Padhna, Zara Sochna
(2)
Author:
Chandramohan Kulkarni, Krishna KumarPublisher:
Ektara TrustLanguage:
HindiCategory:
Picture-books₹
200
₹ 166 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
क्यों और क्या पढ़ना है, इस जिज्ञासा का अंत कैसे हुआ ? जब आप स्कूल में थे और जब आप उसी स्कूल में शिक्षक हैं तो आप वही कर रहे हैं जो आपके साथ किया जा रहा था। पढ़े हुए लोगों में पढ़ने को लेकर इतनी विरक्ति क्यों है इसे कृष्ण कुमार ने कितनी सरलता से समझाया है। इस जटिल संसार में कृष्ण कुमार को पढ़ना ख़ुद को सरल बनाना है। हर बच्चा पढ़ना चाहता है लेकिन हर बच्चा पढ़ाई से दूर हो जाता है। इस पुस्तक को पढ़ने के लाभ नहीं हैं क्योंकि यह पुस्तक लाभ के लिए पढ़ने की मनोवृत्ति का प्रतिकार करती है। तय आपको करना है कि पढ़ना है या नहीं और क्यों पढ़ना है । आनंद आया। किसी ने पढ़ाया तो नहीं लेकिन पढ़ने का रास्ता बता दिया। शिक्षण में जो लोग हैं वो कैसे नहीं पढ़ाना चाहिए, उसके गुर सीखने के लिए इसे पढ़ सकते हैं। माँ बाप,जिन्होंने माँ और बाप बनने के बहुत पहले पढ़ना छोड़ दिया लेकिन चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ें वो अगर इसे पढेंगे तो मज़ा आएगा।
Read moreDon’t Miss Out
- Free Delivery
- 25% off on all MRP of books
- Author-signed copy
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹999/Year
You will be auto-charged ₹999 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Prime Plus
Author-signed copy
25% off on all MRP of books
Book Recomendation Per Year
Delivery is free for the entire year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
क्यों और क्या पढ़ना है, इस जिज्ञासा का अंत कैसे हुआ ?
जब आप स्कूल में थे और जब आप उसी स्कूल में शिक्षक हैं तो आप वही कर रहे हैं जो आपके साथ किया जा रहा था। पढ़े हुए लोगों में पढ़ने को लेकर इतनी विरक्ति क्यों है इसे कृष्ण कुमार ने कितनी सरलता से समझाया है। इस जटिल संसार में कृष्ण कुमार को पढ़ना ख़ुद को सरल बनाना है। हर बच्चा पढ़ना चाहता है लेकिन हर बच्चा पढ़ाई से दूर हो जाता है। इस पुस्तक को पढ़ने के लाभ नहीं हैं क्योंकि यह पुस्तक लाभ के लिए पढ़ने की मनोवृत्ति का प्रतिकार करती है। तय आपको करना है कि पढ़ना है या नहीं और क्यों पढ़ना है ।
आनंद आया। किसी ने पढ़ाया तो नहीं लेकिन पढ़ने का रास्ता बता दिया। शिक्षण में जो लोग हैं वो कैसे नहीं पढ़ाना चाहिए, उसके गुर सीखने के लिए इसे पढ़ सकते हैं।
माँ बाप,जिन्होंने माँ और बाप बनने के बहुत पहले पढ़ना छोड़ दिया लेकिन चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ें वो अगर इसे पढेंगे तो मज़ा आएगा।
Book Details
-
ISBN9789391218478
-
Pages68
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age0-11 yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Aaj Nahi Padhunga
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
‘आज नहीं पढ़ूँगा’ कृष्ण कुमार की बाल कहानियों का संकलन है। घर, पड़ोस और स्कूल के आसपास घूमती बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ी यह रोमांचक कथा-शृंखला दो दशकों से चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी दो कहानियाँ पहली बार अज्ञेय के ‘नया प्रतीक’ में छपी थीं। बच्चों को उनके अपने मनोलोक की गहराइयों में ले जाने वाली यह किताब मामूली बातों में कौतूहल जगाती है और बार-बार पढ़ने की इच्छा पैदा करती है।
