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Author:
Bhairavprasad GuptPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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प्रस्तुत उपन्यास ह्रासशील सामन्तवाद को उसके सम्पूर्ण घिनौने पहलुओं के साथ, बड़ी बारीकी से हमारे समक्ष पेश करता है। इस ह्रासशील सामन्तवाद को उसकी सारी सड़ांध के साथ हम बड़े सरकार के चरित्र, उनके क्रियाकलापों, जो उनके अन्तःपुर से लेकर बाहर के परिवेश तक फैले हुए हैं, सामन्ती साम्राजी साँठ-गाँठ और उसके शिकार साधारण जनों की ज़िन्दगी तथा नरक की इस ज़िन्दगी से मुक्त होने की उनकी कोशिशों तथा मुक्त न हो पाने की स्थिति में उनकी छटपटाहट, प्रतिहिंसा आदि में देखते हैं। भैरव जी ने इस सारे परिदृश्य को यथार्थ के सही आलोक में बारीकी के साथ देखा और चित्रित किया है।
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प्रस्तुत उपन्यास ह्रासशील सामन्तवाद को उसके सम्पूर्ण घिनौने पहलुओं के साथ, बड़ी बारीकी से हमारे समक्ष पेश करता है। इस ह्रासशील सामन्तवाद को उसकी सारी सड़ांध के साथ हम बड़े सरकार के चरित्र, उनके क्रियाकलापों, जो उनके अन्तःपुर से लेकर बाहर के परिवेश तक फैले हुए हैं, सामन्ती साम्राजी साँठ-गाँठ और उसके शिकार साधारण जनों की ज़िन्दगी तथा नरक की इस ज़िन्दगी से मुक्त होने की उनकी कोशिशों तथा मुक्त न हो पाने की स्थिति में उनकी छटपटाहट, प्रतिहिंसा आदि में देखते हैं।
भैरव जी ने इस सारे परिदृश्य को यथार्थ के सही आलोक में बारीकी के साथ देखा और चित्रित किया है।
Book Details
-
ISBNBaandiPaperBack
-
Pages255
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीतते-न-बीतते उस पर केन्द्रित एक संवेदनशील, संयत और सार्थक औपन्यासिक कृति का रचा जाना एक आश्चर्य ही कहा जाएगा। कहानियों-कविताओं की बात अलग है, पर क्या उपन्यास जैसी विधा के लिए इतनी अल्प पक्वनावधि/जेस्टेशन पीरियड काफ़ी है? और क्या इतनी जल्द पककर तैयार होनेवाले उपन्यास से उस गहराई की उम्मीद की जा सकती है जो ऐसी मानवीय त्रासदियों को समेटनेवाले उपन्यासों में मिलती है? इनका उत्तर पाने के लिए आपको अमर देसवा पढ़नी चाहिए जिसने अपने को न सिर्फ़ सूचनापरक, पत्रकारीय और कथा-कम-रिपोर्ट-ज़्यादा होने से बचाया है, बल्कि दूसरी लहर को केन्द्र में रखते हुए अनेक ऐसे प्रश्नों की गहरी छान-बीन की है जो नागरिकता, राज्यतंत्र, भ्रष्ट शासन-प्रशासन, राजनीतिक निहितार्थों वाली क्रूर धार्मिकता और विकराल संकटों के बीच बदलते मनुष्य के रूपों से ताल्लुक़ रखते हैं। इस छान-बीन के लिए प्रवीण संवादों और वाचकीय कथनों का सहारा लेने से भरसक परहेज करते हैं और पात्रों तथा परिस्थितियों के घात-प्रतिघात पर ज़्यादा भरोसा करते हैं। इसीलिए उनका आख्यान अगर मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित किए जाने लायक़ सरकारी संवेदनहीनता और मौत के कारोबार में अपना लाभ देखते बाजार-तंत्र के प्रति हमें क्षुब्ध करता है, तो निरुपाय होकर भी जीवन के पक्ष में अपनी लड़ाई जारी रखनेवाले और शिकार होकर भी अपनी मनुष्यता न खोनेवाले लोगों के प्रति गहरे अपनत्व से भर देता है। संयत और परिपक्व कथाभाषा में लिखा गया अमर देसवा अपने जापानी पात्र ताकियो हाशिगावा के शब्दों में यह कहता जान पड़ता है, ‘कुस अस्ली हे... तबी कुस नकली हे। अस्ली क्या हे... खोज्ना हे।’ असली की खोज कितनी करुण है और करुणा की खोज कितनी असली, इसे देखना हो तो यह उपन्यास आपके काम का है।
The Hidden Hindu
- Author Name:
Akshat Gupta
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इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
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