Wangchoo
(0)
Author:
Bhisham SahniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
150
₹ 120 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘वाङ्चू’ सुख्यात कथाकार भीष्म साहनी की ग्यारह कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों में सोद्देश्यतानिर्वहन के साथ-साथ हृदयग्राही अन्तरंगता और रसमयता दर्शनीय है। इन्हें व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में लिखा गया है, किन्तु जीवन-सन्दर्भों के चयन में विविधता रखी गई है जिससे रोचकता और प्रभाव में वृद्धि हुई है। इस प्रसंग में संग्रह की एक कहानी ‘वाङ्चू’—जिसके आधार पर पुस्तक का नामकरण हुआ है—और दूसरी कहानी ‘राधा-अनुराधा’ को ले सकते हैं। पहली में एक विस्थापित चीनी मानस की निरीहता का चित्रण है तो दूसरी, अभावों और यातनाओं में पली एक निम्नवर्गीय किशोरी नायिका के रोमांस की करुण उच्छ्वास-कथा है। ‘ओ हरामजादे’ शीर्षक व्यंग्यात्मक है, किन्तु कहानी प्रवासी भारतीय मानस की पीड़ा की परतों को खोलती है। इसी तरह और-और कहानियाँ मन पर अलग-अलग प्रभाव छोड़ती हैं तथा आज के सामाजिक जीवन की विषमताओं को रेखांकित करती हैं।
Read moreAbout the Book
‘वाङ्चू’ सुख्यात कथाकार भीष्म साहनी की ग्यारह कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों में सोद्देश्यतानिर्वहन के साथ-साथ हृदयग्राही अन्तरंगता और रसमयता दर्शनीय है। इन्हें व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में लिखा गया है, किन्तु जीवन-सन्दर्भों के चयन में विविधता रखी गई है जिससे रोचकता और प्रभाव में वृद्धि हुई है। इस प्रसंग में संग्रह की एक कहानी ‘वाङ्चू’—जिसके आधार पर पुस्तक का नामकरण हुआ है—और दूसरी कहानी ‘राधा-अनुराधा’ को ले सकते हैं। पहली में एक विस्थापित चीनी मानस की निरीहता का चित्रण है तो दूसरी, अभावों और यातनाओं में पली एक निम्नवर्गीय किशोरी नायिका के रोमांस की करुण उच्छ्वास-कथा है। ‘ओ हरामजादे’ शीर्षक व्यंग्यात्मक है, किन्तु कहानी प्रवासी भारतीय मानस की पीड़ा की परतों को खोलती है। इसी तरह और-और कहानियाँ मन पर अलग-अलग प्रभाव छोड़ती हैं तथा आज के सामाजिक जीवन की विषमताओं को रेखांकित करती हैं।
Book Details
-
ISBN9788171785032
-
Pages136
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Fulkari
- Author Name:
Gogi Saroj Pal
- Book Type:

-
Description:
कहने और सुनने की कला मुझे अपनी दादी और माँ से मिली। उनकी हर कहानी को मैंने कई-कई बार सुना और उन्होंने कई-कई बार उतने ही प्यार से सुनाया और हर बार सुनाने में वह वैसे ही अपने आप में खो गई जैसे कि मैं पहली बार सुन रही हूँ और वह पहली बार सुना रही हैं। मैंने उनसे कहानी देखना भी सीखा, सुनना और कहना भी और बाद में जीना भी।
यह पुस्तक मिस सरोज भसीन को भी अर्पित है जिन्होंने मुझे मेरी पहली कहानी लिखने के लिए उत्साहित किया और मेरे ताया जी यशपाल को, जिन्हें मेरे लिख पाने में पूरा विश्वास था। फुलकारी पर फूल-पत्तियाँ काढ़ने का तरीक़ा और रिवाज़ तो सैकड़ों सालों से है। इन्हें काढ़ते यह औरतें, न जाने आपस में कितनी बातें करतीं और अकेली हों तो अपने आप से भी। कभी गुनगुना भी लेती हैं और कभी आँखें पोंछ लेतीं।
