Sahela Re
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भारतीय संगीत का एक दौर रहा है जब संगीत के प्रस्तोता नहीं, साधक हुआ करते थे। वे अपने लिए गाते थे और सुननेवाले उनके स्वरों को प्रसाद की तरह ग्रहण करते थे। ऐसा नहीं कि आज के गायकों-कलाकारों की तरह वे सेलेब्रिटी नहीं थे, वे शायद उससे भी ज़्यादा कुछ थे, लेकिन कुरुचि के आक्रमणों से वे इतनी दूर हुआ करते थे जैसे पापाचारी देहधारियों से दूर कहीं देवता रहें। बाज़ार के इशारों पर न उनके अपने पैमाने झुकते थे, न उनकी वह स्वर-शुचिता जिसे वे अपने लिए तय करते थे। उनका बाज़ार भी गलियों-कूचों में फैला आज-सा सीमाहीन बाज़ार नहीं था, वह सुरुचि का एक क़िला था जिसमें अच्छे कानवाले ही प्रवेश पा सकते थे।</p> <p>मृणाल पाण्डे का यह उपन्यास टुकड़ों-टुकड़ों में उसी दुनिया का एक पूरा चित्र खींचता है। केन्द्र में हैं पहाड़ पर अंग्रेज़ बाप से जन्मी अंजलिबाई और उसकी माँ हीरा। दोनों अपने वक़्तों की बड़ी और मशहूर गानेवालियाँ। न सिर्फ़ गानेवालियाँ बल्कि ख़ूबसूरती और सभ्याचार में अपनी मिसाल आप। पहाड़ की बेटी हीरा एक अंग्रेज़ अफ़सर एडवर्ड के. हिवेट की नज़र को भायी तो उसने उस समय के अंग्रेज़ अफ़सरों की अपनी ताक़त का इस्तेमाल करते हुए उसे अपने घर बिठा लिया और एक बेटी को जन्म दिया, नाम रखा विक्टोरिया मसीह। हिवेट की लाश एक दिन जंगलों में पाई गई और नाज़-नखरों में पल रही विक्टोरिया अनाथ हो गई। शरण मिली बनारस में जो संगीत का और संगीत के पारखियों का गढ़ था।</p> <p>लेकिन यह कहानी उपन्यासकार को कहीं लिखी हुई नहीं मिली, इसे उसने अपने उद्यम से, यात्राएँ करके, लोगों से मिलकर, बातें करके, यहाँ-वहाँ बिखरी लिखित-मौखिक जानकारियों को इकट्ठा करके पूरा किया है। इस तरह पत्र-शैली में लिखा गया यह उपन्यास कुछ-कुछ जासूसी उपन्यास जैसा सुख भी देता है।</p> <p>मृणाल पाण्डे अंग्रेज़ी में भी लिखती हैं और हिन्दी में भी। इस उपन्यास में उन्होंने जिस गद्य को सम्भव किया है, वह अनूठा है। वह सिर्फ़ कहानी नहीं कहता, अपना पक्ष भी रखता चलता है और विपक्ष की पहचान करके उसे धराशायी भी करता है। इस कथा को पढ़कर संगीत के एक स्वर्ण-काल की स्मृति उदास करती है और जहाँ खड़े होकर कथाकार यह कहानी बताती हैं, वहाँ से उस वक़्त से कोफ़्त भी होती है जिसके चलते यह सब हुआ, या होता है।
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भारतीय संगीत का एक दौर रहा है जब संगीत के प्रस्तोता नहीं, साधक हुआ करते थे। वे अपने लिए गाते थे और सुननेवाले उनके स्वरों को प्रसाद की तरह ग्रहण करते थे। ऐसा नहीं कि आज के गायकों-कलाकारों की तरह वे सेलेब्रिटी नहीं थे, वे शायद उससे भी ज़्यादा कुछ थे, लेकिन कुरुचि के आक्रमणों से वे इतनी दूर हुआ करते थे जैसे पापाचारी देहधारियों से दूर कहीं देवता रहें। बाज़ार के इशारों पर न उनके अपने पैमाने झुकते थे, न उनकी वह स्वर-शुचिता जिसे वे अपने लिए तय करते थे। उनका बाज़ार भी गलियों-कूचों में फैला आज-सा सीमाहीन बाज़ार नहीं था, वह सुरुचि का एक क़िला था जिसमें अच्छे कानवाले ही प्रवेश पा सकते थे।</p>
<p>मृणाल पाण्डे का यह उपन्यास टुकड़ों-टुकड़ों में उसी दुनिया का एक पूरा चित्र खींचता है। केन्द्र में हैं पहाड़ पर अंग्रेज़ बाप से जन्मी अंजलिबाई और उसकी माँ हीरा। दोनों अपने वक़्तों की बड़ी और मशहूर गानेवालियाँ। न सिर्फ़ गानेवालियाँ बल्कि ख़ूबसूरती और सभ्याचार में अपनी मिसाल आप। पहाड़ की बेटी हीरा एक अंग्रेज़ अफ़सर एडवर्ड के. हिवेट की नज़र को भायी तो उसने उस समय के अंग्रेज़ अफ़सरों की अपनी ताक़त का इस्तेमाल करते हुए उसे अपने घर बिठा लिया और एक बेटी को जन्म दिया, नाम रखा विक्टोरिया मसीह। हिवेट की लाश एक दिन जंगलों में पाई गई और नाज़-नखरों में पल रही विक्टोरिया अनाथ हो गई। शरण मिली बनारस में जो संगीत का और संगीत के पारखियों का गढ़ था।</p>
<p>लेकिन यह कहानी उपन्यासकार को कहीं लिखी हुई नहीं मिली, इसे उसने अपने उद्यम से, यात्राएँ करके, लोगों से मिलकर, बातें करके, यहाँ-वहाँ बिखरी लिखित-मौखिक जानकारियों को इकट्ठा करके पूरा किया है। इस तरह पत्र-शैली में लिखा गया यह उपन्यास कुछ-कुछ जासूसी उपन्यास जैसा सुख भी देता है।</p>
