Main Aur Tum
(0)
Author:
Martin BuberPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
अस्तित्ववादी चिन्तन-सरणी में सामान्यत: सार्त्र-कामू की ही बात की जाती है और आजकल हाइडेग्गर की भी; लेकिन एक कवि-कथाकार के लिए ही नहीं समाज के एकत्व का सपना देखनेवालों के लिए भी मार्टिन बूबर का दर्शन शायद अधिक प्रासंगिक है क्योंकि वह मानवीय जीवन के लिए दो बातें अनिवार्य मानते हैं : सहभागिता और पारस्परिकता।</p> <p>अस्तित्ववादी दर्शन में अकेलापन मानव-जाति की यंत्रणा का मूल स्रोत है। लेकिन बूबर जैसे आस्थावादी अस्तित्ववादी इस अकेलेपन को अनुल्लंघनीय नहीं मानते, क्योंकि सहभागिता या संवादात्मकता में उसके अकेलेपन को सम्पन्नता मिलती है। इसे बूबर ‘मैं-तुम’ की सहभागिता, पारस्परिकता या ‘कम्यूनियन’ मानते हैं। यह ‘मैं-तुम’ अन्योन्याश्रित है। सार्त्र जैसे अस्तित्ववादियों के विपरीत बूबर ‘मैं’ का ‘अन्य’ के साथ सम्बन्ध अनिवार्यतया विरोध या तनाव का नहीं मानते, बल्कि ‘तुम’ के माध्यम से ‘मैं’ को सत्य की अनुभूति सम्भव होती है, अन्यथा वह ‘तुम’ नहीं रहता, ‘वह’ हो जाता है। यह ‘तुम’ या ‘ममेतर’ व्यक्ति भी है, प्रकृति भी और परम आध्यात्मिक सत्ता भी। 'मम’ और 'ममेतर’ का सम्बन्ध एक-दूसरे में विलीन हो जाने का नहीं, बल्कि ‘मैत्री’ का सम्बन्ध है। इसलिए बूबर की आध्यात्मिकता भी समाज-निरपेक्ष नहीं रहती बल्कि इस संसार में ही परम सत्ता या ईश्वर के वास्तविकीकरण के अनुभव में निहित होती है; लौकिक में आध्यात्मिक की यह पहचान कुछ-कुछ शुद्धाद्वैत जैसी लगती है।</p> <p>विश्वास है कि ‘आई एंड दाऊ’ का यह अनुवाद हिन्दी पाठकों को इस महत्त्वपूर्ण दार्शनिक के चिन्तन को समझने की ओर आकर्षित कर सकेगा।</p> <p>—प्राक्कथन से</p> <p>
Read moreAbout the Book
अस्तित्ववादी चिन्तन-सरणी में सामान्यत: सार्त्र-कामू की ही बात की जाती है और आजकल हाइडेग्गर की भी; लेकिन एक कवि-कथाकार के लिए ही नहीं समाज के एकत्व का सपना देखनेवालों के लिए भी मार्टिन बूबर का दर्शन शायद अधिक प्रासंगिक है क्योंकि वह मानवीय जीवन के लिए दो बातें अनिवार्य मानते हैं : सहभागिता और पारस्परिकता।</p>
<p>अस्तित्ववादी दर्शन में अकेलापन मानव-जाति की यंत्रणा का मूल स्रोत है। लेकिन बूबर जैसे आस्थावादी अस्तित्ववादी इस अकेलेपन को अनुल्लंघनीय नहीं मानते, क्योंकि सहभागिता या संवादात्मकता में उसके अकेलेपन को सम्पन्नता मिलती है। इसे बूबर ‘मैं-तुम’ की सहभागिता, पारस्परिकता या ‘कम्यूनियन’ मानते हैं। यह ‘मैं-तुम’ अन्योन्याश्रित है। सार्त्र जैसे अस्तित्ववादियों के विपरीत बूबर ‘मैं’ का ‘अन्य’ के साथ सम्बन्ध अनिवार्यतया विरोध या तनाव का नहीं मानते, बल्कि ‘तुम’ के माध्यम से ‘मैं’ को सत्य की अनुभूति सम्भव होती है, अन्यथा वह ‘तुम’ नहीं रहता, ‘वह’ हो जाता है। यह ‘तुम’ या ‘ममेतर’ व्यक्ति भी है, प्रकृति भी और परम आध्यात्मिक सत्ता भी। 'मम’ और 'ममेतर’ का सम्बन्ध एक-दूसरे में विलीन हो जाने का नहीं, बल्कि ‘मैत्री’ का सम्बन्ध है। इसलिए बूबर की आध्यात्मिकता भी समाज-निरपेक्ष नहीं रहती बल्कि इस संसार में ही परम सत्ता या ईश्वर के वास्तविकीकरण के अनुभव में निहित होती है; लौकिक में आध्यात्मिक की यह पहचान कुछ-कुछ शुद्धाद्वैत जैसी लगती है।</p>
<p>विश्वास है कि ‘आई एंड दाऊ’ का यह अनुवाद हिन्दी पाठकों को इस महत्त्वपूर्ण दार्शनिक के चिन्तन को समझने की ओर आकर्षित कर सकेगा।</p>
<p>—प्राक्कथन से</p>
<p>
Book Details
-
ISBN9789388933773
-
Pages123
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Dhalti Saanjh Ke Musafir
- Author Name:
Pratapmal Devpura
- Book Type:

