(0)
Author:
U.R. AnanthamurthyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
प्रसिद्ध उपन्यासकार यू.आर. अनन्तमूर्ति की ये कहानियाँ अपनी प्रयोगधर्मिता, बौद्धिक संयम, अनूठी कथा-शैली और बेबाक आधुनिक दृष्टि के कारण कन्नड़ कथा-साहित्य में विशेष स्थान बना चुकी हैं। ‘घटश्राद्ध’ कहानी पर कन्नड़ में फ़िल्म भी बन चुकी है, जो काफ़ी चर्चित और पुरस्कृत हुई। इन कहानियों में प्रचलित रूढ़ियों के अनूठे चित्र और दिलचस्प चरित्र हैं जो आधुनिकता की मार खा-खाकर चरमरा रहे हैं, टूट रहे हैं, बिखर रहे हैं। उनके इस विघटन में निहित अनिवार्य त्रासदी मन को आलोड़ित करती है। कुछ प्रयोगधर्मी कहानियों में अनूठी फैंटेसियों का आकलन हुआ है, जो किसी गहरे आन्तरिक यथार्थ की प्रतीति कराती हैं। नारी के शोषण के अनेक चित्र इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। कंठ के भीतर घुटते उच्छ् वासों को रचनाकार ने अपनी विशेष सजीव और सहज शैली में उभारा है। भारतीय भाषाओं को ‘संस्कार’ जैसा आधुनिक क्लासिक उपन्यास देनेवाले रचनाकार का यह संकलन पढ़ना एक अनूठा अनुभव है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
प्रसिद्ध उपन्यासकार यू.आर. अनन्तमूर्ति की ये कहानियाँ अपनी प्रयोगधर्मिता, बौद्धिक संयम, अनूठी कथा-शैली और बेबाक आधुनिक दृष्टि के कारण कन्नड़ कथा-साहित्य में विशेष स्थान बना चुकी हैं। ‘घटश्राद्ध’ कहानी पर कन्नड़ में फ़िल्म भी बन चुकी है, जो काफ़ी चर्चित और पुरस्कृत हुई। इन कहानियों में प्रचलित रूढ़ियों के अनूठे चित्र और दिलचस्प चरित्र हैं जो आधुनिकता की मार खा-खाकर चरमरा रहे हैं, टूट रहे हैं, बिखर रहे हैं। उनके इस विघटन में निहित अनिवार्य त्रासदी मन को आलोड़ित करती है। कुछ प्रयोगधर्मी कहानियों में अनूठी फैंटेसियों का आकलन हुआ है, जो किसी गहरे आन्तरिक यथार्थ की प्रतीति कराती हैं। नारी के शोषण के अनेक चित्र इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। कंठ के भीतर घुटते उच्छ् वासों को रचनाकार ने अपनी विशेष सजीव और सहज शैली में उभारा है। भारतीय भाषाओं को ‘संस्कार’ जैसा आधुनिक क्लासिक उपन्यास देनेवाले रचनाकार का यह संकलन पढ़ना एक अनूठा अनुभव है।
Book Details
-
ISBN9788183612685
-
Pages188
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Aakash Aur Billi
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description:
कन्नड़ कहानी को कथ्य और शिल्प दोनों स्तरों पर एक नया मोड़ देने का श्रेय यू.आर. अनन्तमूर्ति को ही जाता है। उनकी कहानियाँ समस्याओं के समाधान नहीं बतातीं, बल्कि उनके परिवेश और परिस्थितियों का उद्घाटन करती हैं और हमें एक ज़्यादा प्रकाशमान संसार में लेकर जाती हैं जहाँ हम अपनी दुनिया की जटिलताओं को बेहतर ढंग से देख और समझ सकते हैं।
बौद्धिक, नैतिक और भावनात्मक अन्वेषण पर केन्द्रित यू.आर. अनन्तमूर्ति की कहानियाँ एक विमर्श की रचना करती हैं। प्रस्तुत संग्रह की शीर्षक कहानी 'आकाश और बिल्ली' को सिर्फ़ कन्नड़ ही नहीं, सभी भारतीय भाषाओँ की श्रेष्ठ कथा रचनाओं में स्थान प्राप्त है जिसके अंग्रेज़ी सहित अन्य भाषाओँ में भी अनुवाद हो चुके हैं।
संग्रह में शामिल अन्य कहानियाँ, यथा—'क्लिप जॉइंट', 'सूखा', 'आक्रमण', 'रूथ और रसूल', 'अपूर्व' आदि भी यू.आर. अनन्तमूर्ति की कथा-तकनीक और उनकी आधारभूत लेखकीय चिन्ताओं को अभिव्यक्ति देती हैं।
कहना ज़रूरी नहीं कि हमारे समय के शीर्षस्थ भारतीय लेखकों में अग्रगण्य यू.आर. अनन्तमूर्ति की ये कहानियाँ हिन्दी पाठकों को एक नए आस्वाद और भावलोक से परिचित कराती हैं।
Sanskar
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy +1
- Book Type:

