Lyrics Songs
Gulzar Ke Geet
- Author Name:
Gulzar
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Book Type:

- Description: गुलज़ार ने हिन्दी फ़िल्मों में गीतों की एक अलग रवायत शुरू की जो आज तक सिर्फ़ उन्हीं की है। कोई और गीतकार न उसकी नक़ल कर पाया, और न उसे कोई और शक्ल दे सका। गुलज़ार पर जो शुरू होता है, वह गुलज़ार पर ही ख़त्म होता है। ‘गुलज़ार के गीत’ में उनके वे गीत शामिल हैं जो दशकों से गाए-बजाए जाते रहे हैं और जितने लोकप्रिय वे तब थे, उतने ही आज भी हैं। ‘मोरा गोरा अंग लई ले’, ‘रोज़ अकेली आए’, ‘हमने देखी है उन आँखों की महकती ख़ुश्बू’ और इन जैसे अनेक गीत हैं जो फ़िल्मों से निकलकर हमारे भाव-जगत का अभिन्न हिस्सा हो गए। संकलन में शामिल गीतों को उनकी प्रकृति के अनुसार दो भागों में प्रस्तुत किया गया है—एक, ‘भाव-गीत’ और दूसरा, ‘रंगारंग’। दूसरे हिस्से में वे गीत हैं जो अपने खिलंदड़पने में भी ज़िन्दगी और दुनियादारी के बारे में गहरी फ़लसफ़ियाना बातें करते हैं, और शायरी को भी एक नई सूरत बख़्शते हैं। गीतों के साथ यहाँ पाठक भूषण बनमाली द्वारा लिखा गया गुलज़ार के बारे में एक आलेख और स्वयं गुलज़ार द्वारा लिखा गया एक दिलचस्प लेख ‘एक गीत का जन्म’ भी पाएँगे। इस लेख में ‘मोरा गोरा अंग लई ले’ गीत की कहानी बयान की गई है।
Gulzar Ke Geet
Gulzar
20% offBhakti Sangeet
- Author Name:
Amal Dash Sharma
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Book Type:

- Description: भारतीय संगीत का इतिहास अत्यंत गौरवमय और महत्त्वपूर्ण है। सुविख्यात संगीत-मर्मज्ञ अमल दाश शर्मा की यह कृति यद्यपि कुछ संत-भक्तों के लोकप्रसिद्ध पदों और गीतों को संगीतबद्ध करके स्वरलिपि के साथ प्रस्तुत करती है, लेकिन ‘भजन की इतिकथा’ नामक अनुच्छेद में उन्होंने संक्षिप्त किंतु परिच्छन्न रूप में सांगीतिक इतिहास को भी प्रतिध्वनित किया है। उपयुक्त रागों एवं तालों में निबद्ध जो लोकप्रिय भजन इस पुस्तक में संग्रहीत हैं, विद्यार्थियों से लेकर साधारण संगीतप्रेमियों तक, सभी के लिए सहज ग्राह्य हैं। इसके अलावा श्री दाश ने छ: जनप्रिय भक्त कवियों अथवा गायकों की जीवनियाँ भी इस पुस्तक में शामिल की हैं, जिससे इसकी उपयोगिता में वृद्धि हुई है।
Bhakti Sangeet
Amal Dash Sharma
20% offMadhukosh Tumhare Adhar
- Author Name:
Rameshraaj
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Book Type:

- Description: यह एक गीत संग्रह है। गीत केवल वो नहीं होते तो चलचित्रों में देखे या सुने जाते हैं, गीत उन भावों को संप्रेषित करते हैं जो अलग अलग सामयिक भावनावों के साथ जन्म लेते हैं। इस पुस्तक में, व्यवस्था-विरोध के गीत, सांप्रदायिक सद्भाव के गीत, प्रेम गीत, लोक गीत हैं। पढ़े, आनंद लें।
Madhukosh Tumhare Adhar
Rameshraaj
15% offZehen Ka Pairhan
- Author Name:
Umesh Pant
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Book Type:

- Description: Description Awaited
Zehen Ka Pairhan
Umesh Pant
20% offTumhare Naam
- Author Name:
Naresh Nadeem
-
Book Type:

- Description: Tumhare Naam Ghazal by Naresh Nadeem
Tumhare Naam
Naresh Nadeem
20% offGeet Sanvidhan ke
- Author Name:
Jorawar Singh
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Book Type:

- Description: Description Awaited
Geet Sanvidhan ke
Jorawar Singh
20% offSaaye Mein Dhoop
- Author Name:
Dushyant Kumar
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Book Type:

- Description: जिंदगी में कभी-कभी ऐसा दौर आता है जब तकलीफ गुनगुनाहट के रास्ते बाहर आना चाहती है । उसमे फंसकर गेम-जाना और गेम-दौरां तक एक हो जाते हैं । ये गजलें दरअसल ऐसे ही एक दौर की देन हैं । यहाँ मैं साफ़ कर दूँ कि गजल मुझ पर नाजिल नहीं हुई । मैं पिछले पच्चीस वर्षों से इसे सुनता और पसंद करता आया हूँ और मैंने कभी चोरी-छिपे इसमें हाथ भी आजमाया है । लेकिन गजल लिखने या कहने के पीछे एक जिज्ञासा अक्सर मुझे तंग करती रही है और वह है कि भारतीय कवियों में सबसे प्रखर अनुभूति के कवि मिर्जा ग़ालिब ने अपनी पीड़ा की अभिव्यक्ति के लिए गजल का माध्यम ही क्यों चुना ? और अगर गजल के माध्यम से ग़ालिब अपनी निजी तकलीफ को इतना सार्वजानिक बना सकते हैं तो मेरी दुहरी तकलीफ (जो व्यक्तिगत भी है और सामाजिक भी) इस माध्यम के सहारे एक अपेक्षाकृत व्यापक पाठक वर्ग तक क्यों नहीं पहुँच सकती ? मुझे अपने बारे में कभी मुगालते नहीं रहे । मैं मानता हूँ, मैं ग़ालिब नहीं हूँ । उस प्रतिभा का शतांश भी शायद मुझमें नहीं है । लेकिन मैं यह नहीं मानता कि मेरी तकलीफ ग़ालिब से कम हैं या मैंने उसे कम शिद्दत से महसूस किया है । हो सकता है, अपनी-अपनी पीड़ा को लेकर हर आदमी को यह वहम होता हो...लेकिन इतिहास मुझसे जुडी हुई मेरे समय की तकलीफ का गवाह खुद है । बस...अनुभूति की इसी जरा-सी पूँजी के सहारे मैं उस्तादों और महारथियों के अखाड़े में उतर पड़ा ।
Saaye Mein Dhoop
Dushyant Kumar
20% offAwara Sajde
- Author Name:
Kaifi Azmi +1
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Book Type:

- Description: आवारा सजदे उर्दू भाषा के विख्यात साहित्यकार कैफ़ी आज़मी द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1975 में उर्दू भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
Awara Sajde
Kaifi Azmi
20% offKuchh Ishq Kiya Kuchh Kaam Kiya
- Author Name:
Piyush Mishra
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Book Type:

- Description: सिनेमा और थिएटर के अन्तरिक्ष में विधाओं के आर-पार उड़नेवाले धूमकेतु कलाकार पीयूष मिश्रा यहाँ, इस जिल्द के भीतर सिर्फ़ एक बेचैन शब्दकार के रूप में मौजूद हैं। ये कविताएँ उनके जज़्बे की पैदावार हैं जिन्हें उन्होंने अपनी कामयाबियों से भी कमाया है, नाकामियों से भी। हर अच्छी कविता की तरह ये कविताएँ भी अपनी बात ख़ुद कहने की क़ायल हैं, फिर भी जो ख़ास तौर पर सुनने लायक़ है वह है इनकी बेचैनी जो इनके कंटेंट से लेकर फ़ार्म तक एक ही रचाव के साथ बिंधी है। दूसरी ध्यान रखने लायक़ बात ये कि इनमें से कोई कविता अब तक न मंच पर उतरी है, न परदे पर। यानी यह सिर्फ़ और सिर्फ़ कवि-शायर पीयूष मिश्रा की किताब है।
Kuchh Ishq Kiya Kuchh Kaam Kiya
Piyush Mishra
20% offNeel
- Author Name:
Bhavesh Dilshad
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Book Type:

- Description: भवेश दिलशाद जदीद दौर के ऐसे ग़ाल गो शायरों में शामिल हैं, जिन्होंने सादगी और बेबाकी को अपना र्तो सुख़न बनाया है। छोटी-छोटी, मगर बहुत दिलपाीर बातें कह जाने वाली यह आवाा, बहुत सुरीली है, दिलकश और भली। अपने सपाट लहजे में जो कुछ वह कहना चाहते हैं, क़ारी (पाठक) के दिल पर सीधे असर अंदाा होता है।
Neel
Bhavesh Dilshad
18% offSiyah
- Author Name:
Bhavesh Dilshad
-
Book Type:

- Description: भवेश दिलशाद की कुछ ग़ालें पढ़ने के बाद लगा कि मैंने उनका कलाम पहले क्यों नहीं देखा। हिंदोस्तानी ग़ाल में जो बहुत सार्थक और चुनौती भरी रचना हो रही है, उसका एक ज्वलंत उदाहरण दिलशाद हैं। दरअसल ग़ाल का मतलब छंद मिलाना नहीं है। दो पंक्तियों में व्यंग्य करना भी नहीं। किसी प्रकार का विवरण देना भी नहीं है। ग़ाल भाषा के जिस स्तर को छूकर भावनाओं का संसार रचती है, वह कठिन कार्य दिलशाद की ग़ालें करती हैं। दिलशाद बाह्य से अधिक आंतरिक संसार पसंद करते हैं और यही ग़ाल की एक ऐसी मंािल है, जहां पहुंचना हर ग़ाल लिखने वाले के लिए सरल नहीं है। दिलशाद के संग्रह के प्रकाशन पर मैं उन्हें बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि हिंदोस्तानी ग़ाल के संसार में यह एक महत्वपूर्ण क़दम माना जाएगा। असग़र वजाहत
Siyah
Bhavesh Dilshad
18% offSheikh Ibrahim Zauq
- Author Name:
Ibrahim Zauq
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Book Type:

- Description: मालूम जो होता हमें अंजाम-ए-मोहब्बत लेते न कभी भूल के हम नाम-ए-मोहब्बत अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे ज़ाहिद शराब पीने से काफ़िर हुआ मैं क्यूँ क्या डेढ़ चुल्लू पानी में ईमान बह गया मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे 'ज़ौक़' जो मदरसे के बिगड़े हुए हैं मुल्ला उन को मय-ख़ाने में ले आओ सँवर जाएँगे