Kuch Aata Na Jata
- Author Name:
Rajesh Joshi +1
- Book Type:

- Description:
कौवा कितना काला है? जैसे कि रोशनी उल्टी हो गई हो, मशहूर कवि राजेश जोशी जवाब देते हैं। उनके जैसा स्थापित कवि अवलोकन की बारीकियों को व्यक्त करने के लिए नई भाषा का निर्माण कर सकता है। यह एक अनोखा संग्रह है, जो बच्चों को बहुत पसंद आएगा। वे पूरे दिन आपके साथ या अकेले इन्हें गाना चाहेंगे। युवा चित्रकार शिवम चौधरी के चित्र ताज़ा हैं। वे दिखाते हैं कि चित्रण में रंगों की अपनी आवाज़ होती है, आप ध्यान से सुनना चाहेंगे।
Vichar Ka Dar
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
हिन्दी गद्य का स्वरूप साठ के दशक में बदलना शुरू हो चुका था। सत्तर के दशक में यह बदलाव कई विधाओं में प्रकट हुआ। लोकतांत्रिक चेतना के फैलाव से पैदा हुए तनावों के अलावा शिक्षा और संचार के आधुनिक माध्यमों का विस्तार गद्य को जिज्ञासा और समझ की नई ज़मीनें तोड़ने के लिए तैयार कर रहा था। इस विकास को कुंठित करनेवाली ताक़तें—अंग्रेज़ी की चौधराई, राज्याश्रित हिन्दी की राजनीति और उत्तर के समाज में फैली सामन्ती प्रवृत्तियाँ भी—पोषण पा रही थीं; विचार का डर हमें इन ताक़तों को समझने में मदद दे सकता है।
इस पुस्तक में संकलित पद्य पिछले दो दशकों में प्रकाशित कृष्ण कुमार की वैचारिक रचनाशीलता की बानगी तो देता ही है, इस समूचे दौर की गतिशील प्रवृत्तियों का बिम्ब भी प्रस्तुत करता है। विषयों की दृष्टि से ये लेख, निबन्ध और संस्मरण हिन्दी समाज के सरोकारों का पैमाना कहे जा सकते हैं। अर्थ और राजनीति से लेकर साहित्य, संचार और मनोरंजन के तेज़ी से बदलते हुए ढाँचों के बीच तकनीक, भाषा, फ़िल्म-संगीत, स्त्री, साम्प्रदायिक हिंसा और पत्रकारिता जैसे सन्दर्भों की जाँच इस कृति को एक नई तरह का, बहुत फैला हुआ पाठक समुदाय देती है।
Shanti ka samar
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों में भावनाओं, विचारों और सन्देहों का एक बड़ा-सा जंजाल आज़ादी के समय से फैला हुआ है, जो समय–समय पर टकराव की स्थिति पैदा कर देता है। इस पुस्तक में इस जंजाल की छानबीन गहरे धीरज और इस आशा के साथ की गई है कि दोनों देश अपनी–अपनी राष्ट्रीय अस्मिताओं को बनाए रखते हुए शान्ति के एक नए दक्षिण एशियाई सन्दर्भ की रचना कर सकते हैं। महात्मा गांधी की हत्या से लेकर कश्मीर–समस्या और विश्व स्तर पर उभरे अस्मिताओं के संघर्ष तक अनेक विषयों की पड़ताल करते हुए लेखक ने कई महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया है : राष्ट्रपिता की हत्या क्यों हुई? विभाजन के इतिहास को अनुभूति के स्तर पर आज किस तरह देखा जाए? गांधी और जिन्ना की विरासतें आज तक हमें किस तरह प्रभावित करती रही हैं? आदि प्रश्नों की मदद से यह पुस्तक हमें विचारोत्तेजक समाधि की अवस्था में ले जाती है। इसे पढ़ते हुए हम शान्ति की सम्भावना को लेकर एक नई तरह का तर्क रचने की प्रेरणा पाते हैं जिसका आधार बीते हुए कल की रूमानी यादों में न हो। दक्षिण एशिया में सामूहिक शान्ति के पक्ष में सहमति बनाने के सिलसिले में यह पुस्तक बच्चों और युवाओं की शिक्षा के अलावा मीडिया की भूमिका पर भी रोशनी डालती है।
