Kosh Kala
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Author:
Ramchandra VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
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‘कोश निर्माण' की विधा पर लिखी गई विश्व साहित्य में यह पहली पुस्तक है। वर्मा जी ‘हिन्दी शब्द सागर’ के अन्यतम सम्पादकों में से थे। वही एक ऐसे सम्पादक भी थे जिन्होंने आरम्भ से अन्त तक, अपने इस दायित्व का निर्वाह किया। इसके उपरान्त उन्होंने ‘संक्षिप्त शब्द सागर’, ‘उर्दू हिन्दी कोश’, ‘प्रामाणिक हिन्दी’ तथा ‘मानक हिन्दी कोश’ की भी रचना की। इस प्रकार उनके जीवन का अधिकांश कोश-निर्माण में ही व्यतीत हुआ। ‘कोशकला’ को उनके कोश-निर्माण काल के अनुभवों का निचोड़ कहें तो अत्युक्ति न होगी।</p> <p>‘कोश-निर्माण’ का कार्य विज्ञान भी है और कला भी। कोश की रचना का आधार वैज्ञानिक पद्धति तथा नियम हैं इसलिए यह विज्ञान है। जो सत्य है और सुन्दर है उसकी अभिव्यक्ति इसका सरोकार है, इसलिए यह कला है। वर्मा जी ने कोश निर्माण के हर पहलू पर इस कृति में गम्भीरता और सूक्ष्मता से विचार किया है।</p> <p>‘कोशकला’ के प्रस्तुत संस्करण में नए तथ्यों का समावेश तो हुआ ही है, कई नई प्रस्थापनाओं पर भी पुनर्विचार हुआ है।
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‘कोश निर्माण' की विधा पर लिखी गई विश्व साहित्य में यह पहली पुस्तक है। वर्मा जी ‘हिन्दी शब्द सागर’ के अन्यतम सम्पादकों में से थे। वही एक ऐसे सम्पादक भी थे जिन्होंने आरम्भ से अन्त तक, अपने इस दायित्व का निर्वाह किया। इसके उपरान्त उन्होंने ‘संक्षिप्त शब्द सागर’, ‘उर्दू हिन्दी कोश’, ‘प्रामाणिक हिन्दी’ तथा ‘मानक हिन्दी कोश’ की भी रचना की। इस प्रकार उनके जीवन का अधिकांश कोश-निर्माण में ही व्यतीत हुआ। ‘कोशकला’ को उनके कोश-निर्माण काल के अनुभवों का निचोड़ कहें तो अत्युक्ति न होगी।</p>
<p>‘कोश-निर्माण’ का कार्य विज्ञान भी है और कला भी। कोश की रचना का आधार वैज्ञानिक पद्धति तथा नियम हैं इसलिए यह विज्ञान है। जो सत्य है और सुन्दर है उसकी अभिव्यक्ति इसका सरोकार है, इसलिए यह कला है। वर्मा जी ने कोश निर्माण के हर पहलू पर इस कृति में गम्भीरता और सूक्ष्मता से विचार किया है।</p>
<p>‘कोशकला’ के प्रस्तुत संस्करण में नए तथ्यों का समावेश तो हुआ ही है, कई नई प्रस्थापनाओं पर भी पुनर्विचार हुआ है।
Book Details
-
ISBN9788180311772
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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लखनऊ की गलियों में बुनी गई दोस्ती की, साथ बड़े होने और खुद को ढूँढ़ने की दिल को छू लेने वाली कहानी। दिनेश, फिरोज और राहुल लखनऊ के शांत गंजों में क्रिकेट खेलते और साइकिल चलाते साथ-साथ बड़े हुए, जहाँ उनकी जिंदगी का उनके शहर के साथ आपस में एक करीबी रिश्ता जुड़ गया। लेखक ने उनकी रोजाना की जिंदगी और साहसिक कारनामों को जीवंतता से पेश किया है; उनके उस सफर को बखूबी बयाँ किया है, जब वे तीनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते हैं। क्या होता है, जब प्यार उन्हें आमने-सामने ला देता है और उनका सामना कड़वी सच्चाई से होता है? क्या पैसों और सियासत की वेदी पर पत्रकारिता के मूल्यों की बलि दे दी जाएगी? साजिश और धोखे के आगे आदर्शवाद की राजनीति टिक पाएगी? और खास तौर पर, क्या प्यार जगह, समय और हालात की खाई को पाट देगा? ‘लव इन लखनऊ’ आए दिन बदलते समाज की पृष्ठभूमि में बुनी गई इश्क और ख्वाहिश, सियासत और भ्रष्टाचार, अरमानों और सपनों, रिश्तों और खुलासों की जबरदस्त कहानी है, जो पाठकों के मर्म और संवेदना को सहज छू लेगी।
