Karyakshamta Ke Liye Aayurveda Aur Yog
(0)
Author:
Vinod VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Lifestyle-and-wellness₹
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डॉ. विनोद वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलम्बी तरीक़ों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है। लेखिका की विदेशों में आयुर्वेद की शिक्षा, आयुर्वेद और योग का लम्बे समय तक अध्ययन तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसन्धान और अनुभव इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण कृति बनाते हैं।</p> <p>दफ़्तर में तनावमुक्त वातावरण कैसे बने, इसके लिए डॉ. विनोद वर्मा की पहली सलाह दैनिक योगाभ्यास है—एक ऐसा आसान-सा व्यायाम जो आपके पूरे दिन से मात्र 16 मिनट चाहता है। आगे डॉ. वर्मा आयुर्वेद के आधार पर तीन मूलभूत व्यक्ति-प्रकारों पर प्रकाश डालती हैं, ताकि आप अपने सहकर्मियों का भलीभाँति अध्ययन कर सकें। इस पुस्तक से आप अपने प्रकार को विभिन्न भोज्य पदार्थों और मसालों से सन्तुलित करने की प्रविधियाँ भी जानेंगे। निःसन्देह, यह कोई भोजन-निर्देशिका नहीं है, यह पुस्तक आपको केवल यह बताती है कि अपनी क्षमताओं के अधिकाधिक उपयोग के लिए आप अपनी ऊर्जा का समुचित सन्तुलन कैसे प्राप्त करें। आयुर्वेद की नज़र से देखें तो भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, वह आपकी ऊर्जा के पुनर्सन्तुलन के लिए एक महत्त्वपूर्ण साधन भी <br />है।</p> <p>डॉ. विनोद वर्मा व्यावहारिक अध्यापिका हैं। वे दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ाती रही हैं। अनेक भाषाओं में उनकी पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित व चर्चित हो चुके हैं। इसके अलावा उनके पास अनुभवों का ख़ज़ाना है और अत्यन्त तनावकारी व्यस्तता के साथ एक स्वस्थ जीवन-शैली के निर्वाह की कला भी। जिस पाँच हज़ार साल पुरानी जीवन-पद्धति की शिक्षा वे देती हैं, उसे वे अन्य असंख्य लोगों के साथ-साथ अपने ऊपर भी सफलतापूर्वक आज़मा चुकी हैं। क्यों न आप भी आज़माएँ? यदि आप कार्य-तत्पर प्रकृति के व्यक्ति हैं तो इस पुस्तक का अध्ययन आपको हर प्रकार से लाभान्वित करेगा।
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डॉ. विनोद वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलम्बी तरीक़ों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है। लेखिका की विदेशों में आयुर्वेद की शिक्षा, आयुर्वेद और योग का लम्बे समय तक अध्ययन तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसन्धान और अनुभव इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण कृति बनाते हैं।</p>
<p>दफ़्तर में तनावमुक्त वातावरण कैसे बने, इसके लिए डॉ. विनोद वर्मा की पहली सलाह दैनिक योगाभ्यास है—एक ऐसा आसान-सा व्यायाम जो आपके पूरे दिन से मात्र 16 मिनट चाहता है। आगे डॉ. वर्मा आयुर्वेद के आधार पर तीन मूलभूत व्यक्ति-प्रकारों पर प्रकाश डालती हैं, ताकि आप अपने सहकर्मियों का भलीभाँति अध्ययन कर सकें। इस पुस्तक से आप अपने प्रकार को विभिन्न भोज्य पदार्थों और मसालों से सन्तुलित करने की प्रविधियाँ भी जानेंगे। निःसन्देह, यह कोई भोजन-निर्देशिका नहीं है, यह पुस्तक आपको केवल यह बताती है कि अपनी क्षमताओं के अधिकाधिक उपयोग के लिए आप अपनी ऊर्जा का समुचित सन्तुलन कैसे प्राप्त करें। आयुर्वेद की नज़र से देखें तो भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, वह आपकी ऊर्जा के पुनर्सन्तुलन के लिए एक महत्त्वपूर्ण साधन भी <br />है।</p>
<p>डॉ. विनोद वर्मा व्यावहारिक अध्यापिका हैं। वे दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ाती रही हैं। अनेक भाषाओं में उनकी पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित व चर्चित हो चुके हैं। इसके अलावा उनके पास अनुभवों का ख़ज़ाना है और अत्यन्त तनावकारी व्यस्तता के साथ एक स्वस्थ जीवन-शैली के निर्वाह की कला भी। जिस पाँच हज़ार साल पुरानी जीवन-पद्धति की शिक्षा वे देती हैं, उसे वे अन्य असंख्य लोगों के साथ-साथ अपने ऊपर भी सफलतापूर्वक आज़मा चुकी हैं। क्यों न आप भी आज़माएँ? यदि आप कार्य-तत्पर प्रकृति के व्यक्ति हैं तो इस पुस्तक का अध्ययन आपको हर प्रकार से लाभान्वित करेगा।
Book Details
-
ISBN9788183611435
-
Pages186
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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