Raaj Samaaj Aur Shiksha
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
शिक्षा की बहसें प्रायः सरकारी नीतिपत्रों में दिए गए वायदों, घिसे-पिटे आदर्श वाक्यों या फिर प्राचीन व्यवस्था के मिथकों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। स्कूल और कॉलेजों की दैनिक चर्चा हो या शिक्षाशास्त्र की पाठ्य-पुस्तकें—दोनों ही बच्चे के जीवित संसार और समाज के व्यापक संघर्षों से बहुत दूर जा पड़ी हैं। इस पुस्तक ने शिक्षा की बहसों को एक नई शब्दावली ही नहीं, एक नई अर्थवत्ता भी दी है। कोई आश्चर्य नहीं कि यह पुस्तक उमस के बीच ताज़ा हवा के झोंके का पर्याय बन सकने की क्षमता रखती है।
शिक्षा की सच्चाई को यह कृति राज्य-व्यवस्था और सामाजिक जीवन की जटिल बुनावट के बीच ढूँढ़ती है। इसे पढ़ते हुए हम बच्चों के प्रति अपनी स्वाभाविक चिन्ता को एक राजनैतिक आधार और वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पाते हुए देखते हैं। शिक्षा को कृष्ण कुमार ने बहुत व्यापक अर्थ में लिया है, जिसमें बच्चों के लालन-पालन से लेकर उन्हें सामाजिक मूल्यबोध देनेवाली अनेक सूक्ष्म प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
ज़ाहिर है, इस पुस्तक का पाठक वर्ग शिक्षा के नीतिकारों, प्रशिक्षकों और छात्रों तक सीमित नहीं है। उसमें ऐसे सभी माता-पिता भी शामिल हैं जो अपनी सन्तान के भविष्य को समाज की संरचना और राजनीति के चरित्र से अलग नहीं मानते।
Mera Desh, Tumhara Desh
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
अतीत की साझेदारी के बावजूद भारत और पाकिस्तान के स्कूलों में स्वाधीनता संघर्ष का इतिहास बिलकुल अलग ढंग से पढ़ाया जाता है। इतिहास की पढ़ाई दो परस्पर विरोधी राष्ट्रीय अस्मिताओं का निर्माण करती है। कुछ घटनाओं पर ज़ोर देकर और कुछ को छोड़कर स्कूली पाठ्य-पुस्तकें किस तरह दो अलग आख्यान रचती हैं, प्रोफ़ेसर कृष्ण कुमार की यह किताब इसी प्रश्न की गहराइयों में जाकर बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करनेवाले सांस्कृतिक और विचारधारा-सम्बन्धी आग्रहों की पड़ताल करती है।
विश्लेषण के दायरे में 1857 के विद्रोह से लेकर विभाजन और स्वतंत्रता तक की सभी घटनाओं का भारत और पाकिस्तान की समकालीन पाठ्य-पुस्तकों में चित्रण शामिल किया गया है। इसके अलावा गांधी और जिन्ना जैसे व्यक्तित्वों की प्रस्तुतियों की छानबीन और व्याख्या भी की गई है। किताब के अन्तिम हिस्से में लाहौर और दिल्ली के बच्चों द्वारा लिखे गए निबन्धों का विश्लेषण शामिल है। यह विश्लेषण बच्चों की प्रतिक्रियाओं में निहित ताज़गी और दोटूकपने को चिन्हित करता है।
‘मेरा देश, तुम्हारा देश’ यह उम्मीद जगानेवाली किताब है कि भारत और पाकिस्तान अपनी आज़ादी के साठ वर्ष बाद विभाजन की पीड़ादायी स्मृति से उबरकर शान्ति का रास्ता खोज सकते हैं। प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार ने इस पुस्तक को अपनी तरह के पहले कदम की संज्ञा दी है।
Choori Bazar Mein Ladki
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