- Description:
यू.आर. अनन्तमूर्ति के इस कन्नड़ उपन्यास को युगान्तरकारी उपन्यास माना गया है। ब्राह्मणवाद, अन्धविश्वासों और रूढ़िगत संस्कारों पर अप्रत्यक्ष लेकिन इतनी पैनी चोट की गई है कि उसे सहना सनातन मान्यताओं के समर्थकों के लिए कहीं–कहीं दूभर होने लगता है। ‘संस्कार’ शब्द से अभिप्राय केवल ब्राह्मणवाद की रूढ़ियों से विद्रोह करनेवाले नारणप्पा के दाह–संस्कार से ही नहीं है। अपने लिए सुरक्षित निवास–स्थान, अग्रहार आदि के ब्राह्मणों के विभिन्न संस्कारों पर भी रोशनी डाली गई है—स्वर्णाभूषणों और सम्पत्ति–लोलुपता जैसे संस्कारों पर भी! ब्राह्मण–श्रेष्ठ और गुरु प्राणेशाचार्य तथा चन्द्री, बेल्ली और पद्मावती जैसे अलग और विपरीत दिखाई देनेवाले पात्रों की आभ्यन्तरिक उथल–पुथल के सारे संस्कार अपने असली और खरे–खोटेपन समेत हमारे सामने उघड़ आते हैं। धर्म क्या है? धर्मशास्त्र क्या है? क्या इनमें निहित आदेशों में मनुष्य की स्वतंत्र सत्ता के हरण की सामर्थ्य है, या होनी चाहिए? ऐसे अनेक सवालों पर यू.आर. अनन्तमूर्ति जैसे सामर्थ्यशील लेखक ने अत्यन्त साहसिकता से विचार किया है, और यही वैचारिक निष्ठा इस उपन्यास को विशिष्ट बनाती है।
Awastha
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Bhartipur
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description:
साहसिक और कलात्मक रचनाशीलता से औपन्यासिकता को नया संस्कार और आयाम देनेवाले विवादास्पद कन्नड़ लेखक यू.आर. अनन्तमूर्ति का बहुचर्चित उपन्यास है ‘भारतीपुर’।
यों ‘भारतीपुर’ एक दक्षिण भारतीय बस्ती की कहानी है, लेकिन बस्ती तो एक बहाना है। दरअसल यह समसामयिक भारतीय जीवन के दहशत पैदा करनेवाले अनुभवों और तिलमिला देनेवाले यथार्थ का बहुत तीखा और एक हद तक अविश्वसनीय लगनेवाला दस्तावेज़ है।
भारतीपुर नामक बस्ती में मंजुनाथ का एक मन्दिर है। वह मन्दिर केवल देवालय नहीं, उस बस्ती की सारी व्यवस्था का केन्द्र है—एक ऐसा केन्द्र और नियामक स्थल, जहाँ से ढोंग, पाखंड, स्खलन और दुराचार के अजस्र स्रोत फूटते हैं—सारी बस्ती के जीवन को समेटने, जकड़ने और यथास्थितिवाद को सुरक्षित बनाए रखने के लिए। ऐसे में सामाजिक परिवर्तन लाने की कोई भी भूमिका या उसका कोई प्रयत्न न केवल निष्फल होकर रह जाता है, बल्कि अपने पीछे श्रीपतिराय और अडिग जी जैसे लोगों की कुंठित और हताश पीढ़ी छोड़ जाता है।
ईश्वर, पूँजी और पाखंड की मिलीभगत और उसकी कुत्सित सत्ता के असली चेहरे को उजागर करनेवाले इस उपन्यास की सबसे बड़ी शक्ति है—इसका सामाजिक सन्दर्भ, जो रचना को तो अतिरिक्त ऊर्जा देता ही है, उपन्यास को बेहद प्रासंगिक भी बनाता है। गहरी संवेदना, मार्मिक भाषा, भेदक सामाजिक दृष्टि और साहसिक रचनाशीलता के लिए विख्यात अनन्तमूर्ति का यह उपन्यास भी हिन्दी पाठकों के लिए एक नया अनुभव देता है—‘संस्कार’ की ही तरह।
Kis Prakar Ki Hai Yah Bhartiyata ?
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description:
भारतीय मूल्यों के प्रति अगाध निष्ठा और अपने व्यक्ति के स्तर पर विकट आत्मालोचन यू.आर. अनन्तमूर्ति के लेखक के विशिष्ट गुण हैं। ‘संस्कार’, ‘अवस्था’ और ‘भारतीपुर’ जैसे उपन्यासों में जिस प्रकार उन्होंने आधुनिक युग की चुनौतियों को कथा के भावालोक में समझा है, वैसी ही गहनता के साथ इस पुस्तक में संकलित निबन्धों में उन्होंने उन पर विचार किया है। ‘मैं अपने भीतर का आलोचक हूँ’, वे कहते हैं। परम्पराओं पर प्रश्न करते हैं और विकास की प्रश्नाकुल द्वन्द्वात्मकता में विश्वास रखते हैं।
‘किस प्रकार की है यह भारतीयता’ कुछ चुने हुए भाषणों, लेखों और साक्षात्कारों का संकलन है। दलित साहित्य, विकेन्द्रीकरण और संस्कृतिपरक कई आलोचनात्मक लेख इस पुस्तक में संकलित हैं। इन लेखों में लेखक क्षेत्रीय पवित्रता क़ायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि उपनिवेशविरोध की राजनीति से उपजी हुई अपनी संस्कृति की रक्षा अपनी भाषा में ही सृजन करने से सम्भव है। अनन्तमूर्ति ने अभिव्यक्ति के प्रगटीकरण के लिए अपनी मातृभाषा कन्नड़ का ही इस्तेमाल किया है। ज्ञान का आगार होने के नाते वह अंग्रेज़ी का समर्थन करते हैं, लेकिन उसके आक्रमणकारी तेवर का विरोध भी करते हैं।
Katha Saptak Manisha Kulshreshtha
- Author Name:
Manisha Kulshreshtha
- Book Type:


- Description:
स्त्री जीवन के विभिन्न रंगों को उकेरी ७ कहानियाँ, हरेक कहानी अपने आप में भावनाओं के अनूठे अनुभवों को समेटे हुए। - कठपुतलियाँ - स्वाँग - एडोनिस और लिली के फूल - क़सुमल रंग - आर्किड - एक थी लिलन - ज़मीन
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
Katha Saptak - Bhalchandra Joshi
- Author Name:
Bhalchandra Joshi
- Book Type:


- Description:
Description Awaited
Mansarovar Vol. 7 : Jail Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
प्रेमचन्द जहाँ भी समाज में अन्याय था, उसका प्रतिकार अपने ढंग से कर रहे थे। ईश्वर द्वारा मनुष्य के प्रति किया गया अन्याय ही नहीं, वे ग्रीक ट्रेजेडी नहीं लिख रहे थे, मनुष्य द्वारा मनुष्य के प्रति किया गया अन्याय, इसी समाज द्वारा इसी समाज में रहने वाले लोगों के प्रति किया गया अन्याय, उसे भी सतह पर लाकर दिखा रहे थे। जहाँ दमन और अन्याय था, उस अन्याय की व्यथा, पीड़ा सामने रख रहे थे और साथ ही उस व्यथा-पीड़ा का ऐसा चित्रण कर रहे थे, जो हमें आपको इस हद तक झकझोर दे कि हम स्वयं उस व्यवस्था के खिलाफ खड़े हो सकें, जो अमानवीय है ग़ैरबराबरी पर खड़ी है, जिसको हम अनजाने संस्कारवश ढोए चले जा रहे हैं और कभी-कभी परम्परा के प्रति श्रद्धा के नाम पर हम जिसका पोषण-समर्थन करते हैं। —नामवर सिंह
Pratinidhi Kahaniyan : Bhisham Sahni
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description:
भीष्म साहनी के कथा-साहित्य से गुज़रना अपने समय को बेधते हुए गुज़रना है। हिन्दी के प्रगतिशील कहानीकारों में उनका स्थान बहुत ऊँचा है। यहाँ उनके सात कहानी-संग्रहों से प्राय: सभी प्रतिनिधि कहानियों को संकलित कर लिया गया है। युग-सापेक्ष सामाजिक यथार्थ, मूल्यपरक अर्थवत्ता और रचनात्मक सादगी इन कहानियों के कुछ ऐसे पहलू हैं, जो हमारे लिए किसी भी काल्पनिक और मनोरंजक दुनिया को ग़ैर-ज़रूरी ठहराते हैं। विभिन्न जीवन-स्थितियों में पड़े इनके असंख्य पात्र आधुनिक भारतीय समाज की अनेक जटिल परतों को पाठकों पर खोलते हैं। उनकी बुराइयाँ, उनका अज्ञान और उनके हालत व्यक्तिगत नहीं, सार्वजनीन और व्यवस्थाजन्य हैं। इसके साथ ही इन कहानियों में ऐसे चरित्रों की भी कमी नहीं, जो गहन मानवीय संवेदना से भरे हुए हैं और अपने-अपने यथास्थितिवाद से उबरते हुए एक सार्थक सामाजिक बदलाव के लिए संघर्षरत शक्तियों से जुड़कर नया अर्थ ग्रहण करते हैं। वे न तो अपनी भयावह और दारुण दशा से आक्रान्त होते हैं न निराश, बल्कि अपने साथ-साथ पाठकों को भी संघर्ष की एक नई उर्जा से भर जाते हैं।
Mansarovar Vol. 6 : Laag - Daat Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
