Pratinidhi Kahaniyan : Mannu Bhandari
(0)
Author:
Mannu BhandariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
नई कहानी को समृद्ध बनाने में जिन कथा-लेखिकाओं ने महत्त्वपूर्ण कार्य किया, मन्नू भंडारी का नाम उनमें सर्वोपरि है। स्वभावत: इसमें उनका नारी-मन रूपायित हुआ है। आधुनिक नारी की अस्मिता, उसकी अपनी पहचान और सामाजिक जड़ताओं से लड़ने के उसके साहस की उन्होंने बराबर रचनात्मक हिमायत की है। यह एक चुनौती-भरा कार्य था, क्योंकि उनके अपने शब्दों में, ‘कवयित्री की अपेक्षा नारी-कथाकार के साथ यह कठिनाई और भी बढ़ जाती है कि उसे बिना लाक्षणिक भाषा का सहारा लिए अधिक खुलकर सामने आना पड़ता है। वह घिसे-पिटे कथानकों और भाव-धरातलों को ही लेती रहे, तब तक तो ठीक है, लेकिन जहाँ जीवन और जगत के व्यापक क्षेत्रों को छूने का साहस उसने किया कि प्रत्यक्ष और परोक्ष वर्जनाएँ उसकी ओर अँगुली उठाती सामने आ खड़ी होती हैं।’</p> <p>मन्नू भंडारी की ये कहानियाँ कहानी-कला के अपने तकाजों और चुनौतियों से बेबाक भाषा में जूझती हुई सामाजिक सरोकार की भी कहानियाँ हैं और आज के अर्धसामन्ती-अर्धपूँजीवादी समाज में नारी के उभरते व्यक्तित्व सम्बन्धों के बदलते स्वरूप और उनके संघर्षों को रेखांकित करती हैं। फिर भी मन्नू भंडारी सिर्फ़ ‘नारी लेखिका’ ही नहीं हैं। उन्होंने विविध अनुभव-खंडों को जागरूकता के साथ कहानियों में उठाया है।
Read moreAbout the Book
नई कहानी को समृद्ध बनाने में जिन कथा-लेखिकाओं ने महत्त्वपूर्ण कार्य किया, मन्नू भंडारी का नाम उनमें सर्वोपरि है। स्वभावत: इसमें उनका नारी-मन रूपायित हुआ है। आधुनिक नारी की अस्मिता, उसकी अपनी पहचान और सामाजिक जड़ताओं से लड़ने के उसके साहस की उन्होंने बराबर रचनात्मक हिमायत की है। यह एक चुनौती-भरा कार्य था, क्योंकि उनके अपने शब्दों में, ‘कवयित्री की अपेक्षा नारी-कथाकार के साथ यह कठिनाई और भी बढ़ जाती है कि उसे बिना लाक्षणिक भाषा का सहारा लिए अधिक खुलकर सामने आना पड़ता है। वह घिसे-पिटे कथानकों और भाव-धरातलों को ही लेती रहे, तब तक तो ठीक है, लेकिन जहाँ जीवन और जगत के व्यापक क्षेत्रों को छूने का साहस उसने किया कि प्रत्यक्ष और परोक्ष वर्जनाएँ उसकी ओर अँगुली उठाती सामने आ खड़ी होती हैं।’</p>
<p>मन्नू भंडारी की ये कहानियाँ कहानी-कला के अपने तकाजों और चुनौतियों से बेबाक भाषा में जूझती हुई सामाजिक सरोकार की भी कहानियाँ हैं और आज के अर्धसामन्ती-अर्धपूँजीवादी समाज में नारी के उभरते व्यक्तित्व सम्बन्धों के बदलते स्वरूप और उनके संघर्षों को रेखांकित करती हैं। फिर भी मन्नू भंडारी सिर्फ़ ‘नारी लेखिका’ ही नहीं हैं। उन्होंने विविध अनुभव-खंडों को जागरूकता के साथ कहानियों में उठाया है।
Book Details
-
ISBN9788126702466
-
Pages151
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Gandhiji Kahaniyo Me
- Author Name:
A.P. Parameswaran Pillai
