Dharohar Kahaniyaan : Acharya Chatursen Shastri
(0)
Author:
Acharya ChatursenPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
चतुरसेन शास्त्री ने अपनी कहानियों का निर्माण कल्पना और इतिहास के इतने रोमानी धरातल से किया है कि ये कहानियाँ सदा अमर रहेंगी। इन कहानियों के कथानक निर्माण में क्रमबद्ध स्वाभाविक घटनाओं के घटने का प्रमुख हाथ है। इस संयोग से कथानक में नाटकीय विकास होता है। उनकी कथा-सृष्टि सौन्दर्य, प्रेम और बलिदान की रेखाओं से हुई है। उनकी सामाजिक कहानियों में भी इसी तरह कल्पना, नाटकीय स्थितियों, संयोग और आदर्श आदि तत्त्वों का आपस में अद्भुत तादात्म्य उपस्थित हुआ है। —लक्ष्मीनारायण लाल
Read moreDon’t Miss Out
- Free Delivery
- 25% off on all MRP of books
- Author-signed copy
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹999/Year
You will be auto-charged ₹999 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Prime Plus
Author-signed copy
25% off on all MRP of books
Book Recomendation Per Year
Delivery is free for the entire year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
चतुरसेन शास्त्री ने अपनी कहानियों का निर्माण कल्पना और इतिहास के इतने रोमानी धरातल से किया है कि ये कहानियाँ सदा अमर रहेंगी। इन कहानियों के कथानक निर्माण में क्रमबद्ध स्वाभाविक घटनाओं के घटने का प्रमुख हाथ है। इस संयोग से कथानक में नाटकीय विकास होता है। उनकी कथा-सृष्टि सौन्दर्य, प्रेम और बलिदान की रेखाओं से हुई है। उनकी सामाजिक कहानियों में भी इसी तरह कल्पना, नाटकीय स्थितियों, संयोग और आदर्श आदि तत्त्वों का आपस में अद्भुत तादात्म्य उपस्थित हुआ है।
—लक्ष्मीनारायण लाल
Book Details
-
ISBN9788198959492
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
RAJYABHISHEK (PB)
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
आचार्य जी का यह प्रसिद्ध उपन्यास राम द्वारा लंका पर चढ़ाई से प्रारंभ होता है और सीता के भू प्रवेश तक चलता है। इसकी एक-एक पंक्ति, एक-एक दृश्य ऐसा जीवंत है कि पाठक को बरबस लगता है कि वह स्वयं उसी युग में जी रहा है। - बहुमुखी प्रतिभा के धनी आचार्य चतुरसेन ने ५० वर्षों तक विविध विधाओं में निरंतर लेखन कार्य किया। वह एक लेखक और विचारक ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शास्त्री भी थे ।
Dharmokarshati
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
महाभारत की कथा पर आधारित यह एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आचार्य जी ने कर्मयोग के महत्व को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। राजनीति में पारंगत कर्मयोगी कृष्ण और भावना की साकार प्रतिमा राधा का जैसा चित्रण ‘धर्मोरक्षति’ में हुआ है,
Hridaya Ki Parakh
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
चैत्र मास का अंतिम दौर चल रहा था। वसंत का यौवन चतुर्दिक बिखरी हरीतिमा के अंग-प्रत्यंगों से फूट चला था। संध्या का समय था। चंद्रमा कभी बादलों के आवरण में मुँह छिपाता और कभी स्वच्छ नीलाकाश में खुले मुँह अठखेलियाँ सी करता फिरता। मैं भोजन के उपरांत अपने अनन्य मित्र बाबू सूर्यप्रताप के साथ अपने मकान की छत पर घूम-घूमकर इस दृश्य का आनंद लूट रहा था। मन उस समय इतना प्रफुल्ल था, किंतु मेरे मित्र के मन में सुख नहीं था। क्योंकि जब मैंने हँसकर सुंदर चंद्रमा की चपलता पर एक व्यंग्य छोड़ा, तो उन्होंने प्रशांत तारकहीन नीलाकाश की ओर हाथ फैलाकर उदास मुख, गंभीर वाणी और कंपित स्वर में कहा, “इस अस्थिर और श्रुद्र चंद्रमा की चपलता से अनुरंजित कहीं इस अनंत गांभीर्य की अमूर्त मूर्ति को मत भूल जाना।"