यह पुस्तक लड़कियों के मानस पर डाली जानेवाली सामाजिक छाप की जाँच करती है। वैसे तो छोटी लड़की को बच्ची कहने का चलन है, पर उसके दैनंदिन जीवन की छानबीन ही यह बता सकती है कि लड़कियों के सन्दर्भ में 'बचपन' शब्द की व्यंजनाएँ क्या हैं। कृष्ण कुमार ने इन व्यंजनाओं की टोह लेने के लिए दो परिधियाँ चुनी हैं। पहली परिधि है घर के सन्दर्भ में परिवार और बिरादरी द्वारा किए जानेवाले समाजीकरण की। इस परिधि की जाँच संस्कृति के उन कठोर और पैने औज़ारों पर केन्द्रित है जिनके इस्तेमाल से लड़की को समाज द्वारा स्वीकृत औरत के साँचे में ढाला जाता है। दूसरी परिधि है शिक्षा की जहाँ स्कूल और राज्य अपने सीमित दृष्टिकोण और संकोची इरादे के भीतर रहकर लड़की को एक शिक्षित नागरिक बनाते हैं। लड़कियों का संघर्ष इन दो परिधियों के भीतर और इनके बीच बची जगहों पर बचपन भर जारी रहता है। यह पुस्तक इसी संघर्ष की वैचारिक चित्रमाला है।
Bhasha Ki Sanjeevani
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कृष्ण कुमार अपने पाठकों को पहचानते हैं और उनसे आत्मीयता बढ़ाने के अन्दाज़ में लिखते हैं। पहली बार उनका गद्य पढ़ रहे नए पाठक इस आत्मीयता का स्पर्श पाकर चकित होते हैं। निबन्ध की विधा कृष्ण कुमार को विशेष प्रिय रही है यद्यपि वे कहानी और संस्मरण भी चाव से लिखते रहे हैं। ‘भाषा की संजीवनी’ की शुरुआत थोड़ा-बहुत भी बता पाने के संघर्ष और सुकून से होती है और अन्त भाषा के जीवनदायी चरित्र के अभिन्दन से। इन दो विचार-ध्रुवों के बीच इस संग्रह में अठ्ठारह निबन्ध, समीक्षा-लेख और संस्मरण शामिल हैं। विषयों की विविधता के बीच पाठकों को कृष्ण कुमार के स्थायी सरोकार मिलेंगे—प्रकृति, स्त्री, सरकार और पढ़ाई। इन सभी के भीतर और इर्द-गिर्द मची भगदड़ और हिंसा पर टिप्पणी भी मिलेगी। इस निबन्ध विविधा से गुज़रते हुए पाठक याद करेंगे कि कृष्ण कुमार के लिए अगर कोई चीज़ नागवार है तो वह ‘विचार का डर’ है जो उनके एक प्रसिद्ध संग्रह का शीर्षक भी है।
Jadui Chashmen
- Author Name:
Dr. Manjari Shukla
- Book Type:

- Description:
डॉ मंजरी शुक्ला की पठनीय और शिक्षाप्रद बाल-कहानियों का संग्रह है 'जादुई चश्में' 'जादुई चश्में' लेखिका डॉ मंजरी शुक्ला का कहानी संग्रह है। इसमें लेखिका की चौदह कहानियों को संकलित किया गया है। कहानियाँ रोचक है और बच्चों को पढ़ने के लिए दी जा सकती हैं या इन्हें उन्हें पढ़कर सुनाया जा सकता है:
Aawo bachhon tumhe sunayen
- Author Name:
Alok Kumar
- Book Type:

- Description:
नेहा, आयशा, कबीर और राहुल भी बाकि बच्चों की तरह पार्क में बैठकर मोबाइल की दुनिया में व्यस्त थे। तभी उन्हें वहाँ एक रहस्यमयी बूढ़ा व्यक्ति मिलता है जो उन्हें कहानियाँ सुनाने की पेशकश करता है। इसके बाद तो बच्चों को कहानियों का ऐसा चस्का लगता है कि उनकी हर शाम पार्क में उस व्यक्ति के साथ कहानियाँ सुनते हुए गुजरने लगती है। दूसरी तरफ उनके माता-पिता के पास अपने बच्चों के लिए समय ही कहाँ था? वे तो अब भी मोबाइल के संसार में उलझे हुए थे। ऐसे में बच्चे एक बेहद खतरनाक निर्णय लेते हैं.. निर्णय था घर से भाग निकलने का।
Angoor
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description:
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इजाफ़ा हो गया है। यह बेहद लोकप्रिय कॉमेडी ‘अंगूर’ का मंज़रनामा है। दो जुड़वाँ जोड़ियों के बीच बुनी घटनाओं की यह कहानी आज भी दर्शकों को उतना ही लुभाती है जितना अपने समय में लुभाती थी। शेक्सपीयर के नाटक ‘द कॉमेडी ऑफ़ एरर्स’ से प्रेरित इस फ़िल्म ने स्वस्थ और चुटीले हास्य का एक मानक फ़िल्म-उद्योग के सामने रखा था। विश्वास है, पुस्तक के रूप में इस फ़िल्म की यह प्रस्तुति पाठकों की स्मृति में रचे चित्रों को पुनः गतिमान करेगी और साथ ही एक उपन्यास का आनन्द भी देगी।
Boski Ka Panchtantra
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description:
‘बोसकी का पंचतंत्र’ की पाँच किताबों में, नीति के पाँच हिसाबों में जो पंचतंत्र आरम्भ हुआ, उसे बच्चों के प्यारे फ़िल्मकार-शायर गुलज़ार ने बोसकी को सुनाया। दुनिया-भर के बच्चों के लिए सुनाया। ‘बोसकी का पंचतंत्र’ उसी की एक कड़ी है। इसकी पठनीयता भी पूर्व की तरह आकर्षित करती है। इसमें क़िस्सागोई की भारतीय परम्परा का ख़ास आकर्षण है। किताब के चित्र और रेखांकन बच्चों के लिए और अधिक रोचकता पैदा करते हैं।
Pashubhasha Visheshgya Doctor Dolittle Ki Kahani
- Author Name:
Alok Kumar
- Book Type:

- Description:
यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो पशु-भाषा विशेषज्ञ था। डॉक्टर जॉन डूलिटिल। जो था तो इंसानों का डॉक्टर किन्तु उसके पशुप्रेम ने उसे इंसानों से दूर कर जानवरों के करीब ला दिया। उसने जानवरों की भाषा सीखी और उनका इलाज करने लगा। उसकी प्रसिद्धि इतनी फैली कि अफ्रीका से उसे एक संदेश आया। वहाँ के बंदरों को जानलेवा बीमारी से बचाने के डॉक्टर जॉन डूलिटिल अपने पशुओं के साथ एक ऐसी खतरनाक और रोमांचक यात्रा पर निकल पड़ा जिसे आप कभी भी नहीं भुला सकेंगे।
Ajanta Ki Rajkumari
- Author Name:
Sourabh Sharma
- Book Type:

- Description:
अजंता की गुफाओं ने भारत के क्लासिकल समाज को ज्यों का त्यों अपने भीतर सहेज लिया है। अजंता अपने भीतर आश्चर्य लोक है। अपने सुंदर समय की स्मृतियों को सहेजने का विचार जब राजपुरुषों के मन में आया होगा तो इस अद्भुत गैलरी का निर्माण हुआ होगा। इसका निर्माण भी उतना ही रहस्यमयी और रोचक होगा जितनी ये गुफाएं हैं। संभवतः राजा ने इसके निर्माण के लिए एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट बुलवाया होगा। चित्रकारों का चुनाव किया होगा और चित्रों का भी। इतने गहरे भावों को सृजित कराने वाले आश्रयदाताओं की भावभूमि भी गहन होगी। इनकी कहानियों पर एक कथा रचने का प्रयास है अजंता की राजकुमारी।
Sapnon ka Ped
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कई बार कुछ चीज़ें, हमारे जीवन में बिना कोई प्रश्न खड़ा किए, पूरी मासूमियत और स्वाभाविकता से आकर शामिल हो जाती हैं, हम देख भी नहीं पाते कि उन्होंने हमारे साथ क्या किया, कृष्ण कुमार अक्सर इन्हीं चीज़ों की आवाजाही को पकड़ते हैं, और एक ऐसी सुथरी, संयत, पारदर्शी और अभिव्यक्तिशील भाषा में उन्हें अंकित करते हैं कि फ़ौरन ही उनसे सहमत न हो पाने की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
