Best Manager
(0)
Author:
Arjun ThiagarajPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction₹
177
₹ 150.45 (15% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
If you consider the past as one's Eligibility, every one of us sitting here is good for nothing" When it comes to relationships, which quality do you look for?? Beauty? Wealth? Fame? Being together, thinking of your partner each moment, late night chat, spying on them, sex, conflict with your parents, that courageous decision to leave your respective houses... Love may not always be about the usual scenes mentioned above... Love can wait, love can accept the faults, passion can uphold your morale and moral values in your life, and love can change even the custom in a society... The story of Sree Venugopal and veena started during a competition ’best manager' and extended to the most significant competition human have ever played... The life. Were they the best managers???.
Read moreAbout the Book
If you consider the past as one's Eligibility, every one of us sitting here is good for nothing" When it comes to relationships, which quality do you look for?? Beauty? Wealth? Fame? Being together, thinking of your partner each moment, late night chat, spying on them, sex, conflict with your parents, that courageous decision to leave your respective houses... Love may not always be about the usual scenes mentioned above... Love can wait, love can accept the faults, passion can uphold your morale and moral values in your life, and love can change even the custom in a society... The story of Sree Venugopal and veena started during a competition ’best manager' and extended to the most significant competition human have ever played... The life. Were they the best managers???.
Book Details
-
ISBN9789385137648
-
Pages142
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
In Love With Shah Rukh Khan
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: Everyone has a dream. It’s just that some dreams get fulfilled, and others remain confined in hearts. In love with Shah Rukh Khan by Ajitabha Bose.
Anbita Vyatit
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description: ''देखिए मैं आपकी पत्नी ज़रूर हूँ लेकिन मैं एक औरत भी हूँ…जिस दुनिया में आप रहते हैं, वह भी सही है और जिस दुनिया में मैं रह सकती हूँ? वह भी सही है...मेरा शरीर सन्तृप्त होता रहे और मेरा मन मृत होता रहे, यह मुझे आपके साथ बहुत दूर तक नहीं ले जा सकता...मैं जानती हूँ? पंछियों के केमिकल से युक्त भूसा-भरे शरीरों के करोड़ों रुपए के बिजनेस को छोड़ना या बन्द करना आपके लिए मुमकिन नहीं होगा...लेकिन मेरे लिए यह मुमकिन होगा कि मैं मुर्दों की इस दुनिया से बाहर चली जाऊँ।'' (इसी उपन्यास से) 1947 के बाद सामन्ती युग का पतन, पर्यावरण, पक्षियों से प्रेम तथा सहज मानवीय कोमल सम्बन्धों की यह कहानी बरबस ही आपको अपनी ओर आकर्षित कर लेगी।
Kankal (Raj)
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hum Na Marab
- Author Name:
Gyan Chaturvedi
- Book Type:

- Description: हर बड़ा लेखक, अपने ‘सृजनात्मक जीवन’ में, जिन तीन सच्चाइयों से अनिवार्यतः भिड़न्त लेता है, वे हैं—‘ईश्वर’, ‘काल’ तथा ‘मृत्यु’। अलबत्ता, कहा जाना चाहिए कि इनमें भिड़े बग़ैर कोई लेखक बड़ा भी हो सकता है, इस बात में सन्देह है। कहने की ज़रूरत नहीं कि ज्ञान चतुर्वेदी ने अपने रचनात्मक जीवन के तीस से अधिक वर्षों में, ‘उत्कृष्टता की निरन्तरता’ को जिस तरह अपने लेखन में एकमात्र अभीष्ट बनाकर रखा, कदाचित् इसी प्रतिज्ञा ने उन्हें, हमारे समय के बड़े लेखकों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है। ‘हम न मरब’ में उन्होंने ‘मृत्यु’ को रचना के ‘प्रतिपाद्य’ के रूप में रखकर, उससे भिड़ंत ली है। ‘नश्वर’ और ‘अनश्वर’ के द्वैत ने दर्शन और अध्यात्म में, अपने ढंग से चुनौतियों का सामना किया; लेकिन ‘रचनात्मक साहित्य’ में इससे जूझने की प्रविधि नितान्त भिन्न होती है और वही लेखक के सृजन-सामर्थ्य का प्रमाणीकरण भी बनती है। ज्ञान चतुर्वेदी के सन्दर्भ में, यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि वे अपने गल्प-युक्ति से ‘मृत्युबोध’ के ‘केआस’ को जिस आत्म-सजग शिल्प-दक्षता के साथ ‘एस्थेटिक’ में बदलते हैं, यही विशिष्टता उन्हें हमारे समय के अन्यतम लेखकों के बीच ले जाकर खड़ा कर देती है।
Patiya
- Author Name:
Kedarnath Agrawal
- Book Type:

-
Description:
‘पतिया’ यशस्वी कवि केदारनाथ अग्रवाल का उपन्यास है। अब तक अनुपलब्ध होने के कारण केदार-साहित्य के सहृदय पाठक और आलोचक इस उल्लेखनीय कृति से वंचित रहे। उनके लिए वस्तुत: ‘पतिया’ एक अनमोल उपहार है।
हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श की औपचारिक रूप से चर्चा प्रारम्भ होने से बहुत पहले रची गई कृति ‘पतिया’ में स्त्री-जीवन की जाने कितनी विडम्बनाएँ चित्रित हो चुकी थीं। परिवार, दाम्पत्य, यौन स्वातंत्र्य, शोषण और अलगाव आदि से जुड़े प्रसंगों के छायाचित्र ‘पतिया’ को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। उपन्यास की नायिका का जीवन-संघर्ष स्वयं बहुत कुछ कहता है। स्त्री समलैंगिकता की स्थितियाँ भी प्रस्तुत उपन्यास में हैं। इससे सिद्ध होता है कि कोई भी प्रवृत्ति या घटना सामाजिक स्थिति और व्यक्तिगत मन:स्थिति का संयुक्त परिणाम होती है।
इस उपन्यास का गद्य विशिष्ट है...एक कवि का गद्य। छोटे-छोटे वाक्य। बिम्ब, प्रतीक समृद्ध भाषा। संवेदनशील और प्रवाहपूर्ण। यथार्थवादी गद्य का उदाहरण। पतिया की ननद मोहिनी का यह चित्र कितना व्यंजक है, “मैली-सी चौड़े किनारे की धोती पहिने है। हाथ और पैरों में चाँदी के गहने खनक रहे हैं। धोती का पल्ला सिर से उतरकर गरदन पर आ गया है। पीछे से एक बड़ा-सा जूड़ा उठा दिखता है। जूड़ा गोल घेरे में बँधा है। सामने से देखने पर सिर में सिन्दूर भरी चौड़ी-सी माँग दिखती है। कानों में तरकियाँ, नाक में पीतल की फुल्ली और गले में रंगीन काँच और मूँगे के दानों से बनी दुलरी पड़ी है। बड़ी-बड़ी आँखों में काजल खिंचा है। दाहिनी ओर गाल पर एक तिल है। चेहरे पर तेल की चिकनाहट जवानी को चमका रही है। कोई कुरती या सलूका नहीं पहने है। बर्तन माँजते वक़्त, उसके दोनों उरोज, छलक पड़ते हैं। रंग ज़्यादा गोरा नहीं, पर साँवले से कुछ निखरा हुआ है।
Katha Viraat
- Author Name:
Sudhakar Adeeb
- Book Type:

-
Description:
भारत का स्वाधीनता आन्दोलन जिस प्रकार से लड़ा गया उसमें आए अनेक उतार-चढ़ाव और संघर्ष हमें प्राचीन ‘महाभारत’ की याद दिलाते हैं। ‘कथा विराट’ के 18 अध्यायों में भारतीयों द्वारा अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़े गए आधुनिक महाभारत की वृहद् कथा बेहद दिलचस्प और तथ्यपरक ढंग से शृंखलाबद्ध है। यह सन् 1915 से 1950 तक के 35 वर्षों के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण का एक सजीव इतिहास है।
