Bhartipur
(0)
Author:
U.R. AnanthamurthyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
299
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साहसिक और कलात्मक रचनाशीलता से औपन्यासिकता को नया संस्कार और आयाम देनेवाले विवादास्पद कन्नड़ लेखक यू.आर. अनन्तमूर्ति का बहुचर्चित उपन्यास है ‘भारतीपुर’।</p> <p>यों ‘भारतीपुर’ एक दक्षिण भारतीय बस्ती की कहानी है, लेकिन बस्ती तो एक बहाना है। दरअसल यह समसामयिक भारतीय जीवन के दहशत पैदा करनेवाले अनुभवों और तिलमिला देनेवाले यथार्थ का बहुत तीखा और एक हद तक अविश्वसनीय लगनेवाला दस्तावेज़ है।</p> <p>भारतीपुर नामक बस्ती में मंजुनाथ का एक मन्दिर है। वह मन्दिर केवल देवालय नहीं, उस बस्ती की सारी व्यवस्था का केन्द्र है—एक ऐसा केन्द्र और नियामक स्थल, जहाँ से ढोंग, पाखंड, स्खलन और दुराचार के अजस्र स्रोत फूटते हैं—सारी बस्ती के जीवन को समेटने, जकड़ने और यथास्थितिवाद को सुरक्षित बनाए रखने के लिए। ऐसे में सामाजिक परिवर्तन लाने की कोई भी भूमिका या उसका कोई प्रयत्न न केवल निष्फल होकर रह जाता है, बल्कि अपने पीछे श्रीपतिराय और अडिग जी जैसे लोगों की कुंठित और हताश पीढ़ी छोड़ जाता है।</p> <p>ईश्वर, पूँजी और पाखंड की मिलीभगत और उसकी कुत्सित सत्ता के असली चेहरे को उजागर करनेवाले इस उपन्यास की सबसे बड़ी शक्ति है—इसका सामाजिक सन्दर्भ, जो रचना को तो अतिरिक्त ऊर्जा देता ही है, उपन्यास को बेहद प्रासंगिक भी बनाता है। गहरी संवेदना, मार्मिक भाषा, भेदक सामाजिक दृष्टि और साहसिक रचनाशीलता के लिए विख्यात अनन्तमूर्ति का यह उपन्यास भी हिन्दी पाठकों के लिए एक नया अनुभव देता है—‘संस्कार’ की ही तरह।
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साहसिक और कलात्मक रचनाशीलता से औपन्यासिकता को नया संस्कार और आयाम देनेवाले विवादास्पद कन्नड़ लेखक यू.आर. अनन्तमूर्ति का बहुचर्चित उपन्यास है ‘भारतीपुर’।</p>
<p>यों ‘भारतीपुर’ एक दक्षिण भारतीय बस्ती की कहानी है, लेकिन बस्ती तो एक बहाना है। दरअसल यह समसामयिक भारतीय जीवन के दहशत पैदा करनेवाले अनुभवों और तिलमिला देनेवाले यथार्थ का बहुत तीखा और एक हद तक अविश्वसनीय लगनेवाला दस्तावेज़ है।</p>
<p>भारतीपुर नामक बस्ती में मंजुनाथ का एक मन्दिर है। वह मन्दिर केवल देवालय नहीं, उस बस्ती की सारी व्यवस्था का केन्द्र है—एक ऐसा केन्द्र और नियामक स्थल, जहाँ से ढोंग, पाखंड, स्खलन और दुराचार के अजस्र स्रोत फूटते हैं—सारी बस्ती के जीवन को समेटने, जकड़ने और यथास्थितिवाद को सुरक्षित बनाए रखने के लिए। ऐसे में सामाजिक परिवर्तन लाने की कोई भी भूमिका या उसका कोई प्रयत्न न केवल निष्फल होकर रह जाता है, बल्कि अपने पीछे श्रीपतिराय और अडिग जी जैसे लोगों की कुंठित और हताश पीढ़ी छोड़ जाता है।</p>
<p>ईश्वर, पूँजी और पाखंड की मिलीभगत और उसकी कुत्सित सत्ता के असली चेहरे को उजागर करनेवाले इस उपन्यास की सबसे बड़ी शक्ति है—इसका सामाजिक सन्दर्भ, जो रचना को तो अतिरिक्त ऊर्जा देता ही है, उपन्यास को बेहद प्रासंगिक भी बनाता है। गहरी संवेदना, मार्मिक भाषा, भेदक सामाजिक दृष्टि और साहसिक रचनाशीलता के लिए विख्यात अनन्तमूर्ति का यह उपन्यास भी हिन्दी पाठकों के लिए एक नया अनुभव देता है—‘संस्कार’ की ही तरह।
Book Details
-
ISBN9788183614665
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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उपन्यासकार रांगेय राघव ने ‘सीधा सादा रास्ता’ और ‘कब तक पुकारूँ’ जैसे समकालीन विषय-वस्तु पर आधारित उपन्यासों के साथ ऐतिहासिक उपन्यासों से भी हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है। अपनी मार्क्सवादी विश्व-दृष्टि के आधार पर वे प्रत्येक विषय को अपने ख़ास नज़रिए से चित्रित करते हैं।
‘चीवर’ उनके प्रमुखतम ऐतिहासिक उपन्यासों में से एक है। इसमें उन्होंने हर्षवर्धन काल के पतनशील भारतीय सामन्तवाद को रेखांकित किया है। ब्राह्मण और बौद्ध मतों के परस्पर संघर्ष के साथ-साथ मालव गुप्तों, वर्धनों और मौखरियों के बीच राजनीतिक सत्ता के लिए होनेवाला संघर्ष भी हमें यहाँ दिखाई देता है।
भाषा के स्तर पर यह उपन्यास सिद्ध करता है कि शब्दावली अगर घोर तत्समप्रधान हो तब भी उसमें रस की सर्जना की जा सकती है—बशर्ते लेखनी किसी समर्थ रचनाकार के हाथ में हो। यह इस उपन्यास की प्रवहमान भाषा का ही कमाल है कि इसमें विचरनेवाले पात्र, वह चाहे राज्यश्री हो या हर्षवर्धन या कोई और हमारी स्मृति पर अंकित हो जाते हैं।
Amitav Ghost
