Vey Bahattar Ghante
(0)
Author:
Rajesh MaheshwariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
200 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
राजेश माहेश्वरी की कहानियाँ अपनी बनावट में जितनी भिन्न हैं, उतना ही इन कहानियों का रसास्वादन भिन्न है। संग्रह के नाम को सार्थक करनेवाली कहानी ‘वे बहत्तर घंटे’ मानवीय करुणा और त्याग की भावना से ओतप्रोत है। कहानी में गुजरात में आए भयंकर अकाल का चित्रण मार्मिक है। ऐसी कठिन परिस्थिति में गौ-रक्षा के लिए वहाँ के लोगों की तत्परता न केवल सराहनीय है, बल्कि दिल को छू लेनेवाली है। वहीं 'माँ' कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो अनाथ बच्चों के लिए कुछ करना चाहते हैं। कहानी ‘मित्रता’ हमेशा से चली आ रही हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल को कुछ नए ही तरह से पुन: क़ायम करती है। राजस्थान के परिवेश में बुनी गई कहानी ‘पनघट’ हमारे समाज की घृणित कर देनीवाली सच्चाई को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे शब्दों में प्रस्तुत करती है। अन्य कहानियाँ अपनी सरलता लिए पाठकों तक अपनी बात पहुँचाने में सक्षम हैं।</p> <p>संकलन की ये छोटी-छोटी कहानियाँ बाग़ के उन छोटे-छोटे फूलों की तरह हैं जो खिलकर बागान को ख़ुशनुमा बना देते हैं और देर तक जिनकी ख़ुशबुएँ हमें तरो-ताज़ा करती रहती हैं।
Read moreAbout the Book
राजेश माहेश्वरी की कहानियाँ अपनी बनावट में जितनी भिन्न हैं, उतना ही इन कहानियों का रसास्वादन भिन्न है। संग्रह के नाम को सार्थक करनेवाली कहानी ‘वे बहत्तर घंटे’ मानवीय करुणा और त्याग की भावना से ओतप्रोत है। कहानी में गुजरात में आए भयंकर अकाल का चित्रण मार्मिक है। ऐसी कठिन परिस्थिति में गौ-रक्षा के लिए वहाँ के लोगों की तत्परता न केवल सराहनीय है, बल्कि दिल को छू लेनेवाली है। वहीं 'माँ' कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो अनाथ बच्चों के लिए कुछ करना चाहते हैं। कहानी ‘मित्रता’ हमेशा से चली आ रही हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल को कुछ नए ही तरह से पुन: क़ायम करती है। राजस्थान के परिवेश में बुनी गई कहानी ‘पनघट’ हमारे समाज की घृणित कर देनीवाली सच्चाई को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे शब्दों में प्रस्तुत करती है। अन्य कहानियाँ अपनी सरलता लिए पाठकों तक अपनी बात पहुँचाने में सक्षम हैं।</p>
<p>संकलन की ये छोटी-छोटी कहानियाँ बाग़ के उन छोटे-छोटे फूलों की तरह हैं जो खिलकर बागान को ख़ुशनुमा बना देते हैं और देर तक जिनकी ख़ुशबुएँ हमें तरो-ताज़ा करती रहती हैं।
Book Details
-
ISBN9788183616706
-
Pages100
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bolta Lihaph
- Author Name:
149,201
- Book Type:

- Description: इस संग्रह में हिन्दी के श्रेष्ठ कथाकारों द्वारा लोकप्रिय मासिक 'कादम्बिनी' के ‘कथा-प्रतिमान’ स्तम्भ के लिए चयनित विश्व-साहित्य की श्रेष्ठ कहानियाँ संकलित हैं। चयनकर्ता कथाकारों ने इसमें अपनी पसन्द के कारणों का ज़िक्र करते हुए इन कहानियों की विशिष्टताओं का भी वर्णन किया है, जिससे इस संग्रह की उपयोगिता बढ़ गई है। विभिन्न कालखंडों में रची गई ये कहानियाँ अपनी रचनात्मक विशिष्टता के लिए चर्चित रही हैं। इस संग्रह में शामिल कथाकारों की कहानी-कला का मर्म मानव-जीवन के मूल्यों को लेकर उनकी सतत दुविधा और विस्मय का भाव है जो हमारे मन में मानव जीवन की असारता या क्षुद्रता के प्रति खीज नहीं उपजाते बल्कि एक गहरी हलचल मचाए रखते हैं। यही कारण है कि ये कहानियाँ आज भी हमें उतनी टटकी और अन्तरंग महसूस होती हैं जितनी अपने समकालीन पाठकों के लिए रही होंगी। विश्व के समर्थ कहानीकारों और उनकी विशिष्ट कथा कृतियों को सुलभ कराने का हमारा यह विनम्र प्रयास निश्चय ही आपको पसन्द आएगा और प्रेरणादायक लगेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।
Kentki Chiken Ka Swad
- Author Name:
Priyadarshan Malviya
- Book Type:

- Description: ियदर्शन मालवीय का यह तीसरा कहानी-संग्रह उनके पिछले लेखन में एक अगला क़दम है, क्योंकि इन कहानियों में प्रियदर्शन ने जीवन और अनुभव के नए संसार से भिड़न्त की है। इन कहानियों में हमारे बदलते हुए समय की क़लमकारी है। समय, समाज, गाँव और शहर की चुनौतियाँ संकट के नित नए चोर-दरवाज़े दिखा रही हैं। इसमें क्या किसान और क्या जवान, सब पिस रहे हैं। 'जाके पाँव न फटै बिवाई', 'जबरा की मार', 'रोम जब जल रहा था, नीरो बाँसुरी बजा रहा था' कहानियों में इनका संत्रास चित्रित हुआ है। 'जाके पाँव न फटै बिवाई' में मामा का चरित्र विकासोन्मुख भारत की विषमता उजागर करता है जब पाठक को यह पता चलता है कि उनके खेत बिक रहे हैं, बेटा बेरोज़गार है और बेटियाँ अनब्याही हैं। मामा देसी ठर्रा पीने लगे हैं क्योंकि यही उन्हें ख़ुदकुशी से बचाए रखने में समर्थ है। मामा कहते हैं, "जब विद्यार्थी था तो पढ़ा था, 'दुनिया के मज़दूरो एक हो...'—मगर मज़दूर तो एक नहीं हुए, हाँ व्यापारी और पूँजीपति ज़रूर एक हो गए और सब मिलकर किसानों को भी मज़दूर बनाकर बेड़ियाँ डालना चाहते हैं।" किसान दुर्दशा पर एक अन्य कहानी 'जबरा की मार' भी बताती है कि कैसे किसान आत्महत्या के लिए विवश होते हैं। पुलिस और प्रशासन के मुक्के और धक्के झेलने पर सबसे पहले मनोबल टूटता है। शीर्षक कहानी 'केंटकी चिकन का स्वाद' में भी लेखक ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा व्यवस्था के अन्दर जनता के सुधार या कल्याण की कामना शून्य है। तीखा व्यंग्य, मानवीय सरोकार, पात्रों के प्रति संवेदना संग्रह की कहानियों को अपूर्व आभा प्रदान करते हैं। —ममता कालि
Halant
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
हृषीकेश सुलभ के कथा संकलन ‘हलंत’ की कहानियाँ हिन्दी की यथार्थवादी कथा-परम्परा का विकास प्रस्तुत करती हैं। इन कहानियों में भारतीय समाज की परम्परा, जीवनदृष्टि, समसामयिक यथार्थ और चिन्ताओं की अभिव्यक्ति के साथ-साथ विकृतियों और विसंगतियों का भी चित्रण है। मनुष्य की सत्ता और प्रवृत्ति की भीतरी दुर्गम राहों से गुज़रते हुए भविष्य के पूर्वाभासों और संकेतों को रेखांकित करने की कलात्मक कोशिश इन कहानियों की अलग पहचान बनती है। यथार्थ के अन्त:स्तरों के बीच से ढेरों ऐसे प्रसंग स्वत:स्फूर्ति उगते चलते हैं, जो हमारे जीवन की मार्मिकता को विस्तार देते हैं। संचित अतीत की ध्वनियाँ यहाँ संवेदन का विस्तार करती हैं और इसी अतीत की समयबद्धता लाँघकर यथार्थ जीवन की विराटता को रचता है।
हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ भाषा और शिल्प के स्तर पर नए भावबोधों के सम्प्रेषण की नई प्रविधि विकसित करती हैं। नई अर्थछवियों को उकेरने के क्रम में इन कहानियों का शिल्प पाठकों को कहीं आलाप की गहराई में उतारता है, तो कहीं लोकलय की मार्मिकता से सहज ही जोड़ देता है। जीवन के स्पन्दन को कथा-प्रसंगों में ढालती और जीवन की संवेदना को विस्तृत करती ये कहानियाँ पाठकों से आत्मीय और सघन रिश्ता बनाती हैं।
हृषीकेश सुलभ के कथा-संसार में एकान्त के साथ-साथ भीड़ की हलचल भी है। सपनों की कोमल छवियों के साथ चिलचिलाती धूप का सफ़र है। पसीजती हथेलियों की थरथराहट है, तो विश्वास से लहराते हाथों की भव्यता भी है। भावनाओं और संवेदनाओं के माध्यम से अपना आत्यन्तिक अर्थ अर्जित करती इन कहानियों में क्रूरता और प्रपंच के बीच भी जीवन का बिरवा उग आता है, जो मनुष्य की संवेदना के उत्कर्ष और जिजीविषा की उत्कटता को रेखांकित करता है।
Mansarovar Vol. 6 : Laag - Daat Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: भारत के स्वाधीनता संघर्ष के साथ अनेक बड़े साहित्यकार उदित हुए किन्तु उन सबमें प्रेमचन्द अनूठे हैं। प्रेमचन्द का साहित्य भारत की करोड़ों जनता—विशेषतः किसानों की अपनी आवाज़ है : भारतीय किसान के समान ही सरल, सादा, साफ़ बेबाक, ज़मीन के नज़दीक और सहज बुद्धि से युक्त। इसीलिए रवीन्द्रनाथ ठाकुर और मोहम्मद इक़बाल जैसे महान साहित्यकारों का सम्मान करते हुए भी भारत की जनता ने प्रेमचन्द के साथ विशेष रूप से आत्मीयता का अनुभव किया—उनकी आवाज़ को अपनी आवाज़ समझा; उनके साहित्य में अपनी पीड़ा अपनी आशा-आकांक्षा, अपने अधिकारों और संघर्षों का प्रतिबिम्ब पाया। प्रेमचन्द के उपन्यासों और कहानियों में कबीर और तुलसीदास जैसे मध्ययुगीन सन्तों की वाणी चार-पाँच सौ वर्षों बाद एक नए अंदाज़ के साथ गोया फिर सुनाई पड़ी। राजनीति में इसी आवाज़ के प्रतीक गाँधी थे। —नामवर सिंह
Pratinidhi Kahaniyan : Jogendra Paul
- Author Name:
Jogendra Paul
- Book Type:

- Description: पहली बार मैं जब जोगेंद्र पाल से मिला तो वो ठीक अपनी शक्ल, किरदार और आदतों के एतबार से एक मालदार जौहरी नज़र आया। बाद में मुझे मालूम हुआ कि मेरा कयास ज़्यादा ग़लत भी न था। वो जौहरी तो ज़रूर है, लेकिन हीरे-जवाहरात का नहीं; अफ़सानों का—और मालदार भी लेकिन अपनी कला में। —कृष्ण चंदर। ‘एक परिचय : धरती का काल’ उर्दू कथा-साहित्य में जोगेंद्र पाल अपने रचनात्मक अनुभव के लिए नए-नए महाद्वीप खोजनेवाले कथाकार हैं—चन्द उन कथाकारों में से एक जिन्होंने अपनी आँखें बाहर की ओर खोल रखी हैं और जो अपने दिल के रोने की आवाज़ पर भी कान धरते हैं...। —डॉ. अनवर सदीद ‘औरक़ लाहौर’ जोगेंद्र पाल के यहाँ कहानी बयान नहीं होती, बल्कि सामने ज़िन्दगी के स्टेज पर घटित होती है। उनके चरित्र उस स्टेज से निकलकर हमारे हवास के इतने क़रीब आ जाते हैं कि हमें अपने वजूद में उनकी साँसों का उतार-चढ़ाव महसूस होता है...। — डॉ. कमर रईस ‘जोगेंद्र अपल : फ़न और शख़्सियत’ जोगेंद्र पाल ने मुर्दा लफ़्ज़ों को नई ज़िन्दगी अता करने की तख़्लीक़ी (रचनात्मक) कोशिश की है; उनमें आदम बू पैदा की है। उनकी रचनात्मक भाषा जानने की ज़ुबान नहीं, जीने की ज़ुबान है। —निजाम सिद्दीकी
