Gohanlagua
(0)
Author:
Naseem SaketiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
नसीम साकेती निरन्तर लेखन में सक्रिय हैं, शाश्वत मूल्यों को समेटता इनका कथा जगत् बहुआयामी रहा है। क़लम की नोक को स्पर्श करती इनकी जीवन्त कहानियाँ अपने समय के यथार्थ तथा मानव जीवन-मूल्यों को विभिन्न कोणों से पड़ताल करती विशिष्ट शैली में सुखद एहसास देती हैं।</p> <p>लेखक के मस्तिष्क की शिराओं ने छोटी-छोटी रोज़मर्रा की घटनाओं में से कथा-तत्त्वों के फूल चुनकर उनसे कथा के विभिन्न आकार के गुलदस्ते तैयार किए हैं। जिनसे आम आदमी की ज़िन्दगी की ख़ुशबू पाठक के मन-मस्तिष्क में भरकर दिल की गहराइयों में उतर जाती है और पाठक सोचने लगता है कि ऐसी घटनाओं तथा चरित्रों को तो हम अपने इर्द-गिर्द रोज़ देखते तथा महसूस करते हैं, जिसे लेखक ने शब्दों के माध्यम से कहानी का जामा पहना दिया है।</p> <p>
Read moreAbout the Book
नसीम साकेती निरन्तर लेखन में सक्रिय हैं, शाश्वत मूल्यों को समेटता इनका कथा जगत् बहुआयामी रहा है। क़लम की नोक को स्पर्श करती इनकी जीवन्त कहानियाँ अपने समय के यथार्थ तथा मानव जीवन-मूल्यों को विभिन्न कोणों से पड़ताल करती विशिष्ट शैली में सुखद एहसास देती हैं।</p>
<p>लेखक के मस्तिष्क की शिराओं ने छोटी-छोटी रोज़मर्रा की घटनाओं में से कथा-तत्त्वों के फूल चुनकर उनसे कथा के विभिन्न आकार के गुलदस्ते तैयार किए हैं। जिनसे आम आदमी की ज़िन्दगी की ख़ुशबू पाठक के मन-मस्तिष्क में भरकर दिल की गहराइयों में उतर जाती है और पाठक सोचने लगता है कि ऐसी घटनाओं तथा चरित्रों को तो हम अपने इर्द-गिर्द रोज़ देखते तथा महसूस करते हैं, जिसे लेखक ने शब्दों के माध्यम से कहानी का जामा पहना दिया है।</p>
<p>
Book Details
-
ISBN9788180319624
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Chot
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

-
Description:
चर्चित और सर्वप्रिय कथाकार चन्दन पाण्डेय की ये कहानियाँ बहुत तेज़ी से बदल रही इस दुनिया और उसके साथ ही बदल रहे मानवीय, पारिवारिक और सामाजिक सम्बन्धों के समीकरणों को बेहद निर्मम तटस्थता से उघाड़ती हैं। संग्रह की शीर्षक कथा ‘चोट’ में जो चोट है, वह अलग-अलग रूपों में संग्रह में शामिल सातों कहानियों में महसूस होती है। एक चोट है जो हममें से हर कोई या तो खा रहा है या किसी को दे रहा है।
‘चोट’ का अनिरुद्ध जिसने दफ़्तरी ऊब से ऊपर उठने और अपने तानाशाह-मिजाज़ अधिकारियों को चोट पहुँचाने का अपना एक खिलंदड़ा-सा तरीक़ा निकाला है, आख़िरकार अपने मक़सद में सफल तो होता है लेकिन नौकरी की क़ीमत पर। ‘दूब की वर्णमाला’ का नायक अपनी चोट के पीछे छिपकर ही गली के दबंगों से बचता है और अपने देनदारों से भी जो उसकी टाँग कटाकर ब्याज वसूलने की फ़िराक़ में थे।
