Raaj Samaaj Aur Shiksha
(0)
₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
शिक्षा की बहसें प्रायः सरकारी नीतिपत्रों में दिए गए वायदों, घिसे-पिटे आदर्श वाक्यों या फिर प्राचीन व्यवस्था के मिथकों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। स्कूल और कॉलेजों की दैनिक चर्चा हो या शिक्षाशास्त्र की पाठ्य-पुस्तकें—दोनों ही बच्चे के जीवित संसार और समाज के व्यापक संघर्षों से बहुत दूर जा पड़ी हैं। इस पुस्तक ने शिक्षा की बहसों को एक नई शब्दावली ही नहीं, एक नई अर्थवत्ता भी दी है। कोई आश्चर्य नहीं कि यह पुस्तक उमस के बीच ताज़ा हवा के झोंके का पर्याय बन सकने की क्षमता रखती है।</p> <p>शिक्षा की सच्चाई को यह कृति राज्य-व्यवस्था और सामाजिक जीवन की जटिल बुनावट के बीच ढूँढ़ती है। इसे पढ़ते हुए हम बच्चों के प्रति अपनी स्वाभाविक चिन्ता को एक राजनैतिक आधार और वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पाते हुए देखते हैं। शिक्षा को कृष्ण कुमार ने बहुत व्यापक अर्थ में लिया है, जिसमें बच्चों के लालन-पालन से लेकर उन्हें सामाजिक मूल्यबोध देनेवाली अनेक सूक्ष्म प्रक्रियाएँ शामिल हैं।</p> <p>ज़ाहिर है, इस पुस्तक का पाठक वर्ग शिक्षा के नीतिकारों, प्रशिक्षकों और छात्रों तक सीमित नहीं है। उसमें ऐसे सभी माता-पिता भी शामिल हैं जो अपनी सन्तान के भविष्य को समाज की संरचना और राजनीति के चरित्र से अलग नहीं मानते।
Read moreAbout the Book
शिक्षा की बहसें प्रायः सरकारी नीतिपत्रों में दिए गए वायदों, घिसे-पिटे आदर्श वाक्यों या फिर प्राचीन व्यवस्था के मिथकों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। स्कूल और कॉलेजों की दैनिक चर्चा हो या शिक्षाशास्त्र की पाठ्य-पुस्तकें—दोनों ही बच्चे के जीवित संसार और समाज के व्यापक संघर्षों से बहुत दूर जा पड़ी हैं। इस पुस्तक ने शिक्षा की बहसों को एक नई शब्दावली ही नहीं, एक नई अर्थवत्ता भी दी है। कोई आश्चर्य नहीं कि यह पुस्तक उमस के बीच ताज़ा हवा के झोंके का पर्याय बन सकने की क्षमता रखती है।</p>
<p>शिक्षा की सच्चाई को यह कृति राज्य-व्यवस्था और सामाजिक जीवन की जटिल बुनावट के बीच ढूँढ़ती है। इसे पढ़ते हुए हम बच्चों के प्रति अपनी स्वाभाविक चिन्ता को एक राजनैतिक आधार और वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पाते हुए देखते हैं। शिक्षा को कृष्ण कुमार ने बहुत व्यापक अर्थ में लिया है, जिसमें बच्चों के लालन-पालन से लेकर उन्हें सामाजिक मूल्यबोध देनेवाली अनेक सूक्ष्म प्रक्रियाएँ शामिल हैं।</p>
<p>ज़ाहिर है, इस पुस्तक का पाठक वर्ग शिक्षा के नीतिकारों, प्रशिक्षकों और छात्रों तक सीमित नहीं है। उसमें ऐसे सभी माता-पिता भी शामिल हैं जो अपनी सन्तान के भविष्य को समाज की संरचना और राजनीति के चरित्र से अलग नहीं मानते।
Book Details
-
ISBN9788171788002
-
Pages151
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sampoorn Dalit Andolan : Pasamanda Tasawwur
- Author Name:
Ali Anvar
- Book Type:

