Rajyoga
(0)
₹
400
₹ 320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Discover the transformative teachings of Swami Vivekananda's 'Raja Yoga.' This timeless guide unlocks the path to self-realisation through concentration, meditation, and self-discipline. Explore profound wisdom, achieve inner tranquillity, and unleash your hidden potentials for spiritual growth.
Read moreAbout the Book
Discover the transformative teachings of Swami Vivekananda's 'Raja Yoga.' This timeless guide unlocks the path to self-realisation through concentration, meditation, and self-discipline. Explore profound wisdom, achieve inner tranquillity, and unleash your hidden potentials for spiritual growth.
Book Details
-
ISBN9789350486085
-
Pages192
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Trilochan Rachanawali Vol. 1-4
- Author Name:
Trilochan
- Book Type:

-
Description:
जनसाधारण की दुख-प्रसूत स्थानिक संवेदना को कविता में ढालकर मनुष्यता की सार्वभौमिक चेतना से जोड़ने वाले, शास्त्र की सटीकता और जनजीवन के नित नवीन अनुभवों को कई-कई छन्दों में अंकित करनेवाले विद्वान कवि त्रिलोचन हिन्दी के विराट कविता-लोक में अपनी तरह के अनूठे हस्ताक्षर हैं।
कई भाषाओं के ज्ञाता, संस्कृत के विद्वान और प्रगतिशील चेतना से सम्पन्न कवि त्रिलोचन ने रोला और बरवै जैसे प्राचीन छन्दों को भी साधा, गीत-ग़ज़ल भी लिखे और 'सॉनेट' जैसे विदेशी छन्द को हिन्दी का अपना बना दिया। मुक्त-छन्द भी लिखा और 'गद्य-वद्य' लिखते हुए आलोचना को भी एक आत्मीय रंग दिया।
यह त्रिलोचन की रचनावली है, जिसकी ज़रूरत लम्बे समय से महसूस की जा रही थी। त्रिलोचन महज़ एक कवि नहीं, कविता के विद्यालय थे; मौज़ूदा और आनेवाले रचनाकार उनसे हमेशा ही सीख सकते हैं। प्रस्तुत रचनावली में त्रिलोचन का सम्पूर्ण संकलित है।
कविताओं के साथ-साथ त्रिलोचन ने आलोचनात्मक गद्य भी लिखा। इस खंड में उनके द्वारा लिखित आलोचनात्मक लेखों, समीक्षाओं आदि को लिया गया है। कविता हो या गद्य उन्होंने बोलचाल की भाषा को ही प्राथमिकता दी। यह इन आलेखों से भी ज़ाहिर होता है। कुछ अप्रकाशित लेख भी यहाँ प्रस्तुत हैं। साथ में उनकी दैनन्दिनी भी।
150 Inspirations
- Author Name:
Deepak Chadha +1
- Book Type:

- Description: This book contains 150 quotes compiled that I learned during my daily work life at different levels. All ideas, logics, views and observations I wrote in my diary on daily basis, now I am sharing them with the masses. In hope that this book will inspire and boost the morale of individuals. It will help them understand their feelings better, so they can adapt a better healthy life. I am an optimistic and hopeful that these quotes will be liked by readers and if that happens, then I believe my writing added a pinch of contribution towards building a well-mannered society.
Sangh Aur Swaraj (Punjabi Edition)
- Author Name:
Ratan Sharda
- Book Type:

- Description: पिछले कुछ समय से राजनीतिक मजबूरियों के कारण वामपंथी और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका के विषय में दुष्प्रचार कर रहे हैं और जनसेवा में इसके बेहतरीन रिकॉर्ड पर कीचड़ उछाल रहे हैं। यह पुस्तक हमें बताती है कि संघ अपने जन्म से ही स्वराज के प्रति समर्पित था। डॉ. हेडगेवार का जीवन और वह शपथ, जो स्वयंसेवक लेते थे, स्वतंत्रता संग्राम के प्रति समर्पण को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। इस स्वतंत्रता को स्वराज में बदलने के लिए भारत को अनुशासित और साहस रखनेवाले युवाओं की आवश्यकता थी, जो राष्ट्र के प्रति समर्पित हों। ब्रिटिश दस्तावेज स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वे स्वतंत्रता संग्राम में संघ की बढ़ती ताकत को लेकर सतर्क थे। स्वतंत्रता का आंदोलन 15 अगस्त, 1947 को ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (भाग्य के साथ मुलाकात) से समाप्त नहीं हुआ, बल्कि शुरू हुआ अंतहीन अँधेरी रातों का भयावह सिलसिला, जब सुरक्षाबलों के अतिरिक्त सबसे संगठित बल के रूप में संघ के कार्यकर्ताओं ने तबाह हुई लाखों लोगों की जिंदगी से जो कुछ बचा सकते थे, उसके लिए अपने प्राणों को खतरे में डाला। यह फैसला भारत के लोगों और इतिहास को करना है कि साहस की ऐसी काररवाई देशभक्ति थी या सांप्रदायिक। लेखक अन्य तथ्यों पर प्रकाश डालते हैं, जिनके कारण हमें स्वतंत्रता मिली और यह रेखांकित करते हैं कि स्वाधीनता किसी एक आंदोलन या काररवाई का परिणाम नहीं थी, बल्कि एक लहर के साथ धीरे-धीरे बढ़ी, जिसका निर्माण भारत के महान् आध्यात्मिक गुरुओं के कारण शुरू हुए सांस्कृतिक पुनर्जागरण से हुआ था।
Manoranjak Ganit
- Author Name:
Shriniwas Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rajendra Babu Patron Ke Aaine Mein-2
- Author Name:
Tara Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hum Sab Fake Hain
- Author Name:
Neeraj Badhwar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ek Aur Madhushala
- Author Name:
Dr. Suresh Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Civil Services : Challenges And Resolutions
- Author Name:
Yogendra Narain
- Book Type:

- Description: The book carefully discusses the civil services in India, USA and China and the key-role played by their respective civil services. During the Covid-19 pandemic, India could save its population despite much meager resources than the USA. The success could be attributed to the rare blending of the political will with the highly skilled and committed civil servants. Eminent civil servant Yogendra Narain politely points out that how in USA under the garb of defining the powers of the states and the federation, the national government's key role in protecting its citizens appeared to be under a seize during the pandemic. The book is likely to trigger off the much-needed debate on the effective use of the civil services especially in a war situation or other emergencies. It also offers an insight on the issue whether a permanent civil service should be �committed� to a particular political ideology as being done in China, or it should function as an impartial instrument to serve the common people.
Stuti Suman
- Author Name:
Vinod Bala Arun
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Main Lohiya Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kalam Quiz Book
- Author Name:
Dr. Manish Rannjan, IAS
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Swami Ramtirth Ke Prerak Vichar
- Author Name:
Anil Kumar
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any description
VICHAR NIYAM
- Author Name:
Sirshree
- Book Type:

- Description: "सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यानपद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद वे अंतिम सत्य से दूर रहे। उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य पर भी विराम लगाया, ताकि वे अपना अधिकसेअधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है, वह है—समझ (अंडरस्टैंडिंग)। सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलगअलग प्रकार से होती है, लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सबकुछ है और यह ‘समझ’ अपने आप में पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।"
The Life and Times of Jayaprakash Narayan
- Author Name:
Pankaj Kishor
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC Bihar Secondary School (Special) Teacher Eligibility Test Sakshamta Pariksha | Class 9-10 Science "विज्ञान" 20 Practice Sets (Hindi)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sangh, Rajneeti Aur Media
- Author Name:
Devendra Swarup
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Main Buddha Bol Raha Hoon
- Author Name:
Anita Gaur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Patanjali Yog Darshan
- Author Name:
Dr. Mridul Kirti
- Book Type:

- Description: "ऋषि पतञ्जलि प्रणीत पतञ्जलि योग दर्शन आत्म-भू-योग दर्शन हैं। यह अनन्य, अनूठा, अनुपमेय योग-दर्शन, जो अपने लिए आप ही प्रमाण है। इस अपूर्व और अद्भुत ग्रंथ के समान सृष्टि में कोई अन्य यौगिक ग्रंथ है ही नहीं। एक तरह से इसे प्रकृति की अद्भुत और चमत्कृत घटना कह सकते हैं। ‘पतञ्जलि योग दर्शन’ गणतीय भाषा में एवं सूत्रात्मक शैली में रचित, सृष्टि का एक अद्वितीय, यौगिक विज्ञान का विस्मयकारी ग्रंथ है, जिसमें मनुष्य के प्राण से लेकर महाप्राण तक की अंतर्यात्रा, मृण्मय से चिन्मय तक जाने का यौगिक ज्ञान, मूलाधार से सहस्रार तक ब्रह्मैक्य का आंतरिक ज्ञान, मर्म और दर्शन समाहित है। योग-दर्शन जीव के पंचमय कोषों, अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, ज्ञानमय कोषों के गूढ़ मर्म और उनमें छुपी शक्तियों को उजागर करता हुआ, देह के सुप्त बिंदुओं को जाग्रत् कर, विदेह की ओर उन्मुख कर आनंदमय कोष में प्रवेश कराने का विज्ञान है। साधना देह में रहकर ही होती है, विदेह अंतरात्मा साधना नहीं कर सकता, इसीलिए देह तो आत्मोन्नति का साधन है, अतः देह का स्वस्थ, संयमी और स्वच्छ रखना योग का ही अंग है। शरीर हेय नहीं, श्रेय पाने का साधन है। बिखराव तब आता है, जब हम देह को ही सर्वस्व मान लेते हैं। यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार तक केवल देह के घटकों में समाहित शक्ति केंद्रों को जाग्रत करने का ज्ञान है। धारणा, ध्यान और समाधि अंतर्मन में निहित बिंदुओं को संयमित कर दिव्यता की ओर जाने का विज्ञान है। वस्तुतः योग-दर्शन ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’ के चारों ओर ही परिक्रमायित है क्योंकि साधना कठिन नहीं, किंतु मन का सधना कठिन है। "
Devi
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

