Pratinidhi Kahaniyan : Yashpal
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Author:
YashpalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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प्रेमचन्द की कथा-परम्परा को विकसित करनेवाले सुविख्यात कथाकार यशपाल के लिए साहित्य एक ऐसा शास्त्र था, जिससे उन्हें संस्कृति का पूरा युद्ध जितना था। और उन्होंने जीता। प्रत्येक स्तर पर वे सजग थे। विचार, तर्क, व्यंग्य, कलात्मक सौन्दर्य, मर्म-ग्राह्यता—हर स्तर पर उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। समाज में जहाँ कहीं भी शोषण और उत्पीड़न था, जहाँ कहीं भी रूढ़ियों, परम्पराओं, नैतिकताओं, धर्म और संस्कारों की जकड़ में जीवन कसमसा रहा था, यशपाल की दृष्टि वहीं पड़ी और उन्होंने पूरी शक्ति से वहीं प्रहार किया। इसी दृष्टि को लेकर उन्होंने उस इतिहास-क्षेत्र में प्रवेश किया जहाँ के भीषण अनुभवों को भव्य और दिव्य कहा गया था। उन्होंने उस मानव-विरोधी इतिहास की धज्जियाँ उड़ा दीं। व्यंग्य उनकी रचना में तलवार की तरह रहा है और वे रहे हैं नए समाज की पुनर्रचना के लिए समर्पित एक योद्धा। मर्मभेदी दृष्टि, प्रौढ़ विचार और क्रन्तिकारी दर्शन ने उन्हें विश्व के महानतम रचनाकारों की श्रेणी में ला बिठाया है। ये कहानियाँ उनकी इसी तेजोमय यात्रा का प्रमाण जुटाती हैं।
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प्रेमचन्द की कथा-परम्परा को विकसित करनेवाले सुविख्यात कथाकार यशपाल के लिए साहित्य एक ऐसा शास्त्र था, जिससे उन्हें संस्कृति का पूरा युद्ध जितना था। और उन्होंने जीता। प्रत्येक स्तर पर वे सजग थे। विचार, तर्क, व्यंग्य, कलात्मक सौन्दर्य, मर्म-ग्राह्यता—हर स्तर पर उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। समाज में जहाँ कहीं भी शोषण और उत्पीड़न था, जहाँ कहीं भी रूढ़ियों, परम्पराओं, नैतिकताओं, धर्म और संस्कारों की जकड़ में जीवन कसमसा रहा था, यशपाल की दृष्टि वहीं पड़ी और उन्होंने पूरी शक्ति से वहीं प्रहार किया। इसी दृष्टि को लेकर उन्होंने उस इतिहास-क्षेत्र में प्रवेश किया जहाँ के भीषण अनुभवों को भव्य और दिव्य कहा गया था। उन्होंने उस मानव-विरोधी इतिहास की धज्जियाँ उड़ा दीं। व्यंग्य उनकी रचना में तलवार की तरह रहा है और वे रहे हैं नए समाज की पुनर्रचना के लिए समर्पित एक योद्धा। मर्मभेदी दृष्टि, प्रौढ़ विचार और क्रन्तिकारी दर्शन ने उन्हें विश्व के महानतम रचनाकारों की श्रेणी में ला बिठाया है। ये कहानियाँ उनकी इसी तेजोमय यात्रा का प्रमाण जुटाती हैं।
Book Details
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ISBN9788171788262
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Pages146
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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थपलियाल का कहानी कहने का भी अपना भिन्न तरीका है जिसमें वे जब-तब प्रयोग करते दिखाई देते हैं। अपनी कहानियों के बारे में स्वयं उनकी धारणा है कि हिन्दी मुख्यधारा में पर्वतीय परिवेश के शब्दों की बहुत कमी है और पर्वतीय बोली-भाषा से अधिक से अधिक संवाद द्वारा यह कमी दूर की जा सकती है। इन कहानियों में उन्होंने यह संवाद बनाने की भी कोशिश की है। वे घटनाधर्मिता को कहानी की आत्मा मानते हैं और उनकी कहानियों की पठनीयता इसी घटनाधर्मिता से बनती है जिसे वे बिना हिंसा और मार-धाड़ के, मासूमियत से निभा जाते हैं और पाठक को नई दिशा में सोचने को प्रेरित करते हैं।
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Vasudhendra
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- Description: ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಎರಡು ನೀಳ್ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಜೊತೆಗೆ, ಹಲವು ಸ್ವಾರಸ್ಯಕರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳು. ಕಥೆಗಾರ, ಬರಹಗಾರರಾದ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಸಂಕಲನ ’ ವರ್ಣಮಯ’. ಈ ಪ್ರಬಂಧ ಸಂಕಲನದಲ್ಲಿ ಬರುವ ನಂಜುಂಡಿ ಮತ್ತು ಗೌರಮ್ಮ ಎಂಬ ಬರಹಗಳಲ್ಲಿ ಲೇಖಕರು ತಮ್ಮ ಸುತ್ತಲಿನ ಸಮಾಜದ ಎಷ್ಟೋ ಮಜಲುಗಳನ್ನು ಕೆಳ, ಮಧ್ಯಮ ಹಾಗೂ ಮೇಲಿನ ವರ್ಗದ ಜನರುಗಳ ನಡುವೆ ಮುಖಾಮುಖಿಯಾಗಿಸುತ್ತಾ ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಗಳನ್ನು ಹಾಸ್ಯ ಪ್ರಜ್ಷೆಯೊಂದರಲ್ಲಿಓದುಗರಿಗೆ ಪರಿಚಯಿಸಿದ್ದಾರೆ. ತಾಯಿ ದೇವರಲ್ಲ, ಅಮ್ಮ ಎನ್ನುವ ಸಂಭ್ರಮ, ಹಗ್ಗದ ಹಾವು, ಬರಹಗಳು ಲೇಖಕರ ಮನೆಯ ಅನುಭವ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ನೀಡುವಂತದ್ದಾಗಿದೆ.
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