Brahm Raksash Ka Nai
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‘ब्रह्मराक्षस का नाई’ पाँच दृश्यों वाला राजेश जोशी का एक बाल नाटक है। यह नाटक कुछ रोचक बाल अनुभवों को पठनीय और दृश्य-श्रव्य माध्यम के अनुकूल बनाता है। इस नाटक के संवाद कौतूहल जगाने वाले हैं। कह सकते हैं कि ‘ब्रह्मराक्षस का नाई’ बाल नाटक में एक आधुनिक विषयवस्तु को दिखाते हुए कल्पनाओं की उड़ान भरी गई है। इसमें एक गायक दल भी है जो पात्रों के संवादों को अपनी विलक्षणता के साथ यादगार बनाता है।
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‘ब्रह्मराक्षस का नाई’ पाँच दृश्यों वाला राजेश जोशी का एक बाल नाटक है। यह नाटक कुछ रोचक बाल अनुभवों को पठनीय और दृश्य-श्रव्य माध्यम के अनुकूल बनाता है। इस नाटक के संवाद कौतूहल जगाने वाले हैं। कह सकते हैं कि ‘ब्रह्मराक्षस का नाई’ बाल नाटक में एक आधुनिक विषयवस्तु को दिखाते हुए कल्पनाओं की उड़ान भरी गई है। इसमें एक गायक दल भी है जो पात्रों के संवादों को अपनी विलक्षणता के साथ यादगार बनाता है।
Book Details
-
ISBN9788126720712
-
Pages24
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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कविता का नगर चाहे बहुत भिन्न हो, उसमें कल्पना का तत्त्व बहुत अधिक या कम हो, लेकिन बाहर स्थित नगर से उसकी शक्ल थोड़ी-बहुत तो मिलती है। पर हर बार मेरी शक्ल को वास्तविक नगर की शक्ल से मिला-जुलाकर देखने की क़वायद फ़िज़ूल है। कई बार कवियों को भी यह भ्रम हो जाता है कि वे अपनी कविता में वास्तविक शहर के यथार्थ को समेट रहे हैं। उन्हें लगता है कि वो कविता में शब्दों से वो ही शहर बना सकते हैं जो वास्तविक शहर है। लेकिन दोनों के निर्माण में लगनेवाली सामग्री ही भिन्न है। जब भी वास्तविक शहर शब्दों में रूपान्तरित होता है, उसका चेहरा-मोहरा वही नहीं रहता जो उसका वास्तविक चेहरा है। यह शहर का पुनर्रचित चेहरा है। यह कविता का नगर है।
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