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हमारे वर्तमान जीवन का यथार्थ क्या है? क्या ऐसे समय में भी मिथ्या-विश्वास और प्रवंचना की पिनक में सन्तुष्ट रह सकना सम्भव है? सौन्दर्य और तृप्ति की अभिलाषा उत्पन्न कर देना एक काम है। सौन्दर्य और तृप्ति की स्मृति जगा कर सुख की अनुभूति उत्पन्न कर देना भी काम है, परन्तु उससे बढ़कर काम हो सकता है, सौन्दर्य और तृप्ति के साधनों की उत्पादन और परिस्थिति के निर्माण के लिए भावना और संकेत द्वारा सहयोग देना।</p> <p>साहित्य का कलाकार केवल चारण बनकर सौन्दर्य, पौरुष और तृप्ति की महिमा गाकर ही अपने सामाजिक कर्त्तव्य को पूरा नहीं कर सकता। विकास और पूर्णता के सामाजिक प्रयत्न की इच्छा और उत्साह उत्पन्न करना और उस उत्साह को विवेक और विश्लेषण की प्रवृत्ति द्वारा सजग और सचेत रखने की भावना जगाना, साहित्य के कलाकार का काम है।
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हमारे वर्तमान जीवन का यथार्थ क्या है? क्या ऐसे समय में भी मिथ्या-विश्वास और प्रवंचना की पिनक में सन्तुष्ट रह सकना सम्भव है? सौन्दर्य और तृप्ति की अभिलाषा उत्पन्न कर देना एक काम है। सौन्दर्य और तृप्ति की स्मृति जगा कर सुख की अनुभूति उत्पन्न कर देना भी काम है, परन्तु उससे बढ़कर काम हो सकता है, सौन्दर्य और तृप्ति के साधनों की उत्पादन और परिस्थिति के निर्माण के लिए भावना और संकेत द्वारा सहयोग देना।</p>
<p>साहित्य का कलाकार केवल चारण बनकर सौन्दर्य, पौरुष और तृप्ति की महिमा गाकर ही अपने सामाजिक कर्त्तव्य को पूरा नहीं कर सकता। विकास और पूर्णता के सामाजिक प्रयत्न की इच्छा और उत्साह उत्पन्न करना और उस उत्साह को विवेक और विश्लेषण की प्रवृत्ति द्वारा सजग और सचेत रखने की भावना जगाना, साहित्य के कलाकार का काम है।
Book Details
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ISBN9788180313745
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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Description:
अनिल सिंह लन्दन में रहते हैं और पेशे से बैंकर हैं। उनकी एक महिला मित्र है पैट, जो लम्बे समय से भारत जाने की ख़्वाहिश पाले हुए है। एक दिन उन्हें ख़बर मिलती है कि उनके चाचा की मौत हो गई है, जो उत्तर भारत स्थित पालनपुर नाम के गाँव में रहते थे। अब वे ही उनकी जायदाद के इकलौते वारिस हैं। पैट के आग्रह पर अनिल भारत जाने का फ़ैसला कर लेते हैं। उनके मन में जमीन-जायदाद अपने नाम करवाने के साथ-साथ उस देश को भी थोड़ा अच्छे से जान लेने की इच्छा है जहाँ से उनके माता-पिता आए थे। फ़ोटोग्राफ़ी के शौक़ीन अनिल अपने साथ अपना कैमरा भी ले जाते हैं। उनके मन में खेती करने का ख़याल भी घुमड़ रहा होता है। गाँव के रास्ते में अनिल को पता चलता है कि उनके चाचा की तो हत्या हुई थी और पुलिस ने इस जुर्म में उनकी नौकरानी को गिरफ़्तार किया है। उसका नाम नीतू है और वह दलित है। यहाँ से खुलने वाली आगे की कहानी का एक सिरा इसी हत्या की गुत्थी में है। पालनपुर में अपने प्रवास के दौरान वे उत्तर भारतीय समाज की तमाम जटिलताओं के साथ दो-चार होते हैं, मसलन विभिन्न जाति-समूहों (ठाकुर, मुराव, दलित) की आपसी राजनीति, भ्रष्टाचार, जलनखोरी, लालफीताशाही, ग़रीबी, लैंगिक भेद, सत्ता-संघर्ष और एक बँटे हुए गाँव की तमाम उथल-पुथल।
‘लाइन पार’, जातियों में बँटे हुए एक भारतीय गाँव का यथार्थवादी, तीखा और मनोरंजक पोर्ट्रेट है। इसमें सौ साल के ग्रामीण जीवन की व्यथा-कथा है। इस कहानी में ऐतिहासिक तथ्य हैं, तो निजी अनुभव भी हैं। यह एक सनसनीखेज अपराध कथा भी है और ग्रामीण जीवन का मर्मस्पर्शी दस्तावेज़ भी जिसमें आज़ादी से पहले और बाद के ग्रामीण भारत की विविध रंगी तस्वीरें दिखती है।
Titli
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

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Description:
तितली ‘मनुष्य बनाम समाज’ के संघर्ष का ही उपन्यास न होकर मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा का भी उपन्यास है। इसमें तितली, शैला, माधुरी, श्यामकुमारी, राजकुमारी आदि नारी चरित्रवर्ग चरित्र न होकर ऐसी नारियाँ हैं जो अपनी कमजोरियों के कारण टूटती भी हैं और उसी से शक्ति अर्जित करके सामाजिक जीवन को बदलती भी हैं।
इस उपन्यास में महात्मा गांधी की मूल्य चेतना के साथ ही साथ उस महत्व की भी खोज की गई है जिससे एक वैश्विक सामरस्य का सृजन सम्भव हो सकता है। पुरुष सत्तात्मक व्यवस्था के प्रति विद्रोह के साथ ही साथ संभव बराबरी का लक्ष्य इस उपन्यास से निरन्तर बना हुआ है। त्याग, प्रेम, समता और करुणा के साथ-साथ इसमें इन मूल्यों के कारण मनुष्य में होने वाली हलचलों का संकेत औपन्यासिक शिल्प के विकास और क्षमता का भी प्रमाण प्रस्तुत करता है।
अर्थमय जगत में आत्म संस्कार की आवश्यकता महात्मा गांधी की ही तरह इस उपन्यास में सृजनात्मक आदर्श की तरह संरचना के साथ बुनी हुई है। सेवा भावना निष्कामना के साथ जुड़कर वाटसन और स्मिथ आदि चरित्रों का निर्माण कर सकी है।
वर्तमान हिन्दी उपन्यास को समझने में ही नहीं बल्कि आधुनिक चेतना तथा सत्याग्रहकालीन दृष्टि के संतुलन और वैषम्य की दृष्टि से भी यह उपन्यास महत्त्वपूर्ण है।
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