Sarokar (Samasaamayik Aalekhon Ka Sankalan)
(0)
Author:
Chander SonanePublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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जब मैं म.प्र. शासन के सूचना और जनसंपर्क विभाग में पदस्थ था, तब 1989-93 और बाद में 2004-2006 के बीच चंदर सोनाने ने मेरे साथ काम किया था। मैंने उन्हें गरीबों और दलितों को प्रभावित करनेवाले मुद्दों पर तेज नजर रखनेवाला एक बहुत ही संवेदनशील व्यक्ति पाया। जनसंपर्क अधिकारी के पद पर रहते हुए उन्होंने कठिन परिश्रम कर अपने कार्य के प्रति पूर्ण न्याय किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे निरंतर रचनाशील रहे तथा जनसामान्य, समाज, गरीबों को सीधे प्रभावित करनेवाली शासन की नीतियों और कार्यक्रमों के विषयों पर चिंतनपूर्वक लिखते रहे हैं। ‘सरोकार’ उनका नियमित स्तंभ है। इन लेखों का एक संकलन पहले ही प्रकाशित हो चुका है, जो अति रोचक और ज्ञानवर्धक है। इस दूसरे संकलन में सामयिक विषयों, जैसे कश्मीरी पंडितों की समस्या, शासन द्वारा कोविड से निपटने का तरीका, न्याय प्रणाली, उज्जैन की स्थानीय समस्याओं, महाकाल मंदिर और श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था, शिप्रा नदी की स्वच्छता, किसान आंदोलन, किसान संबंधी तीन कानूनों की वापसी, राजनीति, सामाजिक, व्यक्तित्व, देश व प्रदेश से संबंधित अन्य विषयों पर गहन चिंतन और लेखन किया गया है। यदि नीति-निर्माता और प्रशासक अपने दिन-प्रति-दिन के कार्य के दौरान ऐसे अच्छे ब्लॉगों और पुस्तकों का उपयोग करते हैं, तो मुझे यकीन है कि वे किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर गहन अंतर्दृष्टि का भारी लाभ प्राप्त करेंगे। —ओ.पी. रावत भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त
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जब मैं म.प्र. शासन के सूचना और जनसंपर्क विभाग में पदस्थ था, तब 1989-93 और बाद में 2004-2006 के बीच चंदर सोनाने ने मेरे साथ काम किया था। मैंने उन्हें गरीबों और दलितों को प्रभावित करनेवाले मुद्दों पर तेज नजर रखनेवाला एक बहुत ही संवेदनशील व्यक्ति पाया। जनसंपर्क अधिकारी के पद पर रहते हुए उन्होंने कठिन परिश्रम कर अपने कार्य के प्रति पूर्ण न्याय किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे निरंतर रचनाशील रहे तथा जनसामान्य, समाज, गरीबों को सीधे प्रभावित करनेवाली शासन की नीतियों और कार्यक्रमों के विषयों पर चिंतनपूर्वक लिखते रहे हैं। ‘सरोकार’ उनका नियमित स्तंभ है। इन लेखों का एक संकलन पहले ही प्रकाशित हो चुका है, जो अति रोचक और ज्ञानवर्धक है। इस दूसरे संकलन में सामयिक विषयों, जैसे कश्मीरी पंडितों की समस्या, शासन द्वारा कोविड से निपटने का तरीका, न्याय प्रणाली, उज्जैन की स्थानीय समस्याओं, महाकाल मंदिर और श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था, शिप्रा नदी की स्वच्छता, किसान आंदोलन, किसान संबंधी तीन कानूनों की वापसी, राजनीति, सामाजिक, व्यक्तित्व, देश व प्रदेश से संबंधित अन्य विषयों पर गहन चिंतन और लेखन किया गया है। यदि नीति-निर्माता और प्रशासक अपने दिन-प्रति-दिन के कार्य के दौरान ऐसे अच्छे ब्लॉगों और पुस्तकों का उपयोग करते हैं, तो मुझे यकीन है कि वे किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर गहन अंतर्दृष्टि का भारी लाभ प्राप्त करेंगे।
—ओ.पी. रावत
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त
Book Details
-
ISBN9789390825110
-
Pages336
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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