Vidyalaya Utsav
(0)
Author:
Acharya Mayaram 'Patang'Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
340
272 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"‘उत्सव’ जीवन में उत्साह का संचार करते हैं। जिस समाज में उत्सव जितने जोश और आनंद से मनाए जाते हैं, वह समाज उतना ही जीवंत माना जाता है। भारतवर्ष अत्यंत प्राचीन देश है। यहाँ अवतारों, वीरों, धर्मगुरुओं की संख्या सहस्रों तक जाती है। विद्यालयों में सभी की जयंती मनाना संभव नहीं है। अनेक पर्व ऋतु-परिवर्तन से जुड़े हैं, अनेक पर्व किसी के बलिदान या महान् घटनाओं से जुड़े हैं। सच तो यह है कि हर तिथि और हर दिन का कुछ-न-कुछ महत्त्व है। हमारे विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक अनेक उत्सवों की जानकारी से ही अनभिज्ञ होते हैं। कुछ जानकारी होते हुए भी बोलने में संकोच करते हैं। कई नए शिक्षक बोलना चाहते हैं, परंतु उन्हें तत्संबंधी विषय की जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इन सब कारणों पर विचार करके यह आवश्यकता अनुभव हो रही थी कि एक ऐसी पुस्तक होनी चाहिए, जो वर्ष भर में मनाए जानेवाले प्रमुख त्योहारों की जानकारी शिक्षकों तथा छात्रों को उपलब्ध करा सके। विविध कक्षाओं के स्तर के अनुसार शिक्षक इस पुस्तक की सहायता से छात्रों को लिखवाकर या याद करवाकर सभा में बोलने के लिए तैयारी करवा सकते हैं। ज्ञातव्य है कि ये उत्सव वे नहीं हैं, जो विद्यालयों में मनाए जाते हैं, बल्कि ये ऐसे उत्सव हैं, जो मनाए जाने चाहिए। आप अपने स्थान, स्तर, विश्वास तथा अनुकूलता के आधार पर जो मनाना चाहें, मना सकते हैं। इस कार्य में पुस्तक आपकी सहायता करेगी। आशा है, शिक्षक एवं छात्र इससे लाभान्वित होंगे। "
Read moreAbout the Book
"‘उत्सव’ जीवन में उत्साह का संचार करते हैं। जिस समाज में उत्सव जितने जोश और आनंद से मनाए जाते हैं, वह समाज उतना ही जीवंत माना जाता है। भारतवर्ष अत्यंत प्राचीन देश है। यहाँ अवतारों, वीरों, धर्मगुरुओं की संख्या सहस्रों तक जाती है। विद्यालयों में सभी की जयंती मनाना संभव नहीं है। अनेक पर्व ऋतु-परिवर्तन से जुड़े हैं, अनेक पर्व किसी के बलिदान या महान् घटनाओं से जुड़े हैं। सच तो यह है कि हर तिथि और हर दिन का कुछ-न-कुछ महत्त्व है।
हमारे विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक अनेक उत्सवों की जानकारी से ही अनभिज्ञ होते हैं। कुछ जानकारी होते हुए भी बोलने में संकोच करते हैं। कई नए शिक्षक बोलना चाहते हैं, परंतु उन्हें तत्संबंधी विषय की जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इन सब कारणों पर विचार करके यह आवश्यकता अनुभव हो रही थी कि एक ऐसी पुस्तक होनी चाहिए, जो वर्ष भर में मनाए जानेवाले प्रमुख त्योहारों की जानकारी शिक्षकों तथा छात्रों को उपलब्ध करा सके। विविध कक्षाओं के स्तर के अनुसार शिक्षक इस पुस्तक की सहायता से छात्रों को लिखवाकर या याद करवाकर सभा में बोलने के लिए तैयारी करवा सकते हैं।
ज्ञातव्य है कि ये उत्सव वे नहीं हैं, जो विद्यालयों में मनाए जाते हैं, बल्कि ये ऐसे उत्सव हैं, जो मनाए जाने चाहिए। आप अपने स्थान, स्तर, विश्वास तथा अनुकूलता के आधार पर जो मनाना चाहें, मना सकते हैं। इस कार्य में पुस्तक आपकी सहायता करेगी। आशा है, शिक्षक एवं छात्र इससे लाभान्वित होंगे।
"
Book Details
-
ISBN9788177211306
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
21vin Sadi Ke Sankat
- Author Name:
Ramsharan Joshi
- Book Type:

-
Description:
'आदमी, बैल और सपने' की ज़मीनी संघर्ष-कथाओं से चलकर सामाजिक बदलावों के चौकन्ने दर्शक रामशरण जोशी आज हिन्दी के उन विरल पत्रकारों में हैं जो 'विकसित' होकर 'एक्टिविस्ट-समाजशास्त्री' के रूप में अपनी पहचान बनाते हैं। उनकी 'समाज-समीक्षा' किताबी अध्ययन और कमराबन्द शास्त्रीय चिन्तन से नहीं, परिवर्तनकामी सामाजिक हलचलों के बीच परवान चढ़ी है। इसीलिए एक ओर वे 'आदिवासी समाज और शिक्षा' पर बात करते हैं तो दूसरी ओर आधुनिक 'मीडिया विमर्श' व 'मीडिया और बाज़ारवाद' के जंगलों में रास्ते तलाश करते हैं। उन्हें न देश की राजनीति को बनाने-बिगाड़ने वाले दिग्गज नेताओं को कठघरे में खड़ा करने में हिचकिचाहट होती है और न चुनावी उठा-पटक के बीच अगला प्रधानमंत्री खोज निकालने में। पिछले कार्यक्षेत्र की तरह उनका समाज-विश्लेषण भी जितना हॉरिजेंटल है, उतना ही वर्टिकल भी—वे समस्या के विस्तार में ही नहीं जाते, गहराई में भी उतरते हैं। उनके सरोकार और सम्बद्धता हर जगह वर्तमान और भविष्य से है-अतीत को उन्होंने 'सांस्कृतिक राष्ट्रवादियों के लिए छोड़ दिया है, इसलिए हर समस्या और उपलब्धि को वेदों के खाते में डाल देने की आसान और उतावली विद्वत्ता से बचे रहे हैं।
'इक्कीसवीं सदी के संकट राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में सामान्य जन के संघर्षों और भारत जैसे विकासशील देश पर मँडराते ख़तरों का निर्भीक विश्लेषण है। वे चाहे आधुनिकता के अर्धसत्यों के बहाने, अमेरिकी माफ़िया षड्यंत्रों की बात करें या बाज़ारवाद के साम्राज्यवादी मनसूबों की, निशाने पर चाहे सांस्कृतिक उत्पीड़न और देशी-विदेशी आतंकवाद हो या मानव, मशीन और राज्य की द्वन्द्वात्मकता—हर कहीं उनकी चिन्ता का केन्द्र अपना समाज और अपने देश की स्थितियाँ हैं। इसीलिए वे समझते हैं कि 'भारत में समाज, राष्ट्र और टेक्नोलॉजी के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं रहा।' नतीजे में 'लोकतंत्र का लोकतांत्रीकरण नहीं हो पाया।'
विराट अनुभवों, विशाल अध्ययन और बौद्धिक भूलभुलैयों (लिबरिंथ) के बीच रामशरण जोशी की शक्ति है तार्किक दृष्टि, वैज्ञानिक विश्लेषण, विवेकवादी विमर्श और जनपक्षधर राजनीति। यहाँ उनकी मार्क्सवादी पृष्ठभूमि उनका सबसे विश्वस्त कुतुबनुमा है। इधर उनकी संवेदनाएँ रचनात्मक अभिव्यक्तियों के लिए कसमसाने लगी हैं और वे अपने अनुभवों को कथा-कहानी या आत्म-स्वीकृतियों का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। पता नहीं क्यों, मुझे लगता है कि लम्बी बीहड़ भौतिक और बौद्धिक यात्राओं के बाद वे उस मोड़ पर आ गए हैं जिसे नरेश मेहता ने 'अश्व की वल्गा लो अब थाम, दिख रहा मानसरोवर तीर' कहकर पहचाना था। डिकेन्स से लेकर हैमिंग्वे, शाह ग्रीन, ज्याफ़्री आर्चर, भारत में अरुण साधु या भवानी सेन गुप्ता (चाणक्य सेन) और हिन्दी में मनोहर श्याम जोशी जैसे उपन्यासकार पहले सक्रिय पत्रकार ही तो थे। आख़िर रामशरण ने भी अपनी शुरुआत 'आदमी, बैल और सपने' जैसी कथा-पत्रकारिता से ही तो की थी।
—राजेन्द्र यादव, सम्पादक—'हंस'
Chalen Gaon Ki Ore
- Author Name:
M.D. Mishra 'Anand'
- Book Type:

- Description: कहानियाँ अंतर्मन की वेदनाओं, समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और अन्याय तथा राग-द्वेष को उजागर करते हुए सचेत करती हैं, सही मार्ग प्रशस्त करती हैं। हमारा देश कृषि प्रधान और ग्रामों का समूह है। इसमें निवास करनेवाला वर्ग प्रारंभ से ही शोषित रहा है। किसानों की स्थिति दयनीय रही और आज भी है। पहले से ग्राम्य जीवन में बहुत बदलाव आए हैं। किसानों और खेतिहर मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए शासन द्वारा अनेक योजनाएँ चलाकर उनके उत्थान के प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु बुनियादी परिवर्तन नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि नीचे से ऊपर शासन और प्रशासन जिन भावनाओं के साथ योजनाएँ बनाते हैं, उनका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। लालची और भ्रष्ट लोगों की जो शृंखला बनी हुई है, उसको तोड़ पाना कठिन हो रहा है। वे प्रत्येक मार्ग में अवरोध और अड़ंगे लगाने के विकल्प ढूँढ़ लेते हैं। तू डाल-डाल, मैं पात-पात—इसी साँप-सीढ़ी के खेल में कृषक, मजदूर तथा असहाय वर्ग फँसे हुए हैं। उनके द्वारा भोगे जा रहे यथार्थ का चित्रण ग्राम्य जीवन की इन कहानियों में समाहित है। ग्रामीण परिवेश और देहात में किसान एवं आम जन को होने वाली कठिनाइयों, विसंगतियों, ज्यादतियों एवं उत्पीड़न को कहानियों के माध्यम से सामने लानेवाला यह कहानी-संग्रह ‘चलें गाँव की ओर’ रोचक-मनोरंजक तो है ही, पाठकों के मन को उद्वेलित करनेवाला भी है।
Aadivasi : Vikas Se Visthapan
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