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में राष्ट्रपिता गांधी जी के जीवन की प्रमुख घटनाओं को छोटी-छोटी कहानियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनका जीवन हमें हमेशा प्रेरणा और चेतना प्रदान करनेवाला रहा है। आशा है, नई पीढ़ी के बच्चे व किशोर इससे अधिक से अधिक लाभान्वित होंगे।
Farishtey
- Author Name:
Rajendra Prasad Pandey
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र प्रसाद पांडेय उन विरले कहानीकारों में से हैं, जो अपने समय, समाज और व्यक्ति के चेहरे पर ओढ़ी हुई कृत्रिम परतों को प्याज के छिलके की तरह उकेरकर तह में छिपे उसके वास्तविक चेहरे को पाठकों के सामने पेश कर देते हैं। ‘बड़प्पन-छुटपन’ ऐसी ही कहानी है। उनकी कहानियाँ व्यक्ति मनोविज्ञान के साथ सामाजिक और समूह मनोविज्ञान का अनुभवजन्य आख्यान भी हैं। वे शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह की संवेदना के चितेरे कथाकार हैं। वे वहाँ के सामाजिक परिवेश, स्थिति-परिस्थति और संघर्ष के स्याह-सफेद पक्षों को आमने-सामने रखकर निर्णय के लिए पाठक को स्वतंत्र छोड़ देते हैं। वे समाज के तलहट में जीवनयापन करने वाले लोगों के जीवन के उस क्रूर और विकृत यथार्थ का दस्तावेजीकरण करते हैं, जो इससे पहले हिन्दी कथा संसार में लगभग अनुपस्थित था। उनकी कहानियाँ हर तरह के भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम छेड़ती हैं। उनकी कहानी ‘ठठरी’ इसका बेहतरीन उदाहरण है। कहानियाँ उनका अनुभवजन्य यथार्थ बनकर लोगों को संवेदित-उद्वेलित करती हैं, जिनमें देशज भाषा की छौंक सुगन्ध की तरह व्याप्त है। कहानियों का शिल्प बेहद चुस्त है। ‘फरिश्ते’ की कहानियाँ किसी वाद या आन्दोलन से न जुड़कर स्वतंत्रचेता लेखन की राह चलती हैं। इसलिए पाठक से तादात्म्य स्थापित कर उसे अलग तरह का पाठकीय आस्वाद प्रदान करती हैं।
—विनय दास
Here, There And Everywhere
- Author Name:
Smt. Sudha Murty
- Rating:
- Book Type:

- Description: Wearer of many hats-philanthropist, entrepreneur, computer scientist, engineer, teacher-Sudha Murty has above all always been a storyteller extraordinaire. Winner of the R.K. Narayan Award for Literature, the Padma Shri, the Attimabbe Award from the government of Karnataka for excellence in Kannada literature, and the Raymond Crossword Lifetime Achievement Award, her repertoire includes adult non-fiction, adult fiction, children’s books, travelogues and technical books. Here, There and Everywhere is a celebration of her literary journey and is her 200th title across genres and languages. Bringing together her best-loved stories from various collections alongside some new ones and a thoughtful introduction, here is a book that is, in every sense, as multifaceted as its author.
