Avishkar Joote Ka
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‘आविष्कार जूते का’ रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविता ‘जूता आविष्कार’ पर आधारित है। यह छह दृश्यों का एक बाल नाटक है। हास्य-व्यंग्य शैली का यह नाटक बाल-मनोविनोद की समझदारी रखता है। श्रीलाल शुक्ल ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविता को नाट्य-रूप में जीवंत कर दिया है।
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‘आविष्कार जूते का’ रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविता ‘जूता आविष्कार’ पर आधारित है। यह छह दृश्यों का एक बाल नाटक है। हास्य-व्यंग्य शैली का यह नाटक बाल-मनोविनोद की समझदारी रखता है। श्रीलाल शुक्ल ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविता को नाट्य-रूप में जीवंत कर दिया है।
Book Details
-
ISBN9788126720743
-
Pages24
-
Avg Reading Time1 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘राग दरबारी’ जैसे कालजयी उपन्यास के रचयिता श्रीलाल शुक्ल हिन्दी के वरिष्ठ और विशिष्ट कथाकार हैं। उनकी क़लम जिस निस्संग व्यंग्यात्मकता से समकालीन सामाजिक यथार्थ को परत-दर-परत उघाड़ती रही है, ‘पहला पड़ाव’ उसे और अधिक ऊँचाई सौंपता है।
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वस्तुतः श्रीलाल शुक्ल की यह कथाकृति बीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशकों में ईंट-पत्थर होते जा रहे आदमी की त्रासदी को अत्यन्त मानवीय और यथार्थवादी फलक पर उकेरती है।
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सुविख्यात उपन्यास ‘राग दरबारी’ की रचना के पाँच साल बाद प्रकाशित होनेवाला श्रीलाल शुक्ल का यह उपन्यास उनकी अन्य कृतियों से सर्वथा भिन्न है और उनकी सर्जनात्मक प्रतिभा के कई ऐसे आन्तरिक स्रोतों का परिचय देता है जिनका उपयोग हिन्दी कथा-साहित्य में प्रायः विरल है।
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