Sarabjit Singh : A Case of Mistaken Identity
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Author:
Awaish SheikhPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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Book Details
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ISBN9788126723973
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Pages199
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Book Type:

- Description: "माना जाता है कि कथा-साहित्य का उदय संभवत: कहानी-लेखन से संभव हो सका है। यह भी माना जाता है कि उपन्यास का उदय लंबी कहानियों के लेखन के प्रादुर्भाव के साथ-साथ हुआ है, किंतु कहानी और उपन्यास के बीच जो खास अंतर है, उसे समझने के लिए ज्यादा उलझन का सामना नहीं करना पड़ता। दरअसल कहानी जीवन तथा समाज के किसी विशेष भाग को विश्लेषित करती है, जबकि अर्नेस्ट ए. बेकर ने उपन्यास की परिभाषा देते हुए उसे गद्यबद्ध कथानक के माध्यम द्वारा जीवन तथा समाज की व्याख्या का सर्वोत्तम साधन बताया है। उपन्यास लिखने के पीछे समाज में कुछ ऐसी अप्रिय व हिंसक घटनाओं का बढ़ जाना है, जो लोकतंत्र को सीधे चुनौती देती नजर आती हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की गतिविधियाँ इनके निराकरण की अपेक्षा एक प्रकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनका समर्थन करती नजर आती हैं। उपन्यास 'सर्जिकल स्ट्राइक' लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक जज्बाती जंग है। उपन्यास में पुलवामा के आतंकी हमले की पृष्ठभूमि मौजूद है, यह हकीकत है। उपन्यास का घटनाक्रम फरवरी से मई के पूर्वार्ध 2019 तक सिमटा है। बेहद रोमांचक एवं कथारस से भरपूर एक उपन्यास।"
Swadheenta Sangharsh Aur Police
- Author Name:
Ajay Shankar Pandey
- Book Type:

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Description:
इस पुस्तक में अत्यन्त विरोधाभासपूर्ण मनःस्थिति से गुज़र रहे समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करनेवाले तंत्र की सफलता या असफलता का मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है। एक ऐसे समाज में शान्ति-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना उतना दुष्कर कार्य नहीं है, जो प्रशासनिक एवं पुलिस ढाँचे को अपना ही सृजन एवं अंग स्वीकृत करता हो; परन्तु जिस समाज की मनोदशा यह रही हो कि प्रशासनिक तंत्र उसके लक्ष्यों के मार्ग में बाधक है, उनका दुश्मन है, उसमें शान्ति-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना अत्यन्त कठिन एवं दुष्कर कार्य अवश्य होता है।
जिस समाज में शान्ति छोड़कर या प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देकर अपना लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद हो, ऐसे मनोभावों वाले समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना किस प्रकार, कितनी सफलता के साथ सम्भव हो सका?—निष्कर्षात्मक रूप में ऐसे मूल प्रत्ययों को विश्लेषणात्मक रूप से स्थापित करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
पुस्तक में राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलन एवं विचारधारा को चरणबद्ध तरीक़े से विवेचित किया गया है। राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रत्येक चरण की विवेचना के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में अपराध स्थिति एवं पुलिस तंत्र के गठन एवं उनमें होनेवाले परिवर्तनों को भी विवेचना का विषय बनाया गया है। यह देखने एवं मूल्यांकित करने का प्रयास किया गया है कि राष्ट्रीय आन्दोलन की विचारधारा एवं राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं ने अपराध स्थिति को कहाँ तक प्रभावित किया है। पुलिस तंत्र के ढाँचे में होनेवाले परिवर्तनों को भी राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं, अपराध स्थिति पर उसके अनुवर्ती प्रभाव के दृष्टिकोण से विवेचित करने का प्रयास किया गया है।
Gandhi Aur Samaj
- Author Name:
Giriraj Kishore
- Book Type:

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Description:
गांधी के जीवन और विरोधाभासों को देखें तो कहा जा सकता है कि उनका व्यक्तित्व और दर्शन एक सतत बनती हुई इकाई था। एक निर्माणाधीन इमारत जिसमें हर क्षण काम चलता था। उनका जीवन भी प्रयोगशाला था, मन भी। एक अवधारणा के रूप में गांधी उसी तरह एक सूत्र के रूप में हमें मिलते हैं जिस तरह मार्क्स; यह हमारे ऊपर है कि हम अपने वर्तमान और भविष्य को उस सूत्र से कैसे समझें।
यही वजह है कि गोली से मार दिए जाने, बीच-बीच में उन्हें अप्रासंगिक सिद्ध करने और जाने कितनी ऐतिहासिक ग़लतियों का ज़िम्मेदार ठहराए जाने के बावजूद वे बचे रहते हैं; और रहेंगे। उनकी हत्या करनेवाली ताक़तों के वर्चस्व के बाद भी वे होंगे। वे कोई पूरी लिखी जा चुकी धर्म-पुस्तिका नहीं हैं, वे जीने की एक पद्धति हैं जिसका अन्वेषण हमेशा जारी रखे जाने की माँग करता है।
‘पहला गिरमिटिया’ लिखकर गांधी-चिन्तक के रूप में प्रतिष्ठित हुए, वरिष्ठ हिन्दी कथाकार गिरिराज किशोर ने अपने इन आलेखों, वक्तव्यों और व्याख्यानों में उन्हें अलग-अलग कोणों से समझने और समझाने की कोशिश की है। ये सभी आलेख पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग मौक़ों पर लिखे गए हैं; इसलिए इनके सन्दर्भ नितान्त समकालीन हैं; और आज की निगाह से गांधी को देखते हैं। इन आलेखों में ‘व्यक्ति गांधी’ और ‘विचार गांधी’ के विरुद्ध इधर ज़ोर पकड़ रहे संगठित दुष्प्रचार को भी रेखांकित किया गया है; और उनके हत्यारे को पूजनेवाली मानसिकता की हिंस्र संरचना को भी चिन्ता व चिन्तन का विषय बनाया गया है।
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