Karja Ke Khatir
(0)
Author:
Rana Pratap SinghPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
205 (18% off)
Available
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Stories
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Stories
Book Details
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ISBN9789385013737
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Pages112
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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प्रेमचन्द मनुष्य और मानवीय स्थितियों में दिलचस्पी रखते थे।... प्रेमचन्द के लिए मनुष्य की स्थिति ही समाज की स्थिति थी। उनकी कहानियों में मनुष्य को स्वयं में सम्पूर्ण इकाई के रूप में शायद ही कहीं प्रस्तुत किया गया हो। मनुष्य के अन्तर्मन की उथल-पुथल और दुविधाएँ हमेशा समाज और
आस-पास के माहौल से जुड़ी
होती हैं। यहाँ तक कि पारिवारिक सम्बन्धों को भी सामाजिक तर्कों से प्रभावित होता दिखाया गया है। उनका गहरा सामाजिक निरीक्षण उनकी कहानियों में झलकता है जिनमें उन्होंने हर 'प्रकार' के इनसानों को और लगभग हर व्यवसाय को शामिल किया है।
—विश्वनाथ एस. नरवणे
Gulmarg Gulzar Hoga
- Author Name:
Priyanka Vaidya
- Book Type:

- Description: यह किताब 34 कहानियों का संग्रह है। यह समर्पित है उन लोगों को जो गुलमर्ग के गुलज़ार होने का इंतज़ार कर रहे हैं, जो बिछड़ी हुई बच्ची की छोटी-छोटी चूड़ियों को देख ज़िंदगी का सफ़र तय करते हैं, वो औरत जो पति के इंतज़ार में बैठी है और उसकी दी हुई लालटेन से ज़िंदगी को रौशन करने की कोशिश कर रही है। एक साहित्य उत्सव में प्रिया उस पिता को मिलती है जिसकी बेटी ने कैन्सर से लड़ते हुए अपने प्राण त्याग दिए और वो प्रिया में अपनी बेटी को देखता है। ये संग्रह है उन लोगों के बारे में है जो विदेशों में देश की मिट्टी की महक ढूँढ रहे हैं, वो लोग जो माँ का बुना हुआ स्वेटर पहन विदेश की ठिठुरती शीत को सहने की कोशिश करते हैं, वही लोग जो रोज़ घर की तलाश में घर से निकलते हैं, मंडी की पराशर झील को लंदन के हाइड पार्क में ढूँढते हैं। हाँ माता-पिता ने ही तो वो दिल दिया जो सतरंगी आसमान को देख सके, उस कलाकार की ज़िंदगी का चित्र खींच सके जो प्रेमिका का चित्र बनाते-बनाते प्रेमिका को प्रेम करना ही भूल गया है। वो लड़की जो हज़ारों पन्ने लिखती है और फिर इस दौड़ को रोकने के लिए सारे पन्ने जला देती है, किताबों को हासिल करने के लिए ठंड में शिमला से चंडीगढ़ का सफ़र और सनवारा में बस के रुकने पर एक कप चाय की ललक। बिखरे तिनकों को जोड़ने के लिए कल्पना और प्रेरणा भी उन्हीं की देन है। वो लड़की जो बूढ़े माँ बाप को छोड़ शहर चली जाती है और वापिस लौटती है पिता की ख़ाली कुर्सी देखने के लिए, वक़्त ने उसे वक़्त पर उनकी क़द्र न करने की सज़ा दी, अब वो गुलमोहर के पेड़ से लिपट कर रोती है, मानो पिता ने गले लगाया हो। उस लड़के की कहानी जो पिता के घर छोड़ने के बाद पश्चात्ताप से भर आँसू बहाता है। नानी के सूने घर में अमावस्या में फैले अँधियारे को कौन दूर करेगा?