- Description: स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु तव देवि भेदा:। सम्पूर्ण सृष्टि की महिलाएँ, हे देवि, वस्तुत: तुम्हारे ही विभिन्न स्वरूप हैं। स्त्रियों के विभिन्न स्वरूपों की डोर पकड़कर आदिशक्ति के मूल स्वरूप को समझना; और शक्ति के नाना रूपों के आईनों में आज से लेकर आर्षकालीन समाज की स्त्रियों की ढेरों लोकगाथाओं, महागाथाओं, आख्यानों को नए सिरे से पकड़कर व्याख्यायित कर पाना—यही इस विचित्र पुस्तक का मूल अभीष्ट है। यह न विशुद्ध कथापरक उपन्यास है, न कपोलकल्पित मिथकों की लीला और न ही एक वैज्ञानिक इतिहास। मानव–मन के गोपनीय और रहस्यमय अंश से लेकर महाकाव्यकारों की उदात्त कल्पना के बिन्दुओं तक सभी यहाँ हैं; कभी जुड़ते, कभी छिटकते, कभी एक साथ जुड़ते–छिटकते हुए। जीवन की ही तरह देवी की ये गाथाएँ भी कभी कालातीत गहराइयाँ मापती हैं, तो कभी समकालीन इतिहास में क़दमताल करती हैं। इन गाथाओं में वे सभी द्वैत मौजूद हैं, जिनसे एक औसत भारतीय का मन–संसार बनता है, अपने सभी उजले–स्याह राग–विराग समेत। अपने मानाभिमान, दर्प, आक्रोश, करुणा और ममत्व में यही वे बिम्ब हैं, जिनसे सृष्टि चलती है, जीवन चलता है। साहित्य उपजता है और लोकगाथाएँ रची जाती हैं।
Shyam, Phir Ek Bar Tum Mil Jate!
- Author Name:
Dinkar Joshi
- Book Type:

- Description: "दौड़कर उसने कृष्ण के पाँव से तीर खींचने के लिए हाथ बढ़ाया । कृष्ण उसकी व्यग्रता को निमिष- भर ताकते रहे, फिर निषेध में दाहिना हाथ उठाया । जरा ठिठक गया- '' क्यों, नाथ, क्यों?'' '' रहने दो, भाई! माता गांधारी के वचन में व्यवधान बनने का व्यर्थ प्रयत्न मत करो!'' बड़ी धीरता से वे बोले । '' मैंने महापातक किया है! मुझे क्षमा करो, नाथ! मैंने.. .मैंने आपको जंगली प्राणी समझकर आप पर तीर चलाया । यह मैंने क्या किया, नाथ!'' जरा भूमि पर लोटकर करुण क्रंदन करने लगा । '' उठो वत्स!'' करुणार्द्र स्वर में कृष्ण बोले, '' तुम्हारा नाम क्या है?'' '' मेरा नाम ?. .जरा ! '' '' जरा !. .ठीक!'' कृष्ण का मधुर हास्य छलका । तलवे से बहकर रक्तधारा भूमि पर काफी दूर चली गई थी । '' जरा, तुम्हारा नाम सार्थक है, तात ! ' जरा ' कभी किसीको नहीं छोड़ती ! अमरत्व के अभिशाप ने जिसे घेरा हो, उसे भी महाकाल जरा समेट ही लेता है न! जरा, तू तो निमित्त मात्र है, वत्स!'' - इसी उपन्यास से कोई भी भारतीय भाषा ऐसी नहीं है जिसमें श्रीकृष्ण को केंद्र में रखकर काव्य, कहानी, उपन्यास. नाटक, संदर्भ-ग्रंथ आदि साहित्य का सर्जन न किया गया हो । ' श्याम, फिर एक बार तुम मिल जाते ' (मूल गुजराती में लिखा) उपन्यास इन सबसे अनूठा इसलिए है कि यह सिर्फ उपन्यास नहीं है-यह तो उपनिषद् है! यथार्थ कहा जाए तो यह उपनिषदीय उपन्यास है । तत्कालीन आर्यावर्त्त में श्रीकृष्ण एक विराट् व्यक्तित्व था । जब यह व्यक्तित्व अनंत में विलीन हो गया तो जो सन्नाटा छा गया, उस सन्नाटे के चीत्कार का यह आलेखन है जब श्रीकृष्ण सम्मुख थे तब बात और थी जब वे विलीन हो गए तब वसुदेव-देवकी से लेकर अर्जुन, द्रौपदी, अश्वत्थामा, अक्रूर उद्धव और राधा पर्यंत पात्रों की संभ्रमिद मनोदशा को एक अनूठी ऊँचाई के ऊपर ले जाता है यह उपन्यास । "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book