Matribhoomi
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
इसका रचना-काल द्वितीय महायुद्ध का अंतिम काल है, जबकि मानव संहार के पीड़ित समाचारों को पढ़कर आचार्यजी का हृदय हाहाकार कर रहा था। युद्ध के दिन थे, सब चीजें बेहद महँगी और दुर्लभ हो रही थीं। लिखने के लिए कागज और जलाने के लिए मिट्टी का तेल भी उन्हें मुश्किल से मिलता था। उन दिनों हमारे मकान में बिजली नहीं थी। टीन की छत के तीन कमरे और फूँस का एक गोल छप्पर ही हम शाहदरे की भूमि में बना पाए थे। उसी छप्पर में बैठकर रात को मिट्टी का दिया जलाकर उन्होंने इन उपन्यास का आरंभ किया था।
Acharya Chatursen Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
आज के युग की भौतिकता और यंत्रवतता से यदि आप बेजार हो गए हों तो हिंदी के यशस्वी रचनाकार आचार्य चतुरसेन की ये कहानियाँ आपको मानवीय स्वाभाविकता व संवेदनशीलता, त्याग, समर्पण एवं सेवा के सुखद संसार में ले जाएँगी। सामान्य जीवन से और जमीनी वास्तविकता से जुड़े रहना आचार्यजी की रचनाओं की अपनी ही विशेषता है, इसी कारण आप उनकी रचनाओं के पात्रों को न केवल हर रूप में पसंद करते हैं, अपितु उनको प्यार भी करते हैं। यही कारण है कि ये कहानियाँ जीवन के प्रति आपके दृष्टिकोण में न केवल परिवर्तन लाएँगी, बल्कि जीवन और जीवन की घटनाओं को देखने तथा समझने का आपका नजरिया भी बदल जाएगा। इन कहानियों के पठन, चिंतन व मनन के बाद आप स्वयं को एक नए इनसान के रूप में पाएँगे, जिसका दुनिया में कोई वैरी नहीं होगा।
Goli
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
ऐतिहासिक कथा-लेखन के सर्वाधिक प्रसिद्ध स्तंभ आचार्य चतुरसेन ने इस उपन्यास में राजस्थान के रजवाड़ों और उनके रंगमहलों की भीतरी जिंदगी का बड़ा मार्मिक, रोचक और मनोरंजक चित्रण किया है। उसी परिवेश की एक बदनसीब गोली की करुणकृगाथा, जो जीवनभर राजा की वासना का शिकार बनती रही और उसका पति उसे छूने का सहास भी नहीं कर सका। यह संस्करण संपूर्ण मूल पाठ है। इसीलिए इसे हमेशा प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में समझा जाएगा|
Vaishali Ki Nagarvadhu
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
‘वैशाली की नगरवधू’ की गणना हिन्दी के श्रेष्ठतम ऐतिहासिक उपन्यासों में की जाती है। आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने स्वयं भी इसे अपनी उत्कृष्टतम रचना मानते हुए इसकी भूमिका में लिखा था कि निरन्तर चालीस वर्षों की अर्जित अपनी सम्पूर्ण साहित्य-सम्पदा को मैं आज प्रसन्नता से रद्द करता हूँ; और यह घोषणा करता हूँ कि आज मैं अपनी यह पहली कृति विनयांजलि सहित आपको भेंट कर रहा हूँ।
कथा उस अम्बपाली की है जो शैशवावस्था में आम के एक वृक्ष के नीचे पड़ी मिली और बाद में चलकर वैशाली की सर्वाधिक सुन्दर एवं साहसी युवती के रूप में विख्यात हुई। नगरवधू बनने के अनिवार्य प्रस्ताव को उसने धिक्कृत कानून कहा और उसके लिए वैशाली को कभी क्षमा नहीं कर पाई। लेकिन वह अपने देश को प्रेम भी करती है जिसके लिए उसने अपने निजी सुखों का बलिदान भी किया। और अन्त में अपना सर्वस्व त्यागकर बौद्ध दीक्षा ले ली।
कई वर्षों तक आर्य, बौद्ध और जैन साहित्य का अध्ययन करने के उपरान्त और लेखक के तौर पर लम्बे समय में अर्जित अपने भाषा-कौशल के साथ लिखित यह उपन्यास न सिर्फ पाठकों के लिए एक नया आस्वाद लेकर आया बल्कि हिन्दी उपन्यास-जगत में भी इसने अपना एक अलग स्थान बनाया जो आज तक कायम है।
