Akhil Bharatiya Prashasnik Kosh
(0)
₹
1500
1200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789352664122
-
Pages440
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
YAUN-HINSA AUR BACHCHON KI SURAKSHA
- Author Name:
Sadhna
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
37 Years NEET Chapterwise & Topicwise Solved Papers Chemistry (2024-1998) | As Per NCERT Class 11 & 12 Include New Syllabus PYQs Question Bank For 2025 Exam
- Author Name:
Dr. K.G. Ojha +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Griha Vatika
- Author Name:
Pratibha Arya
- Book Type:

- Description: आज से हज़ारों वर्ष पूर्व भी मनुष्य अपने घर के चारों ओर फूल, घास व कमल के तालाब आदि लगाता रहा होगा। बेबीलोन के ‘हैंगिंग गार्डन’ विश्व के सात आश्चर्यों में एक माने गए हैं। आज जब हम गृह वाटिका की बात करते हैं तो हमारे सामने उद्यान कला का एक दीर्घ इतिहास साकार हो उठता है। रूप योजना कैसी भी क्यों न रही हो, घर के भीतर, आसपास, रास्तों, दीवारों को, फूलों की झाड़ियों, लताओं, वृक्षों द्वारा सजाने की परम्परा बहुत पुरानी रही है। गुफाओं में रहनेवाले मानव ने जब घर बनाकर स्थिर जीवनचर्या शुरू की तो उसे सजाने-सँवारने का काम भी शुरू कर दिया। जीवन में जब स्थिरता आ जाती है तो मानव-मन कला-सौन्दर्य की ओर झुक जाता है। प्राचीन भारतीय उद्यानों में लतामंडप, पुष्पित लताओं, झाड़ियों वाली वीथियाँ, कुंज, सुगन्धित पुष्प व कमल फलों के जलाशयों का वर्णन मिलता है। वासन्ती लता, लवंग-लता, नवमल्लिका जैसी सुगन्धित लताओं एवं वृक्षों के झुरमुट से घिरी वीथियाँ एवं वाटिकाएँ, जहाँ गृहवासी अपने परिवार के सदस्यों के साथ आमोद-प्रमोद के क्षण व्यतीत करता था। मुग़लकालीन उद्यान सीढ़ीदार होते थे, साथ-साथ उनमें पानी की नहरें व फुहारें अवश्य होते थे। मध्य एशिया से सर्द एवं फलों से भरे प्रदेश से आए मुग़ल बादशाहों ने वहाँ की स्मृति को याद रखते हुए और भारत की गर्मी से बचने के लिए जल की योजना वाटिकाओं में ख़ूब बनाई। उद्यान की योजना का रूप, आकार चाहे अलग रहा हो परन्तु मूल में एक प्रवृत्ति ही काम करती रही—वह थी प्रकृति की सुन्दर आकर्षक विविध प्रकार की वनस्पतियों, पौधों, झाड़ियों, वृक्षों, लताओं को आकर्षक रूप में लगाना, उसे सँजोना और प्राकृतिक भूदृश्यों को अपनी कल्पना के पुट द्वारा अपने घर के भीतर प्रस्तुत करना। उद्यान कला के भी मूलभूत सिद्धान्त लगभग सभी जगहों पर एक जैसे ही होते हैं। इन्हें जानने व समझने के बाद पौधों की देखभाल का कार्य काफ़ी सरल हो जाता है। उद्यान कला एक वैज्ञानिक विषय है, परन्तु शौक़ के रूप में अपनाए जाने पर यह आनन्द व अनुभव का विषय बन जाता है।
BHARAT KI AANTARIK SURAKSHA EVAM AAPDA PRABANDHAN (INTERNAL SECURITY & DISATER MANAGEMENT) - UDAYBHAN SINGH
- Author Name:
Udyabhan Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dalit Chintan
- Author Name:
Shri Ashok Pradhan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sadho Jag Baurana
- Author Name:
Ramesh Nayyar
- Book Type:

- Description: Sadho Jag Baurana
Success ki University
- Author Name:
Og Mandino
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Angootha Chhap Hastakshar
- Author Name:
Ravi Sharma 'Madhup'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Extraordinary Desire To Win
- Author Name:
Zeenat Ara
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Think and Grow Rich
- Author Name:
Napoleon Hill
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Invisible Man
- Author Name:
H. G. Wells
- Book Type:

- Description: The Invisible Man is a science fiction novel by H. G. Wells. Originally serialized in Pearson's Weekly in 1897, it was published as a novel the same year. The invisible man to whom the title refers is Griffin, a scientist who has devoted himself to research into optics and who invents a way to change a body's refractive index to that of air so that it neither absorbs nor reflects light. He carries out this procedure on himself and renders himself invisible, but he fails in his attempt to reverse it. Griffin, a practitioner of random and irresponsible violence, has become an iconic character in horror fiction.
Nagarjun Rachanawali : Vols. 1-7
- Author Name:
Nagarjun
- Book Type:

- Description: उनके जीवन के लगभग अड़सठ वर्ष (1929–1997) रचनाकर्म को समर्पित। कविता, उपन्यास, संस्मरण, यात्रावृत्त, निबन्ध, बाल–साहित्य आदि सभी विधाओं में उन्होंने लिखा। हिन्दी के अलावा मैथिली, बांग्ला और संस्कृत में भी उन्होंने न सिर्फ़ मौलिक रचनाएँ कीं, इन भाषाओं से अनुवाद भी किए। कुछ पत्र–पत्रिकाओं में उन्होंने स्तम्भ-लेखन भी किया। रचनावली के प्रथम खंड में बाबा की उन सभी कविताओं को संकलित किया गया है, जिनका रचनाकाल 1967 ई. तक है। ‘युगधारा’, ‘सतरंगे पंखोंवाली’, ‘प्यासी पथराई आँखें’, ‘तुमने कहा था’, ‘हज़ार–हज़ार बाँहोंवाली’, ‘पुरानी जूतियों का कोरस’, ‘रत्नगर्भ’, ‘इस गुब्बारे की छाया में’ तथा ‘भूल जाओ पुराने सपने’—इन संग्रहों से 1967 तक की सभी कविताओं को कालक्रम से यहाँ ले लिया गया है। इसके अलावा नागार्जुन के सर्वाधिक प्रिय कवि कालिदास की रचना ‘मेघदूत’ का उनके द्वारा मुक्तछन्द में किया गया अनुवाद भी इसमें संकलित है। यह अनुवाद 1953 में ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ के एक ही अंक में प्रकाशित हुआ। इसके बाद 1955 में पुस्तकाकार प्रकाशन के समय इसमें एक लम्बी भूमिका और कुछ पादटिप्पणियाँ भी जोड़ी गर्इं। रचनावली में वह इसी रूप में उपलब्ध है।
Uttar Pradesh Police Sub Inspector ("उपनिरीक्षक")/Assistant Sub Inspector (सहायक उपनिरीक्षक) 12 Practice Sets Hindi | UP Police SI/ASI 2024
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chanakya Tum Laut Aao
- Author Name:
Shivdas Pandey
- Book Type:

- Description: "भारतीय ऐतिहासिक संस्कृति की पुरातनता तथा भारत की सांस्कृतिक ऐतिहासिकता की प्राचीनता पर पाश्चात्य विद्वान् साहित्यकारों, यथा—‘विलियम जोंस’ प्रभृति जानकारों ने अपनी धार्मिक वर्चस्वता का भारत की ऐतिहासिक प्राचीनता पर जिस रूप में हमला बोलने का अत्युक्तिप्रद प्रयास किया, भारतीय विद्वान् साहित्यकारों को कदापि सह्य न हुआ। विद्वान् साहित्यकार डॉ. शिवदास पांडेय के प्रस्तुत उपन्यास ‘चाणक्य, तुम लौट आओ’ में तथा इसके पूर्व प्रकाशित उपन्यासों—‘द्रोणाचार्य’, ‘गौतम गाथा’ के प्राक्कथनों में उसकी नितांत अध्ययनशीलता की सीरिज उरेही जा सकती है। इन प्राक्कथनों में पाश्चात्यों के हमलों के मुँहतोड़ व्यक्त-अव्यक्त प्रत्युत्तर गौर करने योग्य हैं। डॉ. शिवदास पांडेयजी की औपन्यासिक दक्षता पुरातन ऐतिहासिक इमारतों के टूटेफूटे रूप को अपने अद्वितीय कौशल से प्रशंस्य साहित्यिक शिल्पी के स्वरूप ढालने में है। इन्होंने अद्वितीय, अपूर्व रूप में अपने सत्कार्य स्वरूप की सफल सिद्धि की है। लेखक ने अपनी सृजन शक्ति की कल्पनात्मक डोर से सघन कथात्मक धूमिलताओं के बीच गहरे गड़े जिस अद्वितीय कौशल से प्रकाश का आँगन उकेरा, संयुक्त सूत्रात्मक बंधन में बाँधा, इस अभिनव बौद्धिक विशेषता को अपनी सविशेष सोच से अशेषगौरव उन्हें स्वतः प्राप्त हो जाता है। इतिहास जब साहित्यमुख से अपने को अभिव्यक्त करता है तो निजी अविरामता में ‘द्रोण’ और ‘चाणक्य’ सदृश सरस्वती ही अपना नया उद्भव प्राप्त करती हैं। निश्चय ही, डॉ. शिवदासजी ने अपने ‘चाणक्य, तुम लौट आओ’ उपन्यास के जरिए भारतीय पुरातन क्षितिज के अनेक गौरवशील ध्रुव तारों के जो अभिनव परिचय कराए हैं, वैश्विक धरातल पर मानवसमाज की वे नूतन संस्कारगत लब्धि कहे जा सकते हैं। —डॉ. सियाराम शरण सिंह ‘सरोज’"
Ramkatha Aaram
- Author Name:
Dr. Viveki Rai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Career Mein Safalta Ke 21 Mantra
- Author Name:
Brian Tracy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Premvallari
- Author Name:
Malik Rajkumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Positive Parenting
- Author Name:
Dr. Navniit Gandhi
- Book Type:

- Description: "• ‘हमारी बेटी गुपचुप किसी लड़के से बात करती है।’ • ‘मेरी बेटी बॉलीवुड के गानों पर डांस सीखना चाहती है। जब से मैंने मना किया है, तब से वो ढीठ और गुस्ताख हो गई है।’ • ‘हमारा एक बेटा है और वह हर समय अपने कमरे में चुपचाप बैठा रहता है; उसका कोई दोस्त भी नहीं है।’ हर बच्चा, हर परिस्थिति और सारे हालात अपने आप में बिल्कुल अलग हैं। अभिभावक होना अपने आप में अनोखा अनुभव होता है या एक रोलर-कोस्टर राइड की तरह नजर आता है। कोई नहीं जानता कि आगे किस तरह का रोंगटे खड़े कर देनेवाला दृश्य सामने आ जाएगा, कहाँ यह सफर धीमा होगा, कहाँ अगला खतरनाक मोड़ आएगा और यह भी कोई नहीं बता सकता कि जमा देनेवाली रफ्तार कब, किस दौर में पहुँचा देगी! इससे पहले कि इस सफर का यात्री खुद को सँभाल पाए और सफर के असर का आकलन भी कर पाए, सफर खत्म हो चुका होता है! बच्चे बड़े हो गए! अभिभावक होने का हर पल उत्साह, खुशी, खिन्नता और निराशा के दौर से भरा एक अनुभव होता है। अगर आप एक अभिभावक हैं, जो इस भूमिका से प्यार करते हैं, लेकिन साथ ही चिढ़ पैदा करनेवाले तमाम सवालों से भी जूझते हैं और फिर भी हमेशा इस बारे में कुछ सुनने और सीखने को लालायित रहते हैं, तो यह किताब आपके हर उस पल को खुशनुमा बना देगी, जो अभी आपके जीवन को दुष्कर बनाए हुए हैं। इसी के साथ आप माता-पिता होने का बेहतरीन अनुभव भी हासिल कर पाएँगे! "
The Great Oceans Within Us
- Author Name:
Killada Satyanarayana, IPS
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samvad Purush Prof. Devendra Swarup
- Author Name:
Jitendra Tiwari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book