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Author:
Ramkishor SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास’ पुस्तक नए अनुसन्धानों, विमर्शों के परिप्रेक्ष्य में समाज सापेक्षता तथा कला-मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई है। इसमें हिन्दी भाषी प्रान्तों के अलावा अन्य प्रान्तों में रहनेवाले, हिन्दीतर भारतीय भाषाओं के प्रयोक्ता लेखकों एवं कवियों की रचनाओं को समाहित किया गया है।</p> <p>नई विधाओं जैसे हिन्दी गज़ल, नवगीत, अनुगीत, हाइकू के रचना-शिल्प पर समुचित प्रकाश डाला गया है।</p> <p>स्वतंत्रता के बाद के ऐसे रचनाकारों की रचनाओं पर विचार किया गया है जो आन्दोलनों से न जुड़कर स्वतंत्र लेखन कर रहे थे। रचनाकारों तथा रचनाओं का मूल्यांकन दुराग्रहमुक्त होकर निष्पक्ष भाव से किया गया है।</p> <p>हिन्दी और उर्दू का गहरा रिश्ता है, अतः हिन्दी के अध्येताओं को उर्दू साहित्य से भी परिचित होना चाहिए, इसी दृष्टि से उर्दू साहित्य का अति संक्षिप्त इतिहास दर्शाया गया हैं। समकालीन अनेक रचनाओं को शामिल किया गया है जो साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट हैं किन्तु साहित्येतिहासों में जिनकी उपेक्षा की गई है। आधुनिक युग में ब्रज तथा अवधी साहित्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला गया है। विवेचन की भाषा-शैली स्पष्ट, सुबोध तथा निष्पक्ष है। हिन्दी साहित्य के समग्र इतिहास में काव्य-प्रवृतियों का अभिनव दृष्टि से मूल्यांकन किया गया है। नए विमर्शों तथा पुनर्पाठ की दृष्टि से नई सामग्री का समावेश भी किया गया है। हिन्दी ग़ज़ल, हाइकू, बोलियों के साहित्य को भी यथास्थान अंकित किया गया है।
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हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास’ पुस्तक नए अनुसन्धानों, विमर्शों के परिप्रेक्ष्य में समाज सापेक्षता तथा कला-मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई है। इसमें हिन्दी भाषी प्रान्तों के अलावा अन्य प्रान्तों में रहनेवाले, हिन्दीतर भारतीय भाषाओं के प्रयोक्ता लेखकों एवं कवियों की रचनाओं को समाहित किया गया है।</p>
<p>नई विधाओं जैसे हिन्दी गज़ल, नवगीत, अनुगीत, हाइकू के रचना-शिल्प पर समुचित प्रकाश डाला गया है।</p>
<p>स्वतंत्रता के बाद के ऐसे रचनाकारों की रचनाओं पर विचार किया गया है जो आन्दोलनों से न जुड़कर स्वतंत्र लेखन कर रहे थे। रचनाकारों तथा रचनाओं का मूल्यांकन दुराग्रहमुक्त होकर निष्पक्ष भाव से किया गया है।</p>
<p>हिन्दी और उर्दू का गहरा रिश्ता है, अतः हिन्दी के अध्येताओं को उर्दू साहित्य से भी परिचित होना चाहिए, इसी दृष्टि से उर्दू साहित्य का अति संक्षिप्त इतिहास दर्शाया गया हैं। समकालीन अनेक रचनाओं को शामिल किया गया है जो साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट हैं किन्तु साहित्येतिहासों में जिनकी उपेक्षा की गई है। आधुनिक युग में ब्रज तथा अवधी साहित्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला गया है। विवेचन की भाषा-शैली स्पष्ट, सुबोध तथा निष्पक्ष है। हिन्दी साहित्य के समग्र इतिहास में काव्य-प्रवृतियों का अभिनव दृष्टि से मूल्यांकन किया गया है। नए विमर्शों तथा पुनर्पाठ की दृष्टि से नई सामग्री का समावेश भी किया गया है। हिन्दी ग़ज़ल, हाइकू, बोलियों के साहित्य को भी यथास्थान अंकित किया गया है।
Book Details
-
ISBN9789388211338
-
Pages487
-
Avg Reading Time16 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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"जंगल और जंगल के अनोखे जीव-जंतु कहानियाँ में आज भी बाल पाठकों की पहली पसंद होते हैं। शायद यही कारण रहा है कि ‘पंचतंत्र’ एवं ‘जातक कथाएँ’ जैसे ग्रंथ आज भी लोकप्रिय है। प्रस्तुत पुस्तक में बाल पाठकों की इसी रुचि को ध्यान में रखकर ‘जंगल’ और जंगल में रहनेवाले अनेक अद्भुत एवं विचित्र जीवों की कहानियों को संग्रहीत किया गया है। ये कहानियाँ मनोरंजक और रोचकता के साथ-साथ बच्चों को नैतिक ज्ञान, संस्कार, धर्म, प्रेम और त्याग का पाठ भी पढाएँगी। प्रस्तुत पुस्तक के रोचक एवं सरल बनाने हेतु सरल भाषा एवं सुंदर चित्रों का प्रयोग किया गया है। अतः कहना अनुचित नहीं होगा कि पुस्तक आयु वर्ग के लिए उपयोगी होगी। "
Kargil
- Author Name:
Rachna Bisht Rawat
- Book Type:

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कारगिल युद्ध की बीसवीं वर्षगाँठ पर इसके वीर सैनिकों की कहानियों के जरिए बेहद ठंडे युद्धक्षेत्र का दोबारा अनुभव कीजिए। असहाय पैराट्रूपर के एक समूह ने अपनी ही पोजीशन पर बोफोर्स गनों से फायर करने को क्यों कहा? पालमपुर का एक वृद्ध व्यक्ति अपने शहीद फौजी बेटे को न्याय दिलाने के लिए आखिर क्यों लड़ रहा है? एक शहीद जवान का पिता हर साल एक कश्मीरी युवती के घर क्यों जाता है? ‘कारगिल’ पर लिखी यह पुस्तक आपको ऐसे दुर्गम पर्वत शिखरों पर ले जाती है, जहाँ भारतीय सेना ने कुछ रक्तरंजित लड़ाइयाँ लड़ीं। इस युद्ध को लड़नेवाले जवानों और शहीदों के परिवारवालों से साक्षात्कार के बाद रचना बिष्ट रावत ने अदम्य मानवीय साहस दिखानेवाली ये कहानियाँ लिखी हैं, जिनका सरोकार केवल वर्दीधारियों से नहीं, बल्कि उन्हें सबसे ज्यादा प्यार करनेवाले लोगों से भी है। अप्रतिम साहस की कहानियाँ सुनाती यह पुस्तक हमारे लिए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले 527 युवा बहादुरों के अलावा उन शूरवीरों को भी एक श्रद्धांजलि है, जो इस आहुति को देने के लिए तैयार बैठे थे।
Poorvi Africa Ka Praveshdwar Uganda
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

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"युगांडा अफ्रीका का नैसर्गिक सुंदरता और जैव-विविधता से परिपूर्ण देश है जिसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल ने ‘अफ्रीका का मोती’ तक कहा है। यह नील नदी का स्रोत है, जो दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। रंग-बिरंगी तितलियों से लेकर पहाड़ी गोरिल्ला, लुप्तप्राय प्रजातियों के घर के रूप में और एक वैश्विक पर्यटक केंद्र के रूप में युगांडा आकर्षक गंतव्य है। युगांडा के बारे में एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया भर के शरणार्थियों का स्वागत अत्यंत खुले मन से करता है। उत्तम बात यह है कि जहाँ शरणार्थी सामाजिक सेवाओं का आनंद लेते हैं, वही वह स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकते हैं और काम कर सकते हैं। एक राष्ट्र के रूप में युगांडा ने अपनी चुनौतियों से मुकाबला कर, अपने मुश्किलों से भरे हुए अतीत को छोड़ते हुए देश को एक सक्षम, समृद्ध राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। एक अनुशासित, मेहनतकश राष्ट्र के रूप में युगांडा ने तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने लोगों को एक नई पारी के लिए न केवल तैयार किया, बल्कि एक नई जीवन-शैली के लिए प्रेरित किया। यह पुस्तक इस देश के विषय में समग्र जानकारी देती है। इसमें युगांडा की संस्कृति, अर्थव्यवस्था, रीति-रिवाज, इतिहास, भूगोल से लेकर वहाँ के पर्यटक स्थलों, शैक्षिक तंत्र, धार्मिक विविधता, भाषा, जैव-विविधता, राजनैतिक व्यवस्था की जानकारी सरल-सुबोध भाषा में दी है।
Rashtriya Swayamsevak Sangh : Swarnim Bharat Ke Disha-Sootra
- Author Name:
Sunil Ambekar
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यद्यपि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दीर्घ-यात्रा पर अनेक पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं, फिर भी संघ सदैव ही सुर्खियों में रहता है। हाल के दिनों में संघ के कामकाज को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है, क्योंकि एक ओर इन दिनों में बहुत से स्वयंसेवक सरकार में शीर्ष पदों पर पहुँचे हैं, वहीं दूसरी ओर संघ के हिंदू-राष्ट्र और एकात्मता के मूल विचार अब हमारे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की मुख्यधारा बन गए हैं। भारत के लिए संघ का दृष्टिकोण क्या है? यदि भारत एक हिंदू-राष्ट्र बन जाता है, तो इसमें मुसलमानों और अन्य धर्मों का क्या स्थान होगा? इतिहास-लेखन की संघ की परियोजना कितनी बड़ी है? क्या हिंदुत्व जाति की राजनीति को खत्म कर देगा? परिवार की बदलती प्रकृति और विभिन्न सामाजिक अधिकारों पसंघ का क्या दृष्टिकोण है? संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुनील आंबेकरजी ने इस पुस्तक में इन सवालों का विश्लेषण किया है। आंबेकरजी को तथ्यों की गहरी समझ है, इसी कारण से वे विचार की स्पष्टता और उसके विस्तार, दोनों पर ध्यान केंद्रित करने में सफल हुए हैं। एक स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने शाखा पद्धति में कार्य किया है और उसे अपने जीवन में जिया है, उसी के आधार पर संघ की आंतरिक कार्य-प्रणाली, निर्णय-प्रक्रिया और समन्वयक-दृष्टि पर गहराई से दृष्टिपात किया है। वास्तविक जीवन के अनुभवों से भरपूर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : स्वर्णिम भारत के दिशा-सूत्र’ उन सभी के लिए एक पठनीय पुस्तक है, जो संघ-शक्ति की कार्यप्रणाली और इसकी भविष्य की योजनाओं को समझने के इच्छुक हैं।
Rashtriya Swayamsevak Sangh : Swarnim Bharat Ke Disha-Sootra
Sunil Ambekar
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