Atithi Devo Bhav
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

- Description: बहुचर्चित कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह का रचना-कर्म आज के ज्वलंत सामाजिक सवालों से जुड़ा हुआ है और ‘अतिथि देवो भव’ में शामिल कहानियाँ उनकी इस रचनात्मक प्रतिबद्धता को और अधिक गहरा करती हैं । कहानियों की इस दुनिया में प्रवेश करते हुए हम भारतीय समाज के विभिन्न तबकों, संस्कारों और परंपराओं से जुड़े कुछ ऐसे चरित्रों से परिचित होते हैं, जिन्हें व्यक्तियों के बजाय सहज ही मानव-मूल्यों की संज्ञा दी जा सकती है। ऐसे चरित्रों में ‘अलिया धोबी और पाव-भर गोश्त’ का अलिया, ‘पुण्यभोज’ का खुदाबकस,‘खाल खींचनेवाले’ का भुनेसर, ‘नर-लीला’ की कमली, ‘सुलह’ का महादेव, ‘यह कोई अन्त नहीं’ का सरवर और ‘दूसरा सदमा’ के गुलामू चचा विशेष उल्लेखनीय हैं। इन कथा-चरित्रों की शक्लें और कार्य-व्यवहार भले ही अनेक हों, लेकिन अपने इर्द-गिर्द क्रियाशील अमानवीय तंत्र के विरुद्ध उनका गुस्सा और संघर्ष एक है। वर्तमान व्यवस्था के मानव-विरोधी स्वरूप को वे जिस प्रकार महसूस करते हैं और पहचानते हैं, वह न केवल उन्हें, बल्कि इन कहानियों को भी अविस्मरणीय बना देता है। इनके अलावा कुछ कहानियाँ ऐसे चरित्रों को भी सामने लाती हैं, जो पोर-पोर लंपटता से भरे हैं और आधुनिक जीवन स्थितियों से परिचालित मानव-स्वभाव के संदर्भ में कई स्तरों पर विद्रूप पैदा करते हैं। वस्तुत: अपने वर्तमान से सीधे साक्षात्कार के लिए भी इन कहानियों को उसी सहजता से ग्रहण किया जा सकता है, जिस सहजता से ये लिखी गई हैं।
Pratinidhi Kahaniyan : Kashinath Singh
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description: साठोत्तरी पीढ़ी के जिन प्रगतिशील कथाकारों ने हिन्दी कहानी को नई ज़मीन सौंपने का काम किया, काशीनाथ सिंह का नाम उनमें विशेष महत्त्व रखता है। इस संग्रह में उनकी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल की गई हैं। ध्वस्त होते पुराने समाज, व्यक्ति-मूल्यों तथा नई आकांक्षाओं के बीच जिस अर्थद्वन्द्व को जन-सामान्य झेल रहा है, उसकी टकराहटों से उपजी, भयावह अन्तःसंघर्ष को रेखांकित करती हुई ये कहानियाँ पाठक को सहज ही अपनी-सी लगने लगती हैं। इनमें हम वर्तमान राजनीतिक ढाँचे के तहत पनप रही मूल्य-भ्रंशता को भी देखते हैं और जीवन-मूल्यों की पतनशील त्रासदी को भी महसूस करते हैं। समकालीन यथार्थ की गहरी पकड़, भाषा-शैली की सहजता और एक ख़ास क़िस्म का व्यंग्य इस सन्दर्भ में पाठक की भरपूर मदद करता है। वह एक प्रगतिशील मूल्य-दृष्टि को अपने भीतर खुलते हुए पाता है, क्योंकि काशीनाथ सिंह के कथा-चरित्र विभिन्न विरोधी जीवन-स्थितियों में पड़कर स्वयं अपना-अपना अन्तःसंघर्ष उजागर करते चलते हैं और इस प्रक्रिया में लेखकीय सोच की दिशा सहज ही पाठकीय सोच से एकमेक हो उठती है।
Kahani Ki Talash Main
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

-
Description:
अलका सरावगी की कहानी-यात्रा कोई आयोजित भ्रमण नहीं है, यह जानने और जताने की है कि कैसे कोई कहानी के संसार की यात्रा शुरू कर देता है तो उसे पग-पग पर कहानियाँ मिलती रहती हैं। हाँ, इस मिलने में तलाशना जुड़ा है, मिलना सहज संयोग नहीं। लेखिका को सुन्दरता और परिपूर्ण जीवन की तलाश है और उसी की तलाश में वह कहानी पा लेती है—इसमें वह ऐसी सृजनात्मकता का वरण करती है जो सहज है पर जिसमें जटिलताओं का नकार नहीं।