RahmanKhera Ka Bagh
- Author Name:
Utkarsh Shukla
- Book Type:

- Description: ‘रहमान खेड़ा का बाघ’ संग्रह की कहानियाँ और संस्मरण उन वन्य जीवों के हैं जो किसी-न-किसी कारण अपने परिवेश, अपने जंगलों से बिछड़ गए हैं और जंगल से दूर शहरों, गाँवों और कस्बों में भटक गए हैं। यह वन्य जीव सिर्फ अपना खोया हुआ घर ढूँढ़ रहे हैं। जहाँ उन्हें खाने के लिए भोजन, पीने के लिए पानी और सिर छुपाने को जगह मिल जाए। भटकते हुए वन्य जीव, भटक जाने पर अजीब-सा व्यवहार करते हैं हमने इनके बारे में अब तक जो भी सुना, पढ़ा और देखा होता है वो सब बेकार हो जाता है। हर भटका हुआ वन्य जीव एक नई किताब होता है, जिसका अन्त आपको किताब के आखिरी पन्ने पर मालूम होता है। ये कहानियाँ अनुभवों का एक प्रवाह हैं जिसमें कई वर्षों की धारा को एक दिशा देने का प्रयास किया गया है।
Lohe Ka Baksa Aur Bandook
- Author Name:
Mithilesh Priyadarshy
- Book Type:

-
Description:
पिछले कुछ वर्षों में अपनी कहानियों से एक विलक्षण पहचान अर्जित कर चुके युवा कहानीकार मिथिलेश प्रियदर्शी हिन्दी की कहानी की एक बड़ी उम्मीद और आश्वस्ति हैं। इनकी बहुप्रशंसित, महानगरीय जीवन से वाबस्ता कहानी, 'हत्या की कहानियों का कोई शीर्षक नहीं होता' का विन्यास और कथा-भाषा कहानी कला के ओल्ड मास्टर एडगर एलन पो की याद दिलाती है। इसके ठीक दूसरे छोर पर हमारी शहरी सभ्यता के सीमान्त पर, एक दूरस्थ, अँधेरे में डूबे आदिवासी इलाके में घटित कहानी 'सहिया', कहानी के दूसरे उस्ताद जैकलंदन की याद दिलाती है। मिथिलेश की कहानियों में समकालीन यथार्थ की कितनी ही तहें और परतें हैं। इन कहानियों का एक कठोर तरीके से कसा हुआ सघन विन्यास, तीव्र, तन्मय कथा-भाषा और तनाव भरा काँपता-सा स्वर हिन्दी कहानी के लिए नए हैं और उम्मीद जगाते हैं कि कहानी के नए वातायन खुल रहे हैं।
—योगेन्द्र आहूजा
Satmi Ke Bachche
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

-
Description:
‘सतमी के बच्चे’ राहुल सांकृत्यायन का प्रसिद्ध कहानी संकलन है। इस संग्रह की प्रत्येक कहानी अपनी करुणा और यथार्थ चित्रण से पाठकों के मन पर अमिट छाप छोड़ती है।
राहुल सांकृत्यायन ने विचार और शोध के क्षेत्र में जितनी गहराई में जाकर काम किया है, उतनी ही गहराई उनके कथा-साहित्य में भी दिखाई देती है। मानव-मन की पीड़ा और साधनहीन विपन्न वर्ग की कठोर जीवन-स्थितियों को उन्होंने अपनी तीक्ष्ण दृष्टि से देखा और उतनी ही बेलाग भाषा में अंकित किया।
सरल भाषा, गहरा व्यंग्य, पात्रों के साथ आत्मीय संलग्नता और कथा-स्थितियों के माध्यम से समूचे समाज और सभ्यता का विवेचन उनके कथा-कौशल का अभिन्न अंग है। इस संग्रह में शामिल कहानियों में ग्रामीण जीवन का जैसा चित्रण हुआ है, वैसा प्रेमचंद के अलावा शायद ही किसी ने किया हो।
Maya Ne Ghumayo
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