‘गाँठ’ कहानी भी एक चोट पर ही ख़त्म होती है, जिसका लक्ष्य शहरी मध्यवर्ग की भीतरी जड़ता को तोड़ना है। ‘पितृपक्ष’ के जंगी पाण्डे की चोट तो शायद सबसे गहरी है। भारतीय समाज के जाति-समीकरणों में आए निर्णायक बदलाव को यह कहानी अत्यन्त कुशलता से चिन्हित करती है।
भाषा को नया करने और उसकी सम्प्रेषणीयता को वाक्य-दर-वाक्य विस्तृत करने की क्षमता चन्दन पाण्डेय की इन सभी कहानियों में बराबर दिखाई देती है। ‘शुभकामना का शव’ इस लिहाज से बेहद प्रभावशाली कहानी है; और अपनी विषय-वस्तु में इतनी भीषण कि आप सिहर उठते हैं।
‘वैधानिक गल्प’ और ‘कीर्तिगान’ जैसे उपन्यासों और कई असाधारण कहानियों से अपने कौशल का लोहा मनवा चुके चन्दन पाण्डेय का यह संग्रह निश्चय ही उनके पाठकों की उम्मीदों पर पूरा उतरेगा।
Bezubaan
- Author Name:
Subhash Sharma
- Book Type:

- Description: सुभाष शर्मा ने नवें दशक में युवा कथाकार के रूप में अपनी स्पष्ट पहचान बनाई है। जीवन के विभिन्न आयामों को काफी गहराई से देखने एवं समझने का माद्दा उनमें है। वे सामाजिक घटनाओं को ऐसी दृष्टि से देखते हैं जो समाज को आगे ले जाने वाली होती है। उनकी सोच-समझ कभी भी बने-बनाए साँचे में फिट नहीं होती क्योंकि वह जीवनानुभव से संबद्ध है। उनकी कहानी 'बेजुबान' नवें दशक की एक महत्त्वपूर्ण कहानी है। इसकी चर्चा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में होती रही है। समकालीन हिंदी कहानी से गुजरते हुए यह बात निर्विवाद रूप से कही जा सकती है कि सामाजिक अनुभवों का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है, तथा मानवीय दृष्टिबोध और अधिक गहरा। अपने आसपास बिखरे जीवन-यथार्थ को अनदेखा कर आज का कथाकार किसी अगम्य फलसफे को रचने में विश्वास नहीं रखता। कहना न होगा कि सुपरिचित कवि-कहानीकार सुभाष शर्मा के इस संग्रह की कहानियों को इसी श्रेणी में रखा जाएगा। इस संग्रह में सुभाष की दस कहानियाँ संगृहीत हैं और इनमें से प्रायः प्रत्येक कहानी भारतीय जन-जीवन की किसी-न-किसी विडंबना को उजागर करती है। आजादी के बाद हमारे चारों ओर जिस सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षिक तंत्र का निर्माण हुआ है, मनुष्य उसमें किसी शिकार की तरह छटपटा रहा है। इस तंत्र में मौजूद जल्लादों के अनेक चेहरे 'जल्लाद' नामक व्यक्ति से कहीं अधिक भयावह हैं। 'हिंदुस्तनवा', 'फरिश्ते', 'जमीन', 'आँचल' और 'जल्लाद' जैसी कहानियाँ अपनी गंभीर अर्थवत्ता से हमें बहुत गहरे तक झकझोरती हैं, और यदि 'फरिश्ते' के सहारे कहा जाए तो हर प्रकार की अमानवीय दुर्गंध के बावजूद मानवीय संबंधों की महक का भी बखूबी अहसास कराती हैं।
Tuti Ki Aawaz
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ तेज़ी से बदले और बदलते हुए समाज की कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ उन कारकों की गहरी और सघन पहचान करती हैं जिनके कारण, आज के समय में, आदमी तुच्छ और अपदार्थ हुआ है। उनकी कहानियाँ पढ़कर प्राय: ही भीष्म साहनी और अमरकान्त की बहुत-सी कहानियाँ याद आती हैं। हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ एक ओर यदि राजनीति में मनुष्य की स्थिति और नियति को परिभाषित करती हैं, वहीं वे एक कारक के रूप में साम्प्रदायिकता के उभार को भी पर्याप्त बेधक दृष्टि से देखती हैं।