महात्मा गांधी तो इस युग की आत्मा थे, किन्तु इस कथाकृति के महानायक हैं राष्ट्र-निर्माता सरदार पटेल। यह उपन्यास सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा वर्तमान के एकीकरण के लिए किए गए भगीरथ प्रयत्नों को समझने की एक दुर्लभ कुंजी भी है।
Nanya
- Author Name:
Prabhu Joshi
- Book Type:

-
Description:
प्रभु जोशी, हिन्दी गल्प जगत् के ऐसे अनूठे कथा-नागरिक हैं, जो सूक्ष्मतम संवेदनाओं के रेशों से ही, विचार और संवेदना के वैभव का वितान रचते हैं, जिसमें रचना का स्थापत्य, अपने परिसर में, समय के भूगोल को चतुर्दिक् घेर लेता है। यही वजह है कि उनकी लम्बी और औपन्यासिक आभ्यन्तर वाली लगभग सभी कथा-रचनाएँ, वर्गीकृत सामाजिकता के अन्तर्विरोधों के दारुण दु:खों को अपने कथ्य का केन्द्रीय-सूत्र बनाकर चलती आई हैं।
प्रस्तुत कथा-कृति ‘नान्या’, औपनिवेशिक समय के विकास-वंचित अंचल के छोटे से गाँव में एक अबोध बालक के ‘मनस के मर्मान्तक मानचित्र’ को अपना अभीष्ट बनाती हुई, भाषा के नाकाफ़ीपन में भी अभिव्यक्ति का ऐसा नैसर्गिक मुहावरा गढ़ती है कि भाषा के नागर-रूप में, तमाम ‘तद्भव’ शब्द अपने अभिप्रायों को उसी अनूठेपन के साथ रखने के लिए राज़ी हो जाते हैं, जो लोकभाषा की एक विशिष्ट भंगिमा रही है। कहने कि ज़रूरत नहीं कि हिन्दी गद्य में, मालवांचल की भाषिक सम्पदा से पाठकों का परिचय करानेवाले प्रभु जोशी निर्विवाद रूप से पहले कथाकार रहे हैं, जिनकी ग्राम-कथाओं के ज़रिए पाठकों ने सत्तर के दशक के पूर्वार्द्ध में इस क्षेत्र के यथार्थ को उसकी समूची जटिलता के साथ जाना। जबकि इस अंचल से आनेवाले पूर्ववर्तियों से यह छूटता रहा था।
अबोधता के इस अकाल समय में ‘नान्या’ की यह दारुण कथा जिस गल्पयुक्ति से चित्रित की गई है, उसमें प्रभु जोशी का कुशल गद्यकार, दृश्य-भाषा से रची गई कथा-अन्विति को, पर्त-दर-पर्त इतनी घनीभूत बनाता है कि पूरी रचना में कथा-सौष्ठव और औत्सुक्य की तीव्रता कहीं क्षीण नहीं होती। कहना न होगा कि यह हिन्दी गल्प की पहली ऐसी कृति है, जिसमें बाल-कथानायक के सोचने की भाषा के सम्भव मुहावरे में, इतना बड़ा आभ्यन्तर रचा गया है। इसमें उसकी आशा-निराशा, सुख-दु:ख, संवेदना के परिपूर्ण विचलन के साथ बखान में उत्कीर्ण हैं, जहाँ लोक-स्मृति का आश्रय, पात्र की बाल-सुलभ अबोधता को, और-और प्रामाणिक भी बनाता है। कहानी में यह वह समय है, जबकि नगर और ग्राम का द्वैत इतना दारुण नहीं था, और लोग ग्राम से पलायन में जड़-विहीन हो जाने का भय अनुभव करते थे। कथा में एक स्थल पर दादी की कथनोक्ति में यह सामाजिक सत्य जड़ों से नाथे रखने के लिए तर्क पोषित रूप में व्यक्त भी होता है कि ‘जब कुण्डी में पाणी, कोठी में नाज, ग्वाड़ा में गाय, और हाथ में हरकत-बरकत होय तो, गाँव का कांकड़ छोड़ के हम सेरगाम क्यों जावाँ?’
बहरहाल, नान्या अपनी दादी और बड़े ‘बा’ के बीच ही मानसिक गठन की प्रश्नाकुलता से भिड़ता हुआ, यक़ीनों की विचित्र और उलझी हुई गाँठों में, और-और उलझता हुआ, हमें रुडयार्ड किपलिंग, चेख़व और दॉस्तोयेव्स्की के बाल-पात्रों की त्रासदियों का पुनर्स्मरण कराता हुआ, करुणा और संवेदना की सार्वभौमिकता के वृत्त के निकट ला छोड़ता है। प्रभु जोशी के कथाकार की दक्षता इस बात में भी है कि ‘नैरेटर’ की उपस्थिति कलात्मक ढंग से ‘कैमोफ्लेज्ड’ कर दी गई है। नान्या की यह कथा, अपने भीतर के एकान्त में घटनेवाले आत्मसंवाद का रूप ग्रहण करती हुई इतनी पारदर्शी हो जाती है कि पाठक एक अबोध की त्रासदी के पास निस्सहाय-सा, व्यथा के वलय में खड़ा रह जाता है। कथा, काल-कीलित होते हुए भी, सार्वभौमिक सत्य की तरह हमारे समक्ष बहुत सारे मर्मभेदी प्रश्न छोड़ जाती है। विस्मय तो यह तथ्य भी पैदा करता है कि कथाकृति, काल के इतने बड़े अन्तराल को फलाँग कर, साहित्य के समकाल से होड़ लेती हुई अपनी अद्वितीयता का साक्ष्य रखती है।
