NCERT MCQs History of India, Art & Culture Class 6 To 12 Useful Book For UPSC, State PSCs & All Competitive Exam Chapter-wise and Topic-wise Solved Paper 2025
(0)
₹
395
₹ 316 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789348203472
-
Pages312
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
All India Sainik School Entrance Exam-2024 Study Guide with Solved Papers For Class 6
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gita Gyan
- Author Name:
Sirshree Tejparkhi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
A Sindhi Mother’s Cookbook
- Author Name:
Duru Sachdev
- Book Type:

- Description: A Sindhi Mother’s Cookbook is, like any other task mother undertakes, a labour of love. It is a wonderful compilation of recipes from a typical Sindhi kitchen that is mindful of modern lifestyles. Written with great clarity and with easy-to-follow instructions, it gently encourages even the most hesitant to try their hand at producing authentic dishes from this age-old cuisine. But the flavours imbued by the ‘Sindhi Mother’ permeate much more than the simple detailing of ingredients and method: they are evocative of the dining table, leisurely family gatherings, of shared meals prepared and served with the utmost care and savoured in appreciation — of the food, the company and, most of all, the individual who laboured over it with such love. And that is what makes the difference.
Cinema Aur Sansar
- Author Name:
Udayan Vajpeyi
- Book Type:

- Description: ऋत्विक घटक और सत्यजीत राय के बाद कुमार शहानी और मणि कौल सम्भवतः देश के सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण फ़िल्मकार रहे हैं। इनकी फ़िल्मों ने न सिर्फ़ हमारे फ़िल्म के देखने में बुनियादी बदलाव लाया है बल्कि इन फ़िल्मों की रोशनी में हम वास्तविकता और स्वयं अपने आप को भी कुछ और तरह से ही अनुभव करने के रास्ते खोज सके हैं या खोज सकते हैं। कुमार ने जो भी फ़िल्म बनायी है वह अपनी तरह की ‘क्लासिक’ है। उनकी फ़िल्में दुनियाभर के प्रयोगशील और दृष्टि सम्पन्न फ़िल्मकारों के लिए निरन्तर प्रेरणा का स्रोत रही हैं। यह संयोग नहीं कि कुमार शहानी को विश्व के श्रेष्ठ सिनेमा शिक्षकों में गिना जाता है। कुमार अपनी हर फ़िल्म में फ़िल्म बनाने के नये मार्गों की खोज करते हैं और वे निरन्तर इस खोज के लिए विशेषकर भारतीय प्रदर्शनकारी कलाओं और संगीत आदि की परम्परा को गहरे से गहरे तक समझने और टटोलने का मानो अनवरत प्रयास करते रहते हैं। उनकी फ़िल्में भारतीय और वैश्विक कला परम्परा से संवाद करती हुई आकार ग्रहण करती हैं। कुमार शहानी से बात करना हमेशा हर्षित करता है। वे अपने भीतर दुनिया की तमाम कला परम्पराओं के बहावों को मानो लेकर चलते हैं, चाहे वह ख़याल संगीत हो या मिनिएचर चित्र, पश्चिमी शास्त्रीय संगीत हो या कुडियाट्टम नृत्य, ध्रुपद संगीत हो या भक्ति कविता या दरवेशों का अपनी धुरी पर लगातार घूमना। वे बात करते-करते कब किसी विशेष संगीत के रूपाकार के किसी दूरस्थ दार्शनिक दृष्टि के लगभग अनदेखे बिन्दु पर जाकर ठहरेंगे, इसका कोई ठिकाना नहीं होता। इसीलिए उनसे बात करना अनिवार्य रूप से गहन कलात्मक और दार्शनिक अनुभव होता है। —प्रस्तावना से
Shramana Shabari Ke Ram
- Author Name:
Mahakavi Avadhesh
- Book Type:

- Description: जब न बेर कुछ बचे राम ने लखा निकट का कोना, देखा क्षत-विक्षत बेरों का पड़ा दूसरा दोना। बोले वह भी लाओ भद्रे! वे क्यों वहाँ छिपाए, होंगे और अधिक मीठे वे लगते शुक के खाए। उठा लिया था स्वयं राम ने अपना हाथ बढ़ाकर, तभी राम का कर पकड़ा था श्रमणा ने अकुलाकर। प्रभु! अनर्थ मत करो, लीक संस्कृति की मिट जाएगी, जूठे बेर भीलनी के खाए, दुनिया गाएगी। हुआ महा अघ यह मैंने ही चख-चखकर छोड़े थे, जिस तरु के अति मधुर बेर थे, वही अलग जोड़े थे। किंतु किसे था भान, प्रेम से तन-मन सभी रचा था, कहते-कहते बेर राम के, मुख में जा पहुँचा था। छुड़ा रही थी श्रमणा, दोना राम न छोड़ रहे थे, हर्ष विभोर सारिका शुक ने तब यों वचन कहे थे। जय हो प्रेम मूर्ति परमेश्वर, प्रेम बिहारी जय हो, परम भाग्य शीला श्रमणा भगवती तुम्हारी जय हो। —इसी महाकाव्य से ——1—— रामायण में प्रभु की भक्त-वत्सलता और भक्त की भक्ति की मार्मिक कथा की नायिका श्रमणा पर भावपूर्ण महाकाव्य।
UPSSSC Rajava Lekhpal Latest 20 Practice Sets Book 2021
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttarakhand Ki Lokkathayen "उत्तराखंड की लोककथाएँ" Book in Hindi- Umedu Lal
- Author Name:
Umedu Lal ‘Umang’
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Virginia Woolf Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Virginia Woolf
- Book Type:

- Description: सच कहूँ तो तुम्हारे साथ रहते हुए मुझे ऐसा महसूस होता कि मिलानचोली नदी हमें बरदाश्त कर रही थी। चाँदनी रात में चाँद की रोशनी तुम्हारे चेहरे पर पड़ने के कारण मैं तुम्हारे चेहरे को और उस पर आनेवाले भावों को देख रहा था, तुम्हारी आवाज को सुन पा रहा था। बिस्तर पर हम तब तक एक साथ पड़े रहते, जब तक चिडि़यों के चहचहाने की आवाज नहीं सुनाई देने लगती। लेकिन अगर ऐसा है, तो फिर मन के अंदर यह शोक क्यों है? मैं असंतुष्ट क्यों हूँ? जबकि मैं यह अच्छी तरह से जानता हूँ कि एक दिन हर किसी को गुलाब की पत्तियों के नीचे सुकून की नींद सोना है। जहाँ सोने के बाद आप गुब्बारे की तरह से हलके होकर सारे दुःख-तनाव को छोड़कर आसमान में गोते लगाएँगे। उस समय आप एक ऐसी दुनिया में पहुँच चुके होंगे, जहाँ हम तक कोई चाहकर भी पहुँच नहीं पाएगा। —इसी पुस्तक से अपने समय की चर्चित लेखिका वर्जिनिया वूल्फ ने विपुल मात्रा में लेखन किया। स्त्री-विमर्श उनके लेखन के केंद्र में रहा। स्त्रियों के मन की सुप्त भावनाओं, दुःख, उदासी तथा विडंबनाओं को प्रमुखता से अपनी कहानियों में प्रस्तुत किया है। मन को झकझोरने और संवेदनाओं को संपुष्ट करनेवाली कहानियों का पठनीय संकलन।
Modiji Ki Pathshala: Discussion On Exam Modiji Classroom Book in Hindi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Discover the Power Within You
- Author Name:
Arun H. Raikar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nirala Sanchayan
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description: निराला का कवि-विकास एकरैखिक या सपाट नहीं है, उसमें कई घुमाव हैं, उसके कई स्तर हैं। एक ही समय में भिन्न प्रकार की कविताओं के साथ कवि अपने पाठकों और आलोचकों के समक्ष चुनौती देता खड़ा हो जाता है। निराला इसीलिए महाकवि हैं क्योंकि एक तरफ़ तो उनमें क्लैसिकी परम्परा के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी ओर एकदम अपने आसपास के परिवेश के और जनधर्मिता की कविता के। निराला में मुक्ति की एकल याचना नहीं है, बल्कि सामूहिक चेतना है। निराला का साहित्य न साहित्यिक कट्टरता या धार्मिक कट्टरता के समक्ष घुटने टेकता है और न साम्राज्यवाद के। उनके चिन्तन में भौतिकवाद के तत्त्व भी उपस्थित हैं और वे किसी ईश्वर द्वारा संसार के सृजन का मज़ाक़ उड़ाते हैं। उनके धार्मिक दृष्टिकोण के केन्द्र में मनुष्य है, इसीलिए विज्ञान की सत्ता व उसकी सामाजिक भूमिका को तथा आधुनिक सभ्यता के मूल्यों को भी वे सहज स्वीकार करते थे। निराला की कविता मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन-व्यापार की कविता भी है जिसमें जीवन का सम्पूर्ण संगीत है। निराला रचना को ‘युद्ध कौशल’ कहते थे और गद्य को ‘जीवन-संग्राम की भाषा’। अपने कथा-साहित्य में वे जीवन-संग्राम को अंकित करते चलते हैं। निराला ने अपनी मुक्ति-चेतना के साथ जैसे कविता को मुक्त किया वैसे ही कथा को भी। निराला की कहानियाँ भी हिन्दी की परम्परागत कहानियों के रूप और संगठन को अतिक्रमित करती हैं। हर पीढ़ी अपने महाकवि को ‘डिस्कवर’ करती है, इसलिए हर पीढ़ी का अपना चयन होता है। सम्पादन की चौथी पीढ़ी में यह संचयन है। हमारी पीढ़ी का चयन और हमारे अपने निराला की खोज!
Renu Ka Janpad
- Author Name:
Gajendra Pathak
- Book Type:

- Description: Criticism
ABHINAV BINDRA
- Author Name:
Gagandeep
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The World Within
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tulsi Dal, Gangajal
- Author Name:
Rita Shukla
- Book Type:

- Description: अखिलेश काका ने बड़ी रुखाई के साथ कंधे पर रखा बाबूजी का हाथ हटा दिया था और कार में बैठ गए थे। “कोने में रखा दीपक सुगबुगा रहा है। तीन रातों से लगातार जल जो रहा है। बाबूजी निश्चल बैठे हैं। उनकी आँखें मुँदनेवाली नहीं। छोटकी आजी की अपेक्षा उनमें मूर्त है। आजी को गंगाजल चाहिए--जीवन-मुक्ति का अंतिम पाथेय ! आजी की पंचभूत काया बाबूजी की बाँहों में अवशिष्ट है। अब कोई राग नहीं, क्रोध नहीं, ईर्ष्या नहीं'''सारे भाव विसर्जित हो गए। आजी की आँखें बंद हैं, मुँह खुला हुआ- बाबूजी के अंतिम फर्ज की ओर इंगित करता मुखाग्नि जो देनी है। —इसी पुस्तक से भारतीय संस्कृति, जिन सनातन उपादानों से समृद्ध है, उनमें तुलसीदल और गंगाजल का विशेष महत्त्व है। पौराणिक कथा-सूत्रों के अनुसार तुलसी अर्थात् वृंदा घर-आँगन को पावन करती, चतुर्दिक् आस्था के दीपक की आभा भरती है। निर्मल गंगाजल, जिसके बिना हमारे जीवन का कोई भी अनुष्ठान पूर्ण नहीं होता। भवतारिणी गंगा का सुशीतल स्पर्श अनुपमेय सुख-शांति प्रदान करनेवाला है। हिंदी की सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. ऋता शुक्ल विरचित करुणा के रस में पगी ये कहानियाँ मनुष्यता की सच्ची उजास का संधान करती आपके समक्ष प्रस्तुत हैं ।
1000 Bhoogol Prashnottari
- Author Name:
Sachin Singhal
- Book Type:

- Description: वास्तव में ‘भूगोल’ शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। सौरमंडल, वातावरण, पर्यावरण, पृथ्वी, कृषि, वन, वन्यजीवन, उद्योग, जनसंख्या, खनिज, ऊर्जा आदि ऐसे अनेक विषय हैं, जिनमें मानव की सदैव से रुचि रही है। इसी रुचि ने मानव को नए-नए ग्रह खोजने के लिए प्रेरित किया और वह इसमें सफल भी हुआ। प्रस्तुत पुस्तक में इस व्यापकता को पाठकों के लिए 1000 प्रश्नों में समेटने का प्रयास किया गया है। यद्यपि इतने कम प्रश्नों में इस विषय को समेटना एक असंभव कार्य है, परंतु सामान्य पाठक के ज्ञान के स्तर के अनुरूप अधिकांश महत्त्वपूर्ण तथ्यों से संबंधित प्रश्नों का समावेश इस पुस्तक में करने का प्रयास किया गया है। प्रत्येक प्रश्न के चार संभावित उत्तर दिए गए हैं, जिनमें से एक उत्तर सही है। इससे पाठक अपनी तर्कशक्ति के आधार पर अपने ज्ञान को कसौटी पर परख सकते हैं। प्रश्नोत्तरी शैली में लिखित यह पुस्तक भूगोल के विभिन्न पक्षों से पाठकों को परिचित कराती है। 1000 प्रश्नों के रूप में यह भूगोल के ज्ञान का पिटारा खोलती है।
Shrimadbhagwadgita
- Author Name:
Dr. Jagmohan Sharma
- Book Type:

- Description: श्रीमद्भगवद्गीता संपूर्ण मानव जगत् के लिए प्रासंगिक है। यह एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें सृष्टि के समस्त आध्यात्मिक पक्षों का समावेश किया गया है| इसमें संगृहीत सात सौ श्लोक सात महाद्वीपों के समान गंभीर हैं, जिन्हें समझकर भारतीय चिंतन का समस्त सार ज्ञात हो सकता है। युद्धभूमि में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया ज्ञान सार्वभौमिक है । उसमें किसी भी देश, धर्म, जाति के लिए समान रूप से कर्म का संदेश समाहित है । प्रस्तुत पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता के सात सौ श्लोकों का बहुत सुंदर शब्दों में दोहे रूप में रूपांतरण है । उदाहरण के लिए-- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदाssत्मानं सृजाम्यहम्॥ दोहा-- हानि होय जब-जब धरम, अति अधर्म बढ़ जाय। हे भारत ! संसार में, तब-तब प्रकटूँ आय॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥ दोहा-- पापी करूँ विनाश मैं, करूँ साधु उद्धार । युगों-युगों में प्रकटता, धर्म स्थापना सार ॥ मानवीय संबंधों और जीवनमूल्यों को वर्णित करती सरल-सहज कृति, जो हर पाठक के हृदय को छू लेगी और वे 'गीता-ज्ञान' से संपकृत हो जाएँगे।
J. Krishnamurti Ke Darshnik Vichar
- Author Name:
Swati Gautam
- Book Type:

- Description: Awaiting description
1000 Hindi Vastunishtha Prashnottari
- Author Name:
Braj Kishore Prasad Singh
- Book Type:

- Description: "कोई भी भाषा महज इसलिए बड़ी नहीं होती कि उसके बोलनेवालों की संख्या अधिक है, बल्कि वह इसलिए बड़ी होती है कि करोड़-करोड़ जनता के हृदय और मस्तिष्क की भूख मिटाने का वह प्रभावशाली साधन होती है। भारत में हिंदी भाषा की वही स्थिति है। हिंदी साहित्य का भंडार विस्तृत है। गद्य-पद्य, दोनों में विपुल साहित्य की रचना हुई है। किसी भी साहित्य का उसके सम्यक् रूप में पारायण कर पाना बड़ा कठिन है। आज के व्यस्त समय में पाठक के पास न तो इतना समय है और न धैर्य। अतः हिंदी साहित्य के सार रूप को प्रश्नोत्तर शैली के एक हजार प्रश्नों के अंदर समोने की कोशिश की गई है। हालाँकि इतनी बड़ी विषय-वस्तु को मात्र हजार प्रश्नों में बाँध पाना अत्यंत दुष्कर कार्य रहा। प्रस्तुत पुस्तक में हिंदी साहित्य के कलेवर को विभिन्न अध्यायों में बाँटकर विवेचित किया गया है, यथा—हिंदी साहित्य का इतिहास, काव्य शास्त्र, भाषा एवं व्याकरण, साहित्यिक विधाओं के साथ-साथ विविध अध्याय में मिश्रित प्रश्नों को समेटा गया है। पुस्तक के अंत में पाठकोपयोगी हिंदी साहित्येतिहास प्रश्नोत्तर को शामिल किया गया है। विद्यार्थी, शिक्षार्थी, प्रतियोगी परीक्षार्थी, शोधार्थी, अध्यापक ही नहीं, सामान्य हिंदी-प्रेमी पाठकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक।
MUSALMAN AUR SHARNARTHI
- Author Name:
Sardar Patel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book