Dafa 604
(0)
Author:
Apoorv AgarwalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
400
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Unavailable
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किसी भी समाज की कोई भी इकाई समाज के नैतिक मूल्यों, मान-मर्यादाओं और अनुशासन के मानदंडों का प्रतिबिम्ब होती है। फिर चाहे यह न्यायपीठों, न्यायाधीशों, या सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा की प्रतिज्ञा लेनेवाले क़ानूनविद् ही क्यों न हों, जिन्हें समाज ने लोकतंत्र का प्रमुख आधार-स्तम्भ माना है। प्रस्तुत कहानियाँ हमें इसी क़ानूनी दाँव-पेच की जीती-जागती दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ एक न्यायाधीश न्याय-परायणता निभाने के लिए अपने सर्वस्व की बलि दे देता है, तो दूसरा, सामाजिक बुराइयों के आगे घुटने टेक पूरे पेशे की पवित्रता भंग कर देता है। हिन्दी साहित्य की ये श्रेष्ठ कहानियाँ हमें उन पेचदार क़ानूनविदों से भी मिलवाती हैं, जिनके लम्बे होशियार हाथों में क़ानून की लगाम है। ‘दफ़ा 604’ उन्हीं की क़ानून-पटुता की सच्चाई उकेरती कहानियों का संग्रह है, जिसमें मानव-चरित्र के कई राग-रंग आलोकित होते हैं।
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किसी भी समाज की कोई भी इकाई समाज के नैतिक मूल्यों, मान-मर्यादाओं और अनुशासन के मानदंडों का प्रतिबिम्ब होती है। फिर चाहे यह न्यायपीठों, न्यायाधीशों, या सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा की प्रतिज्ञा लेनेवाले क़ानूनविद् ही क्यों न हों, जिन्हें समाज ने लोकतंत्र का प्रमुख आधार-स्तम्भ माना है। प्रस्तुत कहानियाँ हमें इसी क़ानूनी दाँव-पेच की जीती-जागती दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ एक न्यायाधीश न्याय-परायणता निभाने के लिए अपने सर्वस्व की बलि दे देता है, तो दूसरा, सामाजिक बुराइयों के आगे घुटने टेक पूरे पेशे की पवित्रता भंग कर देता है। हिन्दी साहित्य की ये श्रेष्ठ कहानियाँ हमें उन पेचदार क़ानूनविदों से भी मिलवाती हैं, जिनके लम्बे होशियार हाथों में क़ानून की लगाम है। ‘दफ़ा 604’ उन्हीं की क़ानून-पटुता की सच्चाई उकेरती कहानियों का संग्रह है, जिसमें मानव-चरित्र के कई राग-रंग आलोकित होते हैं।
Book Details
-
ISBN9788126728633
-
Pages151
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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भारतीय ग्रामीण जीवन के प्रति मोरित्स जिग्मोन्द की संवेदना दरअसल न केवल उनके साहित्य में व्यक्त हंगेरियन ग्रामीण जीवन का विस्तार है, बल्कि मोरित्स की सार्वभौमिकता की भी द्योतक है। मोरित्स की लगभग सभी कहानियाँ हंगेरियन जीवन पर आधारित हैं, लेकिन उनकी महान प्रतिभा ने बहुत व्यापक पाठक वर्ग का ध्यान आकर्षित किया है। संसार की सभी प्रमुख भाषाओं में अनूदित होकर उनकी रचनाएँ विश्व साहित्य की धरोहर बन चुकी हैं।
हिन्दी में मोरित्स की प्रसिद्ध कहानियों के इक्का–दुक्का अनुवाद मौजूद हैं। लेकिन ये सब अनुवाद अंग्रेज़ी के माध्यम से किए गए हैं। हंगेरियन और अंग्रेज़ी भाषा के बीच जो दूरी है, वैसी हिन्दी और हंगेरियन में नहीं है। इसका एक कारण हंगेरियन समाज और संस्कृति का ग्रामीणोन्मुखी होना है। हंगेरी के ग्रामीण जीवन की भाषा में ऐसे शब्दों की कमी नहीं है जिनके बहुत सटीक पर्याय हिन्दी में हैं। मोरित्स जिग्मोन्द की कहानियाँ पहली बार पुस्तकाकार हिन्दी में प्रकाशित कहानियाँ हैं जो पाठकों को अपनी तो लगेंगी ही, ताउम्र साथ भी रहेंगी।
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