संग्रह की दो कहानियाँ—‘कहानी की तलाश में’ और ‘हर शै बदलती है’ समकालीन हिन्दी कहानी के ढर्रे से कुछ अलग हैं, पर वे जैनेन्द्र कुमार और रघुवीर सहाय जैसे पूर्ववर्ती लेखकों की कहानियों की भी याद दिलाती हैं। इन कहानियों को जीवन की कहानियाँ कहने को मन करता है—रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का मतलब एक पिटी-पिटाई और ढर्रे की ज़िन्दगी नहीं होता, आख़िर हर दिन एक नया दिन भी होता है। यह एहसास कहानियाँ करवाती हैं जो निश्चय ही आज एक अत्यन्त विरल अनुभव है।
कहानियों में कुछ चरित्र-प्रधान हैं, लेकिन उनका मर्म किसी चरित्र के मनोवैज्ञानिक उद्घाटन के बजाय ‘आधुनिकतावादी’ जीवन की संवेदनहीनता और विसंगतियों को उजागर करने में ज़्यादा प्रकट है। ऐसी कहानियों में ‘आपकी हँसी’, ‘ख़िज़ाब’, ‘महँगी किताब’, ‘सम्भ्रम’ की याद आती है।
ये कहानियाँ हिन्दी कहानी की अमित सम्भावनाओं को प्रकट करती हैं और यह कोई कम बड़ी बात नहीं।
Nanga
- Author Name:
Srinjay
- Book Type:

-
Description:
अपने पहले कथा-संकलन ‘कामरेड का कोट’ से ही चर्चित कथाकार सृंजय ने स्पष्ट कर दिया था कि वे ‘महाजनों’ की पिटी-पिटाई लीक पर नहीं चलेंगे, कि उनकी प्रतिबद्धता ‘जन’ के साथ होगी, जन के सिवा किसी अन्य के साथ नहीं। इस प्रतिज्ञा को और भी पुख़्ता करता है उनका यह दूसरा कथा-संकलन—‘नंगा’।
दृश्य, अदृश्य कितनी ही बेड़िया और कितने-कितने दबाव हैं इस ‘जन’ पर, इनके बीच उसकी आकांक्षाएँ हैं, सपने हैं, दुर्निवार संकल्प हैं, जीवट है, जिजीविषा है, साथ ही क़दम-क़दम पर स्खलन और भटकाव भी। अतीत की धुँधली परछाइयों से लेकर अनागत की आहटों तक फैले सृंजय के कथा-संसार में एक और लोककथाओं का परम्परा-प्रवाह है तो दूसरी ओर लोक-शत्रुओं को पहचानने की अधुनातन दृष्टि भी। इस तरह राष्ट्रीय से लेकर अन्तरराष्ट्रीय साज़िशों को नंगा करती हैं ‘नंगा’ की कहानियाँ।
एकरसता से दूर सृंजय की इन कहानियों का रचना-संसार अलग-अलग बुनावटों और बनावटों, अलग-अलग मिज़ाज और तेवरों से लैस है। इस तरह इनके व्यापक फलक में अगर सामन्तवाद का पूँजीवाद के आगे आत्मसमर्पण कराती ֹ‘मूँछ’ है, तो विश्व बाज़ार के नवऔपनिवेशिक जाल में गुड़प होता स्वदेशी ‘बुद्धिभोजी’ भी, असमान विकास को एक्सपोज करती ‘खल्ली छुलाई’ है, तो धर्म के पाखंड को एक्सपोज करती ‘हममज़हब’ भी...स्वप्नों और आग्रहों की स्वनिर्मित ग़ुलामी की शिनाख़्त करती ‘बैल’ और तमाम अशुभ छायाओं के दंश के बीच आदमी की आदमियत को बचाए रखने की कोशिश के रूप में ‘डमर’ भी...साथ ही सत्ता-समीकरण के प्रलोभन और दबाव के अन्तर्गत जनप्रतिबद्धता के अपचय की प्रक्रिया को दर्शाती अतीत के मिथक के माध्यम से अपने समय को व्यंजित करती ‘राजमार्ग पर’ भी।
इन कहानियों की एक विरल विशेषता यह है कि इनकी व्यंजना ऊपर से कम, मगर अन्दर गहरे, बहुत गहरे उतरती जाती है और अपने परिवृत्त में कितने ही प्रत्ययों को समेटती चलती है। कलात्मकता की सर्वथा नूतन बानगी प्रस्तुत करती ये कहानियाँ एक बार पुन: बलपूर्वक प्रमाणित करती हैं कि कला का आरोपण ऊपर से नहीं होता, बल्कि जीवन में गहरे धँसकर ही उसका अवगाहन होता है।