ये कहानियाँ उनके तीन संग्रहों में छपकर अब एकाग्र रूप से यहाँ संकलित हैं। यहाँ कहानियों का क्रम आगे से पीछे की ओर है—यानी बाद की कहानियाँ पहले दी गई हैं और पहले की बाद में। लेकिन कहानियों के लेखन-प्रकाशन वर्ष की चिन्ता के बिना भी इनके पाठ में कलागत कोई बड़ा अन्तर सामान्यत: पकड़ में नहीं आता। यहाँ किसी लेखक की अभ्यास के लिए लिखित आरम्भिक कहानियों जैसा कुछ नहीं है। इन कहानियों की रेंज बड़ी और व्यापक है—पत्रकारिता, स्त्री-यातना के प्रसंग, रंगमंच की दुनिया, दलित चेतना का उभार आदि से मिलकर इन कहानियों की दुनिया बनती है।
हृषीकेश सुलभ की कहानियों की भाषा अपने पात्रों और उनके परिवेश से गहरे जुड़ी भाषा का उदाहरण है। बिम्ब, प्रतीक और दूसरे काव्योपकरणों के इस्तेमाल में न सिर्फ़ यह कि वे कोई परहेज़ नहीं बरतते, बहुत सजगता से वे इन्हें सहेजते और सँवारते हैं। किरणें यहाँ फुदकती हुई ओसकणों को चुगती हैं। इसी तरह जाड़े की धूप के टुकड़े पक्षियों की तरह फुदकते हैं। इन कहानियों की भाषा की सबसे बड़ी सफलता संवादों में दिखाई देती है। एक दूसरे में घुलती और एकाकार होती ब्योरों और संवाद की यह भाषा इन कहानियों की पठनीयता को आश्चर्यजनक उठान देती है। बदलते हुए समय का अक्स इन कहानियों में एहतियात से रखे गए साफ़ शीशे में झलकते अक्स की तरह देखा और पढ़ा जा सकता है।
—मधुरेश
Bin Kan Ka Hoichi
- Author Name:
koizumi yakumo
- Book Type:

-
Description:
जापानी कथा-साहित्य की दुनिया में अलौकिक प्रसंगों के आधुनिक प्रवर्तक कोइज़ुमी याकुमो की छह बहु-चर्चित कहानियों को इस संकलन में शामिल किया गया है। इनमें पाठकों को न सिर्फ़ अलौकिक दुनिया में विचरण करने का मौक़ा मिलेगा, बल्कि जापान के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को जानने-समझने का अवसर भी प्राप्त होगा।
1185 में घटित दान-नो-उरा के विध्वंसक युद्ध की पृष्ठभूमि में रचित ‘बिन कान का होइची’ युद्ध के विनाशकारी प्रभावों को बख़ूबी उभारती है। ‘बच्चों की रज़ाई’ दो अनाथ बच्चों की मार्मिक दास्तान है, जिन्हें ठिठुरती रात में मकान-मालिक बेघर कर उनकी रज़ाई छीन लेता है। बच्चे ठंड से दम तोड़ देते हैं लेकिन उनकी आत्मा रज़ाई में समा जाती है। हर रात रज़ाई से निकलती आवाज जैसे समाज से उसकी निष्ठुरता का हिसाब माँगती है। ‘बर्फ़ सुन्दरी’ और ‘सोएमोन भूला नहीं’ नैतिक मूल्यों के प्रति सजग कराती रोचक कहानियाँ हैं। ‘कुनीज़ाका की ढलान’ एक इच्छाधारी रकून कुत्ते की कहानी है जो यात्रियों को डराया करता है। इस कहानी के द्वारा रचनाकार का सन्देश है कि भय मनुष्य की आन्तरिक कमज़ोरी है जिससे भागना कायरता है। ‘आँसू बने मोती’ कहानी लीक से हटकर है, जो मनुष्य और प्रकृति के पारस्परिक घनिष्ठ सम्बन्ध को रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है।