इन कहानियों को मैंने बहुत-सी अपनी जैसी और बहुत-सी अपने से अलग औरतों के साथ काढ़ा है। ये वे मुलाक़ातें और बातें हैं जहाँ मैंने अपने जाने-पहचाने सच से अलग सच को जाना है। असल में न्याय, सच, उचित, अनुचित की परिभाषा हमें बहुत संकुचित सीमा में बाँधती रहती है। मैंने जाना कि ज़िन्दगी एक कॉमन सिविल लॉ से कहीं ज़्यादा अद्भुत है। बस मेरे लिए इतना ही काफ़ी है कहानी लिखने को।
Tuti Ki Aawaz
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ तेज़ी से बदले और बदलते हुए समाज की कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ उन कारकों की गहरी और सघन पहचान करती हैं जिनके कारण, आज के समय में, आदमी तुच्छ और अपदार्थ हुआ है। उनकी कहानियाँ पढ़कर प्राय: ही भीष्म साहनी और अमरकान्त की बहुत-सी कहानियाँ याद आती हैं। हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ एक ओर यदि राजनीति में मनुष्य की स्थिति और नियति को परिभाषित करती हैं, वहीं वे एक कारक के रूप में साम्प्रदायिकता के उभार को भी पर्याप्त बेधक दृष्टि से देखती हैं।
ये कहानियाँ उनके तीन संग्रहों में छपकर अब एकाग्र रूप से यहाँ संकलित हैं। यहाँ कहानियों का क्रम आगे से पीछे की ओर है—यानी बाद की कहानियाँ पहले दी गई हैं और पहले की बाद में। लेकिन कहानियों के लेखन-प्रकाशन वर्ष की चिन्ता के बिना भी इनके पाठ में कलागत कोई बड़ा अन्तर सामान्यत: पकड़ में नहीं आता। यहाँ किसी लेखक की अभ्यास के लिए लिखित आरम्भिक कहानियों जैसा कुछ नहीं है। इन कहानियों की रेंज बड़ी और व्यापक है—पत्रकारिता, स्त्री-यातना के प्रसंग, रंगमंच की दुनिया, दलित चेतना का उभार आदि से मिलकर इन कहानियों की दुनिया बनती है।
हृषीकेश सुलभ की कहानियों की भाषा अपने पात्रों और उनके परिवेश से गहरे जुड़ी भाषा का उदाहरण है। बिम्ब, प्रतीक और दूसरे काव्योपकरणों के इस्तेमाल में न सिर्फ़ यह कि वे कोई परहेज़ नहीं बरतते, बहुत सजगता से वे इन्हें सहेजते और सँवारते हैं। किरणें यहाँ फुदकती हुई ओसकणों को चुगती हैं। इसी तरह जाड़े की धूप के टुकड़े पक्षियों की तरह फुदकते हैं। इन कहानियों की भाषा की सबसे बड़ी सफलता संवादों में दिखाई देती है। एक दूसरे में घुलती और एकाकार होती ब्योरों और संवाद की यह भाषा इन कहानियों की पठनीयता को आश्चर्यजनक उठान देती है। बदलते हुए समय का अक्स इन कहानियों में एहतियात से रखे गए साफ़ शीशे में झलकते अक्स की तरह देखा और पढ़ा जा सकता है।
—मधुरेश
Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description: चन्द्रकान्ता कश्मीर केन्द्रित अपने विपुल कथा-लेखन के लिए हिन्दी जगत में ख़ासी लोकप्रिय हैं। अपनी कहानियों में उन्होंने देश-विभाजन के तत्काल बाद कश्मीर संकट से उपजे हालात से लेकर 'जेहाद' के नाम पर जारी आतंकवाद से झुलसते कश्मीर की आबोहवा और अवाम के दुःख-दर्द का अद्यतन चित्र उकेरा है, जहाँ वे यथास्थिति का चित्रण-भर करके नहीं रुक जातीं अपितु प्यार, ईमान और इंसानियत से लबरेज़ पात्रों का सृजन कर कट्टरता एवं हिंसा के विरुद्ध पुरज़ोर आवाज़ उठाती हैं। कश्मीर ही नहीं, देश-दुनिया की हर उस मानवीय त्रासदी को चन्द्रकान्ता अपनी कहानियों में जगह देती हैं जिससे एक संवेदनशील रचनाकार का मन आहत एवं उद्वेलित होता है। वे उस भ्रष्ट व्यवस्था और मनुष्य विरोधी तंत्र को कठघरे में खड़ा करती हैं, जिसने तेज़ी से बदलते समाज में चतुर्दिक संघर्ष से घिरे मनुष्य की आन्तरिक अनुभूतियों को कहीं गहरे दफ़न कर दिया है। व्यक्ति और व्यवस्था की मुठभेड़ में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक विषम परिस्थिति एवं प्रवृत्ति की समीक्षा करती हैं; तत्पश्चात् उन तथ्यों का अन्वेषण करती हैं जिससे मनुष्य की अन्तरात्मा को मरने से बचाया जा सके और इस प्रकार एक बेहतर कल के लिए मनुष्य के स्वप्नों, संवेदनाओं और स्मृतियों को सिरज लेने की चिन्ता चन्द्रकान्ता की कहानियों का प्रस्थान-बिन्दु बन जाती है।
Game Hasti Ka Ho Kis Se…!
- Author Name:
Vijay Mohan Singh
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी के सुपरिचित कहानीकार तथा कथा समीक्षक डॉ. विजयमोहन सिंह का यह चौथा कहानी-संग्रह है। संग्रह की अधिकांश कहानियाँ उस मुहावरे से बाहर का पाठ प्रस्तुत करती हैं जिन्हें हम सामान्यतः ‘आधुनिक कहानी’ कहते हैं। न केवल शिल्प तथा भाषा के स्तर पर बल्कि कथानक और ट्रीटमेंट के स्तर पर भी ये कहानियाँ परिचित तथा रूढ़ मुहावरों से पृथक् अपनी निजी कथा भाषा का निर्माण करती हैं। कुछ कहानियों में संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोग एक विशेष प्रकार की व्यंजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए किया गया है जो परम्परागत इतिवृत्तात्मक शैली को एक नए सन्दर्भ प्रदान करता है।
‘अंगरक्षक’ जैसी कहानी एक ऐसी सामाजिक विडम्बना को प्रस्तुत करती है जो समकालीन परिवेश में स्त्री की क्रूर नियति को सामने लाती है। प्रायः सर्वत्र व्याप्त एक अन्तर्निहित गूढ़ व्यंग्य इन कहानियों की केन्द्रीय विशेषता है। इन कहानियों के बारे में स्वयं लेखक का कहना है कि मेरी कहानियों की जो शृंखला पिछले दो दशकों से चली आ रही है, ये कहानियाँ उसके विराम की कहानियाँ हैं क्योंकि उस ‘सामन्ती अवशेष’ का जितना उत्खनन मैं कर सकता था, कर चुका—‘एक बँगला बने न्यारा’ से लेकर इन कहानियों तक।
संग्रह का शीर्षक ग़ालिब के इस विख्यात शे’र का अंश है जो इस संग्रह की एक कहानी का शीर्षक भी है। आज़ादी के बाद के परिवर्तित होते हुए सामाजिक-राजनैतिक परिवेश में उससे असम्पृक्त तथा उसके अपने को अजनबी अकेला और उखड़ा हुआ महसूस करनेवाला सामन्त वर्ग का प्रतिनिधि कहानी के नायक को सहसा अपने अस्तित्व की निरर्थकता का बड़ी शिद्दत से एहसास होने लगता है जिसकी परिणति आत्महत्या में होती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि मूलतः यह ‘आत्महत्या’ या अन्त एक पूरे युग का अन्त है जो आज अप्रासंगिक तथा निरर्थक हो चुका है।
