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कृष्ण बलदेव वैद हमारे वरिष्ठ लेखकों में बिरले हैं जिन्होंने साहित्य की अनौपचारिक विधाओं जैसे—डायरी, पत्र और संवाद में निरन्तर नवाचार किया है। इनमें उनकी बेबाकी, साफगोई, आत्मालोचन, विडम्बना-बोध आदि सब ज़ाहिर होते हैं। यह लम्बा संवाद उसी सिलसिले में है। जीवन और साहित्य दोनों को लम्बे समय से साधने की कोशिश में लगे वैद के अनुभव और विचार का रेंज बहुत व्यापक है और वे अपने समय, समाज, अध्ययन, लेखन, मित्रों, साहित्यिक और सांस्कृतिक स्थिति और तनावों आदि पर जो कहते हैं, वह एक साथ उन्हें समझने और हमारे समय में लेखक की स्थिति और विडम्बना को समझने में हमारी मदद करता है। इस लम्बे संवाद को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। — अशोक वाजपेयी
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About the Book
कृष्ण बलदेव वैद हमारे वरिष्ठ लेखकों में बिरले हैं जिन्होंने साहित्य की अनौपचारिक विधाओं जैसे—डायरी, पत्र और संवाद में निरन्तर नवाचार किया है। इनमें उनकी बेबाकी, साफगोई, आत्मालोचन, विडम्बना-बोध आदि सब ज़ाहिर होते हैं। यह लम्बा संवाद उसी सिलसिले में है। जीवन और साहित्य दोनों को लम्बे समय से साधने की कोशिश में लगे वैद के अनुभव और विचार का रेंज बहुत व्यापक है और वे अपने समय, समाज, अध्ययन, लेखन, मित्रों, साहित्यिक और सांस्कृतिक स्थिति और तनावों आदि पर जो कहते हैं, वह एक साथ उन्हें समझने और हमारे समय में लेखक की स्थिति और विडम्बना को समझने में हमारी मदद करता है। इस लम्बे संवाद को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
— अशोक वाजपेयी
Book Details
-
ISBN9789388183949
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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ज्ञानिनामाग्रगण्य सकल गुणनिधान कपिप्रवर हनुमान के बारे में कौन नहीं जानता? अद्वितीय प्रतिभा और अतुलित बल के कुबेर होते हुए भी उन्होंने स्वार्थ के लिए उसका उपयोग कभी नहीं किया। साधारण मनुष्य में यदि विद्या, गुण या कौशल आदि थोड़े से गुण भी आ जाएँ, तो वह दर्प से चूर हो जाता है, परंतु हनुमान सर्वगुण-संपन्न होकर भी सेवक ही बने रहे। प्रस्तुत पुस्तक ‘हनुमानगाथा’ में संकट-मोचक हनुमान के संपूर्ण जीवन को रामायण, रामचरितमानस आदि ग्रंथों के परिप्रेक्ष्य में आत्मकथात्मक शैली में पवनपुत्र के श्रीमुख से विवेचन हुआ है। हनुमान का चरित्र अलौकिक गुणों से संपन्न असंभव को संभव बनानेवाला है। आज के भौतिकवादी संसार में हनुमान के पावनचरित को अपनाए जाने की महती आवश्यकता है। वर्तमान में संसार को सेवा और भक्ति की पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है। इसके लिए सबसे बड़े आदर्श और प्रेरणास्रोत हनुमान ही हो सकते हैं। इस नाते परोपकारी हनुमान का चरित अनुकरणीय है। सुधी पाठक हनुमान के पावन गुणों को आत्मसात् कर घोर कष्टों और अशांति से निजात पाएँ, इसी में इस पुस्तक के लेखन की सफलता है।
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