Vaishali Ki Nagar Vadhu
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
अपने जीवन के पूर्वाह्न में--सन् 1909 में, जब भाग्य रुपयों से भरी थेलियाँ मेरे हाथों में पकड़ाना चाहता था--मैंने कलम पकड़ी। इस बात को आज 40 वर्ष बीत रहे हैं। इस बीच मैंने छोटी-बड़ी लगभग 84 पुस्तकें विविध विषयों पर लिखीं तथा दस हजार से अधिक पृष्ठ विविध सामयिक पत्रिकाओं में लिखे। इस साहित्य-साधना से मैंने पाया कुछ भी नहीं, खोया बहुत-कुछ, कहना चाहिए, सब कुछ--धन, वैभव, आराम और शांति। इतना ही नहीं, यौवन और सम्मान भी। इतना मूल्य चुकाकर निरंतर चालीस वर्षों की अर्जित अपनी संपूर्ण साहित्य-संपदा को मैं आज प्रसन्नता से रदृद करता है और यह घोषणा करता हूँ कि आज मैं अपनी यह पहली कृति विनयांजलि सहित आपको भेंट कर रहा हूँ। यह सत्य है कि यह उपन्यास है, परंतु इससे अधिक सत्य यह है कि यह एक गंभीर रहस्यपूर्ण संकेत है, जो उस काले परदे के प्रति है, जिसकी ओट में आर्यों के धर्म, साहित्य, राजसत्ता और संस्कृति की पराजय और मिश्रित जातियों की प्रगतिशील संस्कृति की विजय सहस्राब्दियों से छिपी हुई है, जिसे संभवत: किसी इतिहासकार ने आँख उषधाड़कर देखा नहीं है।
Sahyadri Ki Chattanen
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
रात बहुत अँधेरी थी। रास्ता पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ था। आकाश पर बदली छाई हुई थी और अभी कुछ देर पूर्व जोर की वर्षा हो चुकी थी। जब जोर की हवा से वृक्ष और बड़ी-बड़ी घास साँय-साँय करती थी, तब जंगल का सन्नाटा और भी भयानक मालूम होता था। इस समय उस जंगल में दो घुड़सवार बढ़े चले जा रहे थे। दोनों के घोड़े खूब मजबूत थे, पर वे पसीने से लथपथ थे। घोड़े पग-पग पर ठोकरें खाते थे, पर उन्हें ऐसे बीहड़ रास्तों में, ऐसे संकट के समय, अपने स्वामी को ले जाने का अभ्यास था। सवार भी असाधारण, धेर्यवान् और वीर पुरुष थे। वे चुपचाप चल रहे थे। घोड़ों की टापों और उनकी प्रगति से कमर में लटकती हुई उनकी तलवारों और बरछों की खर-खराहट उस सनन्नाटे के आलम में एक भयपूर्ण रव उत्पन्न कर रही थी।
Vayam Rakshamah
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
मेरे हृदय और मस्तिष्क में भावों और विचारों की जो आधी शताब्दी की अर्जित प्रज्ञा- पूँजी थी, उस सबको मैंने 'वय॑ रक्षाम: ' में झोंक दिया है। अब मेरे पास कुछ नहीं है। लुटा-पिटा सा, ठगा सा श्रांत-क्लांत बैठा हूँ। चाहता हूँ--अब विश्राम मिले। चिर न सही, अचिर ही परंतु यह हवा में उड़ने का युग है। मेरे पिताश्री ने बैलगाड़ी में जीवन-यात्रा की थी, मेरा शैशव इक्का टाँगा-घोड़ों पर लुढ़कता तथा यौवन मोटर पर दौड़ता रहा। अब मोटर और वायुयान को अतिक्रांत कर आठ सहख मील प्रति घंटा की चालवाले रॉकेट पर पृथ्वी से पाँच सौ मील की ऊँचाई पर मेरा वार्धक्य उड़ा चला जा रहा है। विश्राम मिले तो कैसे ? इस युग का तो विश्राम से आचूड़ बैर है। बहुत घोड़ों को, गधों को, बैलों को बोझा ढोते-ढोते बोच राह मरते देखा हैं। इस साहित्यकार के ज्ञानयज्ञ की पूर्णाहुति भी किसी दिन कहीं ऐसे ही हो जाएगी। तभी उसे अपने तप का संपूर्ण पुण्य मिलेगा।
Somnath
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