<p>मृणाल पाण्डे अंग्रेज़ी में भी लिखती हैं और हिन्दी में भी। इस उपन्यास में उन्होंने जिस गद्य को सम्भव किया है, वह अनूठा है। वह सिर्फ़ कहानी नहीं कहता, अपना पक्ष भी रखता चलता है और विपक्ष की पहचान करके उसे धराशायी भी करता है। इस कथा को पढ़कर संगीत के एक स्वर्ण-काल की स्मृति उदास करती है और जहाँ खड़े होकर कथाकार यह कहानी बताती हैं, वहाँ से उस वक़्त से कोफ़्त भी होती है जिसके चलते यह सब हुआ, या होता है।
Book Details
-
ISBN9788183618540
-
Pages198
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: Meera is from a middle-class family in Meerut. As a kid, she has always dreamt of becoming an actress and nothing else. After a rigorous struggle of three years in Mumbai, her dream came true when she got cast as the lead of a television show. Her show is an instant hit with highest TRP making her a household name within a few months. There is a twist in her fairy tale that not only threw her out of the industry but also ruined her career. With no godfather in the industry and no money, she was forced to choose one of the two options either to commit suicide or to work as a commoner. With support from her best friend and sister Misha, she chooses the latter. This story documents her journey to find her foothold as a commoner. She discovered that life is not about chasing your dreams, sometimes it could be about finding them. Br>'meera's story is relatable to people from all walks of life. Her story has a message that even in the darkest of times you will find a Ray of light if you are searching for.
Pipal Tole Ke Launde
- Author Name:
Ishan Trivedi
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- Description: एक छोटे-से गाँव का छोटा-सा बैंक है। बस सौ-डेढ़ सौ खाते ही खुले होंगे वहाँ। लेकिन हर महीने की तीसरी तारीख़ को पास ही के एक हाइवे के तीन बड़े कारख़ानों से बहुत सारा पैसा आके यहाँ जमा होता है। सिर्फ़ तीन घंटों के लिए। और इन तीन घंटों में जो होता है उसके पीछे कुछ मील दूर बसे एक क़स्बे की बीस साल लम्बी दास्तान है। वह दास्तान जिसमें बलखाती, उबाल-भरी प्रेम कहानियाँ हैं। वह दास्तान जिसमें बदलती दुनिया के साथ भागते-हाँफते क़स्बाई सपनों का बेमानीपन है। वह दास्तान जहाँ ज़िन्दगी के ख़ालीपन को भरने के लिए रास्ते भी ऐसे चुने जाते हैं जो कहीं नहीं ले जाते। वह दास्तान पीपलटोले के उन तीन लड़कों की है जिनकी आँखों पे ज़िन्दगी ने ऐसा चश्मा चढ़ा दिया है कि उन्हें अपने चारों तरफ़ सब कुछ बस ग़लत होता दिखाई दे रहा है। आगे वही है जो लूट रहा है, तो हम भी क्यों ना लूटें? बैंक डकैती की एक घटना को लेकर लिखी गई यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है। उन अजीब-सी प्रेम कहानियों में भी कल्पना कम है, यथार्थ ज़्यादा जो इसके साथ आप पढ़ेंगे। थोड़े सड़कछाप अन्दाज़ में रुहेलखंडी धज के सा
What I Lived For
- Author Name:
Diya Vyas
- Book Type:

- Description: Neil, a rural boy, grew up in a village growing fast. His obsession with badminton lands him up in the big city of Lucknow. He dreams of winning the world one day, but is he dreaming too much? Ahilya, a player herself, knows that money is essential to survive. And, Sports don’t fetch much money. Is she too practical? Two opposites, how do they fall in love? Dhaani, who is she of the two? Dreamy or practical? Fourteen years younger, how will she change Neil's life? Can Neil win over his lost friends, love and career, or will he lose all three bets? Let Neil truly whisper in your ear what he lived for!
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