Woh Duniya
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी
है।‘वो दुनिया!’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘संन्यासी’, ‘दो मुँह की बात’, ‘बड़े दिन का उपहार’, ‘दूसरी नाक’, ‘मोटरवाली-कोयलेवाली’, ‘तूफान का दैत्य’, ‘कुत्ते की पूँछ’, ‘शिकायत’; ‘गुडबाई’, ‘दर्दे-दिल!’, ‘जहाँ हसद नहीं’, ‘नई दुनिया और वो दुनिया’।
Dhimi Wali Fast Passenger
- Author Name:
Mark Tully
- Book Type:

-
Description:
पचास से अधिक वर्षों तक भारतीय राजनीति और समाज को बेहद क़रीब से देखने-समझने वाले यशस्वी पत्रकार मार्क टली की दूसरी कथाकृति है—धीमी वाली फ़ास्ट पैसेंजर। इस किताब की कहानियों के लिए वह एक बार फिर अपनी मशहूर बेस्टसेलर, द हार्ट ऑफ़ इंडिया के इलाक़े में लौटते हैं, और हमें बीती सदी के आठवें दशक के उस दौर में ले जाते हैं, जब भारत चौराहे पर था और आर्थिक उदारीकरण की बयार बहने वाली थी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश की ग्रामीण दुनिया को रेखांकित करती ये कहानियाँ तमाम अविस्मरणीय लोगों की ज़िन्दगी का ख़ाका हैं—ऐसे साधारण लोग जो ढुलमुल हुकूमत, बेईमानी, भ्रष्टाचार और समाज में ऊँच-नीच जैसी ख़ामियों से पार पाने के तरीक़े खोजते हैं। सन्त रविदास का मन्दिर बनाने के लिए एक दब्बू दलित बुज़ुर्ग परम्पराओं को चुनौती देता है; एक किसान की साफ़गो और चतुर पत्नी अपने परिवार को अपने पति की मूर्खताओं से बचाती है; एक ख़त्म हो रही रेलवे लाइन का वजूद बचाने के लिए एक पूर्व प्रधानाध्यापक आम लोगों की लड़ाई का नेतृत्व करती है; एक राजनेता का बेटा इस सच से वाकिफ होता है कि राजनीति कुल मिलाकर पारिवारिक पेशा नहीं है। एक शान्तिप्रिय और निरुत्साही पुलिस सब-इंस्पेक्टर हत्या के एक हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाकर सबको चौंका देता है; एक अनीश्वरवादी शख़्स भिक्षु बन जाता है।
धीमी वाली फ़ास्ट पैसेंजर उत्तर भारत के गाँवों में लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की हलचलों के बारे में जोश और ज़हानत, संवेदना और करुणा के नज़रिये से दर्ज की गई कहानियों का बेहद दिलकश संग्रह है।
Bapu Katha Chaudas
- Author Name:
Madhukar Upadhyay
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- Description: Mahatma Gandhi's life story in Hindi by Madhuker Upadhyay.
Nahan
- Author Name:
Arun Prakash
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- Description: कुछ कहानीकार आलोचकों के प्रिय होते हैं, कुछ पाठकों के। अरुण प्रकाश पाठकों के ज़्यादा प्रिय लेखक रहे हैं। उनके लिखे की सराहना करने वाले पाठक बहुतायत मिलते हैं। भैया एक्सप्रेस, जल-प्रांतर, बेला एक्का लौट रही है, गज पुराण, नहान, भासा आदि उनकी बहुपठित-बहुचर्चित कहानियाँ रही हैं। इनकी 'हिचक' कहानी 'बहाव' पत्रिका में छापते हुए संपादक के रूप में अमरकांत ने लिखा था, 'छोटे-छोटे वाक्यों से रचना करना अरुण प्रकाश की विशेषता है जैसे चिडिय़ा अपार धैर्य के साथ तिनकों से खूबसूरत घोंसला बनाती है। इस कहानी में एक लड़की जूडो सीखना चाहती है और उसके माँ-बाप हिचक रहे हैं। मामूली जीवन से रचनाकार कुछ धागे निकालकर कला-कौशल से ऐसी कहानी बुनता है जिससे सार्थकता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं।' अरुण प्रकाश की कहानियों में हमारे समाज की विडंबना और विद्रुपता के चित्र अलग से नहीं दिखाए जाते बल्कि वे अंतर्गुम्फित होते हैं। सहजता के साथ गौरतलब और सार्थक बात कहना ही इस कथाकार की बड़ी विशेषता है। इस संग्रह में अरुण प्रकाश की आखरी दौर में लिखी गयी उन कहानियों को संकलित किया गया है जो उनके जीवनकाल में पुस्तकाकार नहीं आ पायी थीं। ये नयी सदी के आरंभिक काल में बदल रहे भारतीय समाज की कहानियाँ हैं। निश्चित रूप से इन कहानियों के बिना कथाकार अरुण प्रकाश पर समग्रता में बात नहीं हो सकती है।
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