सोमनाथ हिन्दी साहित्य के कालजयी उपन्यासों में से है। बहुत कम ऐतिहासिक उपन्यास इतने रोचक और लोकप्रिय हुए हैं। इसके पीछे आचार्य चतुरसेन की वर्षों की साधना, गहन अध्ययन और सबसे बढ़कर उनकी लाजवाब लेखन-शैली है। बारह ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ का अग्रणी स्थान है। अन्य विदेशी आक्रमणकारियों के अलावा महमूद गजनवी ने इस आदि-मंदिर के वैभव को 16 बार लूटा। पर सूर्यवंशी राजाओं के पराक्रम से वह भय भी खाता था। फिर भी लूट का यह सिलसिला सदियों तक चला। यह सब इस उपन्यास की पृष्ठभूमि है
Bodhi Vriksha Ki Chaaya Mein
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description:
धम्मो मैगलमक्किट्ठ अहिन्सा सज्जमोतवो। देवावितं नभ सति जस्स धम्मे सयामणो॥ प्राकृतिक आधिदेविक देवों या नित्यमुक्त ईश्वर का पूज्य स्थान नहीं है। एक सामान्य पुरुष भी अपना चरम विकास करके मनुष्य और देव दोनों का पूज्य बन जाता है। (दश वैकालिक 1-1) यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब धर्म के उत्थान के लिए ईश्वर अपने रूप को रचता है। In each agc since ancient times, I have imposed on myseof the obligation of protecting truth (dharma), when sin destroys truth, I forget my formlessness and take birth.
Katha Saptak Manisha Kulshreshtha
- Author Name:
Manisha Kulshreshtha
- Book Type:


- Description:
स्त्री जीवन के विभिन्न रंगों को उकेरी ७ कहानियाँ, हरेक कहानी अपने आप में भावनाओं के अनूठे अनुभवों को समेटे हुए। - कठपुतलियाँ - स्वाँग - एडोनिस और लिली के फूल - क़सुमल रंग - आर्किड - एक थी लिलन - ज़मीन
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
Sach Kuchh Aur Tha
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description:
Book
Pratinidhi Kahaniyan : Bhisham Sahni
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description:
भीष्म साहनी के कथा-साहित्य से गुज़रना अपने समय को बेधते हुए गुज़रना है। हिन्दी के प्रगतिशील कहानीकारों में उनका स्थान बहुत ऊँचा है। यहाँ उनके सात कहानी-संग्रहों से प्राय: सभी प्रतिनिधि कहानियों को संकलित कर लिया गया है। युग-सापेक्ष सामाजिक यथार्थ, मूल्यपरक अर्थवत्ता और रचनात्मक सादगी इन कहानियों के कुछ ऐसे पहलू हैं, जो हमारे लिए किसी भी काल्पनिक और मनोरंजक दुनिया को ग़ैर-ज़रूरी ठहराते हैं। विभिन्न जीवन-स्थितियों में पड़े इनके असंख्य पात्र आधुनिक भारतीय समाज की अनेक जटिल परतों को पाठकों पर खोलते हैं। उनकी बुराइयाँ, उनका अज्ञान और उनके हालत व्यक्तिगत नहीं, सार्वजनीन और व्यवस्थाजन्य हैं। इसके साथ ही इन कहानियों में ऐसे चरित्रों की भी कमी नहीं, जो गहन मानवीय संवेदना से भरे हुए हैं और अपने-अपने यथास्थितिवाद से उबरते हुए एक सार्थक सामाजिक बदलाव के लिए संघर्षरत शक्तियों से जुड़कर नया अर्थ ग्रहण करते हैं। वे न तो अपनी भयावह और दारुण दशा से आक्रान्त होते हैं न निराश, बल्कि अपने साथ-साथ पाठकों को भी संघर्ष की एक नई उर्जा से भर जाते हैं।
Katha Saptak Ushakiran Khan
- Author Name:
Usha Kiran Khan
- Book Type:

- Description:
Padamshri Ushakiran Khan Famous 7 Stories
Mansarovar Vol. 4 : Laag - Daat Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Katha Saptak - Bhalchandra Joshi
- Author Name:
Bhalchandra Joshi
- Book Type:


- Description:
Description Awaited
Sandigdh
- Author Name:
Tejendra Sharma
- Book Type:


- Description:
पंद्रह बेहतरीन कहानियों का संग्रह।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book