मिलती, लोइना ब्याह दी जाती है। और यहीं से शुरू होती है, लोइना के जीवन की दुश्वारियाँ। फौजी पति शादी के दूसरे रोज़ ही मोर्चे पर चला जाता है और गायब हो जाता है। एक चुलबुली लड़की के लिए, जिसने अभी-अभी जवानी के आँगन में पैर रखे हैं, उसके जीवन की इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है!... अपने भीतर ग्रामीण संस्कृति, विशेष बोली और आंचलिकता का प्रवाह समेटे यह एक ऐसा उपन्यास है, जिसे पढ़ते हुए लगता है, आप किसी पहाड़ी गाँव के मेंड़ों पर चलते हुए इसे सुन रहे हों। अपने सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ती लोइना, पीपल सरीखे छाया देने वाले शांत प्रीतो और प्यारी सास मस्या की एक रुला देने वाली कहानी है 'आग'। कथ्य के साथ-साथ यह उपन्यास में बरती गई लोकधर्मी भाषा की खूबी है कि बढ़ते पन्नों के साथ ही आप इसके चरित्रों की गर्माहट महसूस करने लग जाते हैं। —मिथिलेश प्रियदर्शी
Aag
Chandrarekha Dhadwal
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