‘माया ने घुमायो’ उन कहानियों की आधुनिक प्रस्तुति है जो हमें वाचिक परंपरा से मिली हैं। ये कहानियाँ अपनी कल्पनाओं, अतिरंजनाओं और अपने पात्रों के साथ सुदूर अतीत से हमारे साथ हैं और मानव समाज, उसके मन-मस्तिष्क के साथ मनुष्य की महानताओं-निर्बलताओं का गहरा तथा सटीक अध्ययन करती रही हैं। बिलकुल नानी-दादियों की उन कहानियों की तरह जिन्हें हमारी कई पीढ़ियों ने बचपन में सुना, और दुनिया को अपनी तरह से समझा जो एक ही समय में इतनी विराट, इतनी क्षुद्र, इतनी कठिन और इतनी सहज होती है।
इन कहानियों में वर्चस्व की लिप्सा है, आतंक है, कमजोरों की दीनता और असहायता है, चालाक गीदड़ है, आतंकी सिंह है, और साथ ही है हमारी समकालीन राजनीति और आसपास के सामाजिक-आर्थिक तंत्र में नए-नए आए जुमलों और शब्दों की बुनत जो इन कथाओं को अनायास ही हमारे आज की 'सत्यकथा' में बदल देती हैं। यही वह बिन्दु है जहाँ बच्चों को पूरी-पूरी समझ में आ जाने वाली ये कहानियाँ पाठक से एक वयस्क मस्तिष्क की माँग करने लगती हैं।
वे आधारभूत सत्य, जिजीविषा की वे आदिम प्रेरणाएँ जो इस दुनिया को गति देती हैं, इसे 'रहने' और 'नहीं रहने' लायक बनाती हैं और जिनके कारण ही हर कला, हर कथा को अपने होने का तर्क मिलता है, और जो हर किस्म की प्रगति के बावजूद मनुष्य मन के दरवाजे पर अपना प्राचीन लट्ठ लिये पहरा देती आई हैं, लोककथाएँ उन्हें ही अपना खाद-पानी बनाती आई हैं। मृणाल पाण्डे ने यहाँ उसका प्रयोग अपनी सक्षम और प्रवहमान भाषा और गहरी सामाजिक-राजनीतिक समझ के साथ किया है।
Gulabi Nadi Ki Macchaliyan
- Author Name:
Siniwali
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Ek Dhani Vayakti Ka Bayan
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
अमरकान्त के पात्र क्षुद्रता, स्वार्थ और मजबूरियों से भरी दुनिया से आते हैं। वे अपनी स्वाभाविक जिजीविषा, बुनियादी अच्छाई और किसी न किसी तरह टिके रहने के लिए किए जानेवाले दाँव-पेचों से गुज़रते हुए अपनी निगाह में कामयाब होने के लिए जूझते हैं। और ये पात्र उसी तिनके के सहारे पार उतरने की कोशिश करने लगते हैं। वे हर जगह हर परिस्थिति में ख़ुद को एक कसौटी पर कसते हैं और फिर अपने ख़िलाफ़ माहौल पाते ही दूसरी कसौटी पर स्वयं को आजमाने लगते हैं।
‘एक धनी व्यक्ति का बयान’ अमरकान्त की दस नई कहानियों का पठनीय संकलन है।
अमरकान्त के विख्यात शिल्प से रची गई इन कहानियों में व्यंग्य की अन्तर्धारा है जो कैरियर बनाने के लिए की जानेवाली मिजाजपुर्सी से लेकर क्रान्तिकारी उजबकपन की आलोचना करती चलती है। इस तरह ‘एक धनी व्यक्ति का बयान’ मध्यवर्गीय बिचौलिए और आकांक्षाओं का बयान बन जाता है।
Pratidin
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी की सुपरिचित लेखिका ममता कालिया की कहानियों के इस संग्रह में शिक्षित मध्यवर्गीय नारी की आशाओं, आकांक्षाओं, संघर्षों और स्वप्नों का यथार्थपरक अंकन हुआ है। ममता कालिया हिन्दी के उन कथाकारों में उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय भाव-बोध को अपनी कहानियों का विषय बनाते हुए भी उसकी सीमाओं का अतिक्रमण किया है। मध्यवर्गीय भाव-बोध के प्रति तीखी व्यंग्य-दृष्टि का सहज और तार्किक विकास उनकी जीवन-दृष्टि की गतिशीलता का प्रमाण है। नारी के प्रति परम्परागत भारतीय दृष्टिकोण को नकारते हुए वे किन्हीं पतनशील जीवन-मूल्यों को स्वीकार नहीं करतीं, बल्कि समाज के स्वस्थ जीवन-मूल्यों को आत्मसात् करती हुई, उन्हें नई सामाजिक अर्थवत्ता प्रदान करती हैं।
