Bhasha Vigyan : Saidhantik Chintan
(0)
Author:
Ravindranath ShrivastavaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
895
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प्रो. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव भारतीय भाषा-समुदायों, विशेषकर हिन्दी भाषा-समुदाय की संरचना को व्याख्यायित करनेवाले विद्वानों में एक प्रसिद्ध नाम है। प्रस्तुत पुस्तक प्रो. श्रीवास्तव के भाषावैज्ञानिक सैद्धान्तिक चिन्तन पर प्रकाश डालती है। रूसी, अमरीकी विभिन्न भाषा विश्लेषण पद्धतियों से परिचित होने के बावजूद उन्होंने भारतीय चिन्तन परम्परा को अपने विवेचन का आधार बनाया। इन लेखों के द्वारा जहाँ उनके चिन्तन की गहराई का पता चलता है, वहाँ संस्कृत वैज्ञानिक विश्लेषण के प्रति उनके लगाव का भी परिचय मिलता है। इस सामग्री से विद्यार्थियों में भाषाविज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न होगी, साथ ही भाषावैज्ञानिक सैद्धान्तिक चिन्तकों को दिशा-निर्देश भी प्राप्त होगा। विश्वास है, यह पुस्तक तथा इस शृंखला की अन्य पुस्तकें भी प्रो. श्रीवास्तव के भाषा-चिन्तन को प्रभावशाली ढंग से अध्येताओं तक पहुँचाएँगी।
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प्रो. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव भारतीय भाषा-समुदायों, विशेषकर हिन्दी भाषा-समुदाय की संरचना को व्याख्यायित करनेवाले विद्वानों में एक प्रसिद्ध नाम है। प्रस्तुत पुस्तक प्रो. श्रीवास्तव के भाषावैज्ञानिक सैद्धान्तिक चिन्तन पर प्रकाश डालती है। रूसी, अमरीकी विभिन्न भाषा विश्लेषण पद्धतियों से परिचित होने के बावजूद उन्होंने भारतीय चिन्तन परम्परा को अपने विवेचन का आधार बनाया। इन लेखों के द्वारा जहाँ उनके चिन्तन की गहराई का पता चलता है, वहाँ संस्कृत वैज्ञानिक विश्लेषण के प्रति उनके लगाव का भी परिचय मिलता है। इस सामग्री से विद्यार्थियों में भाषाविज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न होगी, साथ ही भाषावैज्ञानिक सैद्धान्तिक चिन्तकों को दिशा-निर्देश भी प्राप्त होगा। विश्वास है, यह पुस्तक तथा इस शृंखला की अन्य पुस्तकें भी प्रो. श्रीवास्तव के भाषा-चिन्तन को प्रभावशाली ढंग से अध्येताओं तक पहुँचाएँगी।
Book Details
-
ISBN9788171193394
-
Pages181
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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