X Y Ka Z
- Author Name:
Prabhat Ranjan
- Book Type:

- Description: कुछ अलग तरह का गद्य पढ़ने की खोज में लगे पाठकों की तलाश जिन लेखकों पर जाकर समाप्त होती है, उनमें एक नाम प्रभात रंजन है। कहानी और संस्मरण के बीच आवाजाही करता यह लेखक अपने पाठक को अपनी शैली के प्रवाह और भाषा की रवानगी के साथ बहाए ले जाता हैं। "जानकी पुल" यह नाम जैसे प्रभात रंजन का ही अब दुसरा नाम हो चुका है -पंकज सुबीर
Andhera
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description: ‘वजूद’, ‘यक्षगान’, ‘ग्रहण’ और ‘अँधेरा’ महज़ चार लम्बी कहानियाँ नहीं हैं—ये हमारे कथा साहित्य की विरल उपलब्धियाँ हैं। इन्हीं चारों कहानियों से तैयार हुआ है अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और बहुचर्चित कथाकार अखिलेश का नया कहानी-संग्रह ‘अँधेरा’। अखिलेश हिन्दी की ऐसी विशिष्ट प्रतिभा हैं जिनके लेखन को लेकर साहित्य-जगत उत्सुक और प्रतीक्षारत रहता है। अखिलेश की रचनात्मकता के प्रति गहरे भरोसे का ही नतीजा है कि उनकी रचनाएँ साहित्य की दुनिया में ख़ास मुक़ाम हासिल करती हैं। निश्चय ही इस अनोखे विश्वास के निर्माण में ‘अँधेरा’ की कहानियों की अहम भूमिका है। ‘अँधेरा’ में शामिल चारों कहानियाँ लगातार चर्चा के केन्द्र में रही हैं। इन्हें जो ध्यानाकर्षण—जो शोहरत मिली है, वह कम रचनाओं को नसीब होती है। इनके बारे में अनेक प्रकार की व्याख्याएँ, आलेख, टिप्पणियाँ और विवाद समय-समय पर प्रकट हुए हैं। पर इन सबसे ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि चारों कहानियों पर पाठकों ने भी मुहर लगाई है। हमारे युग की मनुष्य विरोधी शक्तियों से आख्यान की भिड़न्त, भाषा की शक्ति, शिल्प का वैविध्य तथा उत्कर्ष, प्रतिभा की विस्फोटक सामर्थ्य—ये सभी कुछ कोई एक जगह देखना चाहता है तो उसे अखिलेश का कहानी-संग्रह ‘अँधेरा’ अवश्य पढ़ना चाहिए। ‘अँधेरा’ की कहानियों की ताक़त है कि वे अपने कई-कई पाठ के लिए बेचैन करती हैं। यही नहीं, वे प्रत्येक अगले पाठ में नई व्यंजना, नए अर्थ, नए सौन्दर्य से जगमगाने लगती हैं। इसी बिन्दु पर ‘अँधेरा’ की कहानियाँ न केवल पढ़े जाने और एकाधिक बार पढ़े जाने की इच्छा जगाती हैं, बल्कि सहेजकर रखे जाने की ज़रूरत भी पैदा करती हैं।
DHOL KI THAP
- Author Name:
Murari Sharma
- Book Type:

- Description: Collection of hindi short stories
Offline Girlfriend Dil Dhoondhta Hai
- Author Name:
Abhishek Tripathi
- Book Type:

- Description: Book
Jal Prantar
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description: Short Stories
SHRESHTHA LATIN AMERIKI KAHANIYAN
- Author Name:
SUSHANT SUPRIY
- Book Type:

- Description: श्रेष्ठ लैटिन अमेरिकी कहानियाँ प्रस्तुत है—विश्व के महान लातिन अमेरिकी कथाकारों बोर्गेस, मार्खेज़, कोर्टाज़ार, रोसा और इज़ाबेल की कालजयी कहानियों का यह मूल्यवान संग्रह हिंदी पाठकों के लिए।
Sunahari Ungaliyan
- Author Name:
Nasira Sharma
- Book Type:

-
Description:
मेहनतकश लोगों के सुख-दुख, राग-द्वेष, हँसी-ख़ुशी, जिजीविषा और उनके जीवन के तमाम अनुभवों से भरी कहानियों का संग्रह है—‘सुनहरी उँगलियाँ’। हमारे शानदार अतीत की सुन्दर व भव्य निशानियों से सजी हमारी यह दुनिया हमें प्रेरणा देती है कि जीवन सदैव बहता है, इनसान आता और चला जाता है लेकिन जीवन के इस प्रवाह के बीच मेहनतकशों के हुनर और कारीगरी की रचनात्मक उपलब्धियाँ हमेशा बची रहती है। हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी सँजोते आ रहे हैं।
इस संग्रह की कहानियों में कई ऐसे किरदार हैं जिनके हाथों में बेहतरीन हुनर है। ‘आँचल के बीज’ और ‘सुनहरी उँगलियाँ’ शीर्षक कहानियों के साथ-साथ ‘शीराज़ लोहार’, ‘फुलवा’ जैसी कहानियों में ऐसे ही कुछ ज़िन्दादिल किरदार हैं जो हिन्दुस्तान की सामासिक संस्कृति को उजागर करते हैं। इसके अतिरिक्त संग्रह की कई कहानियों में जटिल सामाजिक संरचना पाठकों को किरदारों की ज़िन्दादिली के क़रीब ले जाती है। ऐसी कहानियों में ‘अलाव’, ‘सबूत’, ‘फ़ितरत’, ‘क्रोशिया के फंदे’, ‘ख़ौफ़’, ‘रामपुरी चाकू’ आदि उल्लेखनीय हैं। नासिरा शर्मा की कहानियों में भारतीय मानस की जटिलताओं का संवाद मानवीय रिश्तों की पारिवारिक संरचना के साथ आत्मसात हो जाता है और यहीं से गंगा-जमुनी तहजीब की पकड़ से ‘सदाबहार का फूल’, ‘स्वर्ग व नर्क का फ़ासला’, ‘ईदी’, ‘नये रंग की गन्ध’, ‘हथेली में पोखर’ जैसी कहानियाँ बन पड़ती हैं जो सामाजिक सौहार्द का निर्वाह करती हैं।
बीस साल बाद आ रहा नासिरा शर्मा का यह कहानी-संग्रह बीते समय की सामाजिक हलचलों की अक्कासी करता है और इन कहानियों का कथानक-शिल्प एवं कथा-भाषा का प्रवाह उनके पाठकों के लिए एक उपहार है।
Teen Nigahon Ki Ek Tasvir
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ जैसे कालजयी उपन्यासों की रचयिता मन्नू भंडारी की कहानियाँ अपने मन्तव्य की स्पष्टता, साफ़गोई और भाषागत सहजता के लिए ख़ास तौर पर उल्लेखनीय रही हैं। उनकी कहानियों में जीवन की बड़ी दिखनेवाली जटिल और गझिन समस्याओं की गहराई में जाकर, उनके तमाम सूत्रों को समेटते हुए, एक सरल, सुग्राह्य और पठनीय रचना को आकार दिया जाता है।
इस संग्रह में शीर्षक-कहानी के अलावा शामिल ‘अकेली’, ‘अनथाही गहराइयाँ’, ‘खोटे सिक्के’, ‘हार’ और ‘चश्मे’ आदि सभी कहानियाँ जीवन के विभिन्न सन्दर्भों को एक ख़ास रचनात्मक आलोचना-दृष्टि से देखते हुए पाठक को सोचने और अपने वातावरण को एक नई, ताज़ा निगाह से देखने को प्रेरित करती हैं।
Naticharaami
- Author Name:
Santoshkumar Mehandale
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಸ್ವತಃ ಲೇಖಕರೇ ಬರೆದು ಸಂಪಾದಿಸಿದ ಶಾಟ್ ಕಥೆಗಳು ಮತ್ತು ವೈಶಿಷ್ಟ್ಯಗಳ ಸಂಗ್ರಹ
Warison Ki Zubani
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description: Book
Malooshahi…Mera Chhalia Buransh
- Author Name:
Pragya
- Book Type:

-
Description:
‘मालूशाही...मेरा छलिया बुरांश’ संग्रह की नौ कहानियाँ यथार्थ के विविध रूप हैं। कहीं अच्छे आदमी का अपने भीतर के बुरे को पहचाना जाना है तो कहीं प्रतिकूल समय की नब्ज़ को टटोलना है। कोई कहानी शिक्षा के दरीचे को पाठक के लिए नए सिरे से खोलती है तो कोई माटी का राग छेड़ देती है। यथार्थ के अन्तर्विरोधी स्वरों को पकड़ना हो या फिर उसके भीतर प्रवाहित छिपी हुई धवल लहर को देख पाना-कथाकार प्रज्ञा की कहानियाँ उसे पाठक के सामने लाती रही हैं। प्रज्ञा की कहानियों के विषय विविध हैं। श्रमशील वर्ग से लेकर मध्यवर्ग, शहर से लेकर गाँव और उसके सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक परिवर्तनों को पकड़ने की दृष्टि प्रज्ञा के पास है। उपेक्षित हाशिए के विविध चेहरों को, उनकी आवाज़ों को कथाकार ने बेहद मज़बूती के साथ दर्ज कराया है। उनकी कहानियाँ हों या उपन्यास यह ख़ासियत उनमें देखी जा सकती है। प्रज्ञा के रचे किरदार अनेक समस्याओं से जूझते हैं पर उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते। प्रतिरोध की ताक़त और उत्कट जिजीविषा के साथ वे हौसले की डोर थामे रहते हैं। कई बार टूटते भी हैं पर जीवन से भागते नहीं।
परिवेश, शिल्प और बारीक़ बुनावट ‘मालूशाही...मेरा छलिया बुरांश’ की कहानियों में देखी जा सकती है। स्वाभाविक की आशा और नियत की अनिश्चितता से प्रज्ञा अपनी कहानियों का संसार बुनती हैं। इसीलिए उनकी अधिकांश कहानियाँ रहस्य और जिज्ञासा से भरी होकर पाठक को उस अन्त पर ले जाकर खड़ा करती हैं जो उसकी चेतना में लगभग कल्पनातीत होता है। कथा-रस से भरपूर प्रज्ञा की कहानियाँ तेज़ी से भाग रहे समय को न सिर्फ़ ठहरकर देखती हैं बल्कि उनका घटनाक्रम समकाल के विविध ज्वलंत सवालों को साफ़गोई से सामने रखता है। एक दशक से अधिक की अपनी कथा-यात्रा में प्रज्ञा ने अपने समकालीन कथाकारों के बीच अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है।
Mystery of the Missing Cap and Others - Award Winning Stories
- Author Name:
Manoj Das
- Rating:
- Book Type:

- Description: Mystery of the Missing Cap and Others Stories, originally published as Manoj Dasanka Katha O Kahini was the first collection of short stories in Odia to receive the Sahitya Akademi Award (1972). The collection spans twenty-two years of the writer's contribution to Odia short story. While Sri Das has won wider recognitions through his subsequently written stories, roping into the circle of his admires writers like Graham Greene and H.R.F. Keating, this collection marks a mile stone in the evolution of Odia fiction, infusing into the genre of short stories a neew vitality through a combination of deep psychological insight into characters and situations and a remarkable precision in sytle. The translation is by the author himself whoalso occupies a special places in Indian writing in English.
Five Stories From Guru Gobind Singh's Life
- Author Name:
Pritam Singh
- Rating:
- Book Type:

- Description: This set of five stories from the life of Guru Govind Singh Ji(1666-1708) was originally written in Punjabi and translated into English by Navtej Bharti and Ajmer Rode, gifted brothers, who settled in Canada. Guru Govind Singh Ji was the spiritual leader of India, who was deeply interested in the upliftment of human material.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book