Khatarnak Rog
(0)
Author:
Premchandra SwarnkarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Lifestyle-and-wellness₹
895
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इस पुस्तक में वयस्कों में होनेवाली प्राय: सभी ख़तरनाक और जानलेवा बीमारियाँ जैसे—कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गुर्दों की अक्षमता, लकवा, दमा, पेट के छाले, लू, काला मोतिया, ड्रॉप्सी, ऑस्टियोपोरोसिस के साथ ही भयानक संक्रामक रोग—रेबीज, सार्स, एन्थ्रेक्स, स्वाइन फ्लू, क्षय रोग, कुष्ठ रोग, प्लेग, हैजा, फ़ूड पॉयजनिंग, यकृत-शोथ, टायफ़ाइड, डेंगू, चिकुन गुन्या, मस्तिष्क-शोथ और एड्स के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई हैं। इसके अलावा बच्चों में होनेवाले ख़तरनाक संक्रमण जैसे—पोलियो, निमोनिया, खसरा, डिफ्थीरिया, टिटनेस, मस्तिष्क ज्वर, रूमेटिक ज्वर, रोटावाइरस आंत्रशोथ इत्यादि की पूर्ण जानकारी और बचाव के उपायों के साथ ही विभिन्न रोगों के कारणों और नियंत्रण के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही गम्भीर रोगों की पहचान और पैथोलॉजी की जाँचों के बारे में भी ज़रूरी जानकारियाँ दी गई हैं।</p> <p>एक अत्यन्त उपयोगी और प्रत्येक घर के लिए ज़रूरी पुस्तक है ‘ख़तरनाक रोग’।
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इस पुस्तक में वयस्कों में होनेवाली प्राय: सभी ख़तरनाक और जानलेवा बीमारियाँ जैसे—कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गुर्दों की अक्षमता, लकवा, दमा, पेट के छाले, लू, काला मोतिया, ड्रॉप्सी, ऑस्टियोपोरोसिस के साथ ही भयानक संक्रामक रोग—रेबीज, सार्स, एन्थ्रेक्स, स्वाइन फ्लू, क्षय रोग, कुष्ठ रोग, प्लेग, हैजा, फ़ूड पॉयजनिंग, यकृत-शोथ, टायफ़ाइड, डेंगू, चिकुन गुन्या, मस्तिष्क-शोथ और एड्स के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई हैं। इसके अलावा बच्चों में होनेवाले ख़तरनाक संक्रमण जैसे—पोलियो, निमोनिया, खसरा, डिफ्थीरिया, टिटनेस, मस्तिष्क ज्वर, रूमेटिक ज्वर, रोटावाइरस आंत्रशोथ इत्यादि की पूर्ण जानकारी और बचाव के उपायों के साथ ही विभिन्न रोगों के कारणों और नियंत्रण के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही गम्भीर रोगों की पहचान और पैथोलॉजी की जाँचों के बारे में भी ज़रूरी जानकारियाँ दी गई हैं।</p>
<p>एक अत्यन्त उपयोगी और प्रत्येक घर के लिए ज़रूरी पुस्तक है ‘ख़तरनाक रोग’।
Book Details
-
ISBN9789381863749
-
Pages367
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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भारतीय मनीषा के प्रतीक ग्रन्थों में एक ‘योग वासिष्ठ’ की तुलना विद्वत्जन ‘भगवद्गीता’ से करते हैं। गीता में स्वयं भगवान मनुष्य को उपदेश देते हैं, जबकि ‘योग वासिष्ठ’ में नर (गुरु वशिष्ठ) नारायण (श्रीराम) को उपदेश देते हैं। विद्वत्जनों के अनुसार सुख और दु:ख, जरा और मृत्यु, जीवन और जगत, जड़ और चेतन, लोक और परलोक, बन्धन और मोक्ष, ब्रह्म और जीव, आत्मा और परमात्मा, आत्मज्ञान और अज्ञान, सत् और असत्, मन और इन्द्रियाँ, धारणा और वासना आदि विषयों पर कदाचित् ही कोई ग्रन्थ हो, जिसमें ‘योग वासिष्ठ’ की अपेक्षा अधिक गम्भीर चिन्तन तथा सूक्ष्म विश्लेषण हुआ हो। अनेक ऋषि-मुनियों के अनुभवों के साथ-साथ अनगिनत मनोहारी कथाओं के संयोजन से इस ग्रन्थ का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। स्वामी वेंकटेसानन्द जी का मत है कि इस ग्रन्थ का थोड़ा-थोड़ा नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। उन्होंने पाठकों के लिए 365 पाठों की माला बनाई है। प्रतिदिन एक पाठ पढ़ा जाए। पाँच मिनट से अधिक समय नहीं लगेगा। व्यस्तता तथा आपाधापी में उलझा व्यक्ति भी प्रतिदिन पाँच मिनट का समय इसके लिए निकाल सकता है। स्वामी जी का तो यहाँ तक कहना है कि बिना इस ग्रन्थ के अभी या कभी कोई आत्मज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। स्वामी जी ने इस ग्रन्थ का सार प्रस्तुत करते हुए कहा है कि बिना अपने को जाने मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता। मोक्ष प्राप्त करने का एक ही मार्ग है आत्मानुसन्धान। आत्मानुसन्धान में लगे अनेक सन्तों तथा महापुरुषों के क्रियाकलापों का विलक्षण वर्णन आपको इस ग्रन्थ में मिलेगा। प्रस्तुत अनुवाद स्वामी वेंकटेसानन्द द्वारा किए गए ‘योग वासिष्ठ’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘सुप्रीम योग’ का हिन्दी रूपान्तरण है जिसे विख्यात भाषाविद् और विद्वान बदरीनाथ कपूर ने किया है। स्वामी जी का अंग्रेज़ी अनुवाद 1972 में पहली बार छपा था जो निश्चय ही चिन्तन, अभिव्यक्ति और प्रस्तुति की दृष्टि से अनुपम है। लेकिन विदेश में छपने के कारण यह भारतीय पाठकों के समीप कम ही पहुँच पाया। आशा है, यह अनुवाद उस दूरी को कम करेगा, और हिन्दी पाठक इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक का लाभ उठा पाएँगे।
Rogon Ki Achook Chikitsa
- Author Name:
P.N. Singh
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- Description:
– प्रस्तुत पुस्तक अच्छी तन्दुरुस्ती बनाए रखने में और बीमारियों को सहज ही भगा देने में पूरी-पूरी मदद करेगी।
अचूक इलाज की सभी तरकीबें : ठीक-ठीक खाना, हवा, धूप, पानी और मिट्टी का इस्तेमाल, कसरत और आराम के तरीक़े, अलग-अलग बीमारियों के इलाज के तरीक़े इस पुस्तक में बताए गए हैं।
तन्दुरुस्ती का मसला बहुत आसान है, स्वस्थ रहना ही शरीर की क़ुदरती हालत है, लेकिन इन्सान ने क़ुदरत के रास्ते में बहुत-सी अड़चनें डाल रखी हैं। इसी से इन दिनों बीमारियों की भरमार है। इलाज करनेवालों ने इस उलझन को बढ़ाकर स्वास्थ्य के मसले को और भी पेचीदा कर दिया है। क़ुदरत की राह में अड़चन न डालिए, आप स्वस्थ रहिएगा।
दवा से कुछ भी फ़ायदा नहीं हो सकता बल्कि नुक़सानदेह है। शरीर को प्राकृतिक तरीक़े से हवा, पानी, धूप के सिवा और किसी चीज़ की भी ज़रूरत नहीं है। क़ुदरत ने उसे ऐसा ही बनाया है कि वह अपनी मरम्मत और सफ़ाई आप ही कर लेता है।
Khoobsoorti Se Jeevan Jeene Ki Kala
- Author Name:
H.L. Maheshwari
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ख़ुश रहने के लिए कुछ ज़्यादा करने की ज़रूरत नहीं है। बस सहज होने की कोशिश करें, और आप देखेंगे कि जिसे आप दु:ख मानकर अपनी ज़िन्दगी का उल्लास छोड़ बैठे हैं, उसमें भी एक सुख है। होनी को सरल भाव और खुले मन से स्वीकारें और आप देखेंगे कि आपकी इच्छाशक्ति आपको कहाँ ले जाती है। हँसिए और जब मन भर जाए तो खुलकर रोइए भी। रोना उतना बुरा नहीं है जितना माना जाता है, इससे आप नए हो जाते हैं। दिमाग़ से काम लें लेकिन दिल की भी सुनें, पुस्तकें पढ़कर अपनी कल्पना को नया आकाश दें, और ख़ुशी के परिन्दों के साथ उड़ें। यह पुस्तक ऐसी ही छोटी-छोटी बातों से आपको जीना सिखाती है, ख़ुश रहना सिखाती है। और बताती है कि जीवन अपने आप में ही कितना सुखकारी, कितना अनमोल वरदान है; ज़रूरत है बस हिम्मत, धीरज और सहनशीलता के साथ उसे जीना सीखने की। आशा है, यह किताब इस राह में अवश्य ही आपकी हमसफ़र बनेग
Nari Shareer Ke Rahashya
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
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‘नारी शरीर के रहस्य’ सरल और दिलचस्प शैली में रची गई अनूठी पुस्तक है। इसमें नारी शरीर के भीतर छुपी विराट दुनिया, उसके सातों सुरों और सम्पूर्ण रागों की सुरुचिपूर्ण प्रामाणिक व्याख्या है। किशोर अवस्था से प्रौढ़ा होने तक नारी के शरीर में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं—तरुणाई में तन-मन कैसे सयानेपन की ओर बढ़ एक नया सफ़र शुरू करते हैं? कैसे और कब मासिक-धर्म की शुरुआत होती है? हर चन्द्र मास के साथ स्त्री की देह की आन्तरिक लय-ताल में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं, कैसे वह अपने भीतर नए जीवन का बीज रोपने की तैयारी करती है, और कैसे रजोनिवृत्ति का समय आने पर वह मासिक चक्र के बन्धन से मुक्त हो जाती है, इसका साफ़-सुथरा वर्णन हमें इस पुस्तक में मिलता है।
जानकारियाँ ऐसी कि ये न सिर्फ़ हर स्त्री के लिए उपयोगी हैं, बल्कि पुरुषों के लिए भी बोधकर हैं, इससे वह अपनी संगिनी के तन-मन की भाषा पढ़ सकता है।
Khile Matritva Goonjein Kilkariyan
- Author Name:
Yatish Agarwal +1
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यह पुस्तक उन दिनों की साथी है जब मन में माता-पिता बनने के मीठे सपने खिलने लगते हैं और घर किलकारियों से गूँज उठता है। सन्तान-बीज के गर्भ में आने से लेकर शिशुजन्म और बच्चे की पहली वर्षगाँठ तक समस्त जानकारियों को सरल व स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत करनेवाली यह पुस्तक सभी दम्पतियों, दादा-दादियों और नाना-नानियों के लिए पठनीय है—कैसे करें गर्भधारण की तैयारी, गर्भधारण के लिए महीने की कौन-सी तिथियाँ अनुकूल हैं, क्या बेटे या बेटी का पहले से चुनाव हो सकता है, गर्भावस्था की रोमांचक घटनाएँ, बच्चा गर्भ में कब से आँख-मिचौनी खेलना शुरू कर देता है, गर्भावस्था में क्या खाएँ और क्यों, आरामदेह मुद्राएँ और लाभकारी व्यायाम, डॉक्टरी जाँच-परीक्षण : कब और कैसे, अल्ट्रासाउंड और दूसरे टेस्ट कब-कब किए जाते हैं, आम तकलीफ़ : कैसे पाएँ निजात, कैसे करें शिशु के आगमन की तैयारी, बच्चे का जन्म कैसे होता है, सीज़ेरियन की ज़रूरत कब-कब होती है, बच्चे की सँभाल के लिए क्या-क्या बातें जानना ज़रूरी है, बच्चे को कब, कौन-से टीके लगवाने होते हैं। एक बेहद महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक।
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