घर की चारदीवारी में क़ैद नारी की मुक्ति-आकांक्षा और उसका संघर्ष ममता कालिया को अधिकांश कहानियों का प्रस्थान बिन्दु है, जिसके आसपास वे समूचे कथानक को बुनती हैं। इन कहानियों के पात्रों से लेखिका का सम्बन्ध इतना सीधा और आत्मीय है कि वे हमारी आँखों के सामने गतिशील होने लगते हैं। कहना न होगा कि इस संग्रह की कहानियाँ भारतीय नारी के संघर्ष और उसकी छटपटाहट को मार्मिक प्रसंगों के माध्यम से उद्घाटित करती हैं।
Zikre Yaar Chale : Love Notes
- Author Name:
Pallavi Trivedi
- Book Type:

-
Description:
इन लव-नोट्स के तल में प्रेम का समूचा संसार है! ये वैसे ही हैं, जैसे पानी की आण्विक संरचना H2O ही रहती है, चाहे वह जो रूप-रंग ले ले। प्रेम की संरचना वही है—दो अणु मोह—एक अणु समर्पण, एक अणु पीड़ा।
ज़िक्रे यार चले में अतीत, वर्तमान और भविष्य—तीनों कालों में स्पन्दित दो लोगों के बीच का प्रेम रोलरकोस्टर बना हुआ है। कहीं बेचैनी ऐसी है कि सीने में पुराना दर्द जाग उठे! कहीं राहत है प्रेम की अति साँकरी गली से निकल आने की, कहीं समय के उस टुकड़े में बन्द होकर रह जाने की ललक है, कहीं आगत के सपन सलोने हैं। प्रेम के अनगिन रंगों का यह वितान इन्द्रधनुषी भी है। कड़ी धूप का सफ़र भी है तो धारासार बरसात भी है। घुटी-घुटी उमस है, सर्दियों की मीठी गुनगुनी धूप भी है। प्रेम के हर कोण से लेकर हर चाप तक 360 डिग्री का पूरा सर्कल इस छोटी-सी किताब में है।
यही वजह है कि ये लव नोट्स छोटे-छोटे आईने की तरह सामने आते हैं! इनमें आप भी ख़ुद को पाकर चौंक सकते हैं। मुस्कुराइए कि आपके हाथों में पल्लवी त्रिवेदी के लोकप्रिय लव नोट्स हैं—ज़िक्रे यार चले!
—मनीषा कुलश्रेष्ठ
Mehfil
- Author Name:
Hariyash Rai
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Katha Saptak - Mamta Kalia
- Author Name:
Mamta Kalia
- Book Type:

- Description: 7 Short Stories
Mansarovar Vol. 2 : Lottery Aur Anya kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: प्रेमचन्द की रचनाएँ आधुनिक भारत को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्हीं के समय से भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ होता है, जिसके पैरों की आहट उनकी रचनाओं में महसूस होती है। राष्ट्रीय जीवन की परिवर्तनशीलता, क्रिया-प्रतिक्रिया, प्रगति एवं प्रतिक्रियावादिता, धर्म की, मानवता की परछाइयाँ प्रेमचन्द की रचनाओं में झलकती हैं। —डॉ. जाफ़र रज़ा
The Accidental Anthology
- Author Name:
Bishwadeep Ghosh
- Book Type:

- Description: "The stories compiled in this anthology depict the minds of varied people – from a curious 10-year-old to a confused teenager; from a broken heart to a psychopath; from a dumb creature to ... Well, READ ON to find more."