रेखाचित्रों तथा टिप्पणियों से भरपूर कोइज़ुमी याकुमो की मूल जापानी कहानियों का यह हिन्दी अनुवाद बाल-पाठकों का मनोरंजन करने के साथ उन्हें नैतिक तथा चारित्रिक मूल्यों के प्रति सजग कराएगा।
Maseeha Ki Aankhein
- Author Name:
Balram
- Book Type:

-
Description:
‘मसीहा की आँखें’ में दो किस्म की लघुकथाएँ हैं—पहली लघुकहानी जैसी तो दूसरी लघुव्यंग्य जैसी। दोनों ही किस्म की रचनाएँ अपने लघु कलेवर में गहरी चोट करने की क्षमता से लैस हैं। बलराम का यह संग्रह सही अर्थों में लघुकथा को बहुविध स्थापित तो करता ही है, उसके प्रतिमानों को सर्जनात्मक लेखन से पुष्ट भी कर देता है। अब इसमें कोई सन्देह नहीं रह गया है कि लघुकथा एक सशक्त विधा है। संवाद, संवेदना, भाषा, चरित्र, शिल्प और परिवेश के वे सारे तत्त्व इसके भी वैसे ही अंग हैं, जैसे उपन्यास और कहानी के होते हैं। बलराम ने इसके जरिये उन सारी दलीलों को खारिज कर दिया है कि लघुकथा का कोई भविष्य नहीं। वास्तविकता तो यह है कि आज जब व्यक्ति के पास अधिक समय नहीं है, इस भागमभाग भरी जिन्दगी में यही विधा सबसे कारगर और प्रभावी है। ‘डायरी’ लघुकथा विधा की विकास यात्रा तो कराती ही है, उसके सौन्दर्यशास्त्रीय पक्ष पर भी गहरा मंथन करती है। उल्लेखनीय लघुकथाओं के विवेचन के साथ बलराम ने उनके प्रतिमानों को स्थिर, विन्यास को सुदृढ़ और सर्जनात्मक विधा के रूप में उनकी अन्तर्क्रिया को समझने की एक नई व्यवस्था दी है, जो न सिर्फ लेखकों के लिए उपयोगी है, बल्कि उनके लिए भी विशेष रूप से लाभप्रद है, जो लघुकथा को सही अर्थों में समझना चाहते हैं।
—ज्योतिष जोशी
Rocking Chair
- Author Name:
Aruna Sabbarwal
- Book Type:

- Description: Book
Gulabi Nadi Ki Macchaliyan
- Author Name:
Siniwali
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Hampi Express
- Author Name:
Vasudhendra
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಹಂಪಿ ಎಕ್ಸ್ಪ್ರೆಸ್ (ಕನ್ನಡ)-ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಸಣ್ಣ ಕಥೆಗಳ ಸಂಗ್ರಹವನ್ನು ಚಂದಾ ಪುಸ್ತಕದಿಂದ ಪ್ರಕಟಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಕೃತಿಯಲ್ಲಿ ವಾಸ್ತವಕ್ಕೆ ಹತ್ತಿರವಾದ ಮತ್ತು ಸಮಕಾಲೀನ ತಲ್ಲಣಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸುವ ಹಲವು ವಿಷಯಗಳನ್ನು ಕಥೆಗಾರ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಓದುಗರಿಗೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಕೃತಿಗೆ ಮಾಸ್ತಿ ಕಥಾ ಪ್ರಶಸ್ತಿ, ಬೇಂದ್ರೆ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಮತ್ತು ವಾಸುದೇವ ಭೂಪಾಲಂ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಲಭಿಸಿದೆ.
Pratinidhi Kahaniyan : Suryabala
- Author Name:
Suryabala
- Book Type:

- Description: सूर्यबाला सहज लेकिन बहुस्तरीय अभिव्यक्ति की कथाकार हैं। उनके पात्र अपने जीवन को जीते हुए उन सच्चाइयों को बयान कर जाते हैं जिन्हें विचारों और शिल्प-चातुर्य से बोझिल कथाएँ अकसर नहीं कर पातीं। उनका रचना-संकल्प अपने परिवेश और उसमें रची-बसी सहज मानवीय जिजीविषा के आलोड़नों से उठता है; इसलिए वे ऐसी कहानियाँ रच पाती हैं जिन्हें हर पाठक अपनी संवेदना की गहराई के साथ पढ़ सकता है, उनमें अपने किसी न किसी भाव-पक्ष का बिम्ब देख सकता है। कथा-कथन की पारम्परिक प्रवाहमयता को बरकरार रखते हुए वे उसे आधुनिक जीवन-संघर्षों की सहज वाहक बना देती हैं। पठनीयता जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है, जिसके चलते पाठक कब भीतर से बदलना शुरू हो जाता है, पता ही नहीं चलता। भाव-प्रवण स्थितियों को वे ऐसे तटस्थ कौशल से चित्रित करती हैं कि पाठक-मन में होनेवाला करुणा का उद्रेक निरर्थक सहानुभूति की तरफ नहीं, यथार्थ की विडम्बना के प्रति प्रतिकार और अस्वीकार की ओर मुड़ जाता है। वे किसी आन्दोलन की अनुयायी नहीं रहीं, उनके विमर्श का आधार उनका अपना सरोकार बोध है, जो उन्हें अपने वृत्त के बाहर से जुटाए गए आग्रहों की कृत्रिमता से भी बचाता है।
Manushya Hone Ke Sansmaran
- Author Name:
Devi Prasad Mishra
- Book Type:

- Description: ‘मनुष्य होने के संस्मरण’ की नवोन्मुख कथा प्रविधि जिसे देवी प्रसाद मिश्र अन्य कथा कहते हैं भारतीय ही नहीं विश्व साहित्य में आधुनिक फ़ेबल की वस्तु, संरचना और फैंटेसी को पाती दिखती है। यह समकालिक क़िस्सा है—संस्तरवान और तिर्यक। ये बहुत छोटी कहानियाँ हिन्दी की लघु कथा के सरलीकरण से बचकर अपनी ज़ेहनियत पाती रही हैं। खंड-खंड यातनाओं, प्रफुल्लताओं, और प्रतिरोध को अवाँगार्दीय अनुच्छेदों में कहने की अनिवार्यता, दबाव और ज़रूरत से इनकार किया जा सकता है क्या? इन छोटी कहानियों में कथात्मकता के पार जाता और फिर उनकी तरफ़ लौटता एक उड़ाउड़ापन है—कुछ काव्य, कुछ दार्शनिकता, कुछ मेटाफ़िज़िक्स जो काव्याख्यान-सा लगता है। कविता के साथ इन कथाओं के गहरे रिश्तों को झुठलाया नहीं जा सकता। ये कविता हैं तो कथा भी हैं और इसीलिए ये अन्य कथाएँ हैं। इन्हें एक ऐसे छोर से संगठित किया गया है जिसमें कथा कहने की स्वतन्त्रता हो लेकिन अन्तत: ग्रहण करें वे काव्याकार। ये कमतमता का उदाहरण हैं—मिनिमलिज़्म की मिसाल। अन्तर्वस्तु के बिखराव को खुलते हुए शिल्प में कह लेना इनकी उपलब्धि है। यह काव्योन्मुख फ़ेबलीय लोककथात्मक संरचना नयी वस्तु और विन्यास का आश्चर्यसंसार है जो प्रखर रूप से मौलिक और कृतिकारिता का अभूतपूर्व और उच्चतम है।
Kavita Ka Ganit
- Author Name:
Prakash Thapliyal
- Book Type:

-
Description:
‘कविता का गणित’ प्रकाश थपलियाल का दूसरा कहानी-संग्रह है। इसमें जहाँ कई वाकयों को कथाकार नये नजरिये के साथ पेश करता है वहीं उनका व्यंग्य भी पाठक को अन्दर तक उद्वेलित करता है। जीविका और श्रद्धा के बीच का द्वन्द्व ‘लाल सलाम’ जैसी कहानियों में खुलकर उभरता है तो ‘बोरी’ और ‘मजमा’ जैसी कहानियों में राजनीति और बाजार की सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते पात्र दिखाई देते हैं। ‘कीड़ा-जड़ी की खोज में’ कहानी कथाकार की किस्सागोई की अपनी ही तकनीक और बुनावट सामने लाती है। कुल मिलाकर इस कथा-संग्रह में हर कहानी का अपना ही सलीका और रंग है।
