Avignon
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About the Book
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Book Details
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ISBN9788171784318
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Pages108
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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पिछले दशकों में न केवल हिन्दी बल्कि समूचे भारतीय सांस्कृतिक परिदृश्य पर आलोचक, सम्पादक और संस्कृतिकर्मी के रूप में अशोक वाजपेयी की सक्रियता बहुचर्चित और ध्यानाकर्षण का केन्द्र रही है। इन्होंने इस दौरान साहस, संकल्प और खुलेपन से जो कुछ भी किया, विवादास्पद और विचारोत्तेजक सिद्ध हुआ।
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पचास साल पहले प्रकाशित यह पुस्तक ऐसे समीक्षात्मक लेखों का संग्रह है, जिससे हिन्दी आलोचना में एक ‘रेडिकल चेंज’ आया, और आज भी इसका महत्त्व अपनी उल्लेखनीय भूमिका में बना हुआ है।
पुस्तक में शामिल अपने लेखों के बारे में अशोक वाजपेयी ने ख़ुद ‘दृश्यालेख’ में स्पष्ट किया है कि ये लेख ‘जब-तब लिखे गए हैं और इसलिए इनमें बहुत स्पष्ट तारतम्य नहीं है’। पर अपनी समग्रता में ये ‘उन खोजों और आग्रहों को’ उजागर करते हैं जो समकालीन कविता के मूल में हैं। युवा कविता के घटाटोप से बौखलाकर जब सिद्ध और प्रतिष्ठित समीक्षक आँख मींच बैठे हों, तब उस ढेर में से सही और सार्थक कविता की पहचान करने-कराने का अशोक वाजपेयी का यह प्रयत्न कल भी आत्यन्तिक महत्त्व रखता था, आज भी रखता है।
इस पुस्तक में अपने समय के युवा-लेखन की गड़बड़ियों और उनके स्रोतों को स्पष्ट करते हुए अशोक वाजपेयी अच्छे कवियों की रचना की मूल्यवत्ता को रेखांकित करने में सफल हुए हैं। वैज्ञानिक समझ और बेलाग सफ़ाई से उन्होंने काव्य-सृजन को परखा है और मुक्तिबोध, कमलेश, धूमिल आदि समकालीन कवियों की कविता की विशेषताओं को सही रोशनी में रखा है। अपने लेखन से उन्होंने समकालीन आलोचना को जो नई समझ और उसके लिए जो ज़रूरी मुहावरा दिया, उसके बल पर हम कह सकते हैं कि इस पुस्तक के प्रकाशन का हिन्दी समीक्षा पर ही नहीं, हिन्दी कविता पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।
निस्सन्देह, आलोचना साहित्य में एक बहुमूल्य और विरल कृति का नाम है ‘फ़िलहाल’।
Aurat Ki Janib
- Author Name:
Dhirendra Kumar Patel
- Book Type:

- Description:
इस संग्रह की कविताओं में ‘स्त्री’ को मानवीय पक्ष में उजागर करने के लिए उनके जीवन का चित्रण यथार्थ रूप में गहरे भावबोध से हुआ है। आज स्त्री विमर्श ने स्त्रियों के मौन को तोड़ा है। वे मुखर हुई हैं। उनका दबा क्रोध, आवेश पीड़ा स्वानुभूति के धरातल पर अभिव्यक्त हो रहा है, साथ ही स्त्री जीवन के लिए निर्धारित मानक और मूल्य भी बदलाव की सहज माँग करने लगे हैं। सबसे बड़ी बात ‘पैदा हुई औरत’ और ‘बनायी गयी औरत’ का भेद स्पष्ट होने लगा। इस स्पष्टता ने औरतों की एक नयी समझ विकसित की है। वे स्त्रीजनित तमाम समस्याओं, कुण्ठाओं और हिंसा को मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक स्तर पर समझने लगीं। वे समझने लगीं कि औरत के प्रेम की ताकत को वैसे शरीर के दायरे में सीमित कर दिया गया है। आख़िर पुरुष वर्ग ने शुरू से नारी के गुणों को लेकर उसकी इतनी सराहना कर दी है कि नारी उसी को अपना सर्वस्व मानने लगी। उसी के आधार पर जीवन जीती चली आ रही है। प्रस्तुत संग्रह की कविताएँ स्त्री के पक्ष में समाज से संवाद है।
Phir Meri Yaad
- Author Name:
Kumar Vishwas
- Book Type:

- Description:
‘कोई दीवाना कहता है’ काव्य-संग्रह के प्रकाशन के 12 वर्षों बाद प्रकाशित हो रहा ‘फिर मेरी याद’ कुमार विश्वास का तीसरा काव्य-संग्रह है। इस संग्रह में गीत, कविता, मुक्तक, क़ता, आज़ाद अशआर— सबकी बहार है। “कुमार विश्वास के गीत ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ के सांस्कृतिक दर्शन की काव्यगत अनिवार्यता का प्रतिपादन करते हैं। कुमार के गीतों में भावनाओं का जैसा सहज, कुंठाहीन प्रवाह है, कल्पनाओं का जैसा अभीष्ट वैचारिक विस्तार है तथा इस सामंजस्य के सृजन हेतु जैसा अद्भुत शिल्प व शब्दकोष है, वह उनके कवि के भविष्य के विषय में एक सुखद आश्वस्ति प्रदान करता है।” —डॉ. धर्मवीर भारती “डॉ. कुमार विश्वास उम्र के लिहाज़ से नए लेकिन काव्य-दृष्टि से ख़ूबसूरत कवि हैं। उनके होने से मंच की रौनक बढ़ जाती है। वह सुन्दर आवाज़, निराले अन्दाज़ और ऊँची परवाज़ के गीतकार, ग़ज़लकार और मंच पर क़हक़हे उगाते शब्दकार हैं। कविता के साथ उनके कविता सुनाने का ढंग भी श्रोताओं को नई दुनिया में ले जाता है। गोपालदास नीरज के बाद अगर कोई कवि, मंच की कसौटी पर खरा लगता है, तो वो नाम कुमार विश्वास के अलावा कोई दूसरा नहीं हो सकता है.” —निदा फ़ाज़ली “डॉ. कुमार विश्वास हमारे समय के ऐसे सामर्थ्यवान गीतकार हैं, जिन्हें भविष्य बड़े गर्व और गौरव से गुनगुनाएगा।” —गोपालदास ‘नीरज’
Jivan Kati Patang Re…
- Author Name:
Rameshraaj
- Book Type:


- Description:
सर्पकुण्डली राज छंद, मुक्तक विन्यास, पद जैसी शैली , जनकछन्द, लययुक्त हाइकुदार, वर्णिक छंद में तेवरियाँ
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