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यह उपन्यास ऐसे वर्ग के विषय में है, जिनके प्रति समाज की मनोदशा भद्दी व नकारात्मक है। यह कहानी एयर होस्टेस की पर्सनल व प्रोफेशनल जिंदगी को एक साथ दिखाएगी। यह कहानी आपको समझाएगी कि कैसे प्लेन की गैलरी में आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लिये हमारे ही समाज की लड़की मुसकान के साथ घंटों सेवा में खड़ी रहती हैं, जो अपने घर से दूर निरंतर साज-सज्जा के साथ न केवल आपके स्वास्थ्य का खयाल रखती हैं, बल्कि आपके खाने-पीने और मानसिक व्यवहार का भी खयाल रखती हैं। अतः इनका यह कार्य इन्हें देश की सुरक्षा में खड़े सैनिकों के समान यों कहें कि सैनिकों का दर्जा दिलाता है। शुभी सक्सेना का यह जीवन आपको बताएगा कि प्लेन की गैलरी में खड़ी लड़की के चेहरे पर हर रोज लगातार 14-15 घंटे खिली मुसकान के पीछे क्या और कितना कुछ छुपा है! यह कहानी आपको समझाएगी कि नारी के बलिदान की कोई सीमा नहीं होती तथा नारी का धैर्य सबकुछ छिन जाने के बाद भी कितना विशाल होता है। यह कहानी आपको बताएगी कि नारी सशक्तीकरण का मेडल लिये कोई लड़की अपने जीवन से कितना कुछ देती है समाज को...।
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यह उपन्यास ऐसे वर्ग के विषय में है, जिनके प्रति समाज की मनोदशा भद्दी व नकारात्मक है। यह कहानी एयर होस्टेस की पर्सनल व प्रोफेशनल जिंदगी को एक साथ दिखाएगी। यह कहानी आपको समझाएगी कि कैसे प्लेन की गैलरी में आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लिये हमारे ही समाज की लड़की मुसकान के साथ घंटों सेवा में खड़ी रहती हैं, जो अपने घर से दूर निरंतर साज-सज्जा के साथ न केवल आपके स्वास्थ्य का खयाल रखती हैं, बल्कि आपके खाने-पीने और मानसिक व्यवहार का भी खयाल रखती हैं। अतः इनका यह कार्य इन्हें देश की सुरक्षा में खड़े सैनिकों के समान यों कहें कि सैनिकों का दर्जा दिलाता है।
शुभी सक्सेना का यह जीवन आपको बताएगा कि प्लेन की गैलरी में खड़ी लड़की के चेहरे पर हर रोज लगातार 14-15 घंटे खिली मुसकान के पीछे क्या और कितना कुछ छुपा है! यह कहानी आपको समझाएगी कि नारी के बलिदान की कोई सीमा नहीं होती तथा नारी का धैर्य सबकुछ छिन जाने के बाद भी कितना विशाल होता है। यह कहानी आपको बताएगी कि नारी सशक्तीकरण का मेडल लिये कोई लड़की अपने जीवन से कितना कुछ देती है समाज को...।
Book Details
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ISBN9789355211217
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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पढ़ने में रुचिकर और सिर्फ पाठक की दृष्टि से कहूँ तो यह एक सफल, सशक्त और एक स्थायी प्रभाव छोड़नेवाला उपन्यास है। इसके कई चरित्र और घटनाएँ मुझे याद हैं और उनकी याद रहेगी। आंचलिकता केवल भाषिक परिवेश तक सीमित है। उपन्यास की भाषा ने मुझे बहुत आकृष्ट किया। इस उपन्यास ने
बहुत-से ऐसे शब्द हिन्दी को दिए हैं जो ज्यादा आसानी से आज की साधु हिन्दी ग्रहण कर सकती है। भाषा की दृष्टि से इस उपन्यास की यह महत्त्वपूर्ण देन रही।
–अज्ञेय
बुंदेलखंड का जन्म से मरण तक कोई ऐसा पहलू नहीं है जो इस उपन्यास में न आया हो और सो भी ‘फर्स्ट हैंड’। इस उपन्यास के कई गुण हैं मगर सबसे बड़ा गुण है, गोविन्द मिश्र के बयान का अन्दाज जो बातों को शुरू से अन्त तक कहानी बनाए रखता है। यह पुस्तक हमारे उपन्यास साहित्य में एक नक्षत्र की तरह चमकती रहेगी।
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उपन्यास की घटनाएँ बहुत सजीव हैं। कोई पात्र ‘स्टॉक’ नहीं जान पड़ता, बराबर एक साफ, सुडौल, विशिष्ट, महीन से महीन रेखाओं से उकेरा हुआ व्यक्ति सामने आता है।
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Description:
आलोचकों द्वारा पिछली सदी के दस महत्त्वपूर्ण उपन्यासों में शुमार ‘मित्रो मरजानी’ ने सर्जना के रचनात्मक पाठ की लेखकीय सीमाओं को उलाँघकर मित्रो जैसा एक ऐसा धड़कता पात्र हमें दिया है जो लेखक से अलग और आगे नितान्त अपने होने के बलबूते पर पाठकों और दर्शकों की महापंचायत में दशकों से बना हुआ है। मान लेना होगा कि इस रचना की बुनत में कुछ ऐसा ज़रूर घटित हुआ है जो सर्वसाधारण के चैतन्य में कुछ जगाता है। अपने शब्दों से, अपनी भाषा से कुछ ऐसा कहता है जो नया भी है और पुराना भी। पारिवारिक जीवन का ढका-छिपा नेपथ्य और उसके संवेदन का द्रष्टव्य मित्रो की उपस्थिति के साथ-साथ उसके संवाद की नकोर भाषा में मुखर होता है। गृहस्थ की देहरी पर टिकी स्त्री की पारम्परिक छवि आदिम उत्तेजनाओं से निजात पाने को व्याकुल दीखती है, पर छटपटाहट में ही अपने वजूद में उसे भी खोज रही है जिसे ‘अपने’ में अपना व्यक्तित्व कहते हैं।
प्रसिद्ध ग्राफ़िक कलाकार-चित्रकार नरेन्द्र श्रीवास्तव ने इस पात्र से प्रभावित हो ‘मित्रो मरजानी’ उपन्यास के मूलपाठ को चित्रात्मक वर्णमाला/लिपि में आबद्ध करने का निर्णय लिया और बरसों के परिश्रम से उपन्यास में अंकित मानवीय व्यवहार के विविध मुखड़ों को जिस ध्वनि-चित्रात्मक कौशल और स्फुरण से प्रस्तुत किया है, वह पाठक को उपन्यास की रेखाओं की त्वरित और ऊर्जावान सचित्र लिपि में भारतीय परिवार को पढ़ने और देखने का नया अनुभव देगा।
भारत में किसी पुस्तक की टाइपोग्राफ़िक प्रस्तुति का यह पहला प्रयास है, जो बेशक हिन्दी समाज के पाठकीय अहसास में भी कुछ अभिनव जोड़ेगा।
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