Navajeevana Gamyam
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The book Navajeevana Gayam is about Telugu versus a poetry and is one of the best books of its kind. In this book the author talks about social responsibility, society about its role, life and inspirational talk for all ages, Shiva philosophy, love, life and how to live a successful life, old and new generations, Hinduism and its essence. And every thing is written in a book. Essentially the author used simple everyday language to reach many people.
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The book Navajeevana Gayam is about Telugu versus a poetry and is one of the best books of its kind. In this book the author talks about social responsibility, society about its role, life and inspirational talk for all ages, Shiva philosophy, love, life and how to live a successful life, old and new generations, Hinduism and its essence. And every thing is written in a book. Essentially the author used simple everyday language to reach many people.
Book Details
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ISBN9788195643981
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Pages124
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: मानव-दुर्दशाक बढ़ैत परिमाण, मानव-मूल्यक खुल्लमखुल्ला अपमानक वातावरण सँ मुक्तिक कामना हरदम सँ जन-आकांक्षा रहलए। कविताक लेल ई आकांक्षा, जीवन-राग छी जे पीड़ा आ कचोटक ताल पर बजैत रहैए। वैद्यनाथ मिश्रक कविता अही कचकैत पीड़ाक माझ सँ गमन करैए। आइ जाहि तथाकथित 'जनतांत्रिक व्यवस्था' सँ शासित छी हमरा लोकनि, ताहि मे पद-प्राप्ति होइते 'सेवक' अधिनायक भ' जाइए, भाग्य-विधाता बनि जाइए। अपेक्षा करैए जे ओकरा सँ जन-अधिकारक बात नइँ कयल जाए। कोनो प्रश्न नइँ पूछल जाए। कर्तव्यक चर्चा नइँ कयल जाए। जन के लेल एकमात्र उपाय छै, ठेहुनिया रोपि दसो नह जोड़ि, अनुनय, विनय, प्रार्थना, मनुहार, चिरौरी कयल जाए—हे प्रभो! (भक्तक) आनंददाता, कनी एम्हरो तकियउ! खाली ओएह सब मनुख नइँ जकर संपत्ति दिनानुदिन विशाल भेल जाइए। बाकी जनता सेहो अही देशक वासी छी... एम्हरो तकियउ... जनतंत्रक नाम पर एहि विकराल बिडम्बना सँ सोझाँ-सोंझी होइत वैद्यनाथ मिश्रक कविता गंहीर उतरैत तीक्ष्ण व्यंग्य मे परिणत भ' जाइए। सूक्ष्म-पर्यवेक्षण आ स्पष्ट संलिप्तता सँ भरल-पुरल वैद्यनाथ मिश्रक कविता, विम्ब-विधानक सरलता सँ अपरूप काव्यानुभूतिक सृष्टि करैए, सोचबाक लेल बिलमबैए आ चेतना केँ हिलकोरैए। वैद्यनाथ मिश्रक कविता स्वयं आ समय सँ साक्षात्कार करबैए। एहि अनुभूतिक लेल पढऩाइ आवश्यक शर्त। —कुणाल
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Customer Reviews
4.5 out of 5
Book
19/01/2023
Kiran Kumar
ముందుగా శ్రీ నవజీవన్ రెడ్డి గారికి న అభినందనలు. ఈ రచనలు అగాధమైన మరియు నిగూడమైన విశ్లేషణ కు తార్కాణం. ఇది కవితలు మాత్రమే కావు, ఇవి యువత మేలుకొలుపులు. మనలని చాల లోతుగా ఆలోచింపజేసే సంకలనాలు. ఈ పుస్తకము నందు యాభై పై చీలుకు పద్య మాలికలు నిక్షిప్త పరిచియున్నారు ప్రతి కవిత పాఠకులకు స్పూర్తి తో పాటు మనసు చెలింపజేసేలా పొందుపరిచారు, సరళీకృత భాష, దిశా నిర్దేశం చేయగలిగిన సత్తా ఉన్న మేలుకొలుపు, జ్ఞాపక విశ్లేషణ, జీవిత గమ్య మార్గదర్శనాలు ఈ పుస్తకం నందు పుష్కలంగా అందించారు. "జననం,మరణం మధ్యలో మన జీవితం ఒక రణరంగం" అన్న నానుడి తో ప్రారంభించి "గతాన్ని గతంలోనే వదిలి, వర్తమానం లో జీవిస్తూ, బంగారు భవిష్యత్తు కు పునాదులు వేసుకోవాలి" అన్న అందమైన ముగింపు ఇచ్చారు మన ప్రియతమా రచయత ప్రతి ఒకరికి ఆచరణ యోగ్యమైన మరియు ఆశయ సాధన దోహద పడే నిధిని మనకు పద్య రూపేణా అందించారు మన "నవజీవన్ రెడ్డి" గారు. ఊహ శక్తి, రచన సామర్థ్యం, సరళ చాతుర్యం ఈ నవల ప్రత్యేకం, వ్యక్తిగతంగా నాకు స్ఫూర్తి తో పాటు ఆచరణ సాధ్యమైన మేధస్సు మరియ నా భావనలు కావలసిన స్పష్టమైన ప్రేరణ నే కాకా వ్యవహార జ్ఞానం తో కూడిన జీవన సార్ధక్యం అందించడమే కాక ఆలోచింప జేసినా మాలికలు కో-కొల్లలు తెలుగు చదవ గలిగిన ప్రతి భారతీయుడు చదవ వలసిన సంపుటం ఈ "నవజీవన గమ్యం". ఈ బుక్ ద్వారా పాఠకులకు తన కవితలు ప్రస్ఫుటమైన జీవన గమ్య నిర్దేశం అందిచడం లో "నవజీవన్ రెడ్డి" గారు కృతకృత్యులు. - కిరణ్ కుమార్ అధరాపురం-