Ye Khabren Nahin Chhapatin
(0)
₹
350
280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789384344726
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Vidyapati : Raj Kaj Samaj
- Author Name:
Kamlanand Jha
- Book Type:

- Description: विद्यापति 'राज काज समाज' इस दृष्टि से अनोखी पुस्तक है कि इसमें विद्यापति की भक्ति-शृंगार वाली रूढ़ छवि के समानांतर सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकार संपन्न कवि के रूप में उनकी पहचान की गई है। विद्यापति की पदावली का अध्ययन उनकी अन्य महत्त्वपूर्ण वैचारिक रचनाओं के साथ मिलाकर की गई है जिसके परिणाम स्वरूप पदावली की नई अर्थ छटाओं से हमारा साक्षात्कार होता है। कीर्तिलता, पुरुष-परीक्षा और लखनावाली जैसी गंभीर विचार-प्रधान रचनाओं के कारण विद्यापति तमाम मध्यकालीन भक्त कवियों से अलहदा नजर आते हैं क्योंकि मध्यकाल के सभी भक्त केवल कवि हैं लेकिन विद्यापति कवि के साथ इतिहासकार, राजनीतिवेत्ता, संस्कृति-चिंतक तथा शिक्षाविद भी नजर आते हैं। ज्ञान के इस विस्तार ने उनकी कविता को अधिक गहरी और व्यापक जमीन प्रदान की है। हिंदी भक्ति आंदोलन के अग्रदूत विद्यापति की भक्ति कविता में वैष्णव (अलवार) और शैवभक्ति (नयनार) का समन्वित रूप देखने को मिलती है। विद्यापति ने मानव जीवन की श्रेष्ठता को प्रतिष्ठित करते हुए कहा है कि 'मानुस जीवन अनूप'। उनकी कविता में न तो कहीं स्त्री-निंदा है न ही वर्ण-विरोध। इस दृष्टि से विद्यापति समतापरक समाज की कल्पना करने वाले विलक्षण मध्यकालीन कवि के रूप में हमारे सामने उपस्थित होते हैं। विद्यापति की पदावली में शृंगार-भक्ति के अतिरिक्त स्त्री-प्रेम और प्रेम के क्षेत्र में स्त्री-साहस अद्ïभुत रूप से प्रकट हुआ है। सामंती समाज में प्रेम की पाबंदी के सख्त खिलाफ हैं—विद्यापति; वे कहते हैं 'परबस जनु हो हमार पियार'। यह पुस्तक पाठकों को एक 'नए विद्यापति' से परिचय कराने में सक्षम साबित होगी।
Atmanirbhar Bharat
- Author Name:
Sunil Vashisht
- Book Type:

- Description: Since the outbreak of COVID-19 pandemic and the resultant Janta curfew and lockdown, our country and the whole world has suffered a lot in 2020 both on health front and on economic front. COVID-19 has jolted the whole world economically resulting in fall of GDP of all major countries in the world and also a large scale loss of human life. Our PM Narendra Modi being a visionary has come up with a call of �Atmanirbhar Bharat�. The English meaning of Atmanirbhar Bharat is self-reliant India or self-sufficient India. The basic idea behind this concept is making India self sustaining and self generating, an economy that can sustain itself on its own and which minimises its dependence on the outside world. While declaring the Atmanirbhar Bharat Abhiyan and during the announcement of COVID-19 related economic package, PM Modiji stated that the 5 pillars of Atmanirbhar Bharat are economy, infrastructure, technology driven systems, vibrant demography and demand. Various slogans initiated under Atmanirbhar Bharat include �Vocal for Local�, �Local for Global� and �Make for World�. This book focusses on several important aspects related to Atmanirbhar Bharat like economy, banking, national security, self dependence, women empowerment etc. and contains views of various intellectuals and specialist on the above subjects vis-s-vis how to make India self-sufficient.
In The Arms of A Soldier: For A Soldier, The Nation Is Always First
- Author Name:
Buddhabhushan Kuchekar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hamare Sudarshanji
- Author Name:
Baldev Bhai Sharma
- Book Type:

- Description: "संघ के पंचम सरसंघचालक पूज्य सुदर्शनजी का ऋषितुल्य जीवन भौगोलिक व मत-पंथ की सीमाएँ लाँघकर देश-विदेश के लक्षावधि अंतःकरणों में एक प्रेरणापुंज के रूप में बसा है। हमारे ऋषियों ने कहा, ‘यानि अस्माकं सुचरितानि तानि त्वया सेवितम्’ यानी उनके जीवन के जो आदर्श हैं, सुचरितरूप श्रेष्ठ जीवन-मूल्य जिन्हें उन्होंने जिया, वह सद्मार्ग जिस पर चलकर उन्होंने मानवता के उच्च मानदंड स्थापित किए, उन्हें उनकी आनेवाली पीढ़ी यानी हम अपने जीवन के आचरण में ढालें, ताकि हम उन सद्गुण-सदाचार से युक्त उदात्त जीवन-मूल्यों और संस्कारों से युक्त जीवन जी सकें। पूज्य सुदर्शनजी के ऐसे तपोनिष्ठ व संकल्पवान् राष्ट्रसेवी जीवन का सान्निध्य जिन असंख्य लोगों को मिला, वे स्मृतियाँ उनके हृदय को सुवासित किए हुए हैं। एक बालक से लेकर स्वयंसेवक बनने, कार्यकर्ता के रूप में ढलकर प्रचारक जीवन का असिधारा व्रत स्वीकारने और विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए पूज्य सरसंघचालक के रूप में प्रतिष्ठित होने की उनकी यात्रा बड़ी प्रेरणास्पद है। पूज्य सुदर्शनजी के जीवन की यह विविध पक्षीय प्रेरणा आनेवाले समय में राष्ट्र व समाज के सर्वतोमुखी उन्नयन हेतु लक्षावधि स्वयंसेवकों के लिए तो जीवंत रहे ही, समाज के अन्य वर्गों में भी उस जीवन-दृष्टि का विस्तार हो, यह महत् उद्देश्य ही इस ग्रंथ की रचना का आधार है। विश्वास है कि यह ग्रंथ पूज्य सुदर्शनजी की यश-काया को अक्षुण्ण रखेगा और सबके लिए राष्ट्रभक्ति व समाजसेवा का पाथेय बनेगा। "
JEENE KI RAAH SHRIMADBHAGVADGITA
- Author Name:
Suhaib Ilyasi
- Book Type:

- Description: आपि यह पुस्तक उठाकर पढ़ रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप कहीं-न-कहीं आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक शांति तलाश रहे हैं। बेशक हजारों युगों से मानव का पथ-प्रदर्शन करनेवाली श्रीमद्भगवद्गीता आपके लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी कभी यह महाबली अर्जुन या उन्नत महापुरुषों की प्रतिकूल अवस्थाओं में रही है। ‘जीने की राह’ में मौजूद श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित ‘सफलता के व्यावहारिक नियम’ आपके जीवन को सुखद और मंगलमय बनाने के लिए आज भी प्रासंगिक हैं। इस पुस्तक में वे सनातन रहस्य छिपे हैं, जो आपके विशिष्ट स्वप्नों को साकार करने में आपका मार्गदर्शन और आपकी सहायता करेंगे। यह इस धारणा को पुष्ट करती है कि आर्थिक या आध्यात्मिक सफलता केवल सुनिश्चित योजनाओं, उच्च महत्त्वाकांक्षा और कठिन परिश्रम से ही प्राप्त हो सकती है। प्रख्यात टेलीविजनकर्मी सुहैब इल्यासी ने इस पुस्तक में स्वयं अपने जीवन में श्रीमद्भगवद्गीता की व्यावहारिक उपयोगिता का प्रेरणात्मक उल्लेख किया है। उनका मानना है कि जब हम श्रीमद्भगवद्गीता द्वारा बताए तरीके से जीवन गुजारना शरू करते हैं तो फिर प्रकृति से तादात्म्य सहज ही स्थापित हो उठता है और जीवन में सुख-सौभाग्य, सुस्वास्थ्य, सुमधुर संबंध और भौतिक सुख अनायास ही प्राप्त होने लगते हैं। यह पुस्तक जीवन में आध्यात्मिक उत्थान और स्वयं की पहचान करानेवाली तथा जीवन को जबरदस्त उत्प्रेरणा से भर देनेवाली एक व्याहारिक कृति है।
Samudra Ke Khare Pani Ka Rahasya By Sudha Murty | Hindi Edition Of How The Sea Became Salty
- Author Name:
Sudha Murty
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sapanon Ki Udaan
- Author Name:
Rajendra Bharud
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC Bihar Shikshak Bahali "Teacher Recruitment" Class 11 To 12 Bhugol "Geography" 20 Practice Sets- Book in Hindi
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Emergency ka Kahar aur Censor ka Zahar
- Author Name:
Balbir Dutt
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
35 Minute Niyamit Yog "35 मिनट नियमित योग" Book In Hindi - Dr. Surakshit Goswami
- Author Name:
Dr. Surakshit Goswami
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dhyan : Kaise Aur Kyon Karen?
- Author Name:
Sirshree Tejparkhi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Greatest Speeches Of Vivekananda
- Author Name:
Swami Vivekananda
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahabharat Mein Matri Vandana
- Author Name:
Dinkar Joshi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kumbh Aastha Ka Prateek
- Author Name:
Sanjay Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Subhadra Kumari Chauhan Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Subhadra Kumari Chauhan
- Book Type:

- Description: सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी कहानियों में दहेज, परदा प्रथा, छुआछूत, स्त्री की पीड़ा का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है। उनकी कहानियों का फलक बहुत विस्तृत है। उनकी कहानियाँ बहुरंगी हैं। जहाँ एक ओर आजादी की लड़ाई के संदर्भों को रेखांकित करनेवाली कहानियाँ हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कुरीतियों को उकेरनेवाली कहानियाँ भी हैं। सुभद्राजी की कहानियों में कहानीपन है, भाषा की रवानगी है, शब्दों का सटीक प्रयोग है और कहानी कला की दृष्टि से श्रेष्ठ कहानियों को द्योतित करनेवाले संवाद की शैली है। घरेलू जीवन की अंतरंग झाँकियाँ और अपने व्यक्तित्व की प्रतिष्ठा के लिए व्यग्र स्त्री की छटपटाहट पहली बार किसी स्त्री की लेखनी द्वारा व्यक्त की गई। सुभद्राजी की कहानियों में भोगे हुए यथार्थ की अभिव्यक्ति है। कल्पना की झलक का दृष्टिगत होना तो रचनाओं में स्वाभाविक ही है। उनकी कितनी ही कहानियों में उनके अपने जीवन-प्रसंग या अनुभूति के मार्मिक अंश कथा का हलका सा आवरण ओढ़े आ ही गए हैं। सुभद्राजी की कहानियाँ कहानी-कला की दृष्टि से श्रेष्ठ कहानियाँ हैं, जिनमें उत्साह है, उमंग है, हर्ष है, विषाद है। जीवन के हर पहलू को आत्मसात् करती कहानियों का यह संग्रह पठनीय ही नहीं, संग्रहणीय भी है।
Vaigyanik Jagdish Chandra Basu Ke Mahan Vichar
- Author Name:
Saawan Kumar Bag +1
- Book Type:

- Description: कलकता के टाउन हॉल में मिलीमीटर हट 2 का पहली बार प्रदर्शन करने से लेकर पौधों में तंत्रिकातंत्र मौजूद होने तक के युगांतकारी आविष्कारों के प्रणेता महान् वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु से सभी कम या ज्यादा अवश्य परिचित हैं, लेकिन जगदीश चंद्र बसु के लेखक और दार्शनिक पक्ष से बहुत कम लोग ही परिचित हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय भाषाओं की पहली विज्ञान-गल्प जगदीश चंद्र बसु ने बॉग्ला में 'निरुददेशेर कहिनी' के नाम से लिखी थी। उनके लिखे लेख, विज्ञान-गल्प, यात्रावत्तांतों और भाषणों में उन्होंने अपने जीवन की कई रोमांचकारी घटनाओं को शब्दों में बाँधकर एक पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसका नाम उन्होंने ' अव्यक्त ' दिया था। इन कहानियों, लेखों और भाषणों के माध्यम से जनमानस में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जाग्रत् करने का प्रयास किया था। वैज्ञानिक के विभिन्न लेखों मे संगहात शत उन यह लेखन आज भी वैज्ञानिक और सामान्य जन के लिए घनघोर अआँधेरे रास्तों में रोशनी की किरणों की तरह है। वह एक लेख में लिखते हैं--' हमारा मस्तिष्क ही सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।'
Stuti Suman
- Author Name:
Vinod Bala Arun
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BSSTET Bihar Special School Teacher Eligibility Test Paper-1 Class 1-5 Primary Teacher 15 Practice Sets Book
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Prabhat Vidyarthi Hindi-English Dictionary
- Author Name:
Badri Nath Kapoor
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have description
Subhash Chandra Bose Ki Adhoori Atmkatha
- Author Name:
Sisir Kumar Bose +1
- Book Type:

- Description: सुभाषचंद्र बोस की ‘भारत की खोज’, जवाहरलाल नेहरू की तुलना में उनके जीवन में काफी पहले ही हो गई, यानी उन दिनों वे अपनी किशोरावस्था में ही थे। वर्ष 1912 में पंद्रह वर्षीय सुभाष ने अपनी माँ से पूछा था, ‘स्वार्थ के इस युग में भारत माता के कितने निस्स्वार्थ सपूत हैं, जो अपने निजी स्वार्थ को त्याग कर इस आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं? माँ, क्या तुम्हारा यह बेटा अभी तैयार है?’’ 1921 में भारतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र देकर वह आजादी की लड़ाई में कूदने ही वाले थे कि उन्होंने अपने बड़े भाई शरत को पत्र लिखा, ‘‘केवल बलिदान और कष्ट की भूमि पर ही हम अपने राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।’’ दिसंबर 1937 में बोस ने अपनी आत्मकथा के दस अध्याय लिखे, जिसमें 1921 तक की अपनी जीवन का वर्णन किया था और ‘माई फेथ-फिलॉसोफिकल’ शीर्षक का एक चिंतनशील अध्याय भी था। सदैव ऐसा नहीं होता कि जीवन के बाद के समय में लिखे संस्मरणों को शुरुआती, बचपन के दिनों की प्राथमिक स्रोत की सामग्री के साथ पढ़ा जाए। बोस के बचपन, किशोरावस्था व युवावस्था के दिनों के सत्तर पत्रों का एक आकर्षक संग्रह इस आत्मकथा को समृद्ध बनाता है। इस प्रकार यह ऐसी सामग्री उपलब्ध कराता है, जिसकी सहायता से उन धार्मिक, सांस्कृतिक, नैतिक, बौद्धिक तथा राजनीतिक प्रभावों का अध्ययन किया जा सकता है, जिनसे भारत के इस सर्वप्रथम क्रांतिधर्मी राष्ट्रवादी के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण हुआ।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book