Bhukhmaroo
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दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी। भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं। ‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है। इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।
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दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी।
भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं।
‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है।
इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।
Book Details
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ISBN9789360864248
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Pages168
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘स्वप्न और सत्य’, ‘चार दिन की’, ‘कालू’, ‘माई’, ‘करिए छिमा’, ‘ज़िलाधीश’, ‘दो बहनें’, ‘मसीहा’ एवं ‘मेरा बेटा’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
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