-
Description:
एक दिन जब आकाश साफ़ हो तब किसी ऊँचे स्थान से सुबह के समय उगते सूरज की छटा देखें। फिर उसी स्थान से सायंकाल में भी ढलते सूरज की छटा देखें। ढलता सूरज उगते सूरज से कम प्रकाशवान नहीं होता। यह बात वृद्धावस्था के लिए भी सत्य है।
बुढ़ापा आते ही निराशाजनक स्वर सुनाई पड़ते हैं। वास्तविकता यह है कि वृद्धावस्था कोई रोग नहीं है, शरीर की एक प्रक्रिया है, प्राकृतिक क्रम को हमें स्वीकार कर लेना पड़ता है।
वृद्धावस्था में अनेक शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव आते हैं जिनके साथ तालमेल बिठाना आवश्यक है। हर व्यक्ति की परिस्थितियों से तालमेल बिठाने की क्षमता भी अलग-अलग होती है। इस अवस्था में पग-पग पर अनिश्चितता भी होती है।
बुज़ुर्गों में स्वास्थ्य की समस्याएँ जटिल होती हैं। वे स्वयं अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक से नहीं समझते हैं क्योंकि कई लोगों में एक से अधिक बीमारियाँ मौजूद होती हैं। इसलिए उनका इलाज भी कठिन होता है। अनेक औषधियों के सेवन से उनके दुष्प्रभाव भी उन बीमारियों में सम्मिलित हो जाते हैं। अनेक बुज़ुर्ग इलाज का ख़र्च वहन करने में अक्षम होते हैं, तब बुज़ुर्गों को और कठिनाइयाँ हो जाती हैं। नियमित एवं सादा खान-पान, स्वास्थ्य के प्रति चेतना, सुबह-शाम टहलना, योग, व्यायाम आदि में नियमित रहना रोग निराकरण में बहुत मददगार होता है। प्रत्येक बुज़ुर्ग को दूसरे बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए समय भी निकालना चाहिए जिससे उनको राहत मिलेगी।
आपकी जीवन-संध्या सुखद होगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इस जीवन संध्या के लिए सार्थक योजना बनाई थी या नहीं।
इस पुस्तक लेखन का उद्देश्य यह है कि पाठकों में इस अवस्था के बारे में जागरूकता आए।
Sangh Samjun Ghetana
- Author Name:
Dattaprasad Dabholkar
- Book Type:

- Description: भर वर्षांच्या अथक, एकाकी, समर्पित, कष्टप्रद, काही काळ यातनामय वाटचालीनंतर संघ आज निर्विवादपणे सत्तेत केंद्रस्थानी उभा आहे. संघाने स्पष्टपणे सांगितलंय आमचा फक्त एककलमी कार्यक्रम आहे, ‘हिंदूंचाच हिंदूस्थान' म्हणजे हे हिंदूराष्ट्र आहे. भारत हे संघराज्य नाही ते एक राष्ट्र आहे आणि हा देश एकाधिकारशाही मानतो. भारतरत्न बाबासाहेब आंबेडकर राज्यघटना बनवत असताना ऑरगनायर्झरने त्याला कडवा विरोध केलाय. या देशाची घटना मनुस्मृतीवर आधारित हवी म्हणून सांगितले. राजकारण करताना ‘वारांगनेव नृपनिती अनेकरूपा' हा मंत्र बरोबर ठेवा आणि मुखवटे घालून राजकारणात वाटचाल करा. हा आदेश संघाने राजकारणात पाठवलेल्या स्वयंसेवकांना दिलाय. पुरोगामी परिवर्तनवादी चळवळ ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने' म्हणून त्याकडे उपेक्षेने खरंतर उपहासाने पाहत उभी होती. आज ही चळवळ भांबावलेल्या खरंतर भेदरलेल्या अवस्थेत आहे. त्यामुळे खरी गरज आहे, यातून बाहेर येवून संघाची शक्तिस्थाने आणि मर्मस्थाने जाणून घेण्याची व पुरोगामी परिवर्तनवादी चळवळीने केलेले ‘हिमालयीन ब्लंडर' समजावून घेत रणनीती ठरविण्याची.या व अशा प्रश्नांचा मागोवा घेत अस्वस्थ मनस्थितीत गेल्या दहा वर्षात दत्तप्रसाद दाभोळकर यांनी लिहिलेल्या काही प्रमुख लेखांचे हे संकलन. आज आपणासमोर असलेल्या धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक राजकारणाचा चक्रव्यूह समजावून घेण्यासाठी हे पुस्तक वाचले आणि संग्रहीपण ठेवले पाहिजे. Sangh Samjun Ghetana | Dattaprasad Dabholkar संघ समजून घेताना | दत्तप्रसाद दाभोळकर
Shivrayanchi Dharmniti
- Author Name:
Dr. Ismail Pathan
- Book Type:

- Description: सतराव्या शतकातील धर्मश्रद्ध वातावरणात छत्रपती शिवाजी महाराजांनी दख्खनमध्ये स्वबळावर हिंदवी स्वराज्य स्थापन केले. अर्थात शिवरायांचा सर्वधर्मसमभावाचा विचार त्यांच्या या हिंदवी स्वराज्याचा मूलाधार होता. खरं तर छत्रपती शिवाजी महाराजांची हिंदू धर्मावर निष्ठा होती. ते धर्माभिमानीही होते, तरीही ते धार्मिक स्वातंत्र्याचे पुरस्कर्ते होते. त्यांनी नेहमीच सहिष्णुतेचे धोरण अवलंबले आणि आपल्या राज्यात सर्व जातिधर्मांच्या लोकांना आश्रय दिला. इतकंच नाही, तर कोणत्याही स्वरूपात धर्मभेद, जातीभेद न करता महाराजांनी शूर, पराक्रमी आणि एकनिष्ठ लोक आपल्याभोवती गोळा केले. त्यांनी कायमच हिंदू आणि मुस्लीम धर्माबद्दल उदार आणि पुरोगामी दृष्टिकोन बाळगला. स्वराज्यातील सर्व धर्मांच्या बांधवांना सन्मान देत सामाजिक सलोखा निर्माण करत सर्वार्थाने हिंदवी स्वराज्य बळकट केले. जगभरात सर्वांनीच गौरविलेल्या शिवरायांच्या या सहिष्णू धार्मिक धोरणाची प्राचार्य डॉ. इस्माईल पठाण यांनी आपल्या या ग्रंथात साधार, तपशीलवार चर्चा केली असून समाजस्वास्थ्याच्या दृष्टिकोनातून ती मार्गदर्शक ठरणारी अशी आहे. वाचक त्याचं दमदार स्वागत करतील अशी आशा. Shivrayanchi Dharmniti | Dr. Ismail Pathan शिवरायांची धर्मनीती | डॉ. इस्माईल पठाण
Ishwar, Swatantrata Aur Amaratva
- Author Name:
Neelima Mishra +1
- Book Type:

- Description: ‘ज्ञान दर्शन’ व ‘तर्कशास्त्र : एक आधुनिक परिचय’ के बाद लेखकद्वय की यह तीसरी पुस्तक है। इसकी विषय-वस्तु तत्त्वदर्शन या तत्त्वमीमांसा की कुछ पारम्परिक समस्याएँ हैं, जिनकी विशद विवेचना दर्शन के विद्यार्थियों तथा साधारण जन, दोनों के लिए रुचिकर हो सकती है। लेखकद्वय की यह चेष्टा रही है कि दुरूह व गूढ़ दार्शनिक चिन्तन को सहज-सरल ढंग से प्रस्तुत किया जाए। इसीलिए उन्होंने अपनी सभी पुस्तकों का लेखन ऐसी हिन्दी भाषा में किया है। आशा है, यह पुस्तक तत्त्वदार्शनिक विचारों की सूचना देने के साथ ही मौलिक विचारों को भी प्रोत्साहित करेगी। इस पुस्तक की विषय-सामग्री दर्शन के विद्यार्थी के साथ-साथ आमजन के लिए भी रोचक हो सकती है और इसके अध्ययन से सम्भवत: उनको अपनी कुछ समस्याओं के प्रति एक अन्तर्दृष्टि प्राप्त हो सकेगी।
KALPTARU
- Author Name:
Gurudev Nandkishore Shrimali
- Book Type:

- Description: अमृत मंथन से कल्पतरु वृक्ष उत्पन्न हुआ जिसे इंद्र अपने साथ स्वर्ग ले आए, क्योंकि कल्पतरु सभी कामनाओं को पूर्ण कर सकता है। जहाँ कामनाएँ पूर्ण होती हैं, वही स्वर्ग है; और उसे पाने के लिए अनंत काल से संघर्ष चल रहा है। देवता और दानव आपस में युद्धरत हैं स्वर्ग पर अधिकार पाने के लिए; और पृथ्वी पर मनुष्य कोशिश में लगा है कि उसकी कामनाएँ कैसे पूर्ण होंगी? कल्पतरु की सबको चाह है। इसके मिलने के बाद गालिब की तरह कहना नहीं पड़ेगा कि हजारों ख्वाहिशें ऐसी...क्योंकि ख्वाहिशें-कामनाएँ पूरी हो रही हैं। वैसे भी, इंद्र इंद्रियजनित सुखों की पराकाष्ठा को निरूपित करते हैं; इसलिए उन्हें हमेशा ही तप से खतरा रहा है। इंद्र की तरह आपने भी यही समझा है कि योग और भोग एक साथ नहीं रह सकते हैं। परंतु शक्ति इस नियम का अपवाद हैं। उन्होंने योगी शिव से विवाह कर उन्हें गृहस्थ बनाया है, सकल जगत् की कामनापूर्ति का उत्तरदायित्व लिया है, और फिर वही शक्ति क्षुधा, कामना रूप में हर प्राणी में स्थित है। इसलिए कल्पतरु खास है। वह विश्वास दिलाता है कि जो माँगोगे, वही मिलेगा। यह विश्वास पुरुषार्थ को जीवंत, सक्रिय कर देता है। जीवन पूर्ण लगने लगता है। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ आओ, साकार करें उपनिषद् की यह शांति प्रार्थना कल्पतरु के सान्निध्य में।
Dalit, Alpsankhyak Sashaktikaran
- Author Name:
Santosh Bhartiya
- Book Type:

-
Description:
भारत से लेकर सम्पूर्ण विश्व के शक्तिहीन, दबे-कुचले, सामाजिक रूप से पिछड़े और सताए हुए
लोग और उनके समूह जब आपस में मिलकर शक्ति-सम्पन्न होने का संकल्प लें, तो इसे बड़े बदलाव के भावी संकेत
के रूप में लिया जाना चाहिए। इतिहास बनने की शुरुआत ऐसे ही होती है। जो इसकी अगुआई करते हैं, उन्हें
इतिहास अपने सिर-माथे बैठाता है, क्योंकि अगर वे आगे नहीं बढ़ते तो यात्रा अपने अन्तिम चरण पर पहुँचती ही
नहीं। दलित, अल्पसंख्यक सशक्तीकरण की यात्रा शुरू हो चुकी है। इस यात्रा का ध्येय है शक्तिहीन, दबे-कुचले, और
सामाजिक रूप से भेदभाव के शिकार दलितों और अल्पसंख्यकों को शक्ति-सम्पन्न करना व उनके सामाजिक आधार
को मज़बूत करते हुए उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करना।
पुस्तक का महत्त्वपूर्ण अंश है डॉ. मनमोहन सिंह का कथन। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने शक्तिहीनों
को शक्ति-सम्पन्न बनाने तथा दलित, अल्पसंख्यक सशक्तीकरण के प्रयास को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने साफ़ कहा कि अब सहूलियत देने से काम नहीं चलेगा, वंचितों
को शिरकत भी देनी होगी। बाबा साहेब अम्बेडकर ने ग़रीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण की लड़ाई को
वैज्ञानिक विचार का आधार दिया तथा उसे हथियार बनाया। उसी कड़ी में यह एक प्रयास है ताकि आज दलित,
अल्पसंख्यक सशक्तीकरण के लिए लड़नेवाले लोग न केवल अपना वैचारिक आधार मज़बूत कर सकें, बल्कि उसे
हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकें।
यह पुस्तक उन सबके लिए उपयोगी होगी जो ग़रीबों और वंचितों की लड़ाई में या तो शामिल होना चाहते हैं या
उन्हें सहयोग देना चाहते हैं। राजनीति और समाजशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए यह पुस्तक भारत के परिवर्तन की इस
लड़ाई को समझने का आधार बनेगी।
Learn To Earn
- Author Name:
Peter Lynch +2
- Book Type:

- Description: अनेक गुंतवणूकदारांना, अगदी शेअर बाजारात भरीव कामगिरी केलेल्या गुंतवणूकदारांनादेखील, हा शेअर बाजार नक्की कसे काम करतो याबद्दल सखोल माहिती नसते. म्हणूनच आपल्या अर्थव्यवस्थेच्या मूलभूत बाबी काय आहेत आणि शेअर बाजाराशी त्यांचा कसा संबंध आहे, यासारख्या गुंतवणुकीबाबतच्या प्राथमिक गोष्टी शालेय शिक्षणात शिकवल्या जाव्यात, असा आग्रह लिंच आणि रोथचाइल्ड धरतात. प्रत्येक तरुण व्यक्तीसमोर आपल्या महाविद्यालयीन शिक्षणासाठी पैसे जमा करायचे, की आपल्या वृद्धापकाळातील अर्थार्जनाची सोय करायची अशी द्विधा मनस्थिती असते, मात्र गुंतवणुकीचे मूलभूत प्रशिक्षण त्याला वेळीच मिळाले असते, तर त्याच्या पुढे असा प्रश्न उभा राहिला नसता. गुंतवणुकीच्या संधी सर्वत्र असतात, मात्र त्या शोधण्याची दृष्टी असायला हवी. शालेय शिक्षणामध्ये फारसे हुशार नसलेल्या विद्यार्थ्यालादेखील नायके, रीबॉक, मॅकडोनाल्ड्स, द गॅप आणि बॉडी शॉप यासारख्या ब्रँड्सची माहिती असते. अमेरिकेत प्रत्येक किशोरवयीन मुलाने कोका-कोला किंवा पेप्सीची चव एकदा तरी चाखलेली असते, मात्र त्यापैकी किती जणांनी या दोन्हीपैकी एका कंपनीचा समभाग विकत घेतला असेल किंवा या कंपन्यांचा समभाग विकत घेता येतो, याची किमान माहिती तरी त्याला असेल? प्रत्येक विद्यार्थी अमेरिकी इतिहासाचा अभ्यास करतो. मात्र, आपला देश हा युरोपीय वसाहतवाद्यांनी घडवला आहे, या वसाहतवाद्यांना इंग्लंड आणि हॉलंड या देशातील पब्लिक कंपन्यांनी वित्तपुरवठा केला होता आणि या पब्लिक कंपन्यांच्या मूलभूत तत्त्वांमध्ये गेल्या तीनशे साडेतीनशे वर्षात फारसा बदल झालेला नाही हे त्यातील मोजयाच विद्यार्थ्यांना ठाऊक असते. आबालवृद्धांना रस वाटेल अशा सहज सोप्या शैलीत लिंच आणि रोथचाइल्ड यांनी ‘लर्न टू अर्न’ या पुस्तकात शेअर बाजारातल्या मूलभूत बाबींचे ज्ञान उपलब्ध करून दिले आहे. वर्तमानपत्रातल्या शेअर बाजाराचे तक्ते कसे वाचावेत, कंपन्यांचे वार्षिक अहवाल कसे समजून घ्यावेत आणि प्रत्येकाने शेअर बाजार समजून घेणे का गरजेचे आहे? तसेच केवळ गुंतवणूक कशी करावी यावर भाष्य करून हे पुस्तक थांबत नाही, तर वाचकांना गुंतवणूकदारासारखा विचार करायलादेखील प्रवृत्त करते. Learn To Earn: लर्न टू अर्न पीटर लिंच आणि जॉन रोथचाइल्ड Peter Lynch and John Rothchild अनुवाद: डॉ. नितीन हांडे Translator: Dr. Nitin Hande
Dictionary of Confusable Words
- Author Name:
Harmik Vaishnav
- Book Type:

- Description: Spellings and pronunciation are very important in the English language. One of the characteristics of this language is that there are many words with slight spelling changes and similar pronunciation but different meanings. Such terms are called homonyms or homophones. In this book, many groups of such words are given along with sentences for an explanation of the difference in meanings. This will help understand the language better and smooth the words' usage. It also shows that a spelling error can change the meaning of the word and hence the sentence to a great extent. This book will help us understand the proper use of the word. The usage is explained with a sentence for better understanding. It will benefit students, aspirants of competitive exams, professionals and lovers of the English language.
Chehre Aur Chitthiyan
- Author Name:
Kunwar Natwar Singh
- Book Type:

- Description: जीवन के आरम्भिक काल में ही कुँवर नटवर सिंह का अन्तरंग सम्बन्ध विभिन्न क्षेत्रों की शीर्षस्थ प्रतिभाओं से हो गया था। निश्चय ही इनमें से हरेक ने उनके जीवन को अलग-अलग तरह से प्रभावित किया और इसका जो समग्र प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर पड़ा उसने उन्हें घटिया जीवन-दृष्टि से बचाए रखा। अपने-अपने क्षेत्र के दुर्लभ गुणोंवाले और विशाल-हृदयी इन व्यक्तित्वों ने समय-समय पर लेखक नटवर सिंह को कृपा-पत्र लिखे। उन पत्रों और उनके व्यक्तित्व के आधार पर एक ऐसी अनूठी पुस्तक लेखक ने तैयार की जिसमें सरलता और त्वरा दोनों हैं। इसमें इन्दिरा गांधी, राजा जी, ई.एम. फ़ॉर्स्टर, नीरद सी. चौधुरी, लार्ड माउंटबेटन, आर. के. नारायण, विजयलक्ष्मी पंडित, हान सुयिन, ज़िया-उल-हक़ और नरगिस दत्त जैसी हस्तियों के व्यक्तित्व की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का आत्मीय चित्रण किया गया है। इन शख़्सियतों के गहरे प्रभाव के बावजूद लेखक ने काफी हद तक तटस्थ और वस्तुनिष्ठ होने का प्रयत्न किया है। उन्होंने मात्र शब्दचित्र नहीं, बल्कि रेखाचित्र तैयार किए हैं जो पाठकों के सामने इन व्यक्तित्वों का आत्मीय व ऊर्जावान स्वरूप लाते हैं।
Kaha-Suni
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

- Description: ‘इस किताब में दूधनाथ सिंह के चार साक्षात्कार और चार आलोचनात्मक निबन्ध संकलित हैं। साक्षात्कार एक तरह का विशिष्ट शास्त्रार्थ होता है। प्रश्नों के आलोक में यह शास्त्रार्थ लेखक तरह-तरह से करता है। कभी आत्म-मन्थन, आत्म-प्रकाश, कभी अपने समय, समाज, इतिहास, साहित्य, कला आदि पर टिप्पणियाँ और प्रतिक्रियाएँ, कभी मतभेद-सहमति और सौमनस्य, कभी अपनी क्षुब्धता, उदासी या ख़ुशी का इज़हार, कभी अपनी ही आस्थाओं पर प्रश्नचिह्न, कभी कलह, वैमनस्य और फिर प्रेम; कभी गहन विश्लेषण और आत्म-स्वीकृति—एक अच्छे साक्षात्कार में एक कलाकार के विविधवर्णी छटाओं वाले रूप के दर्शन पाठक को होते हैं। इस तरह ‘साक्षात्कार’ तर्क-वितर्क की असमंजसपूर्ण, वक्र भाषा में लिपटा हुआ कलाकार के औचक पकड़े गए चिन्तन का निचोड़ है, एक नए क़िस्म का भाष्य है, आलोचना का एक खिलंदरा राग है। ‘कहा-सुनी’ के चारों आलोचनात्मक निबन्ध लेखक के उपर्युक्त साक्षात्कारों के शास्त्रार्थों का ही फैलाव और वितान हैं। बातों और विचारों की अन्तिम तर्क-सिद्धि, परिणति और समापन हैं। फिर भी आलोचना की विधागत माँग के कारण उनमें तटस्थ और निर्वैयक्तिक विश्लेषण, तर्क-वितर्क के आघात-प्रतिघात, नियमन-अनुशासन यहाँ अधिक हैं। आशा है, यह किताब एक नए बौद्धिक आस्वाद के साथ पढ़ी-गुनी जाएगी।
Aurat Ki Aawaz
- Author Name:
Nasira Sharma
- Book Type:

- Description: यह सदी जिस आवाज़ में बोल रही है वह औरत की आवाज़ है, यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है। सदियों जिसकी पीड़ा पुरुष-शासित समाज के तमाम आर्थिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक ढाँचों की नींव में बिना किसी शिकायत के अपनी बलि देती रही, जिसकी ख़ामोशी पर पुरुषों की वाचाल सभ्यता मानवता की अकेली और स्वयम्भू प्रतिनिधि बनी रही, वह औरत अब बोल रही है। सृष्टि में अपनी हिस्सेदारी का दावा कर रही है। और कहना न होगा कि इससे एक बड़ा बदलाव मनुष्यता के लैंडस्केप में दिखाई देने लगा है। अनेक औरतें हैं जिन्होंने इस बिन्दु तक आने के लिए अपनी क़ुर्बानी दी है, अनेक हैं जिन्होंने अकेले आगे बढ़कर बाक़ी औरतों के लिए लिए कितने ही बन्द दरवाज़ों को खोला है। अनेक हैं जिनका नाम भी हम नहीं जानते। और अनेक हैं जिनके नाम इतिहास के निर्णायक मोड़ों पर उत्कीर्ण हो गए हैं। इस किताब में अलग-अलग देशों की उन औरतों से वार्ताएँ शामिल हैं जिन्होंने अपने दम-ख़म से, अपने इरादों और हिम्मत से ज़िन्दगी में एक मुकाम हासिल किया है, जिनका एक स्पष्ट नज़रिया है, और यह नज़रिया उन्होंने अपने संघर्षों से, अपनी खुली निगाह से कमाया है। इन्हें पढ़ते हुए हमें मालूम होता है कि आज उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है। पूरी दुनिया और उसके निज़ाम की गहरी समझ भी उनके पास है और उसकी मरम्मत के लिए व्यावहारिक सुझाव भी। वे जानती हैं कि आने वाले समय को कैसा होना चाहिए और कैसा वह नहीं है। पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, इराक़, सीरिया और टर्की से लेकर जापान, रूस, फ़िलिस्तीन, इस्रायल, फ़्रांस, मलेशिया और लन्दन तक की विभिन्न राजनीतिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाली इन महिलाओं से बातचीत की है नासिरा शर्मा ने जिन्हें हम एक सामर्थ्यवान रचनाकार के रूप में जानते हैं, विभिन्न भाषाओं के स्त्री-संवेदी और मानवतावादी साहित्य से भी वे हमें परिचित कराती रही हैं। ये वार्ताएँ साक्षात्कार के प्रचलित फ़्रेम से आगे बढ़कर दरअसल सरोकारों के समान और वैश्विक धरातल पर जाकर किए गए संवाद हैं—इस सदी की औरत की एक मुकम्मल आवाज़।
DGP Gupteshwar Pandey: Sangharsh Se Utkarsh Tak
- Author Name:
Savita Pandey
- Book Type:

- Description: रियल ‘सिंघम’, ‘रॉबिनहुड’, ‘दबंग’, ‘चुलबुल पांडेय’ जैसे नामों से नवाजे जाते रहे 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी हैं। बिहार में कम्युनिटी पुलिसिंग के अगुआ, डीजीपी पांडेय बहुत लोकप्रिय हैं। लोक जागरण के लिए सोशल मीडिया का बिंदास प्रयोग और अभिव्यक्ति का उनका अंदाज जनता, खासकर युवाओं को काफी पसंद है। वे बिहार में नशामुक्ति और शराबबंदी के ब्रांड अंबेसेडर भी हैं। उनकी जीवन-शैली इतनी साधारण, सादगीपूर्ण है कि लोग कहते हैं कि लगता ही नहीं कि वे डीजीपी हैं! इस पुस्तक में लेखिका ने श्री गुप्तेश्वर पांडेय के बतौर डीजीपी और डीजीपी बनने के क्रम में किए गए उनके प्रयासों को साझा किया है। युवाओं को समर्पित यह पुस्तक गुप्तेश्वर पांडेय की मित्र पुलिसिंग के साथ सख्त कार्य-शैली का वर्णन करती ही है, साथ-ही-साथ छात्रों व युवाओं को संदेश भी देती चलती है कि विषम और विकट परिस्थितियों में भी कैसे सफलता की मंजिल पाई जा सकती है और डीजीपी जैसे पद पर पहुँचकर भी कैसे अहंकार से पार पाया जा सकता है। आमजन में पुलिस के भय और अविश्वास को कम करने के लिए सतत क्रियाशील रहे एक समर्पित जनसेवक की प्रेरक जीवनगाथा।
Hindu, Hindutva, Hindustan
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