भारत के स्वाधीनता संघर्ष के साथ अनेक बड़े साहित्यकार उदित हुए किन्तु उन सबमें प्रेमचन्द अनूठे हैं। प्रेमचन्द का साहित्य भारत की करोड़ों जनता—विशेषतः किसानों की अपनी आवाज़ है : भारतीय किसान के समान ही सरल, सादा, साफ़ बेबाक, ज़मीन के नज़दीक और सहज बुद्धि से युक्त। इसीलिए रवीन्द्रनाथ ठाकुर और मोहम्मद इक़बाल जैसे महान साहित्यकारों का सम्मान करते हुए भी भारत की जनता ने प्रेमचन्द के साथ विशेष रूप से आत्मीयता का अनुभव किया—उनकी आवाज़ को अपनी आवाज़ समझा; उनके साहित्य में अपनी पीड़ा अपनी आशा-आकांक्षा, अपने अधिकारों और संघर्षों का प्रतिबिम्ब पाया। प्रेमचन्द के उपन्यासों और कहानियों में कबीर और तुलसीदास जैसे मध्ययुगीन सन्तों की वाणी चार-पाँच सौ वर्षों बाद एक नए अंदाज़ के साथ गोया फिर सुनाई पड़ी। राजनीति में इसी आवाज़ के प्रतीक गाँधी थे। —नामवर सिंह
Sandigdh
- Author Name:
Tejendra Sharma
- Book Type:


- Description:
पंद्रह बेहतरीन कहानियों का संग्रह।
Download Hote Hain Sapne
- Author Name:
Geeta Shree
- Book Type:

- Description:
collection of stories
Hari Mohan Jha Ki Shreshtha Kathayen
- Author Name:
Lavanya Kirti Singh 'Kavya'
- Book Type:

- Description:
Hari Mohan Jha Ki Shreshtha Kathayen
Mansarovar Vol. 4 : Laag - Daat Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Katha Saptak Ushakiran Khan
- Author Name:
Usha Kiran Khan
- Book Type:

- Description:
Padamshri Ushakiran Khan Famous 7 Stories
Sach Kuchh Aur Tha
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description:
Book
Pratinidhi Kahaniyan : Usha Priyamvada
- Author Name:
Usha Priyamvada
- Book Type:

- Description:
उषा प्रियम्वदा को पढ़ना एक साथ बहुत से बिम्बों में घिर जाना है। बिम्ब जो घुमड़ते बादलों की तरह अनायास तैरते चले आते हैं और एक सार्थक संगति में गुँथकर पहले दृश्य का रूप लेते हैं। कहानियों में परम्परा के निर्वहण की अभ्यस्तता और उसे तोड़ देने की सजगता एक साथ गुँथी हुई मिलती है। 1952 से 1989 तक के कालखंड में फैली उषा प्रियम्वदा की कहानियों का अधिकांश साठ के दशक में उनके विदेश प्रवास के बाद आया है। ज़ाहिर है, डायस्पोरा मनोविज्ञान रिवर्स कल्चरल शॉक से उबरने की क्रमिक प्रक्रिया को नॉस्टेल्जिया में तब्दील कर देता है। इसलिए उषा जी की कहानियों की ज़मीन भले ही विदेशी हो गई हो, वहाँ की खुली संस्कृति और उदार वर्जनामुक्त माहौल से सम्बन्धों में सहजता और कुंठाहीनता पनपी हो, लेकिन उनकी नायिका स्वयं को भारतीयता के संस्कारों से मुक्त नहीं कर पाई है। यही वजह है कि दाम्पत्येतर प्रेम सम्बन्ध बनाते हुए भी वह अपराध-बोध और लोकापवाद के भय से ग्रस्त रहती है। सरपट दौड़ते हुए अचानक ठिठककर खड़े हो जाना, और फिर बिना कुछ कहे अपनी खोह में दुबक जाना उनकी स्त्री की विशेषता है। उषा जी बेहद महीन और कलात्मक पच्चीकारी के साथ उसके चारों ओर रहस्यात्मकता का वातावरण बुनती हैं, जो एक सम्मोहक तिलिस्म का रूप धरकर पाठक के भीतर सीढ़ी-दर-सीढ़ी उतरता चला जाता है, ठीक कृष्णा सोबती की लम्बी कहानी 'तिन पहाड़' की जया की तरह।
Is Hamam mein
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

