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"माया - ""महेश, मुझे पहचाना क्यूँ नहीं! क्या कभी मेरी याद भी नहीं आई तुम्हें?"" महेश - ""ज़िंदगी में उस पल जब तुम साथ छोड़ गई थी, तब से सबकुछ भूल गया हूँ... तुम्हें भी!"" माया - ""हमने कितने साल सिर्फ़ एक दूसरे के साथ वक़्त बिताया... हक़ीक़त और ख्यालों में भी! कितनी बातें की... कितनी यादें समेटी... कितने ही ख़्वाब एक-दूसरे के लिए संजोए... सब भूल गए क्या?"" महेश - ""ज़िंदगी के पन्नें पलटने को कहोगी, तो सब याद है मुझे, माया! जैसे कल ही की बात हो, जब तुम मेरी थी और मेरे पास थी!"" मगर हम तुम जो रह गए थे बीतें वक़्त में, वो कसक... कुछ नहीं! वो अपनापन... कुछ नहीं! वो एहसास... कुछ नहीं! वो अलफाज... कुछ नहीं! वो मोहब्बत, कुछ नहीं! हमारे दरमियान... कुछ नहीं! कुछ नहीं! कुछ नहीं!"
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"माया - ""महेश, मुझे पहचाना क्यूँ नहीं! क्या कभी मेरी याद भी नहीं आई तुम्हें?""
महेश - ""ज़िंदगी में उस पल जब तुम साथ छोड़ गई थी, तब से सबकुछ भूल गया हूँ... तुम्हें भी!""
माया - ""हमने कितने साल सिर्फ़ एक दूसरे के साथ वक़्त बिताया... हक़ीक़त और ख्यालों में भी!
कितनी बातें की... कितनी यादें समेटी... कितने ही ख़्वाब एक-दूसरे के लिए संजोए... सब भूल गए क्या?""
महेश - ""ज़िंदगी के पन्नें पलटने को कहोगी, तो सब याद है मुझे, माया!
जैसे कल ही की बात हो, जब तुम मेरी थी और मेरे पास थी!""
मगर हम तुम जो रह गए थे बीतें वक़्त में,
वो कसक... कुछ नहीं!
वो अपनापन... कुछ नहीं!
वो एहसास... कुछ नहीं!
वो अलफाज... कुछ नहीं!
वो मोहब्बत, कुछ नहीं!
हमारे दरमियान...
कुछ नहीं! कुछ नहीं! कुछ नहीं!"
Book Details
-
ISBN9788195141388
-
Pages166
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
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