Mahamoh : Ahilya Ki Jivani
- Author Name:
Pratibha Rai
- Book Type:

-
Description:
यदि अहल्या ‘सौन्दर्य’ का प्रतीक है, इन्द्र ‘भोग’ का; गौतम ‘अहं’ का प्रतीक है तो राम ‘त्याग’ एवं ‘भाव’ के प्रतीक हैं। सौन्दर्य का केवल स्थूल रूप ही नहीं होता—सूक्ष्म तत्त्व भी होता है। सौन्दर्य का तत्त्व न समझ पाने पर सौन्दर्य और सौन्दर्यग्राही दोनों ही सौन्दर्य का खंडित रूप ही देख पाते हैं। सौन्दर्य मोह पैदा करता है, और मोहभंग भी करता है। इन्द्र का रूप मोह उत्पन्न करता है, जबकि राम के रूप ने अहल्या का मोहभंग किया है। मोह और मोहभंग के उतार-चढ़ाव के बीच आत्ममुग्धा अहल्या स्वयं ही बन गईं मोह का कारण और स्वयं ही मोह का लक्ष्य। इन्द्र मोह ने अहल्या को पाप की ओर प्रेरित किया था, जबकि राम-भाव ने प्रेरित किया था—मोक्ष की ओर। पाप से मोक्ष तक के उत्तरण पथ पर गौतम थे एक दंडाधिकारी प्रशासक मात्र। अहल्या की प्रेमाकांक्षा का रामाकांक्षा में बदल जाना ही अहल्या की तपस्या और मोक्ष है।
युगों से परे ‘महामोह’ है इन्द्र, गौतम और अहल्या के मोह एवं मोहभंग का आख्यान—भ्रान्ति और उत्थान की आख्यायिका।
Mahim Mein Qatla
- Author Name:
Jerry Pinto
- Book Type:

- Description: फ़िक्की बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड के लिए अन्तिम सूची में चयनित उपन्यास मातुंगा रोड रेलवे स्टेशन के टॉयलेट में एक नौजवान की लाश मिलती है। उसका पेट पूरी तरह फटा हुआ है। रिटायर्ड पत्रकार पीटर फ़र्नांडीज़ अपने दोस्त इंस्पेक्टर जेंडे के साथ इस हत्या की जाँच में शामिल हो जाता है, और उसके सामने एक ऐसी दुनिया खुलती है जिसमें गुप्त कामनाएँ हैं, लालच है और निराशा है—एक ऐसी दुनिया जिसके बारे में उसको शक है कि उसका बेटा भी शामिल है। यह कहानी जितनी भय और समानुभूति के सहारे आगे बढ़ती है उतना ही उन मर्दों को जानने की इच्छा से जो दूसरे पुरुषों को चाहते हैं। पीटर हत्यारे तक पहुँचने की कोशिश करता है, रंगीनमिज़ाज लेस्ली सिकेरा के साथ, जो इस वैकल्पिक संसार में उसके लिए गाइड का काम करता है।
Ret Ki Machhali
- Author Name:
Kanta Bharti
- Book Type:

- Description: लेखक सम्पूर्ण जीवन को अपनी रचना का विषय बनाता है, रचता है। ऐसे लेखक को फिर अपनी रचना का विषय बनाना एक विशेष प्रकार के अनुभव और संवेदनशीलता की अपेक्षा रखता है। कान्ता भारती ने अपने इस उपन्यास ‘रेत की मछली’ में लेखकीय जीवन और उसके निकट परिवेश को मानवीय सन्दर्भों में रचने का प्रयास किया है। विदेशी साहित्यों में इस प्रकार की कई औपन्यासिक कृतियाँ प्रसिद्ध हुई हैं; हिन्दी में यह अनुभव-क्षेत्र अभी नया है, और विशेष सम्भावनाओं से संयुक्त है। कान्ता की यह कथा-कृति अपने ब्यौरों में कहीं निर्मम है तो कहीं सहानुभूतिपूर्ण भी, और इस मायने में जीवन के सही अनुपात को साधती है। पाठक यहाँ रचना की पृष्ठभूमि को रचना के रूप में पाकर एक नए अनुभव-संसार में प्रवेश करता है, जहाँ उसके लिए बहुत-सी उपलब्धियाँ सम्भव हैं।
Thodi Mohabbat Thodi Yaariyan
- Author Name:
Amit Patel
- Book Type:

- Description: ये कहानी 3 दोस्तों की है, जो उनके उम्र बढ़ने दिलचस्प मोड़ लेती है।इसमें थोड़ी दोस्ती है,थोडा सा प्यार है,थोड़ी सी तकरार भी है,तो थोड़ी सी याद भी। एक घटना ने कैसे उनकी ज़िन्दगी पूरी तरह बदल दी ये इस कित्ताब में दिखाया गया के शुरुआत केे कुछ पन्ने ही आपको पढ़ने को मजबूर कर देँगे।
Mitro Marjani
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
रघुवीर सहाय की पंक्ति है—जिसका भाव है कि इस दुनिया के सिर पर अँधेरे में अगर मैं एक डंडा मारूँ तो यह किस भाषा में चीखेगी? मित्रो इस कहानी में संयुक्त परिवार की भीरु आत्मतुष्ट दुनिया के सिर पर पड़नेवाले डंडे की चोट है।
चरित्र की दृष्टि से मित्रो हिन्दी कहानी की अभूतपूर्व पात्र है। इस गृहस्थी में पता नहीं कहाँ से टपक पड़ी है, उसने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसा सजीव, सदेह पात्र किसी परिवार को तोड़ देता, पति को पागल कर देता, हत्या हो जाती। लेकिन मित्रो को ऐसे धर्मभीरु, मध्यवर्गीय, परिवार में डालकर कृष्णा सोबती ने बेलौस टक्कर की योजना की है। यह टक्कर बहुत तेज़ है लेकिन ख़तम नहीं होती। विरोधी स्थितियाँ पूरी कथा-अवधि में सक्रिय रहती हैं अनेक दाँव-पेंच करती हुई। पूरी कहानी इस टक्कर से स्पन्दित है।
मित्रो इसलिए भी अभूतपूर्व है कि बहुत सहज है। यह अभूतपूर्वता असामान्यता नहीं, वास्तविकता से उपजी है। मित्रो जैसे व्यक्ति समाज में थे, उन्हें साहित्य में नहीं लाया गया था—हिन्दी कहानी में नहीं लाया गया था। मित्रो कोई मनोविश्लेषणात्मक या असामान्य पात्र नहीं।
हिन्दी में उस जैसी स्त्री का प्रवेश पहली बार हुआ। कृष्णा सोबती ने ऐसे भरपूर पात्र को केन्द्र में रखकर यह कहानी लिखी, यह नई बात है। इसके लिए बहुत साहस, निर्ममता और ममता की ज़रूरत पड़ी होगी। यह सब बहुत-बहुत आत्मीय परिचय, पात्र से तादात्म्य के बिना सम्भव नहीं था।
—विश्वनाथ त्रिपाठी
कुछ कहानियाँ : कुछ विचार पुस्तक से
Mahabrahman
- Author Name:
Trilok Nath Pandey
- Book Type:

-
Description:
भारत के जाति-संजाल की अनूठी विवेचना करता है ‘महाब्राह्मण’। समाज के अब तक अनछुए रहे कई पहलुओं को बड़ी बेबाकी से उभारकर उनकी विडम्बनाओं और त्रासदियों पर प्रकाश डालती है इसकी कहानी।
भारतीय समाज सदियों से जातियों-उपजातियों की चक्की में लोगों को पीसता रहा है। जाति हमारे यहाँ ऊपरी आभासी समरसता के अन्तस्तल में अनिवार्य तत्त्व के रूप में सदैव सक्रिय रहती है और लोगों के निर्णयों और प्राथमिकताओं के निर्धारण में एक बड़ी भूमिका निभाती है। यही कारण है कि लोग मजबूरी में भी अपनी जाति-पहचान से चिपके रहते हैं।
इस उपन्यास का नायक मानवीयता की उदात्त डोर पकड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करता है, किन्तु कदम-कदम पर उसे अपमान और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति के शुभत्व में गहरी आस्था के सहारे नायक अपने संघर्ष की निरन्तरता बनाए रखता है, किन्तु प्राय: हर तरफ से बार-बार मिलती निराशा इसे आत्मघात की ओर धकेल देती है। उपन्यास के अन्य चरित्र मानव-जीवन की विभिन्न विचित्रताओं को चित्रित करते हैं जिससे इसका कथानक बहुआयामी और रोचक बन गया है।
उपन्यास के लेखक ने वर्षों तक निरन्तर शोध और फील्ड वर्क किया है। महाब्राह्मण समाज की गहराई में जाकर लेखक ने अनगिनत इंटरव्यू लिए और अनेक ऐसी विसंगतियों को देखा-समझा जिनके बारे में आमतौर पर हम बिलकुल नहीं जानते। यह पहली कृति है, जो जाति-संरचना के इस पक्ष को इतने अच्छे ढंग से न सिर्फ, चित्रित करती है बल्कि विश्लेषित भी करती है।
Akash Champa
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

-
Description:
क्या जीवन आकाश चम्पा है?