- Author Name:
Supriya Deep
- Rating:
- Book Type:

- Description: She is not aware that she is different. Priyakshee, an it professional, could just see flashes of the future In her dreams. Still, she couldn't save her mother; her father was far dead. The cover-faced, self-healer fighter with the aegishjalmur tattoo on his calf, negative, appears in her dreams and soon in real life. He protects her from attacks no one else knows about; tells her about her dead mother residing in his world: midlife-the ghost-world; falls for her against the 'ghost law of protectors'. Together they discover that priyakshee, like her mother, is a member of Jiva, a hidden society with the power of ghost-immortality. To keep her safe from himself, negative pursues her to marry her boss Amit who has developed an interest in her because she could prevision like amit's grandmother. On the seventh day of their engagement, priyakshee is found missing, Amit is convinced of her murder and after reading about negative in her diary, which says that priyakshee is captured in the ghost world, currently in eternal sleep waiting for Amit and negative to come and rescue her, Amit decides to prove her schizophrenic. Is negative really an imagination of priyakshee or she holds a key to power everyone in midlife would like to have? Why does priyakshee go missing? Does Amit get rid of her after knowing about her schizophrenia? Or does he just want Exemption from accusation to go and find priyakshee? 'Amitav ghost' Breaks the stereotype, rediscovers the concept of ghost, swings between psychological realism and fantasy, and keeps the reader guessing whether everything about negative is true or it's priyakshee's imagination.
Tedhi Lakeer
- Author Name:
Ismat Chugtai
- Book Type:

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Description:
इस्मत चुग़ताई का यह उपन्यास कई अर्थों में बहुत महत्त्व रखता है। पहला तो ये कि यह उपन्यास इस्मत के और सभी उपन्यासों में सबसे सशक्त है। दूसरे, इस्मत को क़रीब से जाननेवाले, इसे उनकी आपबीती भी मानते हैं। स्वयं इस्मत चुग़ताई ने भी इस बात को माना है। वह स्वयं लिखती हैं, ‘‘कुछ लोगों ने ये भी कहा कि ‘टेढ़ी लकीर’ मेरी आपबीती है—मुझे ख़ुद आपबीती लगती है। मैंने इस नाविल को लिखते वक़्त बहुत कुछ महसूस किया है। मैंने शम्मन के दिल में उतरने की कोशिश की है, इसके साथ आँसू बहाए हैं और क़हक़हे लगाए हैं। इसकी कमज़ोरियों से जल भी उठी हूँ। इसकी हिम्मत की दाद भी दी है। इसकी नादानियों पर रहम भी आया है, और शरारतों पर प्यार भी आया है। इसके इश्क़–मुहब्बत के कारनामों पर चटखारे भी लिए हैं, और हसरतों पर दु:ख भी हुआ है। ऐसी हालत में अगर मैं कहूँ कि मेरी आपबीती है तो कुछ ज़्यादा मुबालग़ा तो नहीं...’’
‘टेढ़ी लकीर’ एक किरदारी उपन्यास है जैसे ‘उमरावजान अदा’। ‘टेढ़ी लकीर’ की कहानी शम्मन के इर्द–गिर्द घूमती नज़र आती है। शम्मन को चूँकि अच्छा माहौल और अच्छी तरबीयत नहीं मिली, इसी वजह से उसके अन्दर इतना टेढ़ापन पैदा हो गया जहाँ उसकी नज़र में मुहब्बत मुहब्बत नहीं रही, रिश्ते रिश्ते नहीं रहे, जीवन जीवन नहीं रहा। सब कुछ मज़ाक़ बनकर रह गया। शम्मन के किरदार का विश्लेषण किया जाए तो वह मनोविकारों का गुलदस्ता नज़र आएगी। इस किरदार के बारे में इस्मत ने एक इंटरव्यू में कहा था ‘‘...ये नाविल जब मैंने लिखा तो बहुत बीमार थी, घर में पड़ी रहा करती थी। इस नाविल की हीरोइन ‘शम्मन’ क़रीब–क़रीब मैं ही हूँ। बहुत–सी बातें इसमें मेरी हैं। वैसे आठ–दस लड़कियों को मैंने इस किरदार में जमा किया है, और एक लड़की को ऊपर से डाल दिया है। जो मैं हूँ। इस नाविल के हिस्सों के बारे में मैं सिर्फ़ इतना बता सकती हूँ कि कौन–से हिस्से मेरे हैं और कौन–से दूसरों के !...’’
इस उपन्यास को इस्मत चुग़ताई ने उन यतीम बच्चों के नाम समर्पित किया है जिनके अभिभावक जीवित हैं। दरअसल यह व्यंग्य है उन माता–पिताओं पर जो बच्चे तो पैदा कर लेते हैं पर पालन–पोषण ठीक से नहीं करते। इन्हीं कारणों से यह उपन्यास उर्दू भाषा में जितना लोकप्रिय हुआ, उम्मीद है हिन्दी के पाठकों में भी लोकप्रिय होगा।
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