Learn To Earn
(0)
Author:
Dr. Nitin Hande, Peter Lynch, John RothchildPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction₹
370
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Available
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अनेक गुंतवणूकदारांना, अगदी शेअर बाजारात भरीव कामगिरी केलेल्या गुंतवणूकदारांनादेखील, हा शेअर बाजार नक्की कसे काम करतो याबद्दल सखोल माहिती नसते. म्हणूनच आपल्या अर्थव्यवस्थेच्या मूलभूत बाबी काय आहेत आणि शेअर बाजाराशी त्यांचा कसा संबंध आहे, यासारख्या गुंतवणुकीबाबतच्या प्राथमिक गोष्टी शालेय शिक्षणात शिकवल्या जाव्यात, असा आग्रह लिंच आणि रोथचाइल्ड धरतात. प्रत्येक तरुण व्यक्तीसमोर आपल्या महाविद्यालयीन शिक्षणासाठी पैसे जमा करायचे, की आपल्या वृद्धापकाळातील अर्थार्जनाची सोय करायची अशी द्विधा मनस्थिती असते, मात्र गुंतवणुकीचे मूलभूत प्रशिक्षण त्याला वेळीच मिळाले असते, तर त्याच्या पुढे असा प्रश्न उभा राहिला नसता. गुंतवणुकीच्या संधी सर्वत्र असतात, मात्र त्या शोधण्याची दृष्टी असायला हवी. शालेय शिक्षणामध्ये फारसे हुशार नसलेल्या विद्यार्थ्यालादेखील नायके, रीबॉक, मॅकडोनाल्ड्स, द गॅप आणि बॉडी शॉप यासारख्या ब्रँड्सची माहिती असते. अमेरिकेत प्रत्येक किशोरवयीन मुलाने कोका-कोला किंवा पेप्सीची चव एकदा तरी चाखलेली असते, मात्र त्यापैकी किती जणांनी या दोन्हीपैकी एका कंपनीचा समभाग विकत घेतला असेल किंवा या कंपन्यांचा समभाग विकत घेता येतो, याची किमान माहिती तरी त्याला असेल? प्रत्येक विद्यार्थी अमेरिकी इतिहासाचा अभ्यास करतो. मात्र, आपला देश हा युरोपीय वसाहतवाद्यांनी घडवला आहे, या वसाहतवाद्यांना इंग्लंड आणि हॉलंड या देशातील पब्लिक कंपन्यांनी वित्तपुरवठा केला होता आणि या पब्लिक कंपन्यांच्या मूलभूत तत्त्वांमध्ये गेल्या तीनशे साडेतीनशे वर्षात फारसा बदल झालेला नाही हे त्यातील मोजयाच विद्यार्थ्यांना ठाऊक असते. आबालवृद्धांना रस वाटेल अशा सहज सोप्या शैलीत लिंच आणि रोथचाइल्ड यांनी ‘लर्न टू अर्न’ या पुस्तकात शेअर बाजारातल्या मूलभूत बाबींचे ज्ञान उपलब्ध करून दिले आहे. वर्तमानपत्रातल्या शेअर बाजाराचे तक्ते कसे वाचावेत, कंपन्यांचे वार्षिक अहवाल कसे समजून घ्यावेत आणि प्रत्येकाने शेअर बाजार समजून घेणे का गरजेचे आहे? तसेच केवळ गुंतवणूक कशी करावी यावर भाष्य करून हे पुस्तक थांबत नाही, तर वाचकांना गुंतवणूकदारासारखा विचार करायलादेखील प्रवृत्त करते. Learn To Earn: लर्न टू अर्न पीटर लिंच आणि जॉन रोथचाइल्ड Peter Lynch and John Rothchild अनुवाद: डॉ. नितीन हांडे Translator: Dr. Nitin Hande
Read moreAbout the Book
अनेक गुंतवणूकदारांना, अगदी शेअर बाजारात भरीव कामगिरी केलेल्या गुंतवणूकदारांनादेखील, हा शेअर बाजार नक्की कसे काम करतो याबद्दल सखोल माहिती नसते. म्हणूनच आपल्या अर्थव्यवस्थेच्या मूलभूत बाबी काय आहेत आणि शेअर बाजाराशी त्यांचा कसा संबंध आहे, यासारख्या गुंतवणुकीबाबतच्या प्राथमिक गोष्टी शालेय शिक्षणात शिकवल्या जाव्यात, असा आग्रह लिंच आणि रोथचाइल्ड धरतात. प्रत्येक तरुण व्यक्तीसमोर आपल्या महाविद्यालयीन शिक्षणासाठी पैसे जमा करायचे, की आपल्या वृद्धापकाळातील अर्थार्जनाची सोय करायची अशी द्विधा मनस्थिती असते, मात्र गुंतवणुकीचे मूलभूत प्रशिक्षण त्याला वेळीच मिळाले असते, तर त्याच्या पुढे असा प्रश्न उभा राहिला नसता.