JANAKA AUR ASHTAVAKRA
- Author Name:
Ashraf Karayath
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ऋषि अष्टावक्र और उनके शिष्य, राजा जनक की कहानी बेहद रोचक प्रसंगों में से एक होकर भी ऐसी है जिसे कम ही लोग जानते हैं। अष्टावक्र नाम का एक बालक राजा जनक के दरबार में राज्य के सबसे विद्वान् ऋषि-मुनियों से शास्त्रार्थ के लिए जाता है लेकिन राजा के दरबारी उसके विकृत शरीर के कारण उसका उपहास करते हैं। वह बालक जब शास्त्रार्थ में विजयी होता है तब जनक को अनुभव होता है कि उस बालक में असाधारण बुद्धिमत्ता है और वह उसके शिष्य बन जाते हैं। जनक पर जहाँ अपनी आध्यात्मिक मुक्ति की धुन सवार है, वहीं राजमहल की रहस्यमयी दुनिया में एक षड्यंत्रकारी योजना स्वरूप लेती है। देखते-ही-देखते मिथिला पर युद्ध के बादल मँडराने लगते हैं, फिर भी जनक उसकी परवाह किए बिना उस बाल ऋषि के सान्निध्य में अधिक-से-अधिक समय बिताते हैं। भले ही सभी को द्वार पर संकट खड़ा दिखता है, लेकिन जनक आध्यात्मिक ज्ञान-प्राप्ति के पथ को नहीं छोड़ते। अंततः अष्टावक्र के मार्गदर्शन में राजा एक ऐसे संसार में प्रवेश करते हैं जहाँ उनके और उनके राज्य के लिए वास्तविकता बदल जाती है। यह उपन्यास प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान और दर्शन पर आधारित है, लेकिन इसमें मुक्ति, ज्ञान-प्राप्ति और चेतना की अवधारणाओं के साथ जीवन की वास्तविकताओं की नई विवेचना है। अन्य बातों के साथ ही यह इस प्रश्न का उत्तर देती है—क्या जो कुछ हम देखते हैं, सब सच में माया है? यह रोचक कहानी आधुनिक युग के पाठकों के अस्तित्व से जुड़े प्रश्नों पर प्रकाश डालती है, जिसके कारण वे राजा और उनके संघर्षों में स्वयं को देखते हैं।
Prabhat Sookti Kosh
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
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सूक्तियाँ गागर में सागर भरे वे शब्द समूह हैं, जो सीधे मर्म पर चोट करते हैं। इन शब्दों में ऐसी शक्ति होती है कि ये इनसान को सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं और कई बार वह क्षण जीवन का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित होता है, जो जीवन की दशा और दिशा को बदलकर रख देता है, यह व्यक्ति का मानो नया जन्म होता है; उसका चीजों को देखने का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। महात्मा बुद्ध के कुछ सूक्ति वाक्य ज्यों अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तित कर देते हैं और वह डाकू से संत बन जाता है; सूक्तियाँ कुछ यों ही मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में दुनिया भर के महान् विचारकों की सूक्तियों का संकलन किया गया है, जो प्रबुद्ध पाठकों के लिए निश्चित ही उपयोगी सिद्ध होगा।
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