‘गाली’ कहानी को पढ़कर पाठक सोचने को मजबूर हो जाता है कि ऐसा क्यों है कि गाली हमेशा औरत को केन्द्र में रखकर ही दी जाती है। ‘लाल सलाम’ कहानी विचार को श्रेष्ठतम और अक्षुण्ण बताने वालों से सवाल करती है तो ‘भगवान इनसान’ में लेखक भगवान और इनसान के बीच का फर्क आसानी से सामने रख जाता है।
‘मजमा’ पैसे की ताकत की तरफ इंगित करती है और बताती है कि बाजार में कीमती वह चीज नहीं है जो ज्यादा काम की है बल्कि वह है जिसे ज्यादा काम की बताया जाता है। मुकाबला इसमें है कि बताने के इस फन में कौन कितना माहिर है।
थपलियाल का कहानी कहने का भी अपना भिन्न तरीका है जिसमें वे जब-तब प्रयोग करते दिखाई देते हैं। अपनी कहानियों के बारे में स्वयं उनकी धारणा है कि हिन्दी मुख्यधारा में पर्वतीय परिवेश के शब्दों की बहुत कमी है और पर्वतीय बोली-भाषा से अधिक से अधिक संवाद द्वारा यह कमी दूर की जा सकती है। इन कहानियों में उन्होंने यह संवाद बनाने की भी कोशिश की है। वे घटनाधर्मिता को कहानी की आत्मा मानते हैं और उनकी कहानियों की पठनीयता इसी घटनाधर्मिता से बनती है जिसे वे बिना हिंसा और मार-धाड़ के, मासूमियत से निभा जाते हैं और पाठक को नई दिशा में सोचने को प्रेरित करते हैं।
Rekhaon Mein Ruka Aakash
- Author Name:
Premlata
- Book Type:

-
Description:
कुछ अनसुलझे सवाल आदमी के मनो-मस्तिष्क में इतनी मज़बूती से जड़ें जमाए रखते हैं कि उनका हल हमारे सामने होता है लेकिन हम करते नहीं, कर नहीं पाते या हम करना नहीं चाहते और लगे रहते हैं एक अन्तहीन उधेड़बुन में।
हमारा जीवन रिश्तों में बँधा होता है लेकिन जीवन की मौजूदा चुनौतियों और तनावों के चलते रिश्तों को निभाना आज बहुत ही दुष्कर हो गया है।
‘रेखाओं में रुका आकाश’ हमारे अतीत और वर्तमान का कोरा सच है। यथार्थ से जुड़ी हुई ये वो कहानियाँ हैं, जिन्हें हम जीने के लिए अभिशप्त हैं।
इन कहानियों में मनुष्य का जीवन, मन, आशा, निराशा सब कुछ है। प्रेम और व्यक्ति के जीवन में उसकी विभिन्न छायाओं, प्रतिच्छायाओं का अंकन करती हुई ये कहानियाँ हमारी संवेदना को एक नया आकार देती हैं। पात्रों का चयन, भाषा और कहने की शैली का अनूठापन भी इन कहानियों की एक विशेषता है।
Nibandh Evam Kahaniyan
- Author Name:
Anjum sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Something Unspoken Too - Award Winning Short Stories
- Author Name:
Prem Parkash +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Something Unspoken Too, Kujjh Ankeha Vi, which won Prem Parkash the prestigious Sahitya Akademi Award in 1992, is now being rendered into English as Something Unspoken Too. Most of the stories iun this collection bear testimony to this unique facet of Prem Parkash's art and craft, through which he searches for the hidden, the unrevealed, the mysterious and the unspoken, all in an effort to understand the complexities of human motives and actions. Thestories in this collection move precariously across the spectruuum of words and silences, giving rise to spaces in which the unarticulated can aesthetically be located. Prem Parkash is a 'poet' of the twilight zone, a wanderer of forbidden territories and a cartographer of complex human relationships.