गुंतवणुकीच्या संधी सर्वत्र असतात, मात्र त्या शोधण्याची दृष्टी असायला हवी. शालेय शिक्षणामध्ये फारसे हुशार नसलेल्या विद्यार्थ्यालादेखील नायके, रीबॉक, मॅकडोनाल्ड्स, द गॅप आणि बॉडी शॉप यासारख्या ब्रँड्सची माहिती असते. अमेरिकेत प्रत्येक किशोरवयीन मुलाने कोका-कोला किंवा पेप्सीची चव एकदा तरी चाखलेली असते, मात्र त्यापैकी किती जणांनी या दोन्हीपैकी एका कंपनीचा समभाग विकत घेतला असेल किंवा या कंपन्यांचा समभाग विकत घेता येतो, याची किमान माहिती तरी त्याला असेल? प्रत्येक विद्यार्थी अमेरिकी इतिहासाचा अभ्यास करतो. मात्र, आपला देश हा युरोपीय वसाहतवाद्यांनी घडवला आहे, या वसाहतवाद्यांना इंग्लंड आणि हॉलंड या देशातील पब्लिक कंपन्यांनी वित्तपुरवठा केला होता आणि या पब्लिक कंपन्यांच्या मूलभूत तत्त्वांमध्ये गेल्या तीनशे साडेतीनशे वर्षात फारसा बदल झालेला नाही हे त्यातील मोजयाच विद्यार्थ्यांना ठाऊक असते.
आबालवृद्धांना रस वाटेल अशा सहज सोप्या शैलीत लिंच आणि रोथचाइल्ड यांनी ‘लर्न टू अर्न’ या पुस्तकात शेअर बाजारातल्या मूलभूत बाबींचे ज्ञान उपलब्ध करून दिले आहे. वर्तमानपत्रातल्या शेअर बाजाराचे तक्ते कसे वाचावेत, कंपन्यांचे वार्षिक अहवाल कसे समजून घ्यावेत आणि प्रत्येकाने शेअर बाजार समजून घेणे का गरजेचे आहे? तसेच केवळ गुंतवणूक कशी करावी यावर भाष्य करून हे पुस्तक थांबत नाही, तर वाचकांना गुंतवणूकदारासारखा विचार करायलादेखील प्रवृत्त करते.
Learn To Earn: लर्न टू अर्न
पीटर लिंच आणि जॉन रोथचाइल्ड
Peter Lynch and John Rothchild
अनुवाद: डॉ. नितीन हांडे
Translator: Dr. Nitin Hande
Book Details
-
ISBN9789391547776
-
Pages308
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: "हमारे देश की राजधानी के बाहरी इलाके में पले-बढ़े गुलशन ग्रोवर 1970 के दशक में एक्टिंग में अपना कॅरियर बनाने के लिए बंबई चले आए। ऐसे समय में जब एक्टर बनने की ख्वाहिश रखनेवाले अधिकांश लोग हीरो बनना चाहते थे, तब उन्होंने अपनी पसंद से खलनायक की भूमिकाओं को चुना। उन्होंने एक के बाद एक कई यादगार किरदार निभाए जिनमें से 1989 की सुपरहिट फिल्म, ‘राम-लखन’ में उनकी भूमिका कॅरियर के लिए निर्णायक साबित हुई और बॉलीवुड के ‘बैड मैन’ के तौर पर उनकी पहचान पक्की हो गई। उस युग की कितनी ही बड़ी-बड़ी फिल्मों को उनके खास तकियाकलामों और अजीब-अजीब किस्म की पोशाकों की वजह से कामयाबी मिली जो अब बॉलीवुड के किस्से-कहानियों का हिस्सा बन चुके हैं। धीरे-धीरे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का रुख किया और वहाँ भी अपने बेहतरीन अभिनय केकारण भारत का जाना-माना चेहरा बन गए। इस आत्मकथा में, ग्रोवर अपनी कहानी बयाँ करते हैं—अपनी फिल्मों की, अपने सफर की, बैड मैन की छवि को बनाए रखने के मनोवैज्ञानिक और व्यक्तिगत नुकसान की, बॉलीवुड के खलनायकों के बीच होड़ की, ज्यादा विविधता भरे किरदार निभाने के फैसले की, और बहुत कुछ ऐसी बातों की, जो उनकेबारे में लगभग अनजानी हैं।
Aadivasi : Vikas Se Visthapan
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

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Description:
आदिवासियों का पलायन और विस्थापन सदियों से होता रहा है और ये आज भी जारी है। आदिवासियों के जंगलों, ज़मीनों, गाँवों, संसाधनों पर क़ब्ज़ा कर उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर करने के पीछे मुख्य कारण हमारी सरकारी व्यवस्था रही है। वे केवल अपने जंगलों, संसाधनों या गाँवों से ही बेदख़ल नहीं हुए बल्कि मूल्यों, नैतिक अवधारणाओं, जीवन-शैलियों, भाषाओं एवं संस्कृति से भी वे बेदख़ल कर दिए गए हैं।
हमारे मौलिक सिद्धान्तों के अन्तर्गत सभी को विकास का समान अधिकार है। लेकिन आज़ादी के बाद के पहले पाँच वर्षों में लगभग ढाई लाख लोगों में से 25 प्रतिशत आदिवासियों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा। विकास के नाम पर लाखों लोगों को अपनी रोज़ी-रोटी, काम-धंधों तथा ज़मीनों से हाथ धोना पड़ा। उनको मिलनेवाले मूलभूत अधिकार जो उनकी ज़मीनों से जुड़े थे, वे भी उन्हें प्राप्त नहीं हुए।
आदिवासियों के प्रति सरकार तथा तथाकथित मुख्यधारा के समाज के लोगों का नज़रिया कभी संतोषजनक नहीं रहा। आदिवासियों को सरकार द्वारा पुनर्वसित करने का प्रयास भी पूर्ण रूप से सार्थक नहीं हो सका। अन्ततः अपनी ही ज़मीनों व संसाधनों से विलग हुए आदिवासियों का जीवन मरणासन्न अवस्था में पहुँच गया।
21वीं सदी में पहुँचकर भी हमारे देश का आदिवासी समाज जहाँ विकास की बाट जोह रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ सरकार की उदासीन नीतियों के कारण उनकी स्थिति ज्यों की त्यों ही है।
विकास के नाम पर छले जा रहे आदिवासियों के पलायन और विस्थापन आदि समस्याओं पर केन्द्रित यह पुस्तक समाज और सरकार के सम्मुख कई सवाल खड़े करती है।
KALPTARU
- Author Name:
Gurudev Nandkishore Shrimali
- Book Type:

- Description: अमृत मंथन से कल्पतरु वृक्ष उत्पन्न हुआ जिसे इंद्र अपने साथ स्वर्ग ले आए, क्योंकि कल्पतरु सभी कामनाओं को पूर्ण कर सकता है। जहाँ कामनाएँ पूर्ण होती हैं, वही स्वर्ग है; और उसे पाने के लिए अनंत काल से संघर्ष चल रहा है। देवता और दानव आपस में युद्धरत हैं स्वर्ग पर अधिकार पाने के लिए; और पृथ्वी पर मनुष्य कोशिश में लगा है कि उसकी कामनाएँ कैसे पूर्ण होंगी? कल्पतरु की सबको चाह है। इसके मिलने के बाद गालिब की तरह कहना नहीं पड़ेगा कि हजारों ख्वाहिशें ऐसी...क्योंकि ख्वाहिशें-कामनाएँ पूरी हो रही हैं। वैसे भी, इंद्र इंद्रियजनित सुखों की पराकाष्ठा को निरूपित करते हैं; इसलिए उन्हें हमेशा ही तप से खतरा रहा है। इंद्र की तरह आपने भी यही समझा है कि योग और भोग एक साथ नहीं रह सकते हैं। परंतु शक्ति इस नियम का अपवाद हैं। उन्होंने योगी शिव से विवाह कर उन्हें गृहस्थ बनाया है, सकल जगत् की कामनापूर्ति का उत्तरदायित्व लिया है, और फिर वही शक्ति क्षुधा, कामना रूप में हर प्राणी में स्थित है। इसलिए कल्पतरु खास है। वह विश्वास दिलाता है कि जो माँगोगे, वही मिलेगा। यह विश्वास पुरुषार्थ को जीवंत, सक्रिय कर देता है। जीवन पूर्ण लगने लगता है। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ आओ, साकार करें उपनिषद् की यह शांति प्रार्थना कल्पतरु के सान्निध्य में।
Bahujan Sahitya Ki Saiddhantiki
- Author Name:
Pramod Ranjan
- Book Type:

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Description:
सामाजिक आन्दोलनों और साहित्य में बहुजन अवधारणा को लेकर इधर के वर्षों में चर्चा तेज हुई है। देश भर में बहुजन साहित्य पर केन्द्रित आयोजन स्वत:स्फूर्त ढंग से हो रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भागीदारी कर रहे हैं। ये आयोजन हिन्दी पट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दक्षिण भारत राज्यों में भी हो रहे हैं। बहुजन साहित्य की अवधारणा कई स्तरों पर विचरोत्तेजक है। लेकिन सही मायने में यह प्रगतिशील, जनवादी और दलित साहित्य का विस्तार है और उनका स्वाभाविक अगला मुकाम भी।
तीन खंडों में विभाजित यह किताब बहुजन साहित्य के इतिहास और दर्शन से परिचय करवाती है तथा इस पर आधारित व्यावहारिक आलोचना की एक बानगी भी प्रस्तुत करती है।
किताब का पहला खंड बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केन्द्रित है, इसमें इसकी सैद्वान्तिकी के विविध पहलुओं पर विमर्श है। दूसरा खंड इसके इतिहास से परिचित करवाता है। तीसरे खंड में बहुजन आलोचना की बानगी प्रस्तुत की गई है।
Door Need Ke Pakshi
- Author Name:
Jai Prakash Pandey
- Book Type:

- Description: दूर नीड़ के पक्षी' जय प्रकाश पांडेय का प्रथम कहानी-संग्रह है, जिसमें पच्चीस कहानियाँ संकलित हैं। सभी कहानियों का विषय पृथक्-पृथक् है। इन कहानियों में लेखक ने हिंदी साहित्य के कुछ अनछुए विषयों को चुना है। 'दूर नीड़ के पक्षी ' पुस्तक की प्रतिनिधि रचना है, जिसमें टूटते, पारिवारिक नाते-रिश्ते और संस्कारों के बदलाव की आहट है। अरमान, पुनर्विवाह, जीवन-संघर्ष, रेत का साम्राज्य जैसी कहानियाँ मानव-मन की अनेक परतों को प्रतिबिंबित करती हैं। यंत्रवत् बाजार व्यवस्था, प्लेटिनम जुबली, बर्थ नंबर पच्चीस, आवास जैसी कहानियाँ वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उसके वास्तविक स्वरूप में उजागर करती हैं। अधूरा समर्पण, बिंदास और बदलाव जैसी कहानियों में स्त्री-पुरुषों की ग्रंथियों, उनके संबंधों, परंपप और बदलते परिवेश की बयार को महसूस करने की कोशिश है। लाल अंगारे और दाखिला कहानी में मध्यम वर्ग की छोटी-छोटी खुशियों के लिए जीवन-रूपी सागर में डूबने-उतारने का सजीव और मार्मिक चित्रण है। कहानी-संग्रह की सभी कहानियों में समाज और व्यक्ति के बीच हिचकोले खाता जीवन अपने विविध रूपों और अनेकानेक विरोधाभासों में रूपायित हुआ है। हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए एक पठनीय एवं मनोरंजक कहानी-संग्रह ।
Amrai
- Author Name:
Padma Sachdev
- Book Type:

- Description: साक्षात्कार विधा में पद्मा सचदेव का विशिष्ट स्थान है। ‘दीवानखाना’ और ‘मितवाघर’ के बाद देश की कला-संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों की कद्दावर हस्तियों से लिए गए साक्षात्कारों की यह पुस्तक ‘अमराई’ भी साक्षात्कार विधा के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसमें असमिया की इंदिरा गोस्वामी का एकदम अल्हड़, सादा लेकिन विशिष्ट जीवन है तो कुर्रतुल-ऐन-हैदर द्वारा देखा और जिया गया तत्कालीन मुस्लिम समाज भी है। नामवर जी के जीवन के अनूठे प्रसंग हैं तो कवि केदारनाथ सिंह के भीतर बहती नदी भी है। वयोवृद्ध, लेकिन बाल-सुलभ कौतुक से भरे त्रिलोचन हैं तो डॉ. भारती, इस्मत आपा तथा दूसरे कई भूले-बिसरे लोगों के संस्मरण भी हैं। श्रीमती ललिता शास्त्री के मन का कजरी गूँथते हुए अछूता कोना भी है तो डोगरी के पंतजी का गाँव भी है। कुल मिलाकर ‘अमराई’ के बीच बिछे तख्तपोश पर आप देश के कई विशिष्ट और साधारण लोगों को बैठा पाएँगे।
Investonomy
- Author Name:
Pranjal Kamra +1
- Book Type:

- Description: गुंतवणुक गुरू आणि शेअर बाजारावर प्रभाव टाकणारे भारताचे लाडके लेखक प्रांजल कामरा हे त्यांचे सर्वोत्तम खपाचे पुस्तक ‘ इन्व्हेस्टोनॉमी’ याची नवीन आवृत्ती घेऊन आले आहेत. तुम्हाला शेअर बाजारात पैसे गुंतवायला भीती वाटते का? गुंतवणूक सुरू करण्याआधी आपण त्यात तज्ज्ञ असले पाहिजे असे तुम्हाला वाटते का? हा सगळा प्रकार म्हणजे बेटींग, जुगार आणि नशीब यांचा आहे असे वाटते का? असे प्रश्न तुम्हाला पडत असतील तर हे पुस्तक तुमच्यासाठीच आहे म्हणून समजा आधुनिक मूल्यात्मक तत्वे काय आहेत एवढेच इन्व्हेस्टॉनॉमी समजावून सांगत नाही तर ते शेअर बाजारातील बरीच गुपितेही आपल्यासमोर उघड करते. पीके म्हणतात की, ‘एखादा मॅट्रीक पास झालेला माणूसही शेअर मार्केटमध्ये जोरदार गुंतवणूक करत असतो.’या सगळ्याला तशी मानसिकता लागते. तशी मानसिकता जोपासण्यासाठीच तर या पुस्तकाचा घाट घालण्यात आला आहे. जेवढे जेवढे तुम्ही जास्त शिकाल तेवढे तेवढे तुम्ही त्यात चक्रवाढ व्याजाने तरबेज बनाल हे सांगणे नलगे. Investonomy / Pranjal Kamara, Transleted by – Savita Damale इन्व्हेस्टॉनॉमी । प्रांजल कामरा, अनुवाद – सविता दामले
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