Kisi Aur Subah
(0)
Author:
Lakshmidhar MalviyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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Book Details
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ISBN9788180311901
-
Pages242
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Avg Reading Time8 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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जब कृष्णा पत्रकार बनने का फ़ैसला करती है तो अपना औरत होना और हिन्दी समाचार एजेंसी में काम करना, यही दो परेशानियाँ उसके सामने हैं। जैसाकि उसके मुन्नू चाचा कहते हैं उसका यह फ़ैसला भले ही उसे उसकी निराशा से क्षणिक मुक्ति दे, लेकिन आख़िरकार यह उसे बर्बाद कर देगा। मुन्नू ’चा के मन में इस बारे में कोई शक नहीं था।
सत्तर के दशक में अंग्रेज़ी मीडिया में आए उफान में अंग्रेज़ी और उसके पत्रकार सातवें आसमान पर पहुँच गए, जबकि भाषायी पत्र-पत्रिकाओं पर उनके मालिक कुंडली मारे बैठे रहे—ख़ासकर अब के दौर में मीडिया साम्राज्यों का संचालन करनेवाले मालिक-सम्पादकों की फ़ौज। पुरानी बिल्डिंग के अंधे और तंग दफ़्तर से शुरुआत करनेवाली कृष्णा नई बिल्डिंग के अंग्रेज़ी सम्पादकों और पत्रकारों के नाज़-नखरों को कुछ ईर्ष्या से, कुछ क्रोध से और कुछ मज़े लेकर देखती है। लगभग बेमतलब विषयों के रिपोर्टर से बढ़ते-बढ़ते एक राष्ट्रीय दैनिक की पहली महिला सम्पादक, देश के सबसे लोकप्रिय टीवी चैनलों में से एक की न्यूज़ एंकर बनने तक वह मीडिया के बदलते स्वरूप को बहुत पास से देखती है। वह देखती है कि राजनीतिक और आर्थिक फ़ायदों की लड़ाई मीडिया के सहारे कैसे लड़ी जाती है। और वह पाती है कि इन अधिकांश मामलों में सच्चाई ही बलि चढ़ती है।
समकालीन भारतीय परिदृश्य में सत्ता के पीछे भागनेवालों और दलालों की करतूतों के दिलचस्प और गुदगुदानेवाले विवरणों से भरा यह उपन्यास अपनी सचबयानी और समाचार रिपोर्टिंग की चकाचौंध-भरी दुनिया की वास्तविकताओं पर केन्द्रित है।
Karnataka Ki Lokkathayen
- Author Name:
Prof. B.Y. Lalithamba
- Book Type:

- Description: कर्नाटक की लोककथाएँ क र्नाटक प्रमुख रूप से प्रचीन मैसूर प्रांत; हैदराबाद-कर्नाटक जिला; उत्तर कर्नाटक/उत्तर कन्नड़ प्रदेश तथा दक्षिण कन्नड़ जिले में बँटा हुआ है। कर्नाटक के चारों भागों में लोककथाओं का विपुल भंडार है। इस संग्रह में इन सबका प्रतिनिधित्व है। भूताराधम से संबंधित लोककथाएँ दक्षिण कन्नड़ जिले में खूब प्राप्त होती है। दक्षिण कन्नड़ जिले की तरह उत्तर कन्नड़ जिले की भी कई लोक-जीवन से जुड़ी कहानियाँ प्राप्त होती हैं। कारवार-गोकर्ण आदि की कहानियों पर कोंकण जिले का प्रभाव गहरा है। धारवाड़-हूली पर मराठी संस्कृति का भी प्रभाव है। फिर प्राचीन मैसूर संस्थान पर महाराजा, राजघराने, भरतनाट्यम्, दशहरा, चामुंडी, पहाड़, महिषासुर, दुर्गा द्वारा राक्षस संस्कार आदि से जुड़ी लोकसंस्कृति का असर है। विजयपुर (बीजापुर)-गुलबर्ग, जिसे हैदराबाद-कर्नाटक का क्षेत्र कहा जाता है, की लोककथाएँ भी बहुत प्रचलित हैं। इस संकलन में इन सभी क्षेत्रों में प्रचलित लोकजीवन का प्रतिनिधित्व करनेवाली कहानियाँ संकलित हैं।
The Name Behind The Teachers Desk
- Author Name:
Indranil Roy
- Book Type:

- Description: Aniruddha Chowdhury is a loner, a commoner, a teacher who owes his life to his students. Life unsettles him, whenever he tries to find his foothold. Persecuted in his childhood due to poverty, he even becomes a victim of campus politics in his college life. He aims to become a teacher like his mentor and idol Kamal Sir, whose guidance and support helps him to cling to life, when his parents fail to do their part. He starts giving tuitions from a young age for survival and later joins a school. He gets in touch with four ladies and falls in love with three of them at different stages of his life. He fails twice to save his love interests, from the preying world. Yet, he decides to put up uncharacteristically deceptive resistance to secure his favourite student's future.
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