Jawahar Navodaya Vidyalaya Kaksha-6 Solved Papers 2024-2005
(0)
₹
295
₹ 236 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9788197094682
-
Pages232
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Louis Braille
- Author Name:
Pratyush Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Police (UP) Arakshi Bharti Pareeksha 3000+ MCQs | 21 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Pt. Deendayal Upadhyaya
- Author Name:
Mahesh Chandra Sharma
- Book Type:

- Description: ‘‘हमारी राष्ट्रीयता का आधार ‘भारत माता’ हैं, केवल भारत नहीं। माता शब्द हटा दीजिए तो भारत केवल जमीन का एक टुकड़ा मात्र रह जाएगा। इस भूमि का और हमारा ममत्व तब आता है, जब माता वाला संबंध जुड़ता है। कोई भी भूमि तब तक देश नहीं कहला सकती, जब तक कि उसमें किसी जाति का मातृक ममत्व, यानी ऐसा ममत्व, जैसा पुत्र का माता के प्रति होता है, न हो। वही देशभक्ति है, तथापि देशभक्ति का मतलब जमीन के टुकड़े के साथ प्रेम होना मात्र नहीं है, अन्यथा कई पशु-पक्षी भी तो अपने घर से बहुत प्रेम करते हैं। साँप अपना बिल नहीं छोड़ता, शेर माँद में ही निवास करता है, पक्षी अपने घोेंसले में रोज लौट आते हैं, किंतु वे देशभक्त हैं, ऐसा नहीं कहा जा सकता। मानव भी जहाँ रहता है, वहाँ से उसका कुछ-न-कुछ लगाव हो ही जाता है, फिर भी इतने मात्र से देशभक्ति नहीं आती। उन लोगों का प्रेम ही देशभक्ति कही जाएगी जो देश में एक जन के नाते संबद्ध हैं। पुत्र रूप एक जन और माता रूप भूमि के मिलन से ही देश की सृष्टि होती है। वही देशभक्ति है, जो अमर है।’’ —पं. दीनदयाल उपाध्याय
Elon Musk Ke Prerak Vichar
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: आपको जागने, भविष्य के बारे में उत्साहित होने और प्रेरित होकर जीने की आवश्यकता है। यदि आप सुबह उठते हैं और सोचते हैं कि भविष्य बेहतर होगा, तो यह एक उज्ज्वल दिन है। अन्यथा यह नहीं है। एक उद्यमी होना काँच खाने जैसा और मृत्यु के बाद अस्थियों को घूरने जैसा दुष्कर काम है। जो दिख रही है, वह आधी लड़ाई है। आपको इसके लिए कड़ी मेहनत करनी है और विफलता से डरना नहीं है। ज्यादातर लोग जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा सीख सकते हैं। नतीजे पर ध्यान केंद्रित न करें, अपने काम पर पूरा ध्यान केंद्रित करें, ताकि प्रत्येक कार्य पूरा हो जाने पर आपको एक कदम आगे बढ़ा दे, भले ही यह एक छोटा कदम हो। —इसी पुस्तक से
Mridula Behari Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Mridula Behari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
CHITRAKALA KARNA SEEKHEN
- Author Name:
PUSHPA TETE
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kyon Papa Kyon?
- Author Name:
Chitra Manglik Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tashkent Uttargatha "ताशकंद उत्तरगाथा" Book in Hindi
- Author Name:
Neerja Madhav
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Super Genius Computer Learner-8
- Author Name:
Manuj Bajaj +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
That Night: चार सहेलियाँ, बीस साल: एक डरावना रहस्य (Hindi Translation)
- Author Name:
Nidhi Upadhyay
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC Bihar Lok Seva Aayog Samanya Adhyayan Prarambhik Pareeksha "General Studies Prelims" 1992 To 2023 Solved Papers
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Main Nastik Kyon Hoon? (Hindi Translation of Why I Am An Atheist?)
- Author Name:
Bhagat Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Manchahe Lakshya Prapt Karne Ki Jadue Pustak
- Author Name:
Jack Canfield, Ram Ganglani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
PRATHAM EVEREST VIJETA EDMUND HILLARY
- Author Name:
Sandeep Kumar
- Book Type:

- Description: "विश्व के सर्वोच्च पर्वत शिखर पर सबसे पहले कदम रखनेवाले सर एडमंड हिलेरी के अंदर इस साहसिक कार्य का जज्बा कूटकूटकर भरा था, लेकिन इस उपलब्धि को हासिल करने के बाद भी उनका स्वभाव बहुत सहज और सरल रहा। सर एडमंड हिलेरी ने 29 मई, 1953 को केवल 33 साल की आयु में नेपाल के पर्वतारोही शेरपा तेनजिंग नार्गे के साथ माउंट एवरेस्ट पर पहली बार कदम रखा था। न्यूजीलैंड में 20 जुलाई, 1919 को जनमे सर हिलेरी को स्कूल के दिनों से ही पर्वतारोहण का शौक था। उन्होंने एवरेस्ट यात्रा के बाद हिमालय ट्रस्ट के माध्यम से नेपाल के शेरपा लोगों के लिए कई सहायताकार्य भी किए। उन्होंने 1956, 1960, 1961, 1963 और 1965 में भी हिमालय की अन्य चोटियों पर पर्वतारोहण किया था। भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया था। 1985 में हिलेरी को भारत में न्यूजीलैंड का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। वे बँगलादेश में न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त और नेपाल में राजदूत भी रहे। नेपाल सहित कई अन्य देशों ने भी उन्हें अपने राष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित किया। इस पुस्तक में सर एडमंड हिलेरी की रोमांचक जीवनकथा का वर्णन है, जो रोमांचक तो है ही, साथ ही उत्साहितप्रोत्साहित करनेवाली है।"
Modon Se Gujarte Huye "मोड़ों से गुजरते हुए" Book In Hindi
- Author Name:
Jyoti Jha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhasha Sanshay-Shodhan
- Author Name:
Kamlesh Kamal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
75 Mahila Swatantrata Senani "75 महिला स्वतंत्रता सेनानी" Book in Hindi - Mamta Chandrasekhar
- Author Name:
Mamta Chandrasekhar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JPSC Jharkhand Preliminary Examination-2024 General Studies Paper 1 & 2 | 20 Model Papers with (Previous Years Solved Papers 2003–2021)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dhai Beegha Zameen
- Author Name:
Smt. Mridula Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jagadguru Shri Shankaracharya
- Author Name:
Deendayal Upadhyay
- Book Type:

- Description: "हमारे राष्ट्र निर्माताओं में जगद्गुरु श्री शंकराचार्य का स्थान बहुत ऊँचा है। कई विद्वानों ने तो उन्हें आधुनिक हिंदू धर्म का जनक ही कहा है। शंकराचार्य ने समस्त हिंदू-राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने एवं उसे संगठित करने का प्रयास किया। देश के चारों कोनों पर चार धामों के प्रति श्रद्धा केंद्रित करते हुए उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष की, मातृ-भू की मूर्ति जन-जन के हृदय पर अंकित कर दी। पंचायतन का पूजन प्रारंभ कर विभिन्न संप्रदायों को एक-दूसरे के आराध्य देवों के प्रति केवल सहिष्णुता का भाव ही नहीं तो सभी देवताओं के प्रति अपने इष्टदेव के माध्यम से वही श्रद्धा एवं आदर का भाव व्यक्त करने को प्रेरित किया, इसके अनुसार प्रत्येक पाँचों देवताओं—विष्णु, शुक्र, शक्ति, गणपति और सूर्य की पूजा करता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार अपने इष्टदेव को बीच में तथा चारों ओर अन्य चार देवताओं को रखकर पूजन करने की उसे छूट है। चार धामों के समान ही उन्होंने समाज को धर्म मार्ग पर नियंत्रित एवं अनुशासित रखने के लिए चार शंकराचार्यों की अध्यक्षता में भारत के चारों कोनों में चार मठ स्थापित किए। —दीनदयाल उपाध्याय
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book