A Little Chorus of Love : Love through Ages
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What is love? The question brews a million different answers. Love is not an entity. It is an emotion that embraces several hues and shades within. 'A Little Chorus of Love � Love through Ages' simply follows the same idea and assembles 24 different writers portraying love in a form they acknowledge the best.
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What is love? The question brews a million different answers. Love is not an entity. It is an emotion that embraces several hues and shades within. 'A Little Chorus of Love � Love through Ages' simply follows the same idea and assembles 24 different writers portraying love in a form they acknowledge the best.
Book Details
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ISBN9789385137211
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Pages239
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ग पहाड़ी' का देशकाल, कथा-संसार उन्नीसवीं सदी के मध्य से लेकर बीसवीं सदी से पहले का कुमाऊँ है। कहानी शुरू होती है लाल-काले कपड़े पहने ताल के चक्कर काटती छह रहस्यमय महिलाओं की छवि से जो किसी भयंकर दुर्भाग्य का पूर्वाभास कराती हैं। इन प्रेतात्माओं ने यह तय कर रखा है कि वह नैनीताल के पवित्र ताल को फिरंगी अंग्रेज़ों के प्रदूषण से मुक्त कराने की चेतावनी दे रही हैं। इसी नैनीताल में अनाथ तिलोत्तमा उप्रेती नामक बच्ची बड़ी हो रही है। जिसके चाचा को 1857 वाली आज़ादी की लड़ाई में एक बाग़ी के रूप में फाँसी पर लटका दिया गया था। कथानक तिलोत्तमा के परिवार के अन्य सदस्यों के साथ-साथ देशी-विदेशी पात्रों के इर्द-गिर्द भी घूमता है जिसमें अमेरिकी चित्रकार विलियम डैम्पस्टर भी शामिल है जो भारत की तलाश करने निकला है। तिलोत्तमा गवाह है उस बदलाव की जो कभी दबे पाँव तो कभी अचानक नाटकीय ढंग से अल्मोड़ा समेत दुर्गम क़स्बों, छावनियों और बस्तियों को बदल रहा है, यानी एक तरह से पूरे भारत को प्रभावित कर रहा है। परम्परा और आधुनिकता का टकराव और इससे प्रभावित कभी लाचार तो कभी कर्मठ पात्रों की ज़िन्दगियों का चित्रण बहुत मर्मस्पर्शी ढंग से इस उपन्यास में किया गया है जिसका स्वरूप 'राग पहाड़ी' के स्वरों जैसा है। चित्रकारी के रंग और संगीत के स्वर एक अद्भुत संसार की रचना करते हैं जहाँ मिथक-पौराणिक, ऐतिहासिक-वास्तविक और काल्पनिक तथा फंतासी में अन्तर करना असम्भव हो जाता है। यह कहानी है शाश्वत प्रेम की, मिलन और विछोह की, अदम्य जिजीविषा क
Hool
- Author Name:
Bhalchandra Nemade
- Book Type:

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Description:
हूल में चांगदेव पाटील नाम के एक युवा के जरिए भालचन्द्र नेमाड़े भारतीय जीवन और समाज की कमजोरियों के साथ उसकी जिजीविषा को भी एक बड़े फलक पर अंकित करते हैं। मन का सूक्ष्म और संसार का स्थूल यहाँ साथ-साथ चलता है जिसे उनकी व्यापक विश्वदृष्टि एक महाकाव्यात्मक आयाम देती है।
हूल का चांगदेव एक बदला हुआ चांगदेव है, मुम्बई में अपने विद्यार्थी काल में हुए आदर्शनाशी अनुभवों के बाद अब वह यथार्थ का सामना करने के लिए तैयार है जिसके लिए वह एक छोटे से कस्बे में आकर अध्यापक हो जाता है। ‘कन्वर्टेड’ ईसाइयों के इस विद्यालय में उसे जातिवाद, लिंगभेद और संकीर्ण विभागीय राजनीति के अनेक ऐसे रूप देखने को मिलते हैं जो पुनः उसे उतना ही सम्भ्रमित कर छोड़ते हैं, जितना वह यहाँ आने से पहले था। उसे चिढ़ होती है, अपने आप पर दया आती है, और अपने आसपास के लोगों और जीवन पर क्रोध। प्रोफेसर बनने का उसका सुन्दर सपना यहाँ धराशायी हो जाता है।
लेकिन चांगदेव उनमें से नहीं हैं जो धारा के साथ चलने लगें और अन्ततः उसी का हिस्सा हो जाएँ, उनमें से भी नहीं जो शक्तिमन्त संरचनाओं के आगे घुटने टेक दें, और स्वयं के शक्तिशाली होने के लिए अपने अस्तित्वगत मूल्यों को तिलांजलि दे दें। विरोध करने का, खुद के सत्त्व को बचाने का उसका अपना तौर-तरीका है। अन्तस की लाख गुंजलकों के बीच अपनी असहमति की रक्षा करना वह जानता है, इसलिए बेहतर की ओर उठे अपने कदम को वह कभी वापस नहीं लेता। जगत को जिस वृहत रूप में वह देखता है, व्यक्ति और समाज के बीच जो प्राकृतिक सम्बन्ध उसे महसूस होता है, उसके साथ चेतना की अपनी यात्रा को वह सतत जारी रखता है।
हूल स्वतंत्र रूप से भी उतना ही दिलचस्प और पूर्ण पाठ है, जितना कि शृंखला की एक कड़ी के रूप में। यह एक बड़ी विशेषता है।
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