Hawaon Ka Rukh
(0)
Author:
Murari SharmaPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
330
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बाणमूठ कहानी से राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में आए कहानीकार मुरारी शर्मा ने अब तक अपने चार कहानी संग्रहों और देबकू एक प्रेम कथा नामक उपन्यास से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपना योगदान सुनिश्चित किया है। इसी क्रम में पाँचवाँ कहानी-संग्रह है 'हवाओं का रुख'। इन कहानियों को पढ़ते हुए इस बात के संकेत मिलते हैं कि कहानीकार की रचना-प्रक्रिया कई स्तरों पर अपनी रचनात्मकता के नए आयाम खोज रही है। इन कहानियों के किरदार भले ही बड़े लोग न हों मगर ये कहानियाँ बड़ी चिन्ताओं की कहानियाँ अवश्य हैं। ये चिंताएँ कहानीकार मुरारी शर्मा की जीवन के प्रति प्राथमिकताओं के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करती हैं। ये कहानियाँ मनुष्य की त्रासद नियतियों की केन्द्रीयता के बावजूद अपने कहानीपन को बनाये रखती हैं इसलिए ये पाठकों को आकर्षित करती हैं। पाठ की रोचकता बनाये रखने में कहानीकार मुरारी शर्मा की समर्थ भाषा और वर्णन शैली भी अनिवार्य भूमिका निभाती नजर आती है। वैसे भी वे लोकभाषा में प्रचलित अनेक शब्दों का प्रयोग करते हुए वर्णन में रोचकता बनाये रखने में सिद्धहस्त हैं, ऐसा आभास उनकी पूर्व प्रकाशित अनेक कहानियों को पढ़ते हुए भी हो जाता है। इन कहानियों में भी लोक प्रचलित अनेक शब्दों, मुहावरों व लोकोक्तियों के प्रयोग भाषाई रोचकता को बनाये रखने में कामयाब रहे हैं। यह भाषा ही इनकी सबसे बड़ी ताकत है जो छोटे-छोटे जीवन प्रसंगों को सामान्य चरित्रों के माध्यम से एक बड़ी कहानी के रूप में सफलतापूर्वक रूपांतरित देने में सक्षम है। —डॉ. विजय विशाल
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बाणमूठ कहानी से राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में आए कहानीकार मुरारी शर्मा ने अब तक अपने चार कहानी संग्रहों और देबकू एक प्रेम कथा नामक उपन्यास से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपना योगदान सुनिश्चित किया है। इसी क्रम में पाँचवाँ कहानी-संग्रह है 'हवाओं का रुख'। इन कहानियों को पढ़ते हुए इस बात के संकेत मिलते हैं कि कहानीकार की रचना-प्रक्रिया कई स्तरों पर अपनी रचनात्मकता के नए आयाम खोज रही है। इन कहानियों के किरदार भले ही बड़े लोग न हों मगर ये कहानियाँ बड़ी चिन्ताओं की कहानियाँ अवश्य हैं। ये चिंताएँ कहानीकार मुरारी शर्मा की जीवन के प्रति प्राथमिकताओं के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करती हैं। ये कहानियाँ मनुष्य की त्रासद नियतियों की केन्द्रीयता के बावजूद अपने कहानीपन को बनाये रखती हैं इसलिए ये पाठकों को आकर्षित करती हैं। पाठ की रोचकता बनाये रखने में कहानीकार मुरारी शर्मा की समर्थ भाषा और वर्णन शैली भी अनिवार्य भूमिका निभाती नजर आती है। वैसे भी वे लोकभाषा में प्रचलित अनेक शब्दों का प्रयोग करते हुए वर्णन में रोचकता बनाये रखने में सिद्धहस्त हैं, ऐसा आभास उनकी पूर्व प्रकाशित अनेक कहानियों को पढ़ते हुए भी हो जाता है। इन कहानियों में भी लोक प्रचलित अनेक शब्दों, मुहावरों व लोकोक्तियों के प्रयोग भाषाई रोचकता को बनाये रखने में कामयाब रहे हैं। यह भाषा ही इनकी सबसे बड़ी ताकत है जो छोटे-छोटे जीवन प्रसंगों को सामान्य चरित्रों के माध्यम से एक बड़ी कहानी के रूप में सफलतापूर्वक रूपांतरित देने में सक्षम है। —डॉ. विजय विशाल
Book Details
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ISBN9788196779344
-
Pages104
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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