कृष्ण कुमार विख्यात शिक्षाशास्त्री और समकालीन भारतीय समाज के ‘कैलाइडोस्कोप’ को गहरी और विश्वसनीय संलग्नता, और उतनी ही वस्तुनिष्ठता के साथ देखनेवाले गद्यकार हैं। इस पुस्तक में सम्मिलित हर आलेख उनकी चिन्ता और सरोकार की इन विशेषताओं का साक्षी है। प्रकृति, नगर, राज्यसत्ता और व्यापार जगत से लेकर उनकी दृष्टि तितलियों, खिलौनों, साइकिलों, कारों और तरह–तरह के काम करते लोगों तक जाती है। और हर जगह जहाँ वे देखते हैं, चीज़ें अपनी सम्पृक्ति और अलगाव, दोनों के साथ हमें पूरी–पूरी दिखाई देती हैं। उनका बहुपरतीय सत्य, उनके होने के सीधे और टेढ़े अभिप्राय, सब हमारे सामने खुल जाते हैं।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनिवार्य है जो अपने सामाजिक होने को एक दिशा देना चाहते हैं, और उनके लिए भी जिन्होंने काफ़ी समय से किसी उम्दा गद्य को नहीं पढ़ा।
School Ki Hindi
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कृष्ण कुमार का यह नया निबन्ध-चयन उनके शैक्षिक लेखन को एक वृहत्तर सांस्कृतिक सन्दर्भ देता है। बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल यहाँ बीसवीं सदी के अन्तिम वर्षों में बदलती-बनती नागरिक संस्कृति की परिधि में की गई है। खिलौनों और पाठ्य-पुस्तकों की भाषा से लेकर धार्मिक अलगाववाद की राजनीति और सामाजिक विषमता तक एक लम्बी प्रश्न-शृंखला है, जिसमें कृष्ण कुमार अपनी सुपरिचित चिन्ताएँ पिरोते हैं। इन चिन्ताओं में साहित्य की परख, स्त्री की असुरक्षा और भाषा के भविष्य जैसे विविध प्रसंग शामिल हैं। अपनी व्यंजनापरक शैली और चीज़ों को रुककर देखने की ज़िद से कृष्ण कुमार ने एक बड़ा पाठक-वृत्त बनाया है। अध्यापन और लेखन के बीच कृष्ण कुमार एक व्यक्तिगत पुल बनाने में सफल हुए हैं। यह पुल उनके शैक्षिक सरोकारों को खोजी यात्राओं पर ले जाता है और उनके पाठकों को स्कूल की चारदीवारी और बच्चों के मनोजगत में प्रवेश कराता है।
Ek Kahani
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla +1
- Book Type:

- Description:
मैंने आकाश की तरफ़, चाबी का गुच्छा उछाला तो आसमान खुल गया ज़रूर मेरी कोई चाबी आसमान में लगती है। ~ धूप थी। और मैदान में उड़ती चीलों की परछाई थी। हम तैयार थे। सावधान होकर पास-पास खड़े थे।माधव ने एक, दो, तीन कहा। हम परछाई के पीछे दौड़ पड़े।
Wah Photo Kisne Khinchi
- Author Name:
Nandita da Cunha +1
- Book Type:

- Description:
नंदिता की कहानी भारत के सबसे प्रसिद्ध फोटोग्राफर, होमाई व्यारवाला के जीवन का जश्न मनाती है। होमाई का साहस और शिल्प कौशल पुस्तक में खूबसूरती से सामने आता है। प्रिया कुरियन के चित्रण होमाई की कार्यशैली को इतनी सटीकता से बनाए रखते हैं कि कभी-कभी ऐसा लगता है मानो होमाई ने ही पुस्तक का चित्रण किया हो। शिल्प और जीवन के बीच निरंतर बदलाव पाठकों को रंगमंच की जीवंतता की याद दिलाता है। किताब हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।
Zamin Humko Ghumati Hai
- Author Name:
Gulzar +1
- Book Type:

- Description:
मैं कलम से, एलन रंगों से और सुशील काग़ज़ के खिलौने बनाकर बच्चों को बहला रहे थे। जब क्लास ख़त्म हुई तो देखा बच्चे रंग, कलम और काग़ज़ के खिलौने से हमें बहला रहे थे। ~गुलज़ार
Gyarah Rupye Ka Fountain Pen
- Author Name:
Amit Dutta +1
- Book Type:

- Description:
अमित दत्ता की कहानियों का संग्रह सभी पाठकों को पसंद आएगा। ये कहानियां हैं बचपन की, प्यार की, फिल्मों की. इनमें से प्रत्येक कहानी पाठक को बांधे रखती है। तपोशी घोषाल के चित्र इस पुस्तक को एक आकर्षक दृश्य बनाते हैं। चित्रों में रंगों और विवरणों का प्रयोग समृद्ध है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
4.5 out of 5
Book