-
Description:
सारे बौद्धिक प्रयत्न के बावजूद, ‘हिन्दू अवचेतन’ अपने को ही भारतीय मानता है। भारत जैसे बहुधर्मी और सांस्कृतिक वैविध्य से भरपूर देश के लिए ऐसी मान्यता अनिवार्यतः अनिष्टकारी है। पिछले कुछ समय से यह मान्यता अवचेतन से निकलकर उत्तरोत्तर आक्रामक होती जा रही है। बौद्धिक प्रयत्न के बावजूद नहीं, बल्कि खुलकर एक विचारधारा के रूप में यह हिन्दू को ही राष्ट्र मान बैठी है। ख़तरा यदि प्रधानतः विचारधारा और उससे जुड़ी किसी राजनीतिक पार्टी का होता तो उससे जूझना मुश्किल न होता। पर आज परेशानी यह है कि ‘हिन्दू अवचेतन’ कहीं न कहीं उन बातों को अपनी अँधेरी गहराइयों में मानता है, जिनको चेतना के स्तर पर वह राष्ट्र के लिए घातक और नैतिक रूप से अवांछनीय समझता है। ज़रूरी है कि उसका सामना इस दुविधा से कराया जाए।
—इसी पुस्तक से
Dr. Lohia Ka Samajwad
- Author Name:
Ramgopal Yadav
- Book Type:

-
Description:
भारतीय समाजवाद के आकाश में डॉ. राममनोहर लोहिया का उदय एक ऐतिहासिक घटना थी। उनका सम्पूर्ण जीवन सदियों से उपेक्षित रहे लोगों के प्रति समर्पित था—फिर चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। यही कारण है कि समाजवाद के पुरोधा के रूप में उनका नाम हमेशा अग्रणी रहा है।
समाजवादी चिन्तक प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा प्रणीत यह पुस्तक डॉ. लोहिया के अक्षय व्यक्तित्व एवं कृतित्व का बहुआयामी मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया की वैश्विक दृष्टि की व्यापकता का संज्ञान कराती एवं सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उन्हें प्रतिष्ठित करती हुई यह कृति एक नया चिन्तन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया का जीवन-संघर्ष निरन्तर सामाजिक या उत्थानवादी चेतना के द्वन्द्व को रूपायित करता है। आर्थिक ग़ैर-बराबरी दूर करने और समतामूलक समाज बनाने में उनका चिन्तन मार्क्सवादियों से भिन्न था।
भारतीय समाजवाद के प्रवर्तक डॉ. लोहिया की 105वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रो. यादव द्वारा रचित इस किताब की उपादेयता समाजवाद के विकास की दिशा में एक अमूल्य योगदान है। पुस्तक की उपादेयता इस अर्थ में भी बढ़ जाती है कि यह लोहिया जी के व्यक्तित्व और उनकी निज परिमार्जित की हुई विचारधारा और उनके योगदान सब पर समुचित प्रकाश डालती है।
Aidu Paise VaradakshiNe
- Author Name:
Vasudhendra
- Book Type:

- Description: ಕತೆಗಾರರೂ, ಬರಹಗಾರರೂ ಆದ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಬರೆದಿರುವ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಸಂಕಲನ ಕೃತಿ ’5 ಪೈಸೆ ವರದಕ್ಷಿಣೆ’. ಲೇಖಕರ ಬಾಲ್ಯ, ಮತ್ತು ಅವರ ವೃತ್ತಿ ಬದುಕಿನ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಇಲ್ಲಿರುವ ಪ್ರಬಂಧಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ರಸ್ತಾಪವಿದೆ. ಚುಕ್ಕಿ ಬಾಳೆಯ ಹಣ್ಣನ್ನು ಕಂಡಾಗಲೆಲ್ಲ ಲೇಖಕರನ್ನು ಕಾಡುವ ನೆನವರಿಕೆ, ವಾರಣಾಸಿಯಲ್ಲಿನ ಪ್ರವಾಸಾನುಭವ, ಚಾರಣಕ್ಕೆ ಹೊರಡುವವರ ಪೀಕಲಾಟ ಹೀಗೆ, ಎಲ್ಲ ನಮೂನೆಯ ವಿಷಯಗಳ ಕುರಿತಾದ ಬರಹಗಳಿವೆ. ಮಹಾಭಾರತದಲ್ಲಿನ ಒಳಸುಳಿಗಳನ್ನು ಬಿಚ್ಚಿಡುವ ಪ್ರಯತ್ನವೂ ಕೆಲ ಪ್ರಬಂಧ ಬರಹಗಳಲ್ಲಿ ನವಿರಾಗಿ ಸಾಗಿದೆ.
Prakritik Apdayen Aur Bachav
- Author Name:
Harinarayan Srivastava +1
- Book Type:

-
Description:
भूकम्प, चक्रवात, बाढ़ और सूखा जैसी विनाशकारी आपदाओं से मनुष्य-समाज आदिकाल से आक्रान्त रहा है। संसार के विभिन्न भागों में समय-समय पर इन आपदाओं के चलते जान-माल की अपूरणीय क्षति होती रही है। इसलिए सिर्फ़ भारत के लिए ही नहीं, विश्व-भर के लिए आज ये गम्भीर चुनौती बनी हुई हैं। पूरी दुनिया में इन आपदाओं के संकट से मनुष्य को मुक्त करने हेतु इनके नियंत्रण, रोकथाम और प्रबन्धन आदि पर व्यापक कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं।
लेकिन इन आपदाओं से बचाव के लिए जनसाधारण को इनके विषय में आधारभूत जानकारियाँ देना भी उतना ही ज़रूरी है। इसीलिए प्रस्तुत पुस्तक में भूकम्प, ज्वालामुखी, चक्रवात, बाढ़, सूखा, टारनेडो और तड़ित झंझा आदि आपदाओं की भौगोलिक स्थिति, कारणों, प्रभावों, चेतावनियों-सावधानियों तथा नियंत्रण व रोकथाम आदि के तरीक़ों पर प्रकाश डाला गया है। प्राकृतिक आपदाएँ हमारी आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था को तो नष्ट करती ही हैं, साथ ही इनसे प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों का मनोबल भी भंग होता है, जिसका राष्ट्रों की विकास-प्रक्रिया पर दूरगामी असर पड़ता है। इस परिप्रेक्ष्य में इस पुस्तक का अध्ययन अत्यन्त उपयोगी और प्रकृति के सम्मुख विवश हमारे मन को धैर्य बँधानेवाला होगा, ऐसी हमें उम्मीद है।
Gyanyog
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: ‘ज्ञानयोग’ में स्वामी विवेकानन्द के वेदान्त पर दिए गए विश्लेषणपरक भाषणों को संकलित किया गया है। इनमें कुछ भाषण लंदन में, कुछ अमेरिका में और कुछ अत्यत्र दिए गए थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में वेदान्त निर्णायक रूप में उपयोगी साबित हो सकता है; कि वह मनुष्य के अब तक किए गए चिन्तन का उच्चतम फल है, संसार की समस्त विचार-सरणियों को अन्ततः उसी में विलीन होना है। अत्यन्त सरल और सुगम भाषा में दिए गए इन वक्तव्यों में उन्होंने माया क्या है, मनुष्य का वास्तविक स्वरूप क्या है, माया और ईश्वर की अवधारणा का विकास किस प्रकार हुआ, संसार क्या है, आत्मा का स्वभाव क्या है, अमरत्व क्या है, आदि विषयों पर विचार किया है। विवेकानन्द के चिन्तन की विशेषता ये है कि दर्शन के गूढ़ प्रश्नों पर वे जो भी विचार करते हैं, उसे हमारे भौतिक और वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए, उसकी रोशनी में व्याख्यायित करते हुए करते हैं, यह विशेषता इन आलेखों और वक्तव्यों में भी दृष्टिगोचर होती है।
Mahadevi : Naya Mulyankan
- Author Name:
Ganpatichandra Gupt
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में कवयित्री महादेवी के व्यक्तित्व, दर्शन, जीवन-दर्शन, काव्य-दर्शन, युग-बोध आदि का पहली बार गम्भीरता से विवेचन-विश्लेषण हुआ है। साथ ही महादेवी के काव्य के विभिन्न पक्षों पर भी गम्भीरता से विचार किया गया है। कवयित्री महादेवी के जीवनवृत्त एवं व्यक्तित्व, काव्य-दर्शन, दार्शनिक मान्यताएँ, जीवन-दर्शन, युग- बोध, छायावाद और महादेवी, रहस्यवाद और महादेवी काव्य में वेदना (दुःखवाद), काव्य में प्रकृति, काव्य का शैली पक्ष, काव्य रूप : गीति काव्य का मूल्यांकन, सौन्दर्यशास्त्रीय दृष्टि से, काव्यशास्त्रीय दृष्टि से, वैज्ञानिक दृष्टि से आदि कतिपय महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं का संकेत पुस्तक में मिलता है। वस्तुत: महादेवी काव्य पर लिखा गया एक सर्वश्रेष्ठ आलोचनात्मक एवं गवेशणात्मक ग्रन्थ है जिसमें महादेवी काव्य के सभी पक्षों पर पूरी गम्भीरता से विचार किया गया है।
Aksharon Ki Kahanee
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: Aksharon Ki Kahanee-language teaching
Aao Model Banayen
- Author Name:
Shyam Sunder Sharma
- Book Type:

- Description: "आमतौर पर बच्चे विज्ञान को कठिन विषय समझते हैं। वे समझते हैं कि विज्ञान में बहुत पढ़ना पड़ता है, प्रयोग करने पड़ते हैं और कई बार घर या स्कूल से बाहर—बगीचों, जंगलों आदि में—घूमना पड़ता है। पर न तो विज्ञान के प्रयोग हमेशा बहुत कठिन होते हैं और न ही सब प्रयोगों को करने से पहले बहुत अध्ययन कर जरूरत होती है। प्रयोग करने के लिए कई बार मॉडलों की जरूरत होती है। ये मॉडल सरल यंत्र होते हैं और इन्हें आसानी से बनाया जा सकता है (वैसे इनको बनाना भी अपनेआप में बहुत रोचक प्रयोग होते हैं)। इन्हें तुम उन चीजों से बना सकते हो जो आसानी से बाजार में मिल जाती हैं और जिनकी लागत भी ज्यादा नहीं होती। "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book