Kahaniyan Rishton Ki : Maa
(0)
Author:
AkhileshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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माँ यानी दुनिया से पहली पहचान, पहला रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो जन्म के पहले से ही शुरू हो जाता है। बाद में सन्तान जैसे-जैसे बड़ी होने लगती है, उसकी दुनिया का विस्तार होने लगता है, उसके जीवन में माँ की केन्द्रीयता ख़त्म हो जाती है पर माँ के समूचे व्यक्तित्व और सद् भावना के केन्द्र में उसकी सन्तान ही रहती है। इस संकलन में लगभग सभी महत्त्वपूर्ण कहानियों को चयनित किया गया है, जिससे ‘माँ’ का कोई भी जाना-अनजाना चेहरा छूट न सके। यक़ीनन इसे पढ़ते हुए पाठकों की अपने जीवन से जुड़ी बहुत सारी छवियाँ और स्मृतियाँ कुछ और चटख होंगी।
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माँ यानी दुनिया से पहली पहचान, पहला रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो जन्म के पहले से ही शुरू हो जाता है। बाद में सन्तान जैसे-जैसे बड़ी होने लगती है, उसकी दुनिया का विस्तार होने लगता है, उसके जीवन में माँ की केन्द्रीयता ख़त्म हो जाती है पर माँ के समूचे व्यक्तित्व और सद् भावना के केन्द्र में उसकी सन्तान ही रहती है। इस संकलन में लगभग सभी महत्त्वपूर्ण कहानियों को चयनित किया गया है, जिससे ‘माँ’ का कोई भी जाना-अनजाना चेहरा छूट न सके। यक़ीनन इसे पढ़ते हुए पाठकों की अपने जीवन से जुड़ी बहुत सारी छवियाँ और स्मृतियाँ कुछ और चटख होंगी।
Book Details
-
ISBN9788126725519
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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