Pairol Par Atma Stories Book In Hindi
(0)
₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789355626684
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bundeli: History, Culture & Glories
- Author Name:
Aniket Jain
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bihar Ki Lokkathayen (Bihar Folk Stories)
- Author Name:
Dr. Sanjay Pankaj
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Prapanchpanchshati
- Author Name:
Moolchandra Pathak
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Safal Businessman Kaise Banen?
- Author Name:
Dinanath Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kisse Kavi Sammelanon Ke "किस्से कवि सम्मेलनों के" Book in Hindi- Dr. Kirti Kale
- Author Name:
Dr. Kirti Kale
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sanskrit Subhashit Kosh
- Author Name:
Dr. Ramprakash Sharma ‘Saras’
- Book Type:

- Description: संस्कृत सुभाषित कोश' में संस्कृत वाड्मय के अगाध सिंधु के मणि-माणिक्य हैं । मनीषियों ने अगाध सिंधु का अनंत वर्षों तक अवगाहन करके अमृत रूपी सुभाषित मानव जाति के सकल अभ्युदय हेतु संचित किए हैं। अनेक दोषों से दूषित, कलुषों से कलुषित, अनाचरणीय आचरणों के पाप-तमस से आच्छादित, अविद्यादि दुरितों से ग्रस्त-त्रस्त मानवता पर छाई मूर्च्छा का हरण करने में ये सुभाषित संजीवनी का कार्य करेंगे। 'सा प्रथमा संस्कृति: विश्ववारा' यजुर्वेद संहिता 7/14 जीवन जीने की उत्कृष्टतम पद्धति का नाम 'संस्कृति' है, जिसका सर्वविध विकास भारतवर्ष की पुण्यधरा पर हुआ। इस धरा के निवासी मानव के मन और बुद्धि ने कितनी ऊँचाइयों का स्पर्श किया, इन सुभाषितों में निहित संस्कृति से स्पष्ट है। पुस्तकस्थ सुभाषित प्रेरणा, उत्साह, प्रसन्नता का संचार करने के साथ ही जिज्ञासा के नवीन स्रोतों का सृजन करेंगे। मानव को सहज, सरल, शांत और विवेकशील, विचारप्रपन्न बनाने में दिशा-बोधक का कार्य करते हुए उसमें सुप्त, कुंठित संवेदना को जाग्रत् कर उदात्त मानवीय गुणों से सरस संपन्न बनाने में इन सुभाषितों की विवेचनीय भूमिका होगी।
Media ka Vartmaan Paridrishya
- Author Name:
Rakesh Praveer
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Ki Pragati Mein Incois Ke Rajat Varsh "भारत की प्रगति में इंकॉइस के रजत वर्ष" Book in Hindi
- Author Name:
Dr. D.D. Ozha +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Arunima
- Author Name:
Rita Kaushal
- Book Type:

- Description: हर चीज में छोटा-बड़ा, अनावश्यक वर्गीकरण! कैसी संस्कृति है यह, जहाँ विज्ञान पढऩेवाले उच्च श्रेणी के माने जाते हैं, आट्र्स पढऩेवाले उनसे हेय? जब उसके अपने बच्चे होंगे तो वह कभी उनके साथ ऐसा नहीं करेगी। जो पढऩा चाहें, पढऩे देगी, जो करना चाहें, करने देगी। ये संस्कृति नहीं, मानसिक रोग है, किसी ने हिंदी में स्नातकोत्तर किया है तो वह एँवई समझा जाता है और अंग्रेजी में किया है तो वह लाट साहब माना जाता है। फिर चाहे वह तृतीय श्रेणी लेकर जैसे-तैसे पास हो पाया हो! हिंदुस्तान से अंग्रेज चले गए, अंग्रेजियत छोड़ गए। हिंदुस्तान आजाद हो गया, किंतु हिंदुस्तानियों की सोच ब्रिटेन में गिरवी पड़ी है। भारतीयों ने पश्चिम से वह सीखा, जो नहीं सीखना चाहिए था। वह नहीं सीखा, जो पाश्चात्य संस्कृति में सचमुच अनुकरणीय है। क्या गलत था अगर वह मीडिया के क्षेत्र में जाना चाहती थी! टी.वी. एंकर, न्यूज रीडर बनना चाहती थी। हिंदी साहित्य में उच्च शिक्षा लेना चाहती थी। क्या मिला किसी को उस पर विज्ञान के विषय थोपकर? उसे डॉक्टर बनाने की व्यर्थ कोशिश में एक अधकचरा असफल व्यक्तित्व तैयार हो गया। ऐसे ही डॉक्टर तो पेट में कैंची-तौलिया भूलते हैं। जरूर उन्हें इस व्यवसाय में माता-पिता द्वारा जबरदस्ती भेजा जाता होगा। जिंदगी का ये अध्याय ऐसा नहीं है, जिसे वह बार-बार खोलकर पढ़े। वह इस अध्याय को पूरी ताकत से अपनी याददाश्त के सबसे निचले तले में दबाकर रखती है। आज निराली नाम की आँधी में अटक ये अध्याय स्वत ही फडफ़ड़ा उठा। जबरदस्ती विज्ञान विषय दिलाने से और अतिरिक्त ट्यूशन लगाने से कोई डॉक्टर बन सकता है क्या? और धीरे-धीरे उन अवांछित थोपे विषयों के बोझ तले उसका व्यक्तित्व ध्वस्त हो गया। इस हद तक ध्वस्त कि उसे खुद की क्षमताओं पर ही नहीं, अपने होने पर भी शक रहने लगा। —इसी पुस्तक से
Mahila Adhikar
- Author Name:
Mamta Mehrotra
- Book Type:

- Description: यह समय ‘अस्मिता विमर्श’ का है। विमर्श सचेत करते हैं अधिकारों और दायित्वों के प्रति। विभिन्न स्तरों पर जारी ‘स्त्री विमर्श’ ने स्त्रियों से जुड़े अनेक सवालों को मुखर और प्रखर किया है। स्त्रियाँ स्वतंत्रता, सम्मान, समता और सहभागिता के लिए निरन्तर संघर्ष कर रही हैं। इस सन्दर्भ में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि भारत के संविधान ने महिलाओं को कौन-कौन से अधिकार दिए हैं। 'महिला सशक्तिकरण' को सच करते हुए क़ानून ने महिलाओं को क्या-क्या शक्तियाँ प्रदान की हैं। ज़ाहिर है कि इस लोकतंत्र में महिलाएँ यदि अपने अधिकारों को भली प्रकार जान जाएँ तो उनके 'अस्तित्व' का संघर्ष सरल और सकारात्मक हो जाएगा। ‘महिला अधिकार’ पुस्तक में ममता मेहरोत्रा ने मानवाधिकार को विश्व पटल पर रखकर स्त्री-प्रश्नों का विवेचन किया है। बीजिंग घोषणा-पत्र, वियना सम्मेलन—1993, भारतीय विधि आयोग की इक्कीसवीं रिपोर्ट के ज़रिए महिला अधिकारों के प्रति सामाजिक-वैधानिक सतर्कता का जायजा लिया गया है। सती प्रथा, डायन, विज्ञापन, मातृत्व, द्विविवाह, दहेज आदि पक्षों पर तर्कपूर्ण विचार करते हुए लेखिका ने इनके अनेक पक्षों का वर्णन किया है, विशेषत: क़ानूनी पक्ष का। पुस्तक की भाषा प्रवाहपूर्ण है, इसलिए पठनीयता भरपूर है। सचेत और सशक्त करती एक ज़रूरी किताब।
Relativity The Special and General Theory
- Author Name:
Albert Einstein
- Book Type:

- Description: In Relativity: The Special and the General Theory, Einstein describes the theories that made him famous, illuminating his case with numerous examples and a smattering of math. This book is not a casual read, but for those who appreciate his work without diving into the arcana of theoretical physics, it will prove a stimulating read. “The present book is intended,” Einstein wrote in 1916, “as far as possible, to give an exact insight into the theory of relativity to those readers who, from a general scientific and philosophical point of view, are interested in the theory, but who are not conversant with the mathematical apparatus of theoretical physics.”
Hindi Nibandh Saurabh
- Author Name:
Shyam Chandra Kapoor
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Usha Kiran Khan Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Ushakiran Khan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Desh, Dharma Aur Sahitya
- Author Name:
Vidhyaniwas Mishra
- Book Type:

-
Description:
साहित्य वास्तव में मनुष्य धर्म को रेखांकित करनेवाला वह रूप है, जो अपने देश के समाज के परिदृश्य को उसके बहुआयामी रंगों में कैनवस पर फैला हुआ दिखलाता है। साहित्य ही देश को गति भी देता है और उसे जीवंत बनाने का प्रयत्न करता है।
धर्म से साहित्य का रिश्ता एक ख़ास मायने में परिलक्षित होता है। साहित्य द्वारा ही धर्म का परिचालन होता है, लेकिन वह धर्म से तटस्थ रहकर अपनी बात कह सकने में समर्थ है।
इसीलिए ये तीनों लेखक को परस्पर ओत-प्रोत दिखाई पड़े हैं। ये अन्दर या बाहर रहते हुए भी एक-दूसरे के पूरक होने का आभास देते हैं।
संग्रह के निबन्धों में आज का समय कहीं भी ओझल नहीं हुआ, बल्कि ठोस धरातल पर क़दम जमाए खड़ा है, परन्तु कालातीत से ग्रहण करने की पूरी क्षमता भी रखता है।
Sahajta Ki Bhavyata
- Author Name:
Baldev Bhai Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jharkhand Panchayati Raj Handbook
- Author Name:
Rashmi Katyayan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vimarsh - Jinhen Jurme Ishq Pe Naaz Tha
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: Vimarsh Jinhen Jurm e ishq pw naaz tha Writer Pankaj subeer Edit By Dr. sudha om dhingra
Ahalya Uvach
- Author Name:
Mridula Sinha
- Book Type:

- Description: "‘अहल्या उवाच’ हिंदी की प्रख्यात लेखिका डॉ. मृदुला सिन्हा का अद्यतन ग्रंथ है, जिसमें पुराख्यान की आवृत्ति-मात्र नहीं, आधुनिक प्रश्नों की सहज अभिव्यक्ति लक्षित होती है। प्रातःस्मरणीया पंच कन्याओं में अन्यतम अहल्या के शील एवं सतीत्व का यह आत्मकथात्मक आख्यान तथाकथित नारीवाद के दुराग्रह से मुक्त है। पितृसत्ता के संदर्भ में स्त्री-चित्त के मनोविज्ञान की विश्वसनीय प्रस्तुति इसकी विशेषता है, किंतु यहाँ आधुनिक स्त्री-विमर्श की यांत्रिकता एवं गतानुगतिकता के स्थान पर भारतीय संस्कृति में संप्राप्त शिव-शक्ति के अर्द्धनारीश्वरत्व की मान्यता प्रतिष्ठापित की गई है। ‘उपन्यास’ एक पश्चिमी काव्यरूप है, किंतु यह ग्रंथ भारत की उस परंपरागत औपन्यासिक अवधारणा की प्रतीति कराता है, जिसे मृदुलाजी ‘सीता पुनि बोली’, ‘विजयिनी’, ‘परितप्त लंकेश्वरी’ आदि में उदाहृत कर चुकी हैं। ‘उवाच’ शब्द के द्वारा वे भारत के ‘कथा-कोविदों’ की शैली का ही स्मरण दिलाती हैं। वर्णन-क्रम में लोकसंस्कृति के उपादानों के विनियोग से भी इस तथ्य का सत्यापन होता है। आचार्य कुंतक ने प्रबंधगत कथा-विन्यास का विश्लेषण करते हुए ‘प्रकरणवक्रता’ और ‘प्रबंधवक्रता’ का उल्लेख किया है। ज्ञातकथा में नवीन प्रसंगों की उद्भावना तथा मूल इतिवृत्त की अभिनव व्यंजना में उक्त वक्रोक्ति-भेदों की पहचान की जा सकती है। मृदुलाजी ने चिराचरित कथा को संशोधित करते हुए उसे नई दिशाओं में मोड़ा है। पुरावृत्त और आधुनिकता के संग्रथन में उनकी कारयित्री प्रतिभा की सक्रियता देखी जा सकती है। ‘मिथक’ के नवीकरण की यह प्रक्रिया ‘अहल्या उवाच’ की मौलिकता का निर्धारण करती है। यह उपन्यास रामकथा को एक नव्य आयाम प्रदान करता है। मिथिलांचल की अहल्या के समग्र जीवनवृत्त पर केंद्रित इस कृति की परिणति युवाशक्ति के प्रतीक राम के युगांतकारी कर्तृत्व में दृष्टिगत होती है, किंतु मातृशक्ति की महिमा और नई मर्यादा के संस्थापन की यह कथा समाज की प्रस्तरीभूत चेतना के उस अभ्युत्थान का बोध कराती है, जिसके नियामक राम हैं, जो स्वभावतः अहल्या की चारित्रिक चमक एवं पात्रता से अभिभूत हैं। इस दृष्टि से यह रचना राम और अहल्या, दोनों का महत्त्व-मंडन करती है। महीयसी मृदुलाजी की रचनाधर्मिता की यह गौतमी धारा न केवल उनकी अजस्र संवेदनशीलता और लोक-संस्कृति का साक्षात्कार कराती है, अपितु क्षत-विक्षत जीवन-मूल्यों के युग में भारतीय जीवनादर्शों के प्रति आकर्षण भी उत्पन्न करती है। —प्रो. प्रमोद कुमार सिंह (सेवानिवृत्त)
BPSC Pradhan Shikshak Bharti Pareeksha-2024 (Bihar Head Teacher Recruitment Exam 2024 in Hindi) | Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Spirituality Within You (Pb)
- Author Name:
Manisha Koushik
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book