Sapna Nahi
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

-
Description:
ऐसे लेखक विरले ही होते हैं जिनकी रचनाएँ अपनी विधा को भी बदलती हों और उस विधा के इतिहास को भी। ज्ञानरंजन के बारे में यह बात निर्विवाद कही जा सकती है कि उनकी कहानियों के बाद हिन्दी कहानी वैसी नहीं रही जैसी कि उनसे पहले थी। उनके साथ हिन्दी गद्य का एक नया, आधुनिक, सघन और समर्थ व्यक्तित्व सामने आया जो उस दौर की भाषा में व्याप्त काव्यात्मक रूमान के बजाय काव्यात्मक सच्चाई से निर्मित हुआ था। ज्ञान की भाषा में उस पीढ़ी की भाषा थी जो भारतीय समाज में आज़ादी के महास्वप्नों के टूटने, परिवारों के बिखरने, मनुष्य के अकेला होते जाने और जीवन में अर्थहीनता के प्रवेश जैसे हादसों के बीच अपने विक्षोभ, अपनी हताशा और अपनी उम्मीद को पहचानने की बेचैन कोशिश कर रही थी। युवा होते समाज की इस आन्तरिक उथल-पुथल का इतना गहरा साक्षात्कार ज्ञानरंजन की कहानियों में मिलता है कि उनके अनेक चरित्र प्रेमचंद के कई चरित्रों की तरह हमारी स्मृति में अभिन्न रूप से शामिल हो गए। सन् साठ के बाद की हिन्दी कहानी एक महत्त्वपूर्ण प्रस्थान-बिन्दु या ‘कहानी का दूसरा इतिहास’ मानी गई और ज्ञानरंजन सामाजिक रूप से उसके सबसे बड़े रचनाकार कहे गए। लेकिन हर बड़े लेखक की तरह ज्ञानरंजन की कहानियाँ अपने दौर या समय को लाँघती गईं और इसीलिए आज भी पढ़ने पर उनकी प्राय: सभी कहानियाँ उतनी ही जीवन्त, प्रासंगिक और प्रामाणिक महसूस होती हैं। ‘क्षणजीवी’ जैसी कहानी लिखने और जीवन के निरर्थक क्षणों में अर्थ की खोज करनेवाले ज्ञानरंजन दरअसल हमारे समय के सबसे ‘दीर्घजीवी’ लेखकों में से हैं।
‘फेंस के इधर और उधर’, ‘पिता’, ‘शेष होते हुए’, ‘सम्बन्ध’, ‘यात्रा’, ‘घंटा’ और ‘बहिर्गमन’ आदि कहानियाँ जिस निम्न मध्यवर्गीय यथार्थ से मुठभेड़ के कारण प्रसिद्ध हुईं, वह भले ही बदल गया हो, लेकिन उस पर लिखी गई ये कहानियाँ कभी ‘पुरानी’ या ‘बासी’ नहीं हुईं। ज्ञानरंजन सरीखे कृती लेखक की ही यह सामर्थ्य है कि यथार्थ के पुराने पड़ जाने पर भी उसका अनुभव पुराना या समय-सापेक्ष नहीं हो जाता। बल्कि इन बहुचर्चित कहानियों में अभिव्यक्त विराट हलचल के बीच आनेवाले यथार्थ की अनेक आहटें भी हम सुन सकते हैं। संग्रह की अन्तिम और अद्भुत कहानी ‘अनुभव’ में तथाकथित उच्चवर्ग की विकृति और अश्लीलता के विवरणों में उस अपसंस्कृति का पूर्वाभास है जो आज हमारे समाज में चौतरफ़ा बजबजा रही है। वह एक स्वस्थ समाज की मृत्यु पर हिला देनेवाला शोकगीत है।
‘सपना नहीं’ ज्ञानरंजन की कालजयी कहानियों का संग्रह-भर नहीं है, यह हमारे समय का एक साहित्यिक दस्तावेज़ भी है और हमारे यथार्थ का साफ़ आईना भी है, जिसमें दिखते जीवन के बिम्ब पाठक को हमेशा उद्वेलित करते रहेंगे।