-
Description:
ग़ुलामी भले ही विदा हो गई हो, जाति तो मुसलमानों में क़ायम है ही। उदाहरण के लिए, बंगाल के मुसलमानों की स्थिति को लिया जा सकता है। 1901 के लिए बंगाल प्रान्त के जनगणना अधीक्षक ने बंगाल के मुसलमानों के बारे में यह रोचक तथ्य दर्ज किए हैं—‘मुसलमानों का चार वर्गों—शेख़़, सैयद, मुग़ल और पठान—में परम्परागत विभाजन इस प्रान्त (बंगाल) में प्रायः लागू नहीं है। मुसलमान दो मुख्य सामाजिक विभक्त मानते हैं—1. अशराफ़ अथवा शरफ़ और 2. अज़लाफ़। अशराफ़ से तात्पर्य है ‘कुलीन’ और इसमें विदेशियों के वंशज तथा ऊँची जाति के धर्मान्तरित हिन्दू शामिल हैं। व्यावसायिक वर्ग और निचली जातियों के धर्मान्तरित शेष अन्य मुसलमान अज़लाफ़ अर्थात नीच अथवा निकृष्ट व्यक्ति माने जाते हैं। उन्हें कमीना अथवा इतर कमीना या रासिल, जो ‘रिज़ाल’ का भ्रष्ट रूप है, बेकार कहा जाता है। कुछ स्थानों पर एक तीसरा वर्ग ‘अरज़ाल’ भी है, जिसमें आनेवाले व्यक्ति सबसे नीच समझे जाते हैं। उनके साथ कोई भी अन्य मुसलमान मिलेगा-जुलेगा नहीं और न उन्हें मस्जिद और सार्वजनिक क़ब्रिस्तानों में प्रवेश करने दिया जाता है।
इन वर्गों में भी हिन्दू में प्रचलित जैसी सामाजिक वरीयता और जातियाँ हैं।...
मुसलमानों में इन बुराइयों का होना दु:खद है, किन्तु उससे भी अधिक दु:खद तथ्य यह है कि भारत के मुसलमानों में समाज-सुधार हेतु इन बुराइयों के सफलतापूर्वक उन्मूलन के लिए कोई संगठित आन्दोलन नहीं उभरा।...दूसरी ओर, मुसलमान यह महसूस ही नहीं करते कि ये बुराइयाँ हैं। परिणामतः वे उनके निवारण हेतु सक्रियता भी नहीं दर्शाते। इसके विपरीत, अपनी मौजूदा प्रथाओं में किसी भी परिवर्तन का विरोध करते हैं।
—डॉ. बी.आर. आम्बेडकर
‘पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन’ पुस्तक से
Ramakrishna Paramhans
- Author Name:
Pradeep Pandit
- Book Type:

- Description: गंगा के किनारे बसा बेलूर मठ अब भी अपने परमहंसी स्वरूप में है। रामकृष्ण का कमरा, उनकी चारपाई सबकुछ वैसा ही है जैसा कभी था। नहीं है तो रामकृष्ण की वह देह, जिसके जरिए उन्होंने अध्यात्म के अनेक अभ्यास किए और संसार को प्रायोगिक भक्ति की प्रामाणिकता से अवगत कराया। परमहंस के पहले और बाद में भक्ति सिर्फ याचक की याचना से ज्यादा नहीं रही; लेकिन रामकृष्ण ने भक्ति के शाब्दिक कायांतरण के प्रमाण उजागर किए। भक्ति के उनके प्रयोगों की दुनिया शब्द, अर्थ, ध्वनि के आकाशों से घिरी हुई दुनिया है, जिसकी शुरुआत रामकृष्ण स्कूली जीवन में ही कर चुके थे। भक्ति एक भाव है, स्थिति है, इसलिए उसमें गणित नहीं होता। होता है तो सिर्फ भरोसा और विश्वास। रामकृष्ण अपने स्कूली जीवन में गणित में कमजोर थे, पर उस समय भी वे धार्मिक या धर्म पर बोलनेवाले संतों, महात्माओं को सुनते और अपने दोस्तों को ठीक वैसा ही सुनाकर चकित कर देते। उन्हें रास आता था सिर्फ अध्यात्म का रास्ता। भारत के आध्यात्मिक महापुरुषों में अग्रणी रामकृष्ण परमहंस की पूरी जीवन-यात्रा इस लौकिक जगत् को अतार्किक और अबूझ जगत् से नि:शब्द जोड़ने की यात्रा है। रामकृष्ण परमहंस के जीवन को जानने-समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।
Main Radhakrishnan Bol Raha Hoon
- Author Name:
Jaishri
- Book Type:

- Description: "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत एक आस्थावान् राष्ट्र-सेवक थे। इसके साथ ही वे सभी धर्मों और धर्मावलंबियों के प्रति समान आदरभाव रखते थे। वे स्वभाव से अत्यंत विनम्र और धैर्यशील थे। डॉ. राधाकृष्णन एक उच्चकोटि के दार्शनिक, मूर्धन्य लेखक एवं राष्ट्रीय विचारों के ओजस्वी प्रवक्ता थे। उन्होंने दर्शन एवं संस्कृति पर अनेक ग्रंथों की रचना की। यों तो डॉ. राधाकृष्णन का मूलरूप एक शिक्षक का ही था, परंतु एक उच्चकोटि के लेखक और दर्शनशास्त्र के व्याख्याता के रूप में उन्हें अधिक ख्याति मिली। ऐसे महान् दार्शनिक, विचारक, चिंतक व शिक्षाशास्त्रा् के प्रेरक विचारों का संकलन अवश्य ही हमारा मार्ग प्रशस्त करेगा। "
Business Impacted by Various Pandemic (Series-3)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: The impact of various pandemics on businesses is well documented. But, what about the ripple effect these events have on other aspects of our daily lives? In this fourth part of a series on how business is affected by international and health issues, In the book Business Impacted by Various Pandemic (Series-3) Dr Sanjay Rout sheds light on the circumstances that lead to business disruptions around the world and in India.
Bharatiya Sanskriti
- Author Name:
Narendra Mohan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
1947 Ke Baad Ka Bharat
- Author Name:
Gopa Sabharwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Achchhi Hindi
- Author Name:
Ramvachan Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Ratan Tata Way | Complete Biography & Success Secrets | Business Leadership Principles Visionary Industrial Evolution Inspirational Nation Building
- Author Name:
Vinod Sharma +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Story of A Foreign Investor
- Author Name:
S.K. Uppal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Michael Faraday
- Author Name:
Mamta Jha
- Book Type:

- Description: Awaiting description
UPPSC UP Combined State/Upper Subordinate Services General Studies (Paper-1) Preliminary Examination | Solved Papers 2023–2005 (English)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Infinity
- Author Name:
Minal Arora
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dalit Sahitya : Nai Chunautiyan
- Author Name:
Ramshankar Katheria
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aap Bhi Ameer Ban Sakte Hain
- Author Name:
Joseph Murphy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UTTARAKHAND KE LOKNRITYA
- Author Name:
Garvit Shah
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nayi Naari : Sita Ki Maa : Shakuntala
- Author Name:
Shriramvriksha Benipuri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mero Pahad
- Author Name:
Harsingh Manral
- Book Type:

- Description: Memoirs
Cafe Cine Sangeet
- Author Name:
Pankaj Raag
- Book Type:

-
Description:
फ़िल्मों का गीत-संगीत भारतीय जन-जीवन का अभिन्न हिस्सा है। शायद ही ऐसा कोई समय हो जब कहीं-न-कहीं से किसी फ़िल्मी गीत की कोई धुन, कोई बोल, कोई पंक्ति हमारे आसपास न रहती हो। वे हमारा मनोरंजन भी हैं, हमारा फ़लसफ़ा भी, हमारे सुख-दुख की अभिव्यक्ति भी।
दुनिया में कहीं भी फ़िल्में आम ज़िन्दगी में इस तरह शामिल नहीं हैं जैसे हमारे यहाँ। बल्कि हिन्दी गीतों की लोकप्रियता तो उन क्षेत्रों में भी है जहाँ की भाषा हिन्दी नहीं है फिर भी गीत-संगीत के इस जादुई संसार पर ढंग की किताबें कुछ कम ही हैं।
पंकज राग ने ‘धुनों की यात्रा’ शीर्षक अपनी चर्चित किताब में इस तरफ़ क़दम बढ़ाते हुए फ़िल्मी गीतों को लेकर एक दस्तावेज़ी काम किया था। अब इस किताब में वे हिन्दी फ़िल्मी गीतों पर कुछ और ही अन्दाज़ में बात करते हुए उनके माध्यम से भारतीय समाज को भी समझने और समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
फ़िल्मी गीतों के इतिहास को अलग-अलग सन्दर्भों और कोणों से देखते हुए वे इस किताब में न सिर्फ़ फ़िल्मी गीतों का विश्लेषण करते हैं, बल्कि उनकी संरचना, स्वीकृति, लोकप्रियता और विषयवस्तु की जानकारी देते हुए भारतीय समाज के उतार-चढ़ाव, उसके ग्राफ़ को भी अंकित करते चलते हैं।
Emergency ka Kahar aur Censor ka Zahar
- Author Name:
Balbir Dutt
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
J. Krishnamurti Ke Darshnik Vichar
- Author Name:
Swati Gautam
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book