Beej-Bhoji
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description: बीज-भोजी' किसान आत्महत्या और अभाव से हो रही मौतों की दुखभरी गाथा है। किसान होना किसी व्यक्ति के जीवट की मुकम्मल गवाही है। वह किसान अंत तक जूझता है और अंतत: कर्ज और भूख में दबकर मर जाता है। यह मौत हमारी सभ्यता के मृत होने की मुखर घोषणा है। 'पैमाइश' कहानी एक तरफ गाँव की पतनशीलता का आख्यान है तो दूसरी तरफ दुस्साहसी, स्वच्छंद तथा कर्मठ स्त्री 'संन्यासिन' के डायन में तब्दील होने का लोमहर्षक दस्तावेज़ भी। कोई प्रखर और परिश्रमी स्त्री क्यों गाँव-भर में डायन बताई जाने लगती है, इसके पीछे कौन-सा क्षुद्र स्वार्थ छुपा होता है इसे 'पैमाइश' पढ़कर अच्छी तरह जाना जा सकता है। इसी प्रकार 'एक एकाउण्टेंट की डायरी में मिट्टी की गंध' कहानी का नायक महानगरीय जीवन की तमाम सुख-सुविधाओं को हासिल कर लेने के बावजूद बचपन से प्राणों में घुली मिट्टी की गंध पाने के लिए बदहवास फिरता है, जबकि उसके घर के लोग उसे मिट्टी से दूर रखने की जी-तोड़ कोशिशें करते हैं। 'तर्पण' कहानी गाँव के भीतर ही अपने मन में बसे गाँव को बचाए रखने की असफल कोशिशों को सामने लाती है और यह भी बताती है कि किस तरह शहरीकरण का दैत्य गाँव को गाँव नहीं रहने देने के लिए बेताब है। 'बीज-भोजी' गौरीनाथ का तीसरा कहानी संग्रह है.
Athala
- Author Name:
Jayanti Naik +1
- Book Type:

- Description: awaited
Janane ki Batein (Vol. 8)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: Janane ki Batein Vol. 8 about Fiction: Stories
Chirswayamvara
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘उपहार’, ‘केया’, ‘चीलगाड़ी’, ‘पिटी हुई गोट’, ‘चिरस्वयंवरा’, ‘मास्टरनी’, ‘भूमि-सुता’ एवं ‘विनिपात’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Atithi Devo Bhav
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

- Description: बहुचर्चित कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह का रचना-कर्म आज के ज्वलंत सामाजिक सवालों से जुड़ा हुआ है और ‘अतिथि देवो भव’ में शामिल कहानियाँ उनकी इस रचनात्मक प्रतिबद्धता को और अधिक गहरा करती हैं । कहानियों की इस दुनिया में प्रवेश करते हुए हम भारतीय समाज के विभिन्न तबकों, संस्कारों और परंपराओं से जुड़े कुछ ऐसे चरित्रों से परिचित होते हैं, जिन्हें व्यक्तियों के बजाय सहज ही मानव-मूल्यों की संज्ञा दी जा सकती है। ऐसे चरित्रों में ‘अलिया धोबी और पाव-भर गोश्त’ का अलिया, ‘पुण्यभोज’ का खुदाबकस,‘खाल खींचनेवाले’ का भुनेसर, ‘नर-लीला’ की कमली, ‘सुलह’ का महादेव, ‘यह कोई अन्त नहीं’ का सरवर और ‘दूसरा सदमा’ के गुलामू चचा विशेष उल्लेखनीय हैं। इन कथा-चरित्रों की शक्लें और कार्य-व्यवहार भले ही अनेक हों, लेकिन अपने इर्द-गिर्द क्रियाशील अमानवीय तंत्र के विरुद्ध उनका गुस्सा और संघर्ष एक है। वर्तमान व्यवस्था के मानव-विरोधी स्वरूप को वे जिस प्रकार महसूस करते हैं और पहचानते हैं, वह न केवल उन्हें, बल्कि इन कहानियों को भी अविस्मरणीय बना देता है। इनके अलावा कुछ कहानियाँ ऐसे चरित्रों को भी सामने लाती हैं, जो पोर-पोर लंपटता से भरे हैं और आधुनिक जीवन स्थितियों से परिचालित मानव-स्वभाव के संदर्भ में कई स्तरों पर विद्रूप पैदा करते हैं। वस्तुत: अपने वर्तमान से सीधे साक्षात्कार के लिए भी इन कहानियों को उसी सहजता से ग्रहण किया जा सकता है, जिस सहजता से ये लिखी गई हैं।
Pahad Par Dhoop
- Author Name:
Murari Sharma
- Book Type:

- Description: Collection of Stories
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book