Dhol Aur Apne Paar
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र यादव नई कहानी की ज़मीन को हमवार करनेवाले अगली पंक्ति के कथाकारों में एक रहे हैं। शहरी मध्यवर्गीय समाज की वर्गगत विद्रूपताओं, विडम्बनाओं और पीड़ाओं का अत्यन्त प्रामाणिक विश्वसनीय लेखा-जोखा उनके यहाँ मिलता है।
जीवन के दैनिक प्रसंगों में निहित अन्तर्विरोध को उजागर करने के लिए कहानी के शिल्प में भी राजेन्द्र यादव ने अनेक प्रयोग किए हैं। मध्यवर्गीय मनोरचना की जटिल गुत्थियों को खोलने-समझने के लिए यह शायद ज़रूरी भी था।
इस संकलन की कहानियाँ भी स्वातंत्र्योत्तर भारत के मध्यवित्त समाज के भीतर संक्रमण से गुज़र रहे नैतिक मूल्यों, स्त्री-पुरुष सम्बन्धों, सामाजिक परिस्थितियों तथा इन सबके बीच पैदा हो रही नई दृष्टि को रेखांकित करती हैं।
—डॉ. देवराज।
Teen Saheliyan Teen Premi
- Author Name:
Aakanksha Pare Kashiv
- Book Type:

-
Description:
हो सकता है कि इधर कहानी कि परिभाषा बदल गई हो, लेकिन मेरे हिसाब से एक अच्छी कहानी कि अनिवार्य शर्त उसकी पठनीयता होनी चाहिए। आतंक जगानेवाली शुरुआत कहानी में न हो, वह अपनत्व से बाँधती हो तो मुझे अच्छी लगती है। आकांक्षा की कहानी 'तीन सहेलियाँ तीन प्रेमी' पढ़ना शुरू किया तो मैं पढ़ती चली गई। यह कहानी दिलचस्प संवादों में चली है। उबाऊ वर्णन कहीं है ही नहीं। सम्प्रेषणीयता कहानी के लिए ज़रूरी दूसरी शर्त है। लेखक जो कहना चाह रहा है, वह पाठक तक पहुँच रहा है। इस कहानी के पाठक को बात समझाने के लिए जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती। संवादों में बात हम तक पहुँचती है। स्पष्ट हो जाता है कि कहानी कहती क्या है। लेखक क्या कहना चाहता है। एक चीज़ यह भी कि रचनाकार ने कोई महत्वपूर्ण मुददा उठाया है, वह है व्यक्ति या समाज का। आख़िर वह मुददा क्या है। सहज ढंग से, तीन अविवाहित लड़कियों कि कहानी है यह जो तीन विवाहित पुरुषों से प्रेम करती हैं। वहाँ हमें मिलना कुछ नहीं है, यह जानते हुए भी वे उस रास्ते पर जाती हैं। अच्छी बात यह है कि आकांक्षा ने न पुरुषों को बहुत धिक्कारा है, न आँसू बहाए हैं। कहानी सहज-सरल ढंग से चलती है। लड़कियाँ अपनी सीमाएँ जानते हुए भी सेलिब्रेट करती हैं और अन्त में अविवाहित जीवन कि त्रासदी होते हुए भी (त्रासदी मैं कह रही हूँ, कहानी में नहीं है), कहीं यह भाव नहीं है, यह जीवन का यथार्थ है। जो नहीं मिला है, उसे भी सेलिब्रेट करो। आकांक्षा से पहली बार मिलने पर मुझे लगा कि यह लड़की सहज है। फिर एक शहर का होने के नाते निकटता और बढ़ी।
—मन्नू भंडारी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book