Shreshth Jatak Kathayen
(0)
Author:
Shobha NigamPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
350
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जातक कथाएँ भगवान बुद्ध के द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर दिए गए उपदेशों पर आधारित कथारूप में संग्रह है।</p> <p>जातक कथाएँ इन त्रिपिटकों से एक सुत्तपिटक में सन्निहित हैं। ये कथाएँ बौद्धधर्म की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ हैं। इनमें गौतम बुद्ध के सैकड़ों पूर्व जन्मों की कथाएँ हैं। यहाँ वे बोधिसत्व कहे गए हैं। बोधिसत्व का अर्थ है पूर्ण बुद्धत्व की ओर बढ़ता व्यक्तित्व।</p> <p>जातक कथाओं ने न केवल हमारे देश के परवर्ती कथा साहित्य जैसे ‘पंचतंत्र की कहानियाँ’, ‘हितोपदेश’, ‘कथासरित्सागर’ आदि को प्रभावित किया है, वरन् अनेक विदेशी कथाएँ; जैसे—‘ईसप की कहानियाँ’ तथा ‘अलिफ़ लैला के क़िस्से’ आदि भी इससे प्रभावित हुए हैं।</p> <p>सरल भाषा में किन्तु मूल पाठ को ध्यान में रखते हुए आम लोगों तक इन्हें पहुँचाने के लिए लेखक ने इन्हें अपने शब्दों में लिखा है। इसके साथ ही शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी यह इस अर्थ में उपयोगी है कि तत्कालीन समाज, राजनीति, राजपरिवार, सामान्य एवं निम्न वर्ग की स्थिति, नैतिकता, स्त्रियों के प्रति भावनाएँ, समाज में धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास, इतिहास, भूगोल आदि का बोध भी होता है। इसके अतिरिक्त उस काल में समाज किस प्रकार बुद्ध के विचार से प्रभावित हो रहा था, राजाओं, रानियों तथा राजपरिवार के अन्य सदस्यों के मध्य बुद्ध की शिक्षा का क्या असर था, प्रव्रज्या लेने में लोगों की रुचि कितनी थी, बुद्ध के भिक्षुसंघ तथा भिक्षुणीसंघ की क्या स्थिति थी, भिक्षुगणों का स्वभाव कैसा था, शिक्षा के केन्द्र कहाँ और कैसे थे आदि के विषय में भी हमें इन कथाओं से तथ्य ज्ञात होते हैं।</p> <p>विविध विषयों पर कही गई ये कथाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
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जातक कथाएँ भगवान बुद्ध के द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर दिए गए उपदेशों पर आधारित कथारूप में संग्रह है।</p>
<p>जातक कथाएँ इन त्रिपिटकों से एक सुत्तपिटक में सन्निहित हैं। ये कथाएँ बौद्धधर्म की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ हैं। इनमें गौतम बुद्ध के सैकड़ों पूर्व जन्मों की कथाएँ हैं। यहाँ वे बोधिसत्व कहे गए हैं। बोधिसत्व का अर्थ है पूर्ण बुद्धत्व की ओर बढ़ता व्यक्तित्व।</p>
<p>जातक कथाओं ने न केवल हमारे देश के परवर्ती कथा साहित्य जैसे ‘पंचतंत्र की कहानियाँ’, ‘हितोपदेश’, ‘कथासरित्सागर’ आदि को प्रभावित किया है, वरन् अनेक विदेशी कथाएँ; जैसे—‘ईसप की कहानियाँ’ तथा ‘अलिफ़ लैला के क़िस्से’ आदि भी इससे प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>सरल भाषा में किन्तु मूल पाठ को ध्यान में रखते हुए आम लोगों तक इन्हें पहुँचाने के लिए लेखक ने इन्हें अपने शब्दों में लिखा है। इसके साथ ही शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी यह इस अर्थ में उपयोगी है कि तत्कालीन समाज, राजनीति, राजपरिवार, सामान्य एवं निम्न वर्ग की स्थिति, नैतिकता, स्त्रियों के प्रति भावनाएँ, समाज में धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास, इतिहास, भूगोल आदि का बोध भी होता है। इसके अतिरिक्त उस काल में समाज किस प्रकार बुद्ध के विचार से प्रभावित हो रहा था, राजाओं, रानियों तथा राजपरिवार के अन्य सदस्यों के मध्य बुद्ध की शिक्षा का क्या असर था, प्रव्रज्या लेने में लोगों की रुचि कितनी थी, बुद्ध के भिक्षुसंघ तथा भिक्षुणीसंघ की क्या स्थिति थी, भिक्षुगणों का स्वभाव कैसा था, शिक्षा के केन्द्र कहाँ और कैसे थे आदि के विषय में भी हमें इन कथाओं से तथ्य ज्ञात होते हैं।</p>
<p>विविध विषयों पर कही गई ये कथाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
Book Details
-
ISBN9789388211581
-
Pages304
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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