Pratinidhi Kahaniyan : Khushwant Singh
- Author Name:
Khushwant Singh
- Book Type:

-
Description:
पत्रकारिता से जुड़े रहकर भी खुशवंत सिंह ने अंग्रेज़ी में लिखनेवाले एक भारतीय कथाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस संग्रह में उनकी कुछ प्रतिनिधि कहानियाँ शामिल हैं, जिन्हें उनके तीन कहानी-संग्रहों से चुना गया है।
खुशवंत सिंह की कहानियों का संसार न तो सीमित है और न एकायामी, इसलिए ये कहानियाँ अपनी विषय-विविधता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। ध्यान से पढ़ने पर इनकी दुनिया जहाँ हमारी सामाजिक दुनिया की अनेक ख़ासियतें उजागर करती हैं, वहीँ इनमें लेखक का अपना व्यक्तित्व भी प्रतिध्वनित होता है—विचारोत्तेजक और अनुभूतिप्रवण। शैली सहज, सरल और भाषा प्रवाहमयी है। जीवन के विस्तृत अनुभवों में पगी हुई इन कहानियों में अपने देश की मिट्टी की सोंधी गन्ध है।
मानव-जीवन में गहरे जड़ जमाए खोखले आदर्शों और दकियानूसी परम्पराओं पर कुठाराघात करती हुई ये चुटीली कहानियाँ अपने समय की जीवंत प्रतिध्वनियाँ हैं, जो यदि हमें गुदगुदाती हैं तो सोचने-समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं। लेकिन साथ ही ये एक ऐसे भारतीय लेखक की कहानियाँ भी हैं, जो अपने मुँहफट स्वभाव और स्वतंत्र विचारों के लिए बहुत बार विवादों के घेरे में रहा है।
Rajjo Mistri
- Author Name:
Pragya
- Book Type:

- Description: Book
Shahon Ka Shah
- Author Name:
Ryszard Kapuscinski
- Book Type:

-
Description:
‘शाहों का शाह' ईरान में शाह के अन्तिम वर्षों का लेखा-जोखा है। साथ ही ईरान में व्याप्त शाह के अभूतपूर्व भय और दमन का लोमहर्षक वृत्तान्त। अलग और विशिष्ट शैली में लिखी गई यह पुस्तक हमें ईरानी क्रान्ति के साथ-साथ वहाँ की संस्कृति और सामाजिक-धार्मिक और राजनीतिक ताने-बाने के विषय में भी गहन अन्तर्दृष्टि देती है।
रिषार्ड कापुश्चिंस्की पेशे से भले पत्रकार थे, लेकिन उनकी लेखनी में इतिहासकार, समाजविज्ञानी और कवि—तीनों का पुट मिलता है। ‘शाहों का शाह' की परिचयात्मक प्रस्तावना लिखनेवाले क्रिस्टोफ़र डि बेलाइग के अनुसार, ''वह इतिहास के अमूर्तनों पर अपने स्वयं के पत्रकारीय पर्यवेक्षणों को प्राथमिकता देते हैं।...वह राष्ट्रों और यहाँ तक कि घटनाओं को भी मानवीकृत स्वरूप में सामने रखते हैं, शैली की नफ़ासत सम्भवत: उन्हें मार्क्सवादी दृष्टिकोण से प्राप्त हुई है जो उन्हें पोलैंड में कभी पढ़ाया गया था।...कुल मिलाकर उनके इतिहास का स्रोत पुस्तकालय नहीं है, वह सड़कों से निकलता है, जहाँ गोलियों की पार्श्व-ध्वनियों के साए में मनुष्य धूल-धक्कड़ से जूझ रहा होता है। स्वयं कापुश्चिंस्की ने कहीं कहा है कि, जहाँ तक मुझे लगता है, जनता के विषय में तब तक लिखना ठीक नहीं है जब तक कुछ सीमा तक उसके जीवन को स्वयं भी जीकर समझ न लिया जाए।''
यह पुस्तक ईरान में घटित एक घटना-विशेष के साथ-साथ हमें पत्रकारिता की एक नई शैली से भी परिचित कराती है।
Sambandh
- Author Name:
Maneshwar Manuj
- Book Type:

- Description: Collection of Maithili Short Stories
Bhatakti Raakh
- Author Name:
Bhishma Sahni
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कथा-साहित्य में भीष्म साहनी का नाम प्रतिमान के रूप में स्थापित हो चुका है। प्रतिमान बन जाने तक की उनकी कथा-यात्रा अनेक पड़ावों व संघर्षों से होकर गुज़री है। उनके कथा-साहित्य में रुचि रखनेवाले पाठक अच्छी तरह परिचित हैं कि उनके पास एक विशिष्ट जीवन-दृष्टि है। अपनी इसी जीवन-दृष्टि के माध्यम से वे सामाजिक यथार्थ के जटिल स्तरों को बहुत ही कलात्मक ढंग से खोलते हैं। उनकी कला गहरे अर्थों में मानवीय सम्बन्धों की त्रासदी और उनके भविष्य से अभिन्न रूप से जुड़ी है।
‘भटकती राख’ भीष्म जी का बहुचर्चित कहानी-संग्रह है। इस संग्रह की कहानियों में उन्होंने वर्तमान जगत की समस्याओं को अतीत के परिप्रेक्ष्य में रखकर देखने की कोशिश की है, इसीलिए ये कहानियाँ काल के किसी द्वीप पर ठहरती नहीं, वरन् निरन्तर प्रवाहित इतिहास-धारा का जीवन्त हिस्सा बन जाती हैं। मनुष्य के इतिहास में उनकी यह रुचि किसी आनन्द-लोक की सृष्टि नहीं करती, बल्कि अभावों व शोषण के अन्धकार में भटकते लोगों से हमारा आत्मीय साक्षात्कार कराती है। ‘यादें’ और ‘गीता सहस्सर नाम’ में बूढ़ी महिलाओं की दयनीय हालत को बहुत ही मार्मिकता के साथ अंकित किया है, तो ‘अपने-अपने बच्चे’ में सामाजिक विषमता से उत्पन्न मानवीय संकट का यथार्थपरक अंकन हुआ है। ‘भटकती राख’ की बुढ़िया मानवीय संघर्षों की जीती-जागती दास्तान है, जिसकी स्मृतियों के गर्भ में हमारा भविष्य रूपायित हो उठा है। लगातार अमानवीय होती जा रही सामाजिक परिस्थितियों के ख़िलाफ़ केवल क्षोभ और ग़ुस्सा प्रकट करने तक सीमित न रहकर ये कहानियाँ नये समाज का स्वप्न भी सँजोती हैं।
Sampurna Kahaniyan : Markandey
- Author Name:
Markandey
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत संकलन में मार्कण्डेय के अब तक प्रकाशित सात कहानी-संग्रह शामिल हैं। कहना न होगा कि स्वतंत्रता के बाद लिखी गई इन कहानियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है। देश-विदेश में भी इनके अनुवादों पर वहाँ के आलोचकों ने लेख एवं समीक्षाएँ लिखी हैं। अत्यन्त सहज वाचन और शिल्पगत नवीनता के कारण इन कहानियों में चिन्हित समकालीन सन्दर्भ भारतीय जीवन की वास्तविकताओं को लोगों के सामने ला खड़ा करते हैं। आदर्श और बाह्य मान्यताओं वाली दृष्टि से देखे जाने के कारण संघर्ष और बदलाव की जो बातें हवा में उठाई जा रही थीं, उनके सामने इन कहानियों ने एक नया दृश्य ला खड़ा किया। अन्धकार, अशिक्षा, ग़रीबी ही नहीं धार्मिक अन्धविश्वास, शोषण और अनाचार के परिवेश को उजागर करने के कारण इन कहानियों को लोगों ने एक उपलब्धि की तरह स्वीकार किया। इस संकलन में ‘पान-फूल’, ‘महुए का पेड़‘, ‘हंसा जाई अकेला’, ‘भूदान’, ‘माही’, ‘सहज और शुभ’ तथा ‘बीच के लोग’ नामक पुस्तकें शामिल हैं।
Chirswayamvara
