Jeevan Drishti
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Book Details
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ISBN9789387310407
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Pages120
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: इस पुस्तक में कहानी है एक नौजवान की जिसने अपने घरेलू व्यापार से हटकर कुछ नया करने का स्वप्न देखा था। यह कहानी है उस कालखंड की जब भारत की अर्थव्यवस्था मुक्त अर्थव्यवस्था के शैशव काल में ही प्रवेश कर रही थी। यह यात्रा-संस्मरण भारत के हर उस नौजवान की इच्छाओं और आकांक्षाओं के प्रतीक हैं जो आगे बढ़कर अपनी हिम्मत से कुछ नया करना चाहते हैं। एक नया व्यापार-निर्यात व्यापार शुरू करने में क्या समस्याएँ आईं और उनको कैसे हल किया अर्थात् यह संस्मरण आपको निर्यात व्यापार की बारीकियों भी बताएगा तो साथ ही मध्य-पूर्व के देश जैसे दुबई, बहरीन, कतर, अफ्रीकी महाद्वीप के देश मिश्र अनेक यूरोपीय देश जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, हॉलैंड, बेल्जियम, इटली तथा अमेरिका आदि के विभित्र शहर, उनकी संस्कृति उनके सौन्दर्य, इतिहास, पर्यटन स्थल से भी परिचित कराएगा। यहाँ यह भी बताने की कोशिश की गई है कि कैसे एक समय था जब न तो यहाँ जानकारी थी न संसाधन और न ही अधिक विदेशी भी हमारे उत्पाद लेने को तैयार थे-अपनी दुकान में बैठाकर बात करने को भी तैयार नहीं थे। समय बदला और हमारे भारत के व्यापारियों ने विदेशों में अपने लिये एक सम्मानजनक स्थान बनाया। आज के दौर में जब देश के नौजवान रोज़गार के लिये परेशान हैं, वे सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के लिये भटकते हैं तो इस पुस्तक में उनके लिये यह सन्देश भी है कि आप एक सपना देखिए उद्यमी बनने का। हमारे देश में ऐसे सपने सच होते हैं। अपना सपना पूरा करके आप जॉब-सीकर के स्थान पर जॉब-गिवर बनिए।
Chalte To Achchha Tha
- Author Name:
Asghar Wajahat
- Book Type:

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Description:
‘चलते तो अच्छा था’ में ईरान और आज़रबाईजान के यात्रा-संस्मरण हैं। असग़र वजाहत ने केवल इन देशों की यात्रा ही नहीं की, बल्कि उनके समाज, संस्कृति और इतिहास को समझने का भी प्रयास किया है। उन्हें इस यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार के रोचक अनुभव हुए हैं। उन्हें आज़रबाईजान में एक प्राचीन हिन्दू अग्नि मिला। कोहे-क़ाफ़ की परियों की तलाश में भी भटके और तबरेज़ में एक ठग द्वारा ठगे भी गए।
यात्राओं का आनन्द और स्वयं देखने तथा खोजने का सन्तोष ‘चलते तो अच्छा था’ में जगह-जगह देखा जा सकता है। असग़र वजाहत ने ये यात्राएँ साधारण ढंग से एक साधारण आदमी के रूप में की हैं जिसके परिणामस्वरूप वे उन लोगों से मिल पाए हैं, जिनसे अन्यथा मिल पाना कठिन है।
भारत, ईरान तथा मध्य एशिया के बीच प्राचीन काल से लेकर मध्य युग तक बड़े प्रगाढ़ सम्बन्ध रहे हैं। इसके चलते आज भी ईरान और मध्य एशिया में भारत की बड़ी मोहक छवि बनी हुई है। लेकिन 19वीं और 20वीं शताब्दी में अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत का रिश्ता शिथिल पड़ गया था। आज के परिदृश्य में यह ज़रूरी है कि पड़ोस में उपलब्ध सम्भावनाओं पर ध्यान दिया जाए।
‘चलते तो अच्छा था’ यात्रा-संस्मरण के बहाने हमें कुछ गहरे सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर सोचने के लिए भी मजबूर करता है।
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