-
Description:
आदिवासियों का पलायन और विस्थापन सदियों से होता रहा है और ये आज भी जारी है। आदिवासियों के जंगलों, ज़मीनों, गाँवों, संसाधनों पर क़ब्ज़ा कर उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर करने के पीछे मुख्य कारण हमारी सरकारी व्यवस्था रही है। वे केवल अपने जंगलों, संसाधनों या गाँवों से ही बेदख़ल नहीं हुए बल्कि मूल्यों, नैतिक अवधारणाओं, जीवन-शैलियों, भाषाओं एवं संस्कृति से भी वे बेदख़ल कर दिए गए हैं।
हमारे मौलिक सिद्धान्तों के अन्तर्गत सभी को विकास का समान अधिकार है। लेकिन आज़ादी के बाद के पहले पाँच वर्षों में लगभग ढाई लाख लोगों में से 25 प्रतिशत आदिवासियों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा। विकास के नाम पर लाखों लोगों को अपनी रोज़ी-रोटी, काम-धंधों तथा ज़मीनों से हाथ धोना पड़ा। उनको मिलनेवाले मूलभूत अधिकार जो उनकी ज़मीनों से जुड़े थे, वे भी उन्हें प्राप्त नहीं हुए।
आदिवासियों के प्रति सरकार तथा तथाकथित मुख्यधारा के समाज के लोगों का नज़रिया कभी संतोषजनक नहीं रहा। आदिवासियों को सरकार द्वारा पुनर्वसित करने का प्रयास भी पूर्ण रूप से सार्थक नहीं हो सका। अन्ततः अपनी ही ज़मीनों व संसाधनों से विलग हुए आदिवासियों का जीवन मरणासन्न अवस्था में पहुँच गया।
21वीं सदी में पहुँचकर भी हमारे देश का आदिवासी समाज जहाँ विकास की बाट जोह रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ सरकार की उदासीन नीतियों के कारण उनकी स्थिति ज्यों की त्यों ही है।
विकास के नाम पर छले जा रहे आदिवासियों के पलायन और विस्थापन आदि समस्याओं पर केन्द्रित यह पुस्तक समाज और सरकार के सम्मुख कई सवाल खड़े करती है।
Vibhram Aur Yathartha
- Author Name:
Christopher Caudwell
- Book Type:

-
Description:
‘विभ्रम और यथार्थ’ मार्क्सवादी दृष्टिकोण से लिखी गई काव्यशास्त्र की सम्भवतः पहली और हमारे युग की विशिष्टतम पुस्तक है। इसमें कविता की तो चर्चा है ही, कविता के स्रोतों की भी चर्चा की गई है। कविता भाषा में लिखी जाती है, इसलिए इस पुस्तक में भाषा के स्रोतों का भी विवेचन किया गया है। भाषा मनुष्य को समाज से प्राप्त होती है। एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से लोग न केवल अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, एक-दूसरे को प्रेरित और प्रोत्साहित भी करते हैं, इसलिए भाषा समाज में रहनेवाले मनुष्यों की प्रेरणा का भी उपकरण है। यानी कविता के स्रोतों का अध्ययन समाज के अध्ययन का अंग है, उसे समाज से अलग नहीं किया जा सकता। साहित्य समाज की उपज है, यह कोई नई स्थापना नहीं है। किन्तु मार्क्सवादी समीक्षा-प्रणाली में इसका निहितार्थ यह होता है कि साहित्य या कला की आलोचना के लिए आलोचक को साहित्य से बाहर जाना पड़ता है। उसके लिए साहित्य केन्द्रीय महत्त्व का होता है, किन्तु भौतिक विज्ञान, नृतत्त्वशास्त्र इतिहास और दर्शनशास्त्र आदि विषय में भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं। अतः इस पुस्तक में साहित्य के सैद्धान्तिक अध्ययन के लिए विशुद्ध सौन्दर्यशास्त्रीय दृष्टिकोण के निषेध और साहित्य अथवा कविता के मूल्यों को साहित्येतर मूल्यों के सन्दर्भ में देखने का आग्रह किया गया
है।कॉडवेल इस बात की लगातार वकालत करते दिखते हैं कि कला को कला के भीतर से नहीं, अपितु उसके बाहर से (यानी समाज के भीतर से) देखना चाहिए। उनके मतानुसार, कला या साहित्य की आलोचना शुद्ध सर्जना अथवा शुद्ध रसास्वादन से इस अर्थ में भिन्न है कि इसमें एक समाजशास्त्रीय तत्त्व निहित होता है। वस्तुतः साहित्य के हर जिज्ञासु पाठक के लिए यह अत्यंत आवश्यक और उपयोगी पुस्तक है।
Ab Ve Vhan Nahin Rehte
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