दो-दो बार वसन्त आता है इसमें, दो-दो बार खिलती हैं आकाश चम्पा की कलियाँ–जिन्दगी की तरह। एक बार जो जीवन जिया उसमें कितना कुछ जीने से रह गया, जिस-जिस मोड़ पर मुड़ना था, नहीं मुड़े, जहाँ पलटकर पीछे देखना था नहीं देखे, जहाँ ठहरना था, नहीं ठहरे। सो, आकाश चम्पा उन भूलों को सुधारती है, पहली बार जिन डालों में फूल नहीं आये होते, दूसरी बार उन डालों पर भी फूल खिलते हैं।
गहन अनुभूतियों की बारीक बुनावट से रचा गया संजीव का यह नवीनतम उपन्यास मनुष्य की इस आदिम आकांक्षा का ऐसा मार्मिक आख्यान है, जिसमें व्यक्ति-जीवन के कोण से इतिहास, नियति, रिश्ते और संघर्ष के उन तमाम सवालों की पड़ताल की गई है, जो हमारे समय के विमर्श के केन्द्र में हैं। इन अर्थों में यह उपन्यास महज आख्यान नहीं रह जाता, बल्कि अपने समय से एक दुर्धर्ष टकराहट के रूप में पृष्ठ-दर-पृष्ठ ध्वनित होता है। संजीव ने इस उपन्यास में अपने दिक्काल का ऐसा निर्मम विवर्तन किया है, जिसे अन्यत्र देख पाना कठिन है।
विवर्तन की प्रक्रिया में लेखक की नजर निरन्तर इतिहास के अन्दर विलम्बित और निलम्बित पड़े सवालों और इतिहास के बाहर छूटे हुए लोगों तक जाती है। सामाजिक अवक्षय ने भले ही मनुष्य को हताश कर दिया हो, पर इस स्थिति में भी उसके हृदय के कोने में यह आकांक्षा अपनी पंखुड़ियाँ खोलने से नहीं चूकती कि क्या भूलों का फिर से संशोधन हो सकता है? इस तरह संजीव नियति नहीं नियन्ता की कथा कहते हैं, उस नियन्ता मनुष्य की जिसने अपनी जिजीविषा को आत्मसंघर्ष की ताकत से मूर्त किया है और अपने मुक्तिस्वप्न को एक ही जीवन में दो बार सम्भव किया है। उपन्यास की आनुषंगिक उपलब्धि है एक वर्जित पर मार्मिक प्रेम प्रसंग, जिसकी स्निग्धता और सुरभि उपन्यास में एक नया आयाम जोड़ती है।
Bisaat : Teen Bahanen Teen Aakhyan
- Author Name:
Manjul Bhagat +1
- Book Type:

-
Description:
‘बिसात : तीन बहनें तीन आख्यान’ एक अनूठी कथा-कृति है। कथा-साहित्य में विख्यात मंजुल भगत, मृदुला गर्ग और अचला बंसल तीनों सगी बहनें हैं। मंजुल भगत अब हमारे बीच नहीं हैं। मृदुला गर्ग व अचला बंसल निरन्तर सक्रिय हैं। तीनों के लेखन की पृथक् पहचान होने के बावजूद कुछ सूत्र ऐसे हैं जिन पर साझा अनुभवों के विविध रंग दिख जाते हैं। मृदुला गर्ग के शब्दों में, ‘तीनों के काफ़ी अनुभव साझा रहे। ज़िन्दगी में कितने ऐसे किरदार थे, जिनसे तीनों का साबका पड़ा। कितने ऐसे हालात थे, जिनका तीनों ने नज़ारा किया! साझा अनुभवों, किरदारों और अहसास ने हमारे भावबोध को गढ़ा और अन्य अनुभवों की तरह, वे भी कभी-न-कभी, किसी-न-किसी रूप में हमारी रचना के आधार बने। रचना जब-जब हुई, निजी अहसास से गढ़ी, मौलिक थी। हर लेखक का नज़रिया अपना अलग था। फिर भी साझा अहसास और अनुभव की गूँज, उसमें साफ़ ध्वनित होती थी। कह सकते हैं, हमने एक ही विषय पर आधारित रचना की पर रचना के दौरान, रचनात्मकता के दबाव में, रचना ने अपना विषय, कुछ हद तक बदल लिया।’ इन तीनों बहनों के बीच नाना की उपस्थिति एक ऐसा ही बहुअर्थपूर्ण अनुभव था। इस अनुभव से तीन रचनाओं ने आकार लिया। मृदुला गर्ग ने ‘वंशज’ उपन्यास रचा। मंजुल भगत ने ‘बेगाने घर में’ और अचला बंसल ने ‘कैरम की गोटियाँ’ कहानियाँ लिखीं। तीनों रचनाओं में अलग-अलग तरह से महसूस किया गया यथार्थ रचनाकारों की निजता के साथ व्यक्त हुआ। ‘बिसात : तीन बहनें तीन आख्यान’
में वंशज, ‘बेगाने घर में’ और ‘कैरम की गोटियाँ’ एक साथ उपस्थित हैं। तीनों को एक साथ पढ़ना वस्तुतः प्रीतिकर और विचारोत्तेजक हैं। जैसे एक ही जीवन-सत्य के तीन आयाम।
Sange Sabur : Sahansheel Patthar
- Author Name:
Atiq Rahimi
- Book Type:

-
Description:
एक फ़ारसी लोककथा के अनुसार ‘संगे सबूर’ एक जादुई काला पत्थर होता है, जो मनुष्य के दु:खों को सुनता है, अपने भीतर समाता है, और जब भर जाता है तो फट पड़ता है। अपने भीतर जमा सारे दु:खों को वापस दुनिया के ऊपर पलट देता है और यही दुनिया का अन्त होता है।
ज़िहादी हिंसा से छिन्न-भिन्न किसी शहर में एक जर्जर घर है और गोलियों की आवाज़ों से हिलती-काँपती उसकी दीवारों के भीतर एक स्त्री अपने घायल पति को छिपाए बैठी है। पति की गर्दन में गोली लगी है और इस समय वह कोमा में है। जीवन और मृत्यु के बीच की इसी अचेतनावस्था में पत्थर की तरह पड़े अपने पति को वह स्त्री-जीवन में पहली बार वह सब सुना रही है जिसे कहने की इजाज़त न उसका धर्म उसे देता है, न समाज और न ही पुरुष वर्चस्व। तहेदिल और भरपूर स्नेह के साथ पति की तीमारदारी में जुटी वह स्त्री आज अपने तमाम सपनों, वंचनाओं, पापों और ग़ुस्से को शब्द देती है, अपने रहस्यों से पर्दा उठाती है, अपने दु:खों का हिसाब माँगती है और एक लोमहर्षक कथा बुनती है।
अफ़गानी मूल के फ़्रांसीसी लेखक अतिक् रहिमी इस उपन्यास में संसार की उन असंख्य औरतों की ज़ुबान को हरकत दे रहे हैं जो सदियों से ख़ामोश हैं और जिनके पास ऐसी जाने कितनी कहानियाँ अनकही पड़ी हुई हैं जो सामने आएँ तो पत्थरों के भी कलेजे बेसाख़्ता फट पड़ें।
Anawaran
- Author Name:
Ranjana Prakash
- Book Type:

- Description: रिश्तों को समझ पाने में अक्सर हम चूक जाते हैं। जब तक समझ में आता है, देर हो जाती है और वक़्त मुट्ठी में से रेत सा फिसल जाता है। उपन्यास की नायिका शुभी के जीवन में ऐसे ही अनेक उतार चढ़ाव आए, कभी थकी, कभी लड़खड़ाई, कभी गिरी भी, फिर भी कुछ तो था जिसने उसकी जिजीविषा को समाप्त होने से बचाए रखा, क्या कारण था जो उसने आत्म हत्या का विचार किया? क्या हुआ शुभी के जटिल जीवन का अंत? क्या शुभी की तलाश को पूर्णता प्राप्त हुई? क्या अंज़ाम हुआ शुभी के जीवन का, जानने के लिये पढ़ें ये उपन्यास - "अनावरण".
