Vigyan Fantasi Kathayen
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"किस्से कहानियों की तरह विज्ञान की दुनिया भी कम अचरज से भरी नहीं है। विज्ञान फंतासी कथाएँ प्रकाश मनु की विज्ञान कथाओं का ताजा संग्रह है, जिसमें वैज्ञानिक तथ्यों के साथ ही खेल और कल्पना का भी वितान तना हुआ है और हर क्षण कुछ नया घटित हो रहा है, जो परीकथाओं की दुनिया से कहीं अधिक चित्ताकर्षक और जादुई है। मनुजी की विज्ञान कथाओं में कहीं उड़ते हुए रोबोटनुमा पेड़ की कल्पना है तो कहीं मन को नियंत्रित करनेवाले हाइटेक सुपर कंप्यूटर की। कहीं कोई रोबोट गिलगिल सेवन चौकीदार बनकर अपने रहस्यपूर्ण कारनामे से सबको अचंभित कर डालता है तो कहीं वह अनोखी चिडि़या शिंगाई फू शुम्मा के रूप में एक छोटे बच्चे को लंबी अंतरिक्ष यात्रा पर ले चलता है। ‘मंगल ग्रह की लाल चिडि़या’ और ‘चंद्रलोक की अदृश्य दुनिया’ सरीखी कहानियाँ चाँद और मंगल ग्रह पर मनुष्य अस्तित्व की संभावना की कुछ अधिक कल्पनाशीलता के साथ पड़ताल करती हैं। ‘गोपी की फिरोजी टोपी’ और ‘पप्पू की रिमझिम छतरी’ में कंप्यूटर और लेजर किरणों की दुनिया का एक आश्चर्यलोक है, जो आज भले ही खेल की तरह लग रहा हो, पर कल हकीकत में बदल सकता है। पुस्तक में ‘दुनिया का सबसे अनोखा सुपर हाइटेक चोर’ जैसी रोमांचक कहानियाँ हैं तो ‘प्रोफेसर जोशी बादलों के देश में’ जैसी अद्भुत कथाएँ भी, जो परीकथाओं के समांतर उड़ती हुई अपनी राह बनाती हैं।"
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"किस्से कहानियों की तरह विज्ञान की दुनिया भी कम अचरज से भरी नहीं है।
विज्ञान फंतासी कथाएँ प्रकाश मनु की विज्ञान कथाओं का ताजा संग्रह है, जिसमें वैज्ञानिक तथ्यों के साथ ही खेल और कल्पना का भी वितान तना हुआ है और हर क्षण कुछ नया घटित हो रहा है, जो परीकथाओं की दुनिया से कहीं अधिक चित्ताकर्षक और जादुई है। मनुजी की विज्ञान कथाओं में कहीं उड़ते हुए रोबोटनुमा पेड़ की कल्पना है तो कहीं मन को नियंत्रित करनेवाले हाइटेक सुपर कंप्यूटर की। कहीं कोई रोबोट गिलगिल सेवन चौकीदार बनकर अपने रहस्यपूर्ण कारनामे से सबको अचंभित कर डालता है तो कहीं वह अनोखी चिडि़या शिंगाई फू शुम्मा के रूप में एक छोटे बच्चे को लंबी अंतरिक्ष यात्रा पर ले चलता है। ‘मंगल ग्रह की लाल चिडि़या’ और ‘चंद्रलोक की अदृश्य दुनिया’ सरीखी कहानियाँ चाँद और मंगल ग्रह पर मनुष्य अस्तित्व की संभावना की कुछ अधिक कल्पनाशीलता के साथ पड़ताल करती हैं। ‘गोपी की फिरोजी टोपी’ और ‘पप्पू की रिमझिम छतरी’ में कंप्यूटर और लेजर किरणों की दुनिया का एक आश्चर्यलोक है, जो आज भले ही खेल की तरह लग रहा हो, पर कल हकीकत में बदल सकता है। पुस्तक में ‘दुनिया का सबसे अनोखा सुपर हाइटेक चोर’ जैसी रोमांचक कहानियाँ हैं तो ‘प्रोफेसर जोशी बादलों के देश में’ जैसी अद्भुत कथाएँ भी, जो परीकथाओं के समांतर उड़ती हुई अपनी राह बनाती हैं।"
Book Details
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ISBN9789384344290
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Pages168
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘भारत के लोक इतिहास’ श्रृंखला के इस खंड का विषय 1500 ईसा पूर्व से 700 ईसा पूर्व के बीच का काल-खंड है जिसके तहत ऋग्वेद और उसके बाद के ग्रन्थों को क्रमशः व्यवस्थित किया गया है और उस युग के भूगोल, प्रव्रजन, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और समाज के साथ-साथ धर्म और दर्शन आदि पहलुओं का अन्वेषण किया गया है। लेखकों की कोशिश रही है कि उक्त आदिग्रन्थों के माध्यम से तत्कालीन जन-जीवन की पुनर्रचना कर आम पाठकों के लिए उसे बोधगम्य बनाया जाए। इस प्रक्रिया में लैंगिक और वर्ग-आधारित सामाजिक विभाजनों को ख़ास तौर पर देखने की कोशिश की गई है।
पुस्तक के एक अध्याय में पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर प्रमुख क्षेत्रीय संस्कृतियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया गया है। इतिहास में लोहे का आगमन एक महत्त्वपूर्ण घटना है जो इसी युग में सम्पन्न हुई थी, सो उसका वर्णन किंचित् विस्तार से हुआ है। साथ ही जाति व्यवस्था के आरम्भ पर भी इस पुस्तक में अपेक्षित प्रकाश डाला गया है।
मूल ग्रन्थों के उद्धरणों, तार्किक व्याख्याओं और विश्लेषणों, अनेक प्रामाणिक चित्रों और नक़्शों से समृद्ध यह पुस्तक न सिर्फ़ रुचिकर, बल्कि पाठकों को विचारोत्तेजक भी लगेगी।
Tughluq Kaleen Bharat : Vol. 1
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

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Description:
यह ग्रन्थ तुग़लक़ बादशाहों के महत्त्वपूर्ण कालखंड सन् 1320 से 1351 ई. पर केन्द्रित है। इस दौर में शासन की बागडोर सुल्तान ग़यासुद्दीन और मुहम्मद बिन तुग़लक़ जैसे बादशाहों के हाथों में थी। यह ग्रन्थ उस युग की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है।
फ़ारसी, अरबी, अंग्रेज़ी और हिन्दी के विद्वान और इतिहासकार डॉ. सैयद अतहर अब्बास रिज़वी ने इस ग्रन्थ का सम्पादन-अनुवाद किया है। उन्होंने इस ग्रन्थ में तत्सम्बन्धी अरबी और फ़ारसी में उपलब्ध तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और सामग्रियों का उपयोग किया है जिनमें ज़ियाउद्दीन बरनी, एसामी, बद्रे चाच, अमीर ख़ुर्द, इब्ने बतूता, शिहाबुद्दीन अल उमरी, यहया, मुहम्मद बिहामद ख़ानी, निज़ामुद्दीन अहमद, अब्दुल क़ादिर बदायूँनी, अली बिन अज़ीज़ुल्लाह तबातबा, मीर मुहम्मद मासूम और फ़िरिश्ता जैसे विद्वान लेखकों, इतिहासकारों के ग्रन्थ शामिल हैं।
अनुवाद में फ़ारसी, अरबी के प्रचलित नियमों को, जिनका पालन इतिहासकार करते रहे हैं, ध्यान में रखा गया है। साथ ही आवश्यक टिप्पणियाँ भी जगह-जगह दर्ज कर दी गई हैं ताकि पाठकों को विषय को समझने में सुविधा हो।
इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और इतिहासकारों के साथ-साथ इतिहास में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी ग्रन्थ संग्रहणीय है।
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