- Description:
कहानी को लेकर होनेवाली तमाम चर्चाओं को ध्यान में रखा जाए तो यह विश्वास करना पड़ेगा कि किसी के लिए कहानी केवल भाषा है, किसी के लिए केवल स्थिति चित्रण, कुछ के लिए केवल विचार है तो कुछ के लिए सिर्फ संवेदनाओं का अभिलेख। हरेक के अपने-अपने प्रवर्तक और समर्थक हैं, जो कभी इसे तो कभी उसे कहानी का शिखर घोषित करते रहते हैं। अपने उत्साह में वे यह भुला देते हैं कि कथा साहित्य के व्यापक कैनवस पर अलग-अलग रंगों के रूप में तो उनका कुछ महत्त्व हो सकता है, लेकिन किसी एक को ही कहानी का सर्वोच्च पैमाना नहीं बनाया जा सकता। अर्थरहित भाषा का झुनझुना कब तक बज सकता है, या जीवन-स्थितियों से रहित संवेदना का या संवेदनाविहीन जीवन-स्थितियों का क्या अर्थ है? बहुत से रचनाकार ऐसे हैं, जो प्रचलित मुहावरों और फैशनों से अप्रभावित रहते हुए इस बात के प्रति सचेत हैं कि कहानी वह सबकुछ है और इन सबसे मिलकर बनती है। चित्रा मुद्गल इन्हीं सचेत दृष्टि सम्पन्न रचनाकारों में हैं। उनकी कहानियों का मुख्य सरोकार समकालीन जीवन-स्थितियों में मनुष्य के भीतरी संसार का उद्घाटन है। लेकिन यह भीतरी कशमकश भी बदलते जीवन-परिवेश का आत्मीय ब्योरों और कलात्मक नजर के साथ अंकन भी करती चलती है। इस तरह ये इकहरी अभिव्यक्ति की कहानियाँ न होकर कई स्तरों पर प्रभावित करनेवाली कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ मानवीय सम्बन्धों की आन्तरिक जटिलताओं का अंकन पात्रों को उनके परिवेश से काटकर शिमला या कश्मीर के डाकबँगलों में ले जाकर नहीं, बल्कि उनके दैनन्दिन जीवन के संघर्षों के बीच, सामाजिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि में करती हैं, जहाँ रोजी-रोटी का संघर्ष भी है और पारिवारिक परम्पराओं तथा जीवन की रूढ़ स्थितियों से टकराव भी।
Pratinidhi Kahaniyan : Mohan Rakesh
- Author Name:
Mohan Rakesh
- Book Type:

- Description:
मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। इस संकलन में उनकी प्राय सभी प्रतिनिधि कहानियां संग्रहीत हैं, जिनमें आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर हुआ है । राकेश मुख्यतः आधुनिक शहरी जीवन के कथाकार हैं, लेकिन उनकी संवेदना का दायरा मध्यवर्ग तक ही सिमित नहीं है । निम्नवर्ग भी पूरी जीवन्तता के साथ उनकी कहानियों में मौजूद है । इनके कथा-चरित्रों का अकेलापन सामाजिक संदर्भो की उपज है । वे अपनी जीवनगत जददोजहद में स्वतंत्र होकर भी सुखी नहीं हो पते, लेकिन जीवन से पलायन उन्हें स्वीकार नहीं । वे जीवन-संघर्ष की निरंतरता में विश्वास रखते हैं । पत्रों की इस संघर्ष शीलता में ही लेखक की रचनात्मक संवेदना आश्चर्यजनक रूप से मुखर हो उठती है । हम अनायास ही प्रसगानुकुल कथा-शिल्प का स्पर्श अनुभव करने लगते हैं, जो कि अपनी व्यंगात्मक सांकेतिकता और भावाकुल नाटकीयता से हमें प्रभावित करता है । इसके साथ ही लेखक की भाषा भी जैसे बोलने लगती है और अपने कथा-परिवेश को उसकी समग्रता में धारण कर हमारे भीतर उतर जाती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book