Deshdrohi
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
हमारे वर्तमान जीवन का यथार्थ क्या है? क्या ऐसे समय में भी मिथ्या-विश्वास और प्रवंचना की पिनक में सन्तुष्ट रह सकना सम्भव है? सौन्दर्य और तृप्ति की अभिलाषा उत्पन्न कर देना एक काम है। सौन्दर्य और तृप्ति की स्मृति जगा कर सुख की अनुभूति उत्पन्न कर देना भी काम है, परन्तु उससे बढ़कर काम हो सकता है, सौन्दर्य और तृप्ति के साधनों की उत्पादन और परिस्थिति के निर्माण के लिए भावना और संकेत द्वारा सहयोग देना।
साहित्य का कलाकार केवल चारण बनकर सौन्दर्य, पौरुष और तृप्ति की महिमा गाकर ही अपने सामाजिक कर्त्तव्य को पूरा नहीं कर सकता। विकास और पूर्णता के सामाजिक प्रयत्न की इच्छा और उत्साह उत्पन्न करना और उस उत्साह को विवेक और विश्लेषण की प्रवृत्ति द्वारा सजग और सचेत रखने की भावना जगाना, साहित्य के कलाकार का काम है।
Chhattisgarh Ke Vivekanand
- Author Name:
Kanak Tiwari
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक भारतीय मनीषा के अग्रणी उन्नायकों में से एक स्वामी विवेकानन्द विषयक इस पुस्तक का आधार उनके जीवन का वह समय है जो उन्होंने छत्तीसगढ़ की भूमि पर रायपुर में बिताया। उनकी ओजस्वी चेतना के जो स्फुलिंग 11 सितम्बर, 1893 को शिकागो में विस्फोटक ढंग से दुनिया के सामने आए, उनके कुछ बीज निश्चय ही किशोरावस्था के उन ढाई वर्षों में भी पड़े होंगे जब उन्नीसवीं सदी के छत्तीसगढ़ के अभावों का साक्षात्कार उनके आकार लेते मानस से हुआ होगा।
यह आश्चर्यजनक है और दुर्भाग्यपूर्ण भी कि विवेकानन्द के अधिकतर जीवनीकारों ने उनके इस छत्तीसगढ़ प्रवास को अनदेखा किया है। इसलिए ऐसे तथ्य भी सामने नहीं आ सके जिनसे उनके जीवन में 1875 से 1877 के इस कालखंड के महत्त्व को रेखांकित किया जा सके। लेकिन क्या ये सच नहीं है कि व्यक्ति के जीवन में किशोरावस्था के अनुभवों की भूमिका निर्णायक होती है। ज्ञात हो कि विवेकानन्द उस समय 12 वर्ष के थे, जब उनके पिता उन्हें रायपुर लेकर आए और दो वर्ष से ज़्यादा वे यहाँ पर रहे। लोक विश्वास है कि जबलपुर से रायपुर बैलगाड़ी से आते हुए ही उन्हें माँ की गोद में लेटे हुए दिव्य ज्योति के दर्शन हुए थे। यह भी माना जा सकता है कि इसी दौरान उनका परिचय हिन्दी और छत्तीसगढ़ी से हुआ और यहाँ पर उन्हें भारत की ग़ुरबत की वह झलक भी मिली जो उनके व्याकुल चिन्तन का आधार बनी।
यह पुस्तक विवेकानन्द के छत्तीसगढ़ से सम्बन्ध के साथ-साथ उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व और वैचारिक सम्पदा को एक जिल्द में समेटने का प्रयास है। विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा लिखे आलेखों के अलावा पुस्तक में विवेकानन्द का चर्चित शिकागो व्याख्यान भी प्रस्तुत किया गया है और कुछ अन्य सामग्री भी जो उन्हें समग्रता में समझने में सहायक होगी।
Hamjad
- Author Name:
Manohar Shyam Joshi
- Book Type:

- Description: ‘हमज़ाद' कहानी है उस ‘कमीनगी’ की जो अपने ठोस आत्मविश्वास के बल पर सबसे चोट हमारे उन विभ्रमों पर करती है जिन्हें हम अपने ‘अबोध आशावाद’ के चलते अपने इर्द-गिर्द पाले रखते हैं। इसे पढ़ते हुए आप अचानक असहाय महसूस करेंगे और एक रूहानी शैथिल्य आपको घेर लेगा; आप पाएँगे कि आपका समय वास्तव में उससे कहीं ज़्यादा घटिया, क्रूर और लिजलिजा है जितना आप आज तक अफ़वाहों और अख़बारों के माध्यम से जानते आए हैं। बेशक यह कथा उम्मीद का अन्त कर देनेवाली है, इसका एक भी चरित्र ऐसा नहीं जो सीख देता हो, ‘सुन्दर भविष्य’ का कोई सपना बुनता हो; सब अपने-अपने नरक में इतने गहरे डूबे हुए हैं कि उन्हें अपने अलावा किसी और इकाई का ख़याल तक नहीं आता। लेकिन क्या थोड़ी-सी झूठी इनसानियत के साथ यह हम ही नहीं हैं? 'हमजाद' के चरित्र इस थोड़ी-सी इनसानियत से भी परे जा चुके हैं जिनके भीतर-बाहर को जोशी जी ने अपने सघन पाठ में अद्भुत ढंग से रूपायित किया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book