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘उपहार’, ‘केया’, ‘चीलगाड़ी’, ‘पिटी हुई गोट’, ‘चिरस्वयंवरा’, ‘मास्टरनी’, ‘भूमि-सुता’ एवं ‘विनिपात’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Anubhooti
- Author Name:
Panna Jha
- Book Type:

- Description: Collection of Maithili Short Stories
Maya Ne Ghumayo
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
‘माया ने घुमायो’ उन कहानियों की आधुनिक प्रस्तुति है जो हमें वाचिक परंपरा से मिली हैं। ये कहानियाँ अपनी कल्पनाओं, अतिरंजनाओं और अपने पात्रों के साथ सुदूर अतीत से हमारे साथ हैं और मानव समाज, उसके मन-मस्तिष्क के साथ मनुष्य की महानताओं-निर्बलताओं का गहरा तथा सटीक अध्ययन करती रही हैं। बिलकुल नानी-दादियों की उन कहानियों की तरह जिन्हें हमारी कई पीढ़ियों ने बचपन में सुना, और दुनिया को अपनी तरह से समझा जो एक ही समय में इतनी विराट, इतनी क्षुद्र, इतनी कठिन और इतनी सहज होती है।
इन कहानियों में वर्चस्व की लिप्सा है, आतंक है, कमजोरों की दीनता और असहायता है, चालाक गीदड़ है, आतंकी सिंह है, और साथ ही है हमारी समकालीन राजनीति और आसपास के सामाजिक-आर्थिक तंत्र में नए-नए आए जुमलों और शब्दों की बुनत जो इन कथाओं को अनायास ही हमारे आज की 'सत्यकथा' में बदल देती हैं। यही वह बिन्दु है जहाँ बच्चों को पूरी-पूरी समझ में आ जाने वाली ये कहानियाँ पाठक से एक वयस्क मस्तिष्क की माँग करने लगती हैं।
वे आधारभूत सत्य, जिजीविषा की वे आदिम प्रेरणाएँ जो इस दुनिया को गति देती हैं, इसे 'रहने' और 'नहीं रहने' लायक बनाती हैं और जिनके कारण ही हर कला, हर कथा को अपने होने का तर्क मिलता है, और जो हर किस्म की प्रगति के बावजूद मनुष्य मन के दरवाजे पर अपना प्राचीन लट्ठ लिये पहरा देती आई हैं, लोककथाएँ उन्हें ही अपना खाद-पानी बनाती आई हैं। मृणाल पाण्डे ने यहाँ उसका प्रयोग अपनी सक्षम और प्रवहमान भाषा और गहरी सामाजिक-राजनीतिक समझ के साथ किया है।
Fuhar
- Author Name:
Yogi Mahajan
- Book Type:

- Description: Fuhar-stories
Bhikshuni
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘तोमार जे दोक्खिन मुख’, ‘ज्यूडिश से जयन्ती’, ‘भिक्षुणी’, ‘मामाजी’, ‘अनाथ’, ‘भूल’, ‘सती’, ‘मौसी’, ‘प्रतीक्षा’ एवं ‘लाटी’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Khushkismat
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत कहानी-संग्रह ‘ख़ुशक़िस्मत’ में सामाजिक विसंगतियों का बोध और उनसे उबरने की बेचैनी तथा मनोविज्ञान का समावेश किया गया है। इस कहानी-संग्रह में ‘एक अकेली तस्वीर ख़ुशक़िस्मत’, ‘कौवे और कोलकाता’, ‘चोरी’, ‘सूनी’, ‘बगिया’, ‘छोटे गुरु’, ‘परदेशी’, ‘पंडिताइन’, ‘लड़के’, ‘राएवाली’, ‘बसन्त-सिर्फ़ एक तारीख़’, ‘तस्कीं को हम न रोए’, ‘ख़ाली होता हुआ घर’, ‘एक अदद औरत’ आदि कहानियाँ संगृहीत हैं। नई साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत यह अनुपम कहानी-संग्रह निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय है।
Sach Kuchh Aur Tha
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Rating:
- Book Type:

- Description: Book
Bechain Patton Ka Chorus
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

-
Description:
कुँवर नारायण उन अत्यल्प साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों में हैं जिन्होंने अपने लेखन में भारतीय और वैश्विक विचार, चिन्तन, संवेदना और सरोकारों से गहन संवाद किया है। यह संवाद किसी एक साहित्यिक विधा तक सीमित नहीं रहा। उनकी काव्येतर कृतियाँ इस बात की पुष्टि करती हैं। कुँवर नारायण ने जैसे विश्वस्तरीय कविताएँ लिखी हैं वैसे ही कहानियाँ भी। 'बेचैन पत्तों का कोरस' कुँवर नारायण का दूसरा कहानी-संग्रह है। पहला कहानी-संग्रह, 'आकारों के आसपास', सत्तर के दशक में आया था। अपनी असाधारण मौलिकता के चलते यह संग्रह ख़ासा ध्यानाकर्षक रहा। उस वक़्त रघुवीर सहाय, श्रीकान्त वर्मा, श्रीलाल शुक्ल, नेमिचन्द्र जैन जैसे साहित्यकारों ने इन कहानियों को सुखद आश्चर्य के साथ सराहा।
वर्तमान समय के कथाकारों और समीक्षकों तक के लिए ये कहानियाँ निरन्तर आकर्षण और प्रेरणा का विषय बनी हुई हैं। इसी उपलब्धि का विस्तार हम इस दूसरे संकलन में पाते हैं, जो कि एक लम्बे अन्तराल के बाद आ रहा है।
वर्तमान कथा-परिदृश्य को यह संकलन कई मानों में समृद्ध करेगा। इन कहानियों में अन्तर्वस्तु की विविधता ही नहीं, भाषा, संरचना और रूप का वैविध्य भी उत्कृष्टता का प्रमाण है। हर कहानी स्वयं में नई है और दूसरी से पृथक् भी। ये कहानियाँ औपचारिक और परम्परागत तरीक़े से अलग, कहानी विधा में प्रयोग और नवाचार हैं। बहुविधात्मक प्रभाव का सुन्दर समन्वय इन कहानियों को बहुस्तरीय बनाता है, और निबन्ध, संस्मरण, रेखाचित्र, चारित्रिकी, कविता आदि विधाओं की सम्मिलित शक्ति इन कहानियों के क्षितिज को विस्तृत करती है।
Thakazhiyude Cherukathakal
- Author Name:
Thakazhi Sivasankara Pillai +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: discriptation awaited
Seat Number Chheh
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कथा साहित्य में अपनी एकल और अलग पहचान बनाती ममता कालिया की कहानियाँ पहले वाक्य से ही पाठक का ध्यान आकर्षित करती हैं। इन कहानियों में सातवें दशक के बाद के जीवन और जगत् की हलचल महसूस की जा सकती है। जब भारतीय समाज में परिवर्तन हो रहा था। इन कहानियों को महज़ स्त्री-लेखन के कोष्ठक में सीमित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनमें समूचे समाज की संघर्षधर्मिता विभिन्न पात्रों और स्थितियों द्वारा व्यक्त हुई है। प्रमुख आलोचक मधुरेश के शब्दों में, ‘संरचना की दृष्टि से ममता कालिया की कहानियाँ इस औपन्यासिक विस्तार से मुक्त हैं जिसके कारण ही कृष्णा सोबती की अनेक कहानियों को आसानी से उपन्यास मान लिया जाता है। काव्योपकरणों के उपयोग में भी ये संयत कहानियाँ हैं। यह अकारण नहीं कि उनकी भाषा में एक ख़ास तरह की तुर्शी है। जिसकी मदद से वे
सामाजिक विद्रूपताओं पर व्यंग्य का बहुत सीधा और सधा उपयोग करती हैं।’
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book