- Description: मोहन राकेश, कमलेश्वर और राजेन्द्र यादव की त्रयी को ‘नई कहानी’ आन्दोलन के प्रवर्त्तक और उन्नायक के रूप में जाना जाता है। प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह को नई कहानी की प्रवृत्तियों को सूत्रबद्ध करने का श्रेय है। यह बात ग़ौरतलब है कि आज़ादी के बाद के ये चार शिखर रचनाकार आपस में गहरे मित्र थे, 1950 तथा ’60 के दशक में इन लोगों के बीच ज़बरदस्त अन्तर्संवाद भी था। आलोचना-प्रत्यालोचना और आत्मालोचना से भरे इस अन्तर्संवाद ने उस आन्दोलन को बल दिया, इन रचनाकारों को भी इससे ऊर्जा मिली यह वह समय था जब भारत का नया समाज बन रहा था और साहित्य का भी स्वरूप बदल रहा था। ऐसे में कुछ भी नया करने के लिए गहन विचार-विमर्श जरूरी था और उसका सबसे सुगम मार्ग था पत्र। मित्रों की स्वस्थ आलोचना उस समय का युगधर्म था। जाहिर है, रचनाशीलता के विकास में भी उसकी गहरी भूमिका थी। राजेन्द्र यादव के नाम मोहन राकेश, कमलेश्वर और डॉ. नामवर सिंह तथा राजेन्द्र यादव के नामवर सिंह के लिए पत्रों का यह संग्रह अपने समय के लेखकीय अन्तर्संवादों का जीवन्त दस्तावेज़ है। इनके माध्यम से इन लेखकों के रचनात्मक संघर्ष को भी समझा जा सकता है और साहित्य की उन अन्तर्ध्वनियों को भी, जिन्हें साहित्य के किसी इतिहास के माध्यम से सुन-समझ पाना सम्भव नहीं है।
Hansa Karo Puratan Baat
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

-
Description:
‘हंसा करो पुरातन बात’ कथाकार-उपन्यासकार काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में उनके 1989 से 2022 तक के साक्षात्कार हैं। साक्षात्कारों को प्रकाशन-क्रम से रखा गया है ताकि पाठक उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा को प्रामाणिकता के साथ समझ सकें।
काशीनाथ जी से जुड़ा वह हर सवाल यहाँ मौजूद है जिसमें एक पाठक की जिज्ञासा हो सकती है। ये सभी साक्षात्कार वे हैं जो उनकी पूर्व-प्रकाशित दोनों पुस्तकों, ‘गपोड़ी से गपशप’ और ‘बातें हैं बातों का क्या’ में नहीं हैं। ‘परिशिष्ट’ में ऐसे साक्षात्कार हैं जिनमें सीधे-सीधे सवाल-जवाब की पद्धति नहीं है, लेकिन साक्षात्कारकर्ता या पत्र-पत्रिका ने उन्हें ‘बातचीत’ या ‘बातचीत पर आधारित’ कहा है। इन साक्षात्कारों में ‘सदी का सबसे बड़ा आदमी’ कहानी के प्रति उनका मोह दृष्टिगोचर होता है। ‘काशी का अस्सी’ को वे अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास तथा ‘अपना मोर्चा’ को भूमिका मात्र मानते हैं। सामासिक संस्कृति की पक्षधरता और मनुष्यता में उनका विश्वास भी प्रकट होता है। कहानी लेखन में बदलाव, कहानी से संस्मरण की ओर शिफ्ट होने के कारण, देश-विदेश-छात्र राजनीति एवं वर्तमान लेखन पर उनके विचार इन साक्षात्कारों में अभिव्यक्त हैं।
Bahujan Sahitya Ki Saiddhantiki
- Author Name:
Pramod Ranjan
- Book Type:

-
Description:
सामाजिक आन्दोलनों और साहित्य में बहुजन अवधारणा को लेकर इधर के वर्षों में चर्चा तेज हुई है। देश भर में बहुजन साहित्य पर केन्द्रित आयोजन स्वत:स्फूर्त ढंग से हो रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भागीदारी कर रहे हैं। ये आयोजन हिन्दी पट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दक्षिण भारत राज्यों में भी हो रहे हैं। बहुजन साहित्य की अवधारणा कई स्तरों पर विचरोत्तेजक है। लेकिन सही मायने में यह प्रगतिशील, जनवादी और दलित साहित्य का विस्तार है और उनका स्वाभाविक अगला मुकाम भी।
तीन खंडों में विभाजित यह किताब बहुजन साहित्य के इतिहास और दर्शन से परिचय करवाती है तथा इस पर आधारित व्यावहारिक आलोचना की एक बानगी भी प्रस्तुत करती है।
किताब का पहला खंड बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केन्द्रित है, इसमें इसकी सैद्वान्तिकी के विविध पहलुओं पर विमर्श है। दूसरा खंड इसके इतिहास से परिचित करवाता है। तीसरे खंड में बहुजन आलोचना की बानगी प्रस्तुत की गई है।
Dharmon Ki Kataar Mein Islam
- Author Name:
Arun Bhole
- Book Type:

- Description: इसलामी आतंकवाद की दहशत न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के विध्वंस के साथ ही सारी दुनिया में फैल गई थी। उसके कुछ समय बाद भारत में जब नृशंस गोधरा कांड और उग्र गुजरात दंगे हुए, तो लेखक देश और दुनिया के लिए दुश्चिंताओं से ग्रस्त हो गया। उसके गहन इतिहास-बोध और दीर्घकालीन राजनीतिक अनुभव के साथ घटनाओं के घात-प्रतिघात ने जिन विचारों को जन्म दिया, वे ही घनीभूत होकर ‘धर्मों की कतार में इसलाम’ नामक पुस्तक बन गई। जैसा कि पुस्तक के नाम से झलकता है, विभिन्न धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए यह इसलाम के स्वरूप, स्वभाव और उसकी सृजित समस्याओं पर विशेष प्रकाश डालता है। ‘धर्मों की कतार में इसलाम’ में इस बात पर बल दिया गया है कि भारतीय मूल के मुसलमानों का इतिहास सिर्फ हजार-पाँच सौ साल ही पुराना नहीं माना जाएगा, जब से वे लोग मुसलमान बनाए गए या बने थे। उन्हें अपने पूर्वकालीन पुरखों के इतिहास से भी खुद को जोड़ना चाहिए और इस अति प्राचीन देश की शानदार सभ्यता-संस्कृति पर समान रूप से गर्व करना चाहिए। वर्तमान भारत में गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा जैसी गंभीर समस्याएँ केवल मुसलिम समाज तक ही सीमित नहीं, बल्कि सारे देशवासी इनसे परेशान हैं। इसलिए मुसलमानों के लिए भी ऐसे सार्वजनिक और राष्ट्रीय महत्त्व की समस्याओं पर एक मुसलमान के बजाय एक हिंदुस्तानी के नाते विचार और यत्न करना लाभदायक होगा। इसलाम को सही रूप में जानने-समझने के लिए एक जरूरी पुस्तक।
Anubhootiyon Ka Ghanatva
- Author Name:
Yogendra Mohan
- Book Type:

- Description: जंगल-जंगल ढूँढ़ रहा है मृग अपनी कस्तूरी कितना मुश्किल है तय करना खुद से खुद की दूरी। भीतर शून्य बाहर शून्य शून्य चारों ओर है मैं नहीं हूँ मुझमें फिर भी मैं-मैं का शोर है। मौत का बेरहम इतिहास बदल सकते हो पाप का पुण्य में विश्वास बदल सकते हो अपनी बाँहों पे भरोसा अगर हो जाए तो धरा तो धरा है, आकाश बदल सकते हो। अब डूबने का भी क्या डर प्रभु! जब नाव भी तेरी नदी भी तेरी लहरें भी तेरी और मैं भी तेरा। समय को शान पर चढ़ बुद्धि कुंदन की भाँति चमक उठती है विवेक जाग्रतू होने लगता है विवेक-बुद्धि का संयोग और प्रयोग ही सफल जीवन का रहस्य है। सब भूल सहज भाव अपनाएँ साक्षी भाव में खो जाएँ प्रतिज्ञा करना छोड़ें आडंबरों से ऊपर उठ मन को कर्म से जोड़ें। जीवन स्वयं उत्सव बन जाएगा स्वर्ग बन जाएगा। --इसी संग्रह से
Bhartiya Sanskriti Aur Sex
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

- Description: जहाँ तक 'हिन्दू संस्कृति' का प्रश्न है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरोधाओं ने जिस रूप में इसकी व्याख्या की, पहले भी लिखा जा चुका है कि वह बहुत ही संकुचित और विकृत व्याख्या है, जो लोगों में इस संस्कृति के प्रति एक भ्रम पैदा करती है। जिन विद्वानों ने वास्तविकता पर आधारित तथ्यपरक व्याख्या की, उनको यह कहकर सिरे से ख़ारिज कर दिया गया कि उन पर पश्चिम के विद्वानों का प्रभाव है और वे एकांगी दृष्टि से संस्कृति को देखते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वेदों से प्रारम्भ कर भारतीय संस्कृति का समग्र रूप मनुष्य की समस्त जीवन-शैली के अच्छे-बुरे पक्ष को ज़ाहिर करता है, जो समय के अनुसार बदलती रही है। हमारे देश में एक प्रचलन यह भी रहा है कि हम प्राचीन धार्मिक ग्रन्थों पर तिलक-चंदन चढ़ाते हैं, उनकी पूजा करते हैं, पर उन्हें पढ़ते नहीं हैं। पढ़ते तो संस्कृति के नाम पर जो दुष्प्रचार किया जाता रहा है, वह सम्भव नहीं था।
Aadivasi Darshan
- Author Name:
Amrita Priyanka Ekka +4
- Book Type:

- Description: सभ्यता और संस्कृति के स्तर पर किसी भी समुदाय की जीवनीशक्ति मूलत: उस समुदाय के दार्शनिक चिन्तन में निहित होती है। जिज्ञासा इस चिन्तन का बीज है और कल्पना उसके अँखुआने के लिए आवश्यक जल। इस तरह जो यात्रा आरम्भ होती है वह दर्शन के दायरे में तब प्रवेश करती है जब कल्पना और कल्पनाशक्ति से आगे बुद्धि और विवेक प्रधान हो जाते हैं, तब अज्ञात की गुत्थी खोलने में अलौकिक माध्यमों का परित्याग कर दिया जाता है और अनुभव को तथ्यों की जाँच और व्याख्या का आधार बनाया जाता है। इस मामले में आदिवासी समुदाय भी अपवाद नहीं है। लेकिन दर्शन सम्बन्धी विचार-विमर्शों में आदिवासी समुदायों का सन्दर्भ अब तक प्राय: अनुपस्थित रहा है, जबकि पृथ्वी के प्राचीनतम बाशिन्दों के रूप में वे आदि जिज्ञासु और आदि चिन्तक रहे हैं। उनकी एक सुचिन्तित दर्शन-परम्परा है, जो उनके धर्म—जिन्हें आदि धर्म, सनातन धर्म, गोंडी धर्म, पूयेम धर्म जैसी कई संज्ञाओं से जाना जाता है—सम्बन्धी धारणाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह जरूर है कि इतर समुदायों के विपरीत आदिवासी समुदायों का दार्शनिक चिन्तन वाचिक रूप में ही रहा है। यह हिन्दी में किंचित पहली पुस्तक है जिसमें आदिवासी दर्शन के बुनियादी तत्त्वों का परिचय और विवेचन प्रस्तुत किया गया है। भारत के विभिन्न भागों-अनेक आदिवासी समुदायों के दर्शन-चिन्तन, सृष्टि-कथा, तत्त्व मीमांसा, सत्ता-मीमांसा, ज्ञान-मीमांसा आदि विषयक विचारोत्तेजक सामग्री इस पुस्तक में संकलित की गई है। इसकी एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें आदिवासी दर्शन को प्रस्तुत करने वाले विद्धानों में गैर आदिवासी और विदेशी विद्वान भी शामिल हैं जिनके अनुभव, अध्ययन और चिन्तन-मनन ने इस विषय को व्यापकता प्रदान की है। संक्षेप में, इतर समुदायों की तरह मनुष्य या ईश्वर केन्द्रित न होकर प्रकृति केन्द्रित आदिवासी दार्शनिक चिन्तन के विविध पहलुओं को सामने लाने वाली यह कृति निश्चय ही पाठक को एक नई दृष्टि प्रदान करेगी।
Gyanyog
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: ‘ज्ञानयोग’ में स्वामी विवेकानन्द के वेदान्त पर दिए गए विश्लेषणपरक भाषणों को संकलित किया गया है। इनमें कुछ भाषण लंदन में, कुछ अमेरिका में और कुछ अत्यत्र दिए गए थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में वेदान्त निर्णायक रूप में उपयोगी साबित हो सकता है; कि वह मनुष्य के अब तक किए गए चिन्तन का उच्चतम फल है, संसार की समस्त विचार-सरणियों को अन्ततः उसी में विलीन होना है। अत्यन्त सरल और सुगम भाषा में दिए गए इन वक्तव्यों में उन्होंने माया क्या है, मनुष्य का वास्तविक स्वरूप क्या है, माया और ईश्वर की अवधारणा का विकास किस प्रकार हुआ, संसार क्या है, आत्मा का स्वभाव क्या है, अमरत्व क्या है, आदि विषयों पर विचार किया है। विवेकानन्द के चिन्तन की विशेषता ये है कि दर्शन के गूढ़ प्रश्नों पर वे जो भी विचार करते हैं, उसे हमारे भौतिक और वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए, उसकी रोशनी में व्याख्यायित करते हुए करते हैं, यह विशेषता इन आलेखों और वक्तव्यों में भी दृष्टिगोचर होती है।
1000 Jeev Jantu Prashnottari
- Author Name:
Menaka Gandhi
- Book Type:

- Description: 1000 जीव-जंतु प्रश्नोत्तरी ' में संसार भर के समस्त जीवों-चाहे वे जल में वास करनेवाले हैं या जमीन पर रहनेवाले हैं अथवा गगन में स्वच्छंद विचरण करनेवाले; जमीन पर रेंगनेवाले, पानी में तैरनेवाले या जमीन पर जीवन के लिए संघर्ष करनेवाले हैं-उनकी आदतों, वातावरण, रहन-सहन, शिकार एवं भोजन प्राप्ति, उनकी संतति तथा उनकी जीवन- रक्षा की पद्धति से संबंधित रहस्यपूर्ण व जानकारीपरक वर्णन है । जीव-जगत् का समग्र दिग्दर्शन करानेवाले जंतु विज्ञान का विशद् ज्ञान कराने के उद्देश्य से एक हजार प्रश्नों का संकलन बड़ी सूझ-बूझ और सुबोध एवं सरल भाषा में किया गया है । प्रस्तुत पुस्तक को पढ़कर पाठकगण जीव-जंतुओं के अनोखे संसार की रोचक जानकारी प्राप्त कर इस क्षेत्र में अपने ज्ञान का विस्तार सहज ही कर पाएँगे ।
Kavya Kavi-Karm : Sattarottari Hindi Kavita
- Author Name:
A. M. Murlidharn
- Book Type:

- Description: डॉ. मुरलीधरन की यह पुस्तक जहाँ एक ओर खड़ी बोली में लिखी कविताओं का संक्षिप्त परन्तु सुचिंतित इतिहास है वहीं सत्तर के बाद की कविताओं का गम्भीर विवेचन भी है। कविता और कवि-कर्म की सारगर्भित परिभाषा के साथ ही साथ सत्तर के दशक की कविता के कुल और शील का व्यापक विवरण भी इसमें है। यह कार्य एक अभाव की पूर्ति करता है। साठोत्तरी कविता के अवशेषों का उल्लेख करते हुए लेखक ने सत्तर के दशक के मोहभंगजन्य खीज, आक्रोश, विक्षोभ, विसंगति, संत्रास, अराजकता, राजनैतिक परिवर्तन की आकांक्षा और उलटफेर की आवश्यकता की प्रतीति को सप्रमाण रेखांकित किया है। इस पुस्तक की प्रमुख विशेषता है कि इसमें वैदुषिक दृष्टि से उपलब्ध सभी कवियों की कृतियों को विश्लेषण के लिए चुना गया है, जिसके कारण इस मूल्यांकन का महत्त्व बढ़ गया है। यह पहली पुस्तक है जिसमें हिन्दी-काव्य साहित्य को राष्ट्रीय दृष्टि से विवेचित किया गया है। विचारधाराओं के दबाव और संगठनों के नज़रिए से मुक्त होकर किया गया सटीक विश्लेषण इसे छात्रों के लिए ही नहीं अध्यापकों के लिए भी उपयोगी बनाता है। डॉ. मुरलीधरन के गहन अध्ययन और तत्त्वदर्शी दृष्टि का प्रमाण तो पुस्तक है ही। इससे भी महत्त्वपूर्ण है इसके ज़रिए उन सूक्ष्म अन्तरों और कमियों की ओर संकेत जो पीढ़ियों, दशकों के अन्तराल में मिलते हैं। इसमें कवियों की विशेषताओं और कृतियों की गुणवत्ता तथा अन्तर्वस्तु को स्पष्टता के साथ रेखांकित किया गया है। कविताओं को रचनाकार की आयु के तर्क से नहीं समकालीनता और रचनात्मकता के आधार पर परीक्षित करने के कारण पुस्तक का महत्त्व बढ़ गया है। छठें, सातवें और आठवें दशक की सामान्यताओं, अनुरूपताओं और विरुद्धताओं को अत्यन्त सावधानी से इसमें परिभाषित किया गया है। पुस्तक विद्वानों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए निश्चय ही उपयोगी है।
Chetna Hero
- Author Name:
Mission Chetna
- Book Type:

- Description: चेतना इस संसार में भलाई को पहचानने, उसकी सहारना करने और उसे आगे बढ़ानेवाला एक अभियान है। 'भलाई का प्रसार' करने और तमाम लोगों को जीवन में भलाई पर चलने की प्रेरणा देने के अपने मिशन पर खरा उतरते हुए, चेतना भारत भर में उन पुरुषों और महिलाओं की पहचान और उनका सम्मान हि] है, जो धारा के खिलाफ जाने और अन्य व्यक्तियों तथा परिवारों तक पहुँचने का पर्याप्त साहस रखते हैं। ये पुरुष और स्त्रियाँ चेतना के नायक- नायिकाएँ हैं--चेतना हीरो हैं। “चेतना हीरो' की जीवंत कहानियाँ दूसरों को भी कुछ ऐसा ही करने की, उसमें सहयोग करने की प्रेरणा दे सकती हैं--यही सोच इस चेतना हीरो की कॉफी टेबल बुक का आधार है। चेतना हीरो ऐसे भले लोग हैं, जिन्होंने कर्म के जरिए बोलने का फैसला किया है। उनमें से किसी ने भी बड़े पैमाने पर सुनियोजित और अच्छे-खासे पैसों के साथ भलाई के अपने काम शुरू नहीं किए। वे जिन लोगों के संपर्क में वे आए, उनकी मदद के लिए उन्होंने चुपचाप उनकी तकलीफों को कम किया और फिर किसी एक की तकलीफ दूर करने के बाद वे रुके नहीं। वे खुद से लगातार पूछते रहे, “मैं और क्या कर सकता हूँ समाज के लिए?” और 'किसे इस तरह की मदद चाहिए ?' इस तरह के सवालों के जवाब ने उनको चेतना हीरो में बदल दिया, जो वे आज हैं। 'चेतना हीरो : कॉफी टेबल बुक ' ऐसे ही कुछ असाधारण व्यक्तियों की सराहना है, जिन्होंने पशु देखभाल, शिक्षा, पर्यावरण देखभाल, भूख, सामाजिक जिम्मेदारी, दिव्यांगों और महिलाओं के सशकतीकरण में अपने प्रयासों से करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। चेतना की यह पहल उन सभी हीरो को एक मंच पर लेकर आती है। नेटवर्क बनाने और एक-दूसरे से जुड़ने के कारण इन हीरो को यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि उनके कार्यों का सामूहिक प्रभाव दयालुता और देखभाल के व्यक्तिगत कार्यों की तुलना में कई गुना व्यापक हो। आशा है कि कॉफी टेबल बुक आपके जीवन में भी 'भलाई के प्रसार' का एक दीपक जलाएगी। ...
Khandit Bharat
- Author Name:
Dr Rajendra Prasad
- Book Type:

- Description: "आधुनिक भारत के मनीषी, तत्त्वज्ञानियों और चिंतकों में देशरत्न राजेंद्र प्रसाद का प्रथम स्थान है। परदु:खकातरता, त्याग और सेवा- भाव उनके स्वाभाविक गुण थे। भारत की एकता और अखंडता बनाए रखना उनके लिए अत्यंत महत्त्व की बात थी। सन् 1940 के लाहौर अधिवेशन में मुसलिम लीग ने जब देश के विभाजन का प्रस्ताव पारित किया तो यह गंभीर चिंता और चर्चा का विषय बन गया। अनेक प्रमुख व्यक्तियों ने इस पर अपने विचार एवं योजनाएँ प्रस्तुत कीं तथा अपने-अपने ढंग से इस समस्या के समाधान सुझाए। 1945 में इसी बात को ध्यान में रखकर राजेंद्र बाबू ने अंग्रेजी में पुस्तक लिखी-' इंडिया डिवाइडेड'; खंडित भारत उसी का हिंदी अनुवाद है। पाकिस्तान की माँग से संबद्ध उस समय तक प्रकाशित प्राय: संपूर्ण साहित्य के विस्तृत अध्ययन के बाद लिखी गई इस पुस्तक की मुख्य विशेषता है कि इसमें लेखक के विचार पाठकों पर आरोपित नहीं किए गए। तथ्यों, आँकड़ों, तालिकाओं, नक्शों और ग्राफों की सहायता से भारतीय प्रायदीप के विभाजन से संबंधित संपूर्ण सामग्री उपस्थित कर देश के बँटवारे के पक्ष-विपक्ष में इस प्रकार तर्क प्रस्तुत किए गए हैं कि पाकिस्तान की व्यवहार्यता अथवा अव्यवहार्यता के विषय में पाठक स्वयं अपनी राय बना सकें। विभाजन के समर्थकों एवं विरोधियों-दोनों के लिए ' खंडित भारत' एक आदर्श ग्रंथ माना गया। यद्यपि देश को विभाजित हुए साठ वर्ष से ऊपर बीत चुके हैं, इतिहासकारों की दृष्टि में आज भी यह पुस्तक महत्वपूर्ण है और प्रत्येक भारतीय के लिए पठनीय है।
Yah Jivan Arpit Bachchon Ko
- Author Name:
Asharani Vohara
- Book Type:

- Description: आज के जागरूक बच्चों को ज्ञान-विज्ञान की हर दिशा से परिचित कराया जा रहा है। विषय कोई भी हो, यदि वह बाल-सुलभ जिज्ञासा उत्पन्न कर सरल ढंग से उसका समाधान करता चलता है, बालक का मनोरंजन कर उसके ज्ञान में आनन्ददायक वृद्धि करता है तो वह बच्चों के लिए ग्राह्य है। यह पुस्तक इन्हीं विशिष्टताओं का केन्द्र है। नेता और समाजसुधारक बहुत हुए पर वे नाम बहुत कम हैं जो मुख्यतः बच्चों के हितों को ही समर्पित रहे। क्या इन नामों से स्वयं बच्चों को परिचित नहीं कराना चाहिए? इसी विचार और प्रयत्न का परिणाम है यह छोटी-सी पुस्तक। इस पुस्तक में बच्चों के रुझान और उत्थान को समर्पित विश्व-भर से चुने हुए केवल सात नाम हैं, जिन्हें पढ़ते समय बच्चों को लगेगा, वे तो उनके अपने हैं—कितने निकट अौर परिचित।
Atal Yaaden
- Author Name:
Virendra Jain
- Book Type:

- Description: भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी नाम पढ़ते ही स्मरण हो आता है कि वह ओजस्वी वक्ता थे, कविहृदय थे, उदारहृदय थे। आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध रहे। भारतीय राजनीति के पुरोधा रहे । जीवन के पाँच दशक सांसद के रूप में बिताए। जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे। जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री रहे और तीन बार प्रधानमंत्री रहे । इतना ही नहीं, उनके जीवन से जुड़ी अन्य कई रोचक जानकारियाँ भी हमारी स्मृति में फिर से जीवंत हो उठती हैं। इस आख्यान के केंद्रीय चरितनायक वही अटल बिहारी वाजपेयी हैं, फिर भी वह वही नहीं हैं। यह आख्यान अपने पाठकों को एक ऐसे अटलजी से परिचित होने का अवसर देता है, जो उनके लिए सर्वथा अपरिचित हैं। अटलजी से जुड़ी स्मृतियाँ ही इस आख्यानपरक संस्मरणात्मक पुस्तक में लिपिबद्ध की गई हैं। इस आख्यान के अटलजी पुस्तक की प्रशंसा के लिए अपरिचित लेखक को फोन पर बधाई देने में संकोच नहीं करते। वैचारिक साम्य न रखनेवाले लेखक, संपादक के व्यक्तित्व और कृतित्व की मुक्तकंठ से प्रशंसा करने के लिए श्रोता रूप में समारोह में पहुँचकर बधाई देने में संकोच नहीं करते । कवि के रूप में अपनी सीमाओं को भी पूरे मन से स्वीकारते हैं । जो सार्वजनिक मंच से भी दोष स्वीकारने का साहस रखते हैं। जिन्हें धर्मसंकट उत्पन्न न करनेवाले मित्र अधिक प्रिय हैं। जो औरों की अव्यक्त, अप्रस्तुत अपेक्षाओं की भी पूर्ति करने से नहीं चूकते ।
Encyclopaedia Of Humanities (Psychology)
- Author Name:
Nagendra
- Book Type:

- Description: Encyclopaedia Of Humanities (Psychology)- Comparative study of Indian and Western intentions.
Miracles in Medicine
- Author Name:
Roopa Pai
- Rating:
- Book Type:

- Description: Can you imagine a world where surgeries and amputations were conducted without anaesthesia? OUCH! Or one in which disease was believed to be caused by 'stinky air'? WEIRD! Or a world where treating madness involved drilling a hole through the skull to release the supposed 'demons' inside your head? SAY WHAAAAA...?! Guess what? That was our world, just about 250 years ago! All of this began to change in the eighteenth century with the coming of modern medicine. This brave new science, full of brilliant breakthroughs, was built on the hard work, dedication and persistence of thousands of curious minds across the ages, from Arabia to China and India to Europe. Packed with fascinating stories, insights and illustrations, this book is a celebration of 2,500 years of human endeavour and innovation in the medical sciences. Read it, and raise a rousing cheer to the amazing people who gave their all to unravel the secrets of the natural